Home Blog

मध्यप्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, इतिहास और संस्कृति का सजीव चित्रण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

0

मध्यप्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, इतिहास और संस्कृति का सजीव चित्रण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रेरणा वाक्य “एमपी अजब है, सबसे गजब है” मध्यप्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, इतिहास और संस्कृति का सजीव चित्रण है। यह हमें पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में देश के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन FAITH कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की “जो कहते हैं, वो करते हैं” की कार्यशैली के कारण आज भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित है। उनका मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ हमारी नीतियों का आधार स्तंभ है, जिससे विकास समाज के हर वर्ग तक पहुँच रहा है।

FAITH कॉन्क्लेव में “मध्यप्रदेश: द हार्ट ऑफ इन्क्रेडिबल इंडिया” विषय पर आयोजित विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य को देश का अग्रणी पर्यटन एवं निवेश गंतव्य बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को मध्यप्रदेश में निवेश और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।

पिछले एक साल में 13 करोड़ से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश पहुँचे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतुलनीय भारत का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश बाबा महाकाल की पवित्र धरा है। हमारा राज्य केवल एक नक्शा नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शानदार किलों और जीवंत जंगलों का एक अनूठा कैनवास है। धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय लिखते हुए हमारी सरकार भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी पावन स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। पिछले एक साल में 13 करोड़ से अधिक पर्यटक मध्य प्रदेश पहुँचे हैं, जिसने हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

दुनिया देखेगी सिंहस्थ-2028 का भव्य और दिव्य रूप
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को भव्य और दिव्य के बनाने के लिए लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत से व्यापक आधारभूत संरचना के विकास पर कार्य कर रही है। दुनिया के सबसे बड़े आयोजन की तैयारियां करना हम सभी का दायित्व है। सिंहस्थ-2028 को सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुनयोजित विकास के साथ व्यापक कार्ययोजना पर कार्य तेज गति से चल रहा है। 30 किलोमीटर तक लंबे घाटों का निर्माण हो रहा है। सिंहस्थ में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मां शिप्रा के पावन जल से स्नान का सौभाग्य प्राप्त होगा।

उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद बड़ी पर्यटकों की संख्या
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। भारत का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग उज्जैन में महाकालेश्वर अपनी दिव्यता और अद्वितीय आध्यात्मिक महिमा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिदिन प्रातःकाल होने वाली विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है। उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद एक साल में लगभग 8 करोड़ लोग दर्शन कर चुके हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संपदा के कारण भारत का वास्तविक हृदय है। राज्य सरकार विश्वस्तरीय पर्यटन अधोसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी तथा निवेश-अनुकूल नीतियों के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, विरासत और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रदेश में इको टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए बैतूल जिले के कॉफी वैली के नाम से प्रसिद्ध हिल स्टेशन ‘कुकरू’ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

निवेश और वैश्विक साझेदारी पर रणनीतिक चर्चा
कॉन्क्लेव में पर्यटन विभाग के सचिव एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. और मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स तथा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन चर्चाओं में राज्य में निजी निवेश, हवाई संपर्क के विस्तार, पर्यटन अवसंरचना के विकास तथा मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

मध्यप्रदेश के पर्यटन मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना
कॉन्क्लेव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों ने अपने पर्यटन मॉडल और निवेश संभावनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। इस बहु-राज्यीय मंच पर मध्यप्रदेश के वाइल्डलाइफ टूरिज्म, हेरिटेज होमस्टे, आध्यात्मिक सर्किट और ग्रामीण पर्यटन जैसे नवाचार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उनकी सराहना की।

दो दिवसीय FAITH कॉन्क्लेव-2026 ने राज्यों के बीच सहयोग, पर्यटन निवेश के नए अवसरों और भारत के पर्यटन इको सिस्टम को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया। मध्यप्रदेश की प्रभावशाली सहभागिता ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और निवेश की असीम संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कॉन्क्लेव में अरुणाचल प्रदेश सरकार के पर्यटन, शिक्षा, ग्रामीण कार्य, संसदीय कार्य एवं पुस्तकालय मंत्री पासांग दोर्जी सोना, आंध्र प्रदेश सरकार के पर्यटन, संस्कृति एवं सिनेमेटोग्राफी मंत्री कंदुला दुर्गेश, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव हरि किशोर, फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (FAITH) के चेयरपर्सन पुनीत छतवाल, एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) के प्रेसिडेंट अजीत बजाज, , FAITH के संरक्षक (Patron) नकुल आनंद, एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया (ADTOI) के चेयरमैन वेद खन्ना, इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के प्रेसिडेंट रवि गोसाईं तथा FAITH के सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहरा सहित FAITH से संबद्ध सभी 11 सदस्य संस्थाओं के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

भारत मंडपम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा

0

भारत मंडपम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है किमध्यप्रदेश में गारमेंट सेक्टर में धार जिले का पीएम मित्रा पार्क देश का सबसे बड़ा मित्र पार्क है। इसमें 90 प्रतिशत भूखंड आवंटित हो चुके हैं। यह एक उपलब्धि है। पारंपरिक वस्त्र निर्माण और कपास उद्योग कई दशकों से भारत की पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स 2026 में टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर इंडस्ट्री में आगे बढ़ने की संभावनाओं और क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2025 को मध्यप्रदेश के धार को देश के पहले पीएम मित्र पार्क की सौगात दी। गारमेंट सेक्टर के इस पार्क के भूमि-पूजन के साथ ही यहां 90 प्रतिशत भू-खंडों का आवंटन भी पूरा कर लिया गया। यह एक रिकॉर्ड है और काम के प्रति राज्य सरकार की दक्षता प्रकट करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि धार जिले में पीएम मित्र पार्क के आसपास भी निवेशक अब उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की मांग कर रहे है। प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूलता, कच्चे धागे के लिए माल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर मध्यप्रदेश निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश की बढ़ती निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन की शक्ति से दुनिया परिचित हो रही है। गारमेंट सेक्टर में निवेशकों की पहल और उद्यमियों का हौसला सराहनीय है।

1592 करोड़ रुपए के मिले प्रस्ताव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टैक्सटाइल क्षेत्र में आए निवेश प्रस्तावों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत टेक्स 2026 में विभिन्न औद्योगिक संस्थानों से 1592 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से 15 हजार 700 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के साथ देश के उद्योगपतियों और वैश्विक ब्रांड्स के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां टेक्ससाइल एंड अपेरल सेक्टर की वैल्यू चेन उपलब्ध है। कपास से धागा तैयार करने, गारमेंट निर्माण और मशीनरी की उपलब्धता मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाती है। जैविक कपास के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश नंबर वन है। राज्य में केवल कपास का उत्पादन ही नहीं, बल्कि फॉर्म टू फैशन तक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश से 11 हजार 750 करोड़ का टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में निर्यात हुआ है। हमारी टेक्सटाइल इंडस्ट्री अमेरिका, बांग्लादेश, जापान, जर्मनी, विएतनाम, इटली, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में विशेष पहचान बना रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल एवं गारमेंट के सैकड़ों उद्योग संचालित हो रहे हैं। एमएसएमई यूनिट्स की संख्या भी 43 हजार से अधिक हो चुकी है। इस क्षेत्र में 2400 करोड़ रुपए के निवेश के फलस्वरूप 3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। धार के पीएम मित्र पार्क से 20 हजार करोड़ से अधिक निवेश का आना और 30 बड़ी कंपनियों का आगमन महत्वपूर्ण है। पीएम मित्र पार्क से अंचल के कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा।

मध्यप्रदेश निवेश का रिकार्ड तोड़ेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर में आकर्षक नीतियों से विशेष पहचान बना रहा है। राज्य में उद्योगों को आर्थिक सब्सिडी, बिजली आपूर्ति, भूमि आवंटन, स्टांप ड्यूटी में छूट से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने और अपनी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में मध्यप्रदेश को प्राप्त निवेश प्रस्ताव में से लगभग 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। वर्ष 2027 में फिर जीआईएस का आयोजन होगा, उम्मीद है कि इसमें निवेश का रिकॉर्ड टूटेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उद्यमियों को साढ़े पांच हजार करोड़ की सब्सिडी राशि डीबीटी के माध्य से दी जा चुकी है।

छोटे शहरों में औद्योगिक विकास की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गईं, जिससे छोटे शहरों में भी औद्योगिक विकास हुआ है। नर्मदापुरम में 11 हजार 500 करोड़ से निवेश से नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। रीवा में आईटी पार्क शुरू हो रहा है। ग्वालियर, जबलपुर, सिंगरौली, सतना, कटनी और सागर में इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। शिवपुरी को डिफेंस पार्क और गुना को बड़े सीमेंट प्लांट की सौगात मिली है। वर्तमान में प्रदेश में 37 से अधिक इंडस्ट्रियल पार्क संचालित हैं। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल और गारमेंट के साथ उद्योग के अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्याप्त मात्रा में कपास और रेशम उत्पादन हो रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश के रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मॉडल की सराहना की है।

किसान, बिजली उत्पादन में बने सहयोगी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गैर-जरूरी खर्चों को कम करते हुए वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपने वार्षिक बजट में बढ़ोतरी की है। पहले सरकार किसानों को 20 हजार करोड़ की पहले सब्सिडी देती थी, इसके स्थान पर सोलर एनर्जी को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए किसानों को सोलर पंप दिए जा रहे हैं। किसान अपनी जरूरत की बिजली का स्वयं उत्पादन कर रहे हैं। जरूरत से अधिक बिजली को राज्य सरकार खरीद भी रही है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से जल बंटवारे को नई दिशा दी गई है। मध्यप्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ परस्पर संबंधों को बेहतर करते हुए पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत मंडपम में भारत टैक्स-2026 कार्यक्रम को किया संबोधित

0

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत मंडपम में भारत टैक्स-2026 कार्यक्रम को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कपड़ा उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ा रहा है। टैक्सटाइल इंडस्ट्री से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और मालवा-निमाड़ अंचल के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीएम मित्र पार्क से खेत से लेकर गारमेंट इंडस्ट्री और इंडस्ट्री से वैश्विक बाजार तक प्रदेश के उत्पादों की पहुंच आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में अपना उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है वहीं का होकर रह जाता है। हृदय प्रदेश सभी उद्योगपतियों का स्वागत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में भारत टैक्स-2026 के अंतर्गत आयोजित राउंड टेबल संवाद कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर केंद्रीय टैक्टाइल मंत्री गिरिराज किशोर, प्रमुख टैक्टाइल उद्योग प्रतिनिधि, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधिकारी तथा राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।

महेश्वरी और चंदेरी साड़ियां वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भारत मंडपम् में वस्त्र उद्योग का कुंभ आयोजित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार, सभी वैश्विक ब्रांड्स के प्रतिनिधि, निवेशक, उद्योगपति, पॉलिसी मेकर और फैशन डिजाइनर भारत सरकार के संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। वर्तमान समय ब्रांडिंग और पैकेजिंग का है। प्राचीन समय में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने स्थानीय बुनकरों को रोजगार से जोड़ने के लिए महेश्वरी साड़ियां तैयार करने की शुरुआत करवाई थी। महेश्वरी साड़ियां वर्तमान में भी देश-विदेश मे लोकप्रिय है। चंदेरी की साड़ियां भी वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान रखती हैं। आज भी स्वावलंबन और रोजगार परक उद्योग हमारी पहचान हैं।

राज्य सरकार ने उद्योगपतियों और निवेशकों से किए पूरे किए सभी वादे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब जरी स्टेट, रेशम स्टेट, मैनमेड फाइबर स्टेट, कॉटन कैपिटल बन चुका है। राज्य में टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, कुशल कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता और श्रमिकों के साथ आत्मीय संबंध बेहतर औद्योगिक वातावरण प्रदान करते है। राज्य सरकार ने उद्योगपति और निवेशकों से किए अपने सभी वायदे पूरे किए हैं। सभी सेक्टर्स में उद्योगपतियों और निवेशकों को सब्सिडी के रूप में उनके हक की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। राज्य सरकार ने मई 2026 तक की सभी देनदारियां चूकता कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने डेढ़ साल में लगभग 5500 करोड़ रुपए की राशि उद्योगपतियों को सब्सिडी के रूप में उपलब्ध करायी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। राज्य में सोलर और पंप स्टोरेज से निर्मित बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है।

राउंड टेबल चर्चा का शुभारंभ उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के प्रतिनिधियों के स्वागत से हुआ। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने मध्यप्रदेश के टेक्सटाइल एवं गारमेंट इको सिस्टम, निवेश अवसरों, औद्योगिक नीतियों तथा उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सु आरती कंवर ने भी विशेष संबोधन में वस्त्र क्षेत्र में राज्यों और उद्योगों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिंटेक्स के प्रबंध निदेशक श्रेयस्कर चौधरी ने किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेक्सटाइल उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC), मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (MATEXIL) तथा द कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (TEXPROCIL) के साथ सहयोग संबंधी एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए।

मुख्यमंत्री ने भारत टैक्स-2026 में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देश के प्रमुख टेक्सटाइल उद्योग प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र सचिव श्रीमती नीलम शम्मी राव और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह सहित केंद्र और राज्य के अधिकारी मौजूद थे।

कोहली ने इंग्‍लैंड की सरजमीं पर बना डाला ‘विराट’ रिकॉर्ड

0

कोहली ने इंग्‍लैंड की सरजमीं पर बना डाला ‘विराट’ रिकॉर्ड
विराट कोहली ने अपनी रिकॉर्ड्स बुक में एक और उपलब्धि दर्ज करा ली है। किंग कोहली इंग्‍लैंड में सबसे ज्‍यादा अंतरराष्‍ट्रीय रन बनाने वाले भारतीय बल्‍लेबाज बन गए हैं। उन्‍होंने राहुल द्रविड़ का 15 साल पुराना कीर्तिमान ध्‍वस्‍त किया।

कोहली को दूसरे वनडे में द्रविड़ का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए केवल 4 रन की जरुरत थी। कोहली ने पारी के 9वें ओवर में जोफ्रा आर्चर की गेंद पर बाउंड्री जमाकर कीर्तिमान अपने नाम किया।

कैसे आगे हुए कोहली
37 साल के बल्‍लेबाज ने इंग्‍लैंड की सरजमीं पर 59 मैचों की 75 पारियों में 2646 रन का आंकड़ा पार किया। कोहली ने इंग्‍लैंड में अपना पहला अंतरराष्‍ट्रीय मैच 2011 में खेला था। वहीं, द्रविड़ ने 46 मैचों की 56 पारियों में 2645 रन बनाए थे।

इंग्‍लैंड में सबसे ज्‍यादा अंतरराष्‍ट्रीय रन बनाने वाले भारतीय बल्‍लेबाजों में मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर तीसरे स्‍थान पर काबिज हैं। तेंदुलकर ने 43 मैचों की 56 पारियों में 2626 रन बनाए।

विव रिचर्ड्स के नाम दर्ज है रिकॉर्ड
हालांकि, इंग्‍लैंड में सबसे ज्‍यादा अंतरराष्‍ट्रीय रन बनाने वाले विदेशी बल्‍लेबाजों का रिकॉर्ड वेस्‍टइंडीज के महान बल्‍लेबाज विव रिचर्ड्स के नाम दर्ज है। विव ने इंग्‍लैंड की धरती पर 55 मैचों की 63 पारियों में 3402 रन बनाए हैं।

रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

0

रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

0

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए ‘ट्री एटीएम’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘ट्री एटीएम’ लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

‘आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव’ के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को ‘आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव’ के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

0

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होता है। छेरा-पहरा की परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वाेच्च धर्म है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच यह पर्व एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्षगण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

0

ऋग्वेद से जुड़ी है श्री जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा
जगत- अर्थात शरीर, जो क्षयशील है, नाथ- शरीर में स्थित अक्षय आत्मा अर्थात जगत में दृश्यमान प्रत्येक जीव जगन्नाथ का स्वरूप है। जगत- अर्थात दृश्यमान प्रकृति, नाथ- प्रकृति को आलोक प्रदान करने वाले सूर्यनारायण। जगत- अर्थात सोमतत्व, नाथ-अर्थात अग्नि। वह अग्नि ही जगन्नाथजी का स्वरूप है। इसका स्पष्ट उल्लेख गीता में पंचदश अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने किया है।

वेद में कहा गया “अग्निसोमात्मकं जगत”। ‘अग्निर्ह च वृषभश्च धेनुः’ इस ऋग्वेद मंत्र के अनुसार श्रीजगन्नाथ अग्निस्वरूप वृषभ हैं और आल्हादिनी शक्ति राधा अथवा लक्ष्मी जगत रूपी धेनु स्वरूपा है। निरुक्त में विष्णु के लिए ‘नराशंस’- शब्द का प्रयोग हुआ हैं। नरान् शंसते इति विष्णुः। अग्निर्वा अर्थात जो मनुष्यों के द्वारा स्तुति योग्य हो, वह जगन्नाथ हैं। श्रीजगन्नाथ-परब्रह्म परमात्मा, श्रीवलभद्र-जीवात्मा, श्रीसुभद्रा-मायाशक्ति, श्रीसुदर्शन- क्रियाशक्ति के रूप में विद्यमान है।

श्रीजगन्नाथ-अग्नितत्त्व का प्रतीक हैं (पुरुषशक्ति), अन्य सभी शक्तियां- जलतत्व का प्रतीक हैं, जो उनका ही अंश है (स्त्रीशक्ति)। यथा-स्वरूपशक्ति (बलभद्र), मायाशक्ति (सुभद्रा), तटस्थशक्ति (सुदर्शन)। पुरुषोत्तम श्रीजगन्नाथ महाप्रभु ही सकलजगत का सृष्टि का कारण हैं – यह बताकर श्रीभाष्य के रचयिता विशिष्टाद्वैतवाद के वैष्णवसंप्रदाय के आचार्य रामानुजाचार्य ने श्रीजगन्नाथ जी को वैष्णवधर्म का केंद्रबिंदु के रूप मे स्वीकार किया। चतुर्द्धामूर्तियों के बारे में उनका मत हैं- जगन्नाथ- वासुदेव (परमात्मा), वलभद्र-संकर्षण (जीव), सुभद्रा – प्रद्युम्न (मन), सुदर्शन- अनिरुद्ध (अहंकार)।

आर्तिक को वासुदेव स्वरूप, अर्थार्थी को संकर्षण स्वरूप, जिज्ञासु को प्रद्युम्न, ज्ञानी को अनिरुद्ध का स्वरूप माना गया हैं। द्वैतवाद का ब्रह्म संप्रदाय के आचार्य आनंदