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मुख्यमंत्री डॉ. यादव डोंगला में खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी ने जीता वाराणसी के लोगों का दिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार सुबह वाराणसी के राम भंडार में स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया। उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्हें अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। लोग उनसे मिलकर उत्साहित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी देख प्रभावित हुए और मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव का काफिला जब एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित राम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी ,जलेबी और लस्सी का स्वाद चखा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान की शैली होती है , जो वहां की पहचान होती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

आम जनता के बीच सहज मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे बातचीत भी की। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।

गरीब बच्चों के एडमिशन में देरी पर नाराज हुए चीफ जस्टिस, सरकार से मांगा जवाब

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गरीब बच्चों के एडमिशन में देरी पर नाराज हुए चीफ जस्टिस, सरकार से मांगा जवाब
शनिवार को अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबर को चीफ जस्टिस ने स्वतः संज्ञान में लिया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

प्रवेश प्रक्रिया में कोताही पर कोर्ट की नाराजगी
हालांकि आज न्यायालय का कार्य दिवस नहीं है, लेकिन मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई।

प्रदेश में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने के बावजूद आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया बेहद धीमी है। 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन हुआ है, जिससे 16,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं और कई जिलों में 10% से भी कम आवेदनों का सत्यापन हुआ है।

सत्यापन की धीमी गति और समयसीमा का उल्लंघन
यह भी ध्यान में रखते हुए कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने पंजीकरण और नोडल सत्यापन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, जो अभी भी अधूरी है। नोडल अधिकारी और प्रिंसिपल स्तर पर सत्यापन की धीमी गति के कारण समय सीमा समाप्त हो गई है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिकांश जिलों में लंबित आवेदनों का नोडल सत्यापन समय पर पूरा नहीं हुआ है।

प्राप्त आवेदनों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच असमानता है। लॉटरी के माध्यम से स्कूल आवंटन 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित है, लेकिन अपूर्ण सत्यापन के कारण इसमें देरी की संभावना जताई गई है, जिससे अभिभावकों को असुविधा होगी क्योंकि उन्हें बार-बार आना पड़ सकता है।

दो याचिकाओं पर अब एक साथ होगी सुनवाई
आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेते हुए अवकाश के दिन हाई कोर्ट में सुनवाई की। बता दें कि भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही लापरवाही के संबंध में अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है।

इस याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। अब 8 अप्रैल को इसी दिन स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका की भी सुनवाई होगी।

अधिवक्ताओं की दलीलें और अगली तारीख
डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करने की व्यवस्था दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सीवी भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर, राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने पैरवी की। डिवीजन बेंच ने अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना और अगली सुनवाई के लिए आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है – मुख्यमंत्री साय

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अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शहीद जवानों, बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।

शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।

हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी – मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है – जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।

किराएदारों और छात्रों के लिए खुशखबरी! बस ID दिखाओ, 5kg गैस पाओ

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किराएदारों और छात्रों के लिए खुशखबरी! बस ID दिखाओ, 5kg गैस पाओ
अमेरिका-इजरायल और ईरान में बीच जारी जंग से दुनिया भर में एलपीजी गैस और तेल की कमी का संकट छाया हुआ है। भारत में भी LPG सिलेंडर सप्लाई चरमरा गई है। कई राज्यों से एलपीजी संकट की खबर सामने आ रही है। हालंकि केंद्र सरकार ने इन खबरों को अफवाह करार देते हुए कहा है कि देश में एलपीजी गैस और तेल की कोई कमी नहीं है। बीच सरकार ने शनिवार को 5 किलो एलपीजी सिलेंडर को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने कहा है कि 5 किलो LPG सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटरों के पास उपलब्ध हैं और इन्हें पते के सबूत की जरूरत के बिना, बस एक वैध ID दिखाकर खरीदा जा सकता है।
बिना एड्रेस प्रूफ मिलेगा गैस सिलेंडर

सरकार ने कहा कि वह ईंधन और ऊर्जा की सप्लाई की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। भले ही पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि 5 Kg FTL सिलेंडर आस-पास के LPG डिस्ट्रीब्यूटरों के पास उपलब्ध हैं और इन्हें कोई भी वैध ID सबूत दिखाकर खरीदा जा सकता है। पते के सबूत की कोई ज़रूरत नहीं है।

प्रवासी मजदूरों की मौज
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच को बेहतर बनाना है, खासकर प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के लिए जिनके पास स्थानीय पते के दस्तावेज नहीं हो सकते हैं। 23 मार्च से अब तक, ऐसे लगभग 5.7 लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जिनमें से हाल ही में एक ही दिन में 71,000 से ज़्यादा यूनिट बेची गईं।

पेट्रोल-डीजल या LPG की कोई कमी नहीं
मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है और नागरिकों से घबराकर खरीदारी न करने का आग्रह किया। मंत्रालय ने कहा कि सभी खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और पूरे देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, भले ही अफवाहों के कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ की खबरें आई हों।
घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया

सप्लाई में स्थिरता बनाए रखने के लिए, सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया है, यह सुनिश्चित किया है कि रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चलें, और घरों, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं के लिए ईंधन की सप्लाई को प्राथमिकता दी है। साथ ही, मांग से जुड़े कई उपाय भी शुरू किए गए हैं, जिनमें LPG बुकिंग चक्र को बढ़ाना और PNG, केरोसिन और बिजली से खाना पकाने जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना शामिल है।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई
मंत्रालय ने बताया कि राज्यों को सलाह दी गई है कि वे घरेलू और कमर्शियल, दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए नए PNG कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करें। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए निगरानी भी बढ़ा दी है। हाल ही में 3,700 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए और दोषी LPG डिस्ट्रीब्यूटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिसमें उनके लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।

दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोहित शर्मा के रचा इतिहास, तोड़ा एमएस धोनी का यह बड़ा रिकॉर्ड

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दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोहित शर्मा के रचा इतिहास, तोड़ा एमएस धोनी का यह बड़ा रिकॉर्ड
आईपीएल 2026 के 8वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस की भिड़ंत शनिवार को अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स से हो रही है। मुंबई के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 26 गेंदों में 35 रन बनाए। रोहित ने अपनी इस पारी के दौरान एमएस धोनी का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट
रोहित शर्मा आईपीएल में एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में अब तीसरे नंबर पर आ गए हैं। इसके साथ ही वह आईपीएल में एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए हैं। दिल्ली के खिलाफ 35 रनों की अपनी पारी में रोहित ने एक छक्का लगाया। रोहित दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 51 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने इस मामले में एमएस धोनी को पीछे छोड़ दिया है। धोनी ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ 50 छक्के लगाए हैं। वहीं, इस लिस्ट में पहले नंबर पर क्रिस गेल का नाम है। गेल ने पंजाब किंग्स के खिलाफ 61 छक्के लगाए हैं।

मैच का हाल
टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रयान रिकेल्टन बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और 11 गेंदों का सामना करने के बाद महज 9 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे तिलक वर्मा को मुकेश कुमार ने बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। हालांकि, इसके बाद हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे सूर्यकुमार यादव ने तीसरे विकेट के लिए रोहित शर्मा के साथ मिलकर 53 रन जोड़े। रोहित 26 गेंदों में 5 चौके और एक छक्के की मदद से 35 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, सूर्यकुमार ने 36 गेंदों में 141 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 51 रन बनाए।

जवाब में दिल्ली कैपिटल्स ने 18.1 ओवर में चार विकेट खोकर इसे हासिल कर लिया। रिजवी ने एक बार फिर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 51 गेंद पर सात चौके और सार छक्के की मदद से 90 रन बनाए। वे अपने आईपीएल करियर के पहले शतक से चूक गए।

राज कपूर की विरासत पर मंडराया खतरा, पाकिस्तान के पेशावर में हवेली को बारिश और भूकंप से पहुंचा नुकसान

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राज कपूर की विरासत पर मंडराया खतरा, पाकिस्तान के पेशावर में हवेली को बारिश और भूकंप से पहुंचा नुकसान
भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों में गिने जाने वाले राज कपूर से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर एक बार फिर चर्चा में है। पेशावर स्थित उनकी पुश्तैनी हवेली का एक हिस्सा हाल ही में भारी बारिश और भूकंप के झटकों के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि इतिहास और सिनेमा प्रेमियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।

