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शुक्रवार को किया गया ये आसान उपाय खत्म कर देगा घर का झगड़ा और तनाव

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शुक्रवार को किया गया ये आसान उपाय खत्म कर देगा घर का झगड़ा और तनाव
परिवार में सदस्यों के मध्य रोज किसी बात पर झगड़े होते हैं? जीवनसाथी के साथ छोटी-छोटी बातों पर अनबन होती है या फिर बच्चों के स्वभाव की वजह से घर में अशांति का माहौल बना रहता है। यह सभी चीजें शुक्र की कमजोर दशा को दर्शाती हैं, क्योंकि शुक्र ही वह ग्रह है जो प्रेम का प्रतिनिधित्व करता है। जहां प्रेम नहीं होता है अशांति वहीं पाई जाती है।

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार या दहलीज को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी जगह से घर में एनर्जी आती है। इसलिए, धार्मिक ग्रंथों से लेकर वास्तु शास्त्र तक, हमेशा दहलीज को साफ रखने की सलाह दी जाती है। दहलीज पर नेगेटिव एनर्जी बढ़ने से घर में कई बेवजह की परेशानियां, झगड़े और कलह बढ़ सकते हैं, और आर्थिक स्थिति और सेहत खराब हो सकती है। अक्सर, लोग इन समस्याओं का कारण भी नहीं समझ पाते हैं। अगर आपके घर से खुशी, तालमेल, शांति और पॉजिटिव एनर्जी गायब हो गई है, तो वास्तु शास्त्र मुख्य द्वार के लिए कुछ उपाय बताता है। इन उपायों को अपनाकर आप अपने घर में खुशियां वापस ला सकते हैं।

आप अपने घर के अंदर की साफ-सफाई, रखरखाव और सजावट पर ध्यान देते हैं, उसी तरह मुख्य द्वार का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है। इसलिए, मुख्य द्वार को नियमित रूप से साफ करें। अगर मुख्य द्वार का एरिया खराब हो गया है, या अगर गेट लोहे का है और उसमें जंग लग गया है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। अगर दरवाज़ा लकड़ी का है और टूटा हुआ है, तो उसे भी ठीक करवाएं। जूते-चप्पलों का ढेर तुरंत हटा दें। अगर यह एरिया गंदा या खराब होता है, तो इससे नेगेटिव एनर्जी बढ़ती है।

दहलीज पर फालतू चीजें जमा न करें। हालांकि, मुख्य द्वार को पूरी तरह से खाली भी नहीं रखना चाहिए। आप इसे फूलों, तोरण (सजावटी लटकन) आदि से सजा सकते हैं। आप स्वास्तिक या शुभ-लाभ जैसे शुभ प्रतीक भी बना सकते हैं। इससे पॉजिटिविटी बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि अगर दहलीज पूरी तरह से खाली होती है, तो घर में सुख-समृद्धि नहीं आती है।

वास्तु दोष दूर करने के लिए, आप एक छोटे कपड़े के बैग का इस्तेमाल करके यह उपाय भी आज़मा सकते हैं। एक लाल कपड़ा लें और उसमें 1 चम्मच नमक भरें, फिर इस बैग को अपने घर के मुख्य द्वार के ऊपर लटका दें। नमक नेगेटिव एनर्जी को पूरी तरह से सोख लेता है। हालांकि, ध्यान रखें कि आपको हर 15-20 दिन में कपड़े के बैग में नमक बदलना चाहिए और पुराने नमक को पानी में बहा देना चाहिए।

वास्तु दोष या नेगेटिव एनर्जी को दूर करने के लिए, हर सुबह एक बर्तन में पानी भरकर उसमें आम के पत्ते और फूल डालकर, उसे घर के एंट्रेंस के दाहिनी ओर रखें। शाम को मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाएं। अगर रोज़ाना यह उपाय करना संभव न हो, तो इसे एकादशी, पूर्णिमा और शुक्रवार जैसे खास दिनों पर करें। इससे वास्तु दोष दूर होंगे और देवी लक्ष्मी आपके घर में वास करेंगी।

यूपी में नितिन नवीन के स्वागत से बड़ा संदेश देने में जुटी भाजपा

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यूपी में नितिन नवीन के स्वागत से बड़ा संदेश देने में जुटी भाजपा
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के करीब छह माह बाद प्रदेश पहुंच रहे नितिन नवीन का अभूतपूर्व स्वागत कर भाजपा बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास करेगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ दौरे को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह लगातार नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों एवं मोर्चा अध्यक्षों के साथ बैठक कर रहे हैं।

प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह को कार्यक्रम का समन्वयक बनाया गया है, जो एयरपोर्ट से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक की व्यवस्था का जिम्मा संभालेंगे। सभी सांसदों, विधायकों, एमएलसी एवं जिलाध्यक्षों को भी लखनऊ बुलाया गया है। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष एक दिन पहले पहुंच सकते हैं।

नितिन नवीन के दौरे को देखते हुए कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालय को होर्डिंगों से पाट दिया है। चारबाग से लेकर लोहिया पथ तक हर जगह नवनियुक्त पदाधिकारियों के नाम से होर्डिंग और बैनर लगाए गए हैं। गुरुवार को प्रदेश मुख्यालय पर काफी गहमागहमी रही।

प्रांगण में फूल मालाओं के बिखरे रहने से साफ है कि नए पदाधिकारियों को लेकर कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों में भरपूर उत्साह है। दोपहर दो बजे पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई, जिसमें स्वागत कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई गई।

शाम छह बजे प्रदेश नेतृत्व ने एक बार फिर पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ मंथन कर कार्यक्रम के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश पर बातचीत की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम को लेकर होर्डिंग, बैनर एवं पोस्टर में भी पीडीए का असर नजर आ रहा है।

यूपी में 1 लाख युवाओं को मिलेगा हाई-टेक कौशल प्रशिक्षण

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यूपी में 1 लाख युवाओं को मिलेगा हाई-टेक कौशल प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया गया है। इस बार सरकार का फोकस युवाओं को पारंपरिक कोर्सेज से आगे ले जाकर डिजिटल युग के लिए तैयार करना है।

सादगी, समर्पण और संगठन हेमंत खंडेलवाल की यही है पहचान

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सादगी, समर्पण और संगठन हेमंत खंडेलवाल की यही है पहचान
रोशन नेमा/भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक वर्ष के कार्यकाल में सादगी, अनुशासन और संगठन-केंद्रित कार्यशैली के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। कार्यकर्ताओं के बीच सहज उपलब्धता, निरंतर संवाद और संगठन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें एक कर्मठ संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया है।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत प्रचार से अधिक संगठन को महत्व दिया। लगातार जिला प्रवास, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद, संगठनात्मक बैठकों की नियमित समीक्षा और कार्यकर्ताओं के सुझावों को महत्व देना उनके नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएँ रहीं।

उनके नेतृत्व में संगठन के पुनर्गठन, बूथ सशक्तिकरण, सदस्यता विस्तार, प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन तथा सरकार–संगठन के बेहतर समन्वय पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के साथ-साथ जनता की अपेक्षाओं और समस्याओं को भी संगठन के माध्यम से शासन तक पहुँचाएँ।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एक वर्ष के कार्यकाल में हेमंत खंडेलवाल ने शांत, संयमित और परिणामोन्मुख नेतृत्व का परिचय दिया है। उनकी पहचान ऐसे प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बनी है जो पद से अधिक संगठन, कार्यकर्ता और जनसेवा को महत्व देते हैं।
सादगी, सम्मान और संगठनात्मक दक्षता के साथ उन्होंने यह संदेश दिया है कि मजबूत संगठन ही किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी शक्ति होता है। एक वर्ष का उनका कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि शांत नेतृत्व, निरंतर संवाद और समर्पित संगठन ही दीर्घकालिक सफलता की मजबूत नींव रखते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिभाओं ने संपूर्ण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे दादा स्व. ईश्वरदास रोहाणी स्मृति गौरव शिखर सम्मान 2026 में 12 महान विभूतियों का सम्मान गौरवशाली क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है। हम विश्व को एक परिवार मानते हैं। इसी प्रकार स्व. रोहाणी भी अपने कार्यों के बलबूते आज समाज कल्याण के प्रतीक बने। वे एक कर्मयोगी थे, जिन्होंने गरीब से गरीब के जीवन को रोशन करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति समर्पित राष्ट्र-साधक स्व. रोहाणी का अद्वितीय योगदान प्रेरणादायी रहेगा। उनकी शुचिता और विराट व्यक्तित्व यादगार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जबलपुर में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह चंद्रा ने की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति गुरुकुल परंपरा से पल्लवित थी। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बनीं, जो आज भी हमें कठिन समय में अपने मित्रों की सहायता के लिए प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को कर्म की श्रेष्ठता का संदेश दिया है।

इन 12 हस्तियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में समाज के विभित्र क्षेत्रों में अपनी साधना और उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्र निर्माण में संलग्न 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए सु रेखा चुडास्मा, समाज सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. कैलाश गुप्ता, महिला सशक्तिकरण के लिए सु ज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति एवं कुटुंब प्रबोधन के लिए नंदलाल नेगांधी, युवा प्रेरणा के लिए सरबजीत सिंह कलासी, सनातन ज्ञान के लिए पंडित रोहित दुबे, उद्योग के क्षेत्र में नितिन चंडोक, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. वाई. आर. यादव, पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम कटारे, सेवानिवृत्त अधिकारियों की श्रेणी में सब लेफ्टिनेंट (रिटा.) आर. एन. तिवारी, विधि के क्षेत्र में पूर्व सांसद आर. एन. सिंह, न्याय क्षेत्र में जस्टिस देवव्रत माधव धर्माधिकारी का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यक्रम में सम्मानित हुईं विभूतियों के कार्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के आयोजक और विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि स्व. रोहाणी ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित करने की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह लोधी, विधायक संतोष बरकड़े, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

जल गंगा संवर्धन अभियान ने जनभागीदारी का रचा नया इतिहास – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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जल गंगा संवर्धन अभियान ने जनभागीदारी का रचा नया इतिहास – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुख्य उद्देश्यों के साथ संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के साथ देश और विदेश के लगभग 7 करोड़ परिवारों तक अपनी पहुंच बनाकर जनभागीदारी का एक नया इतिहास रच दिया है। आगामी मानसून में कम वर्षा की संभावना को देखते हुए पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के दूरदर्शी उद्देश्य से शुरू हुआ यह महा अभियान 30 जून 2026 को भव्यता के साथ संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दृढ़ संकल्प से यह अभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक विराट वैश्विक जन आंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है।

इस महाअभियान को सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला। ट्विटर (एक्स), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के आधिकारिक माध्यमों द्वारा प्रतिदिन जागरूकता पोस्टर, लघु फिल्में और इन्फोग्राफिक्स साझा किए गए। #जल_गंगा_संवर्धन_अभियान, #जल_है_तो_कल_है, #WaterConservation और #SaveWater जैसे हैशटैग्स के माध्यम से प्रदेश और देश के कोने-कोने तक जल संरक्षण का संदेश फैला, जिससे कुल 6 करोड़ 95 लाख 74 हजार 820 से अधिक लोगों तक इस अभियान की डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सकी और लोग जल स्रोतों को सहेजने की मुहिम से सीधे जुड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सतत मॉनिटरिंग और विशेष डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से अभियान में पूरे राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर कार्य किए गए। प्रदेश भर में 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख 63 हजार से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और जीर्णोद्धार के कार्य पूर्ण किए गए। भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए रिकॉर्ड समय में 67,708 खेत-तालाब, 225 अमृत सरोवर और 97,614 कूप रिचार्ज संरचनाएं तैयार की गईं। इसके अलावा 10,000 से अधिक कुओं, नदियों और प्राचीन बावड़ियों की सफाई व सौंदर्यीकरण कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इन प्रामाणिक कार्यों की बदौलत मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर श्रमदान किया और समाज के हर वर्ग को प्रेरित किया। 19 मार्च 2026 को इंदौर से इसके तीसरे चरण की शुरुआत करने से लेकर धार में देवी सागर तालाब के गहरीकरण, उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा, भोपाल के ‘सदानीरा समागम’ और राजगढ़ में आयोजित समापन समारोह तक उन्होंने सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प दोहराया कि ‘जल है तो कल है’ और सरकार इसे सहेजने के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है, इसलिए जल संरक्षण के कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। अभियान के समापन के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” पौधरोपण अभियान और 1 जुलाई से “विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन” का भी भव्य शुभारंभ किया गया।

जल संरक्षण और जनभागीदारी के इस अभियान ने मध्यप्रदेश को देश में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है। जल गंगा संवर्धन अभियान ने यह साबित कर दिया कि जब सरकार और समाज साथ आते हैं, तो जल संरक्षण केवल एक योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सशक्त जन आंदोलन बन जाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाटू श्याम मंदिर तलून (बड़वानी) के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को किया वर्चुअली संबोधित

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाटू श्याम मंदिर तलून (बड़वानी) के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को किया वर्चुअली संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बड़वानी सहित निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से समृद्ध रही है। भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सही दिशा दिखाई है, उनके मार्गदर्शन से समाज में सद्भाव, संयम और सेवा की भावना विकसित होती है। गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों की सेवा ही सच्ची भक्ति है, समाज तभी आगे बढ़ता है जब धर्म और सेवा साथ चलते हैं, यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। बड़वानी के समीप तलून में बनने वाला खाटू श्याम मंदिर इस गौरवशाली विरासत को मजबूत करेगा और आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ कार्यक्रम को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

बाबा खाटू श्याम ने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए किया त्याग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का अवसर केवल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का पर्व है। बाबा खाटू श्याम की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। बाबा खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख हरने वाले देवता माने जाते हैं। बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है। महाभारत में उन्होंने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था। उनका यह अद्वितीय त्याग भारतीय संस्कृति में वीरता, विनम्रता और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। मां नर्मदा माँ की परिक्रमा के बाद महंत शशि गिरि जी महाराज के मन में खाटू श्याम मंदिर बनाने का विचार आया और शहर के भक्तों के सहयोग से मंदिर का सपना साकार हुआ।

राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। यह मंदिर भी उस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा खाटू श्याम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य तथा प्रदेश के विकास और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम में सांसद गजेन्द्र पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष बड़वानी बलवंत पटेल, महंत महामण्डलेश्वर हरि सुरेन्द्र गिरी जी महाराज, अध्यक्ष खाटू श्याम मंदिर बड़वानी शशि गिरि जी महाराज तथा अन्य संतगण, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के संकल्प से कुनकुरी में आकार ले रहा आधुनिक नालंदा परिसर

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मुख्यमंत्री के संकल्प से कुनकुरी में आकार ले रहा आधुनिक नालंदा परिसर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित सलियाटोली में 4.37 करोड़ रुपये की लागत से 250 सीटर सर्वसुविधायुक्त नालंदा परिसर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह परिसर क्षेत्र के विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीक आधारित और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण उपलब्ध कराएगा। मुख्यमंत्री साय ने 21 जून 2025 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं। जशपुर जिले में जिला मुख्यालय जशपुर और कुनकुरी के सलियाटोली में ऐसे आधुनिक परिसर बनाए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को विशाल पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन और तकनीकी सुविधाओं से युक्त अध्ययन वातावरण मिलेगा। यह परिसर विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन खुला रहेगा।

’आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर’
नालंदा परिसर में इंडोर और आउटडोर दोनों प्रकार के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। विद्यार्थी प्राकृतिक वातावरण के बीच विकसित ऑक्सी रीडिंग जोन में भी अध्ययन कर सकेंगे। परिसर को पर्यावरण अनुकूल अवधारणा के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था, ऊर्जा दक्ष भवन डिजाइन तथा 50 से अधिक देशी पौधों का रोपण किया जाएगा।

’ज्ञान के साथ स्वास्थ्य और नवाचार पर भी रहेगा फोकस’
परिसर में विद्यार्थियों की समग्र आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ टावर, स्पोर्ट्स कोर्ट, कैफेटेरिया, एटीएम और हेल्थ जोन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप इसे स्वायत्त एवं स्ववित्तपोषित संचालन मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

’डिजिटल लाइब्रेरी और अत्याधुनिक प्रबंधन प्रणाली’
नालंदा परिसर की लाइब्रेरी में 50 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध होंगी। इसके साथ डिजिटल लाइब्रेरी, हाई-स्पीड वाई-फाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष पुस्तकें तथा ई-लर्निंग संसाधनों की सुविधा भी रहेगी। परिसर में आरएफआईडी आधारित प्रवेश प्रणाली, बायोमेट्रिक पहचान, आरएफआईडी से पुस्तकों की ट्रैकिंग तथा आधुनिक सॉफ्टवेयर आधारित पुस्तक प्रबंधन व्यवस्था लागू की जाएगी।
यह नालंदा परिसर जशपुर जिले के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही महानगरों के समान आधुनिक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की बेहतर तैयारी का सशक्त केंद्र बनेगा।

एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

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एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों – एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग – पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 से बढ़कर ₹300 प्रतिदिन -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 से बढ़कर ₹300 प्रतिदिन -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) योजना के तहत अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी ₹261 से बढ़ाकर ₹300 प्रतिदिन कर दी गई है। यह नई दर 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है।

सरकार के इस निर्णय से लाखों ग्रामीण श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा उनकी आय में वृद्धि होगी। मजदूरी दर में बढ़ोतरी से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ आजीविका के बेहतर अवसर भी उपलब्ध होंगे।

राज्य सरकार ने इसे श्रमिकों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश के श्रमिकों की मेहनत और योगदान को उचित सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता है। मजदूरी बढ़ाने का यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने तथा श्रमिक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगा।

साय सरकार का यह फैसला सुशासन, श्रमिक कल्याण और ग्रामीण विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि श्रमिकों की आय बढ़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।