राज कपूर की हवेली को पहुंचा नुकसान
करीब एक सदी पुरानी यह हवेली कभी कपूर परिवार की पारिवारिक पहचान का केंद्र रही है। बताया जाता है कि लगातार हुई बारिश से पहले ही इसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी और उसके बाद आए भूकंप ने इसकी स्थिति को और नाजुक बना दिया। हवेली की दीवार का एक हिस्सा गिरने से यह आशंका और गहरी हो गई है कि यदि जल्द संरक्षण कार्य शुरू नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक इमारत गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

हवेली को मिला विरासत का दर्जा
इस हवेली को पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय विरासत का दर्जा दिया था। इसके बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा सके। अब स्थानीय विरासत विशेषज्ञों और सांस्कृतिक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि इस धरोहर को पूरी तरह नष्ट होने से बचाया जा सके।

पृथ्वीराज कपूर के परिवार से जुड़ी यह हवेली न सिर्फ कपूर खानदान के इतिहास का हिस्सा रही है बल्कि भारतीय सिनेमा की शुरुआती पीढ़ी की यादों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। यही वह स्थान है जहां राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था। इस कारण यह भवन भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित

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एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित
राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में न्याय व्यवस्था पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे अदालतों की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रदेश की विभिन्न न्यायालयों में 20 लाख 96 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से एक मामला ऐसा है जिसका निपटारा 72 साल बाद भी नहीं हो पाया है।

न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा
पुराने मामलों का अंबार न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलना चुनौती बनता जा रहा है। सिविल प्रकृति का यह मुकदमा 1954 में दायर हुआ था। 1982 का एक आपराधिक मामला अब तक निर्णय की प्रतीक्षा में है। इसके अलावा 26 वर्ष से अधिक पुराने 250 मामले भी अब तक निपटारे का इंतजार कर रहे हैं।

सुनवाई की गति प्रभावित

बड़ी संख्या में पुराने मामलों के कारण अदालतों में सुनवाई की गति प्रभावित हो रही है और लोगों को न्याय पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की विभिन्न अदालतों में कुल 20,96,824 मामलों में से 14,44,306 यानी लगभग 68.88 प्रतिशत मामले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।

कुल लंबित मामलों में 4,22,905 सिविल और 16,73,919 आपराधिक केस शामिल हैं। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में सबसे ज्यादा लंबित मामले सामने आए हैं। यहां कुल 2,38,279 मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,82,201 (76.74%) एक वर्ष से अधिक पुराने हैं, जो अन्य शहरों की तुलना में अधिक है। वहीं भोपाल, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

सबसे दबाव में आपराधिक न्यायालय
आंकड़े बताते हैं कि आपराधिक मामलों का बोझ सबसे ज्यादा है, जिनमें से 12,08,062 मामले यानी लगभग 72.17 प्रतिशत एक वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं। वहीं सिविल मामलों में भी 2,36,244 केस एक साल से अधिक समय से लंबित हैं।

महिलाओं के मामलों में भी वृद्धि
इन न्यायालयों में महिलाओं द्वारा दायर 1,96,450 मामले लंबित हैं। इनमें 93,814 सिविल और 1,02,636 आपराधिक प्रकृति के हैं। बुजुर्गों द्वारा दायर 1,12,371 मामले भी अभी तक लंबित हैं, जिनमें 91,794 सिविल और 20,577 आपराधिक मामले शामिल हैं।

प्रदेश में कुल लंबित मामलों की स्थिति
लंबित मामले – संख्या – एक वर्ष से पुराने

कुल लंबित मामले – 20,96,824 – 14,44,306 (68.88%)

सिविल मामले – 4,22,905 – 2,36,244 (55.86%)

आपराधिक मामले – 16,73,919 – 12,08,062 (72.17%)

प्री-लिटिगेशन/प्री-ट्रायल मामले – 1,24,010 – 58,563 (47.22%)

पांच शहर जहां सबसे ज्यादा मामले

शहर – संख्या – एक वर्ष से पुराने

इंदौर – 2,38,279 – 1,82,201 (76.74%)

भोपाल – 1,46,200 – 1,04,593 (71.54%)

जबलपुर – 1,44,809 – 1,03,465 (71.45%)

रीवा – 98,083 – 77,428 (78.94%)

ग्वालियर – 91,521 – 64,914 (70.93%)

लंबित मामलों की स्थिति

कितने वर्ष से – सिविल – आपराधिक

एक वर्ष पुराने – 1,86,661 – 4,65,857

एक से तीन वर्ष पुराने – 1,39,920 – 5,37,142

तीन से पांच वर्ष – 49,588 – 3,67,074

पांच से दस वर्ष – 38,117 – 2,84,209

दस वर्ष से ज्यादा – 8,619 – 19,637

2000 से पहले – 194 – 56

सबसे पुराना मामला – 1954 – 1982

ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र के पास हवाई हमला

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ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र के पास हवाई हमला
ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बताया कि देश के बुशहर परमाणु केंद्र के पास एक हवाई हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले में परमाणु केंद्र के पास की एक इमारत भी क्षतिग्रस्त हो गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

ईरान की परमाणु एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह हमला किसने किया या इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? बुशहर परमाणु केंद्र ईरान की ऊर्जा उत्पादन क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फैसिलिटी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक प्रमुख केंद्र है और इसके आसपास किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

परमाणु केंद्र पर चौथी बार हुआ हमला
जारी किए गए बयान के अनुसार यह चौथी बार है, जब बुशहर परमाणु केंद्र पर युद्ध के दौरान हमला हुआ है। यह तथ्य इस सुविधा की संवेदनशीलता और क्षेत्र में चल रहे संघर्षों के संभावित प्रभाव को रेखांकित करता है। इस हमले से पश्चिम एशिया क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।

फारस की खाड़ी के पास स्थित है बुशहर परमाणु संयंत्र
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, इस हमले से संयंत्र के मुख्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और उत्पादन अप्रभावित बताया जा रहा है। हालांकि, संयंत्र के मुख्य परिचालन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। दक्षिणी ईरान में फारस की खाड़ी पर बुशहर परमाणु संयंत्र स्थित है और यह देश का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है।

अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की धमकियां
युद्ध छिड़ने के बाद से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बुनियादी ढांचे, जिसमें पुल और बिजली संयंत्र शामिल हैं, पर संभावित हमलों की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान में जो कुछ बचा है, उसे नष्ट करना शुरू भी नहीं किया है। उन्होंने ईरान को पाषाण युग में वापस भेजने की धमकी भी दी थी।

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के सभी आरोपों का दिया जवाब

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राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के सभी आरोपों का दिया जवाब
पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने खुद पर लगाए आरोपों पर सफाई दी है। फेसबुक पर लाइव होकर चड्ढा ने कहा कि मेरे खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है। एक जैसी भाषा और एक जैसे आरोप। पहले मुझे लगा कि इसका जवाब नहीं देना चाहिए लेकिन फिर लगा कि एक झूठ को साै बार बोला जाए तो वो सच लगने लगता है।

तीन बड़े आरोपों पर दी सफाई
पहला आरोप: आम आदमी पार्टी की तरफ से मुझ पर तीन बड़े आरोप लगाए गए हैं। पहला आरोप है कि जब विपक्ष सदन से वाॅकआउट करता है तो राघव चड्ढा वहीं बैठे रहते हैं। ये सरासर झूठ है। एक दिन ऐसा बताया जाए जब विपक्ष ने वाॅकआउट किया हो और मैंने उनका साथ न दिया हो। संसद में हर जगह सीसीटीवी कैमरा है, आप उसकी फुटेज निकालकर दिखा दीजिए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

दूसरा आरोप: राघव ने कहा कि दूसरा आरोप मुझ पर लगाया गया कि मैंने चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाने वाली याचिका पर साइन नहीं किए। ये भी सफेद झूठ है। मुझे आप के किसी नेता ने इस याचिका पर साइन करने के लिए नहीं कहा। साथ ही राज्यसभा में पार्टी के दस सांसद हैं, जिनमें से छह या सात सांसदों ने खुद ही इस याचिका पर साइन नहीं किया। अब इसमें मेरी क्या गलती है। सारा दोष मुझ पर ही क्यों। इस याचिका के लिए रास में केवल 50 साइन चाहिए थे यानी 105 विपक्षी सांसदों में से 50 से ये याचिका पूरी हो जाती।

तीसरा आरोप: चड्ढा ने कहा कि तीसरा आरोप जो मुझ पर लगाया गया वो ये था कि राघव चड्ढा डर गए हैं और इसलिए वो बेकार मुद्दे उठाते हैं। मैं बता दूं कि मैं संसद में चीखने चिल्लाने, गाली देने या माइक तोड़ने नहीं गया। मैं वहां जनता के मुद्दे उठाने गया हूं। मैंने काैन से मुद्दा नहीं उठाया। जीएसटी से लेकर पानी तक, पंजाब के पानी से लेकर दिल्ली की हवा की बात की। बेरोजगारी से लेकर महंगाई तक के मुद्दे उठाए। मेरा ट्रैक रिकाॅर्ड उठाकर देख लीजिए। मैं संसद में इंपेक्ट क्रिएट करने गया हूं। जो लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि हर झूठ को बेनकाब किया जाएगा। हर सवाल का जवाब दिया जाएगा। मैं घायल हूं इसलिए घातक हूं।

पीएम मोदी ने केरल में भरी सियासी हुंकार

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पीएम मोदी ने केरल में भरी सियासी हुंकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केरल में भाजपा की चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे केरलम को ईश्वर ने अपार संसाधन और संभावनाएंं दी हैं। यहां समंदर में ब्लू इकोनॉमी के असीम अवसर हैं। यहां उद्योगों के लिए संभावनाएं हैं। पर्यटन के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं, लेकिन केरल बाकी राज्यों से लगातार पीछे होता जा रहा है।’

पीएम मोदी ने आगे कहा कि राज्य में इस बार माहौल बदल चुका है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि 9 अप्रैल को मतदान के बाद 4 मई को एनडीए सरकार बनने जा रही है। उन्होंने महिलाओं के समर्थन को अपनी ताकत बताते हुए कहा कि राज्यभर में एनडीए के पक्ष में माहौल दिख रहा है। उन्होंने उम्मीदवार अनुप को समर्पित और मेहनती बताते हुए जनता से समर्थन की अपील की। रैली के दौरान उन्होंने सबरीमाला और भगवान अयप्पा का भी उल्लेख किया गया और इसे सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़ा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने यह भी बोले कि केरल के लोगों को कांग्रेस और लेफ्ट से सावधान रहने की जरूरत है।

चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के लिए वोट की अपील
केरल में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इस चुनाव में केरल को फायदा होगा, भले ही उन्हें खुद व्यक्तिगत रूप से कुछ नुकसान उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि एनडीए उम्मीदवार अनूप पिछले पांच वर्षों से उनके साथ पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। वह शांत, ईमानदार और दिन-रात काम करने वाले कार्यकर्ता हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल को ऐसे युवा नेता की जरूरत है और आज वह अनूप को जनता के हवाले कर रहे हैं ताकि वह लोगों की सेवा कर सकें।

मेरा बूथ सबसे मजबूत- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान के तहत केरल के भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। इस दौरान 5000 शक्ति केंद्रों से 1.25 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुड़े। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं का एक ही संदेश था कि केरल की जनता अब एलडीएफ सरकार को हटाने का मन बना चुकी है।

बुनियादी सुविधाओं पर क्या बोले पीएम मोदी?
कहा कि रैली में आने के दौरान पूरे रास्ते लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। वाम दल जहां मानव श्रृंखला की बात करते हैं, वहीं केरल की जनता ने एनडीए के समर्थन में मानव दीवार खड़ी कर दी है। प्रधानमंत्री ने एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन सरकारों ने इस क्षेत्र की लंबे समय तक अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि यहां की सड़कें खराब हालत में हैं, वर्षों से नए पुल नहीं बने हैं और मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी चिंताजनक है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की जीवन गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ा है।

केरल के फंड पर क्या बोले प्रधानमंत्री?
उन्होंने कहा कि जब एलडीएफ और यूडीएफ केंद्र में सत्ता में थे, तब केरल को कम फंड मिलता था। लेकिन मोदी सरकार में राज्य को पांच गुना ज्यादा फंड दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में, जहां बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय रहता है, वहां एनडीए की सरकारें बनी हैं और विकास कार्य हुए हैं। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी सरकार लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि केरल में एनडीए सरकार बनेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और मछुआरों समेत स्थानीय समुदायों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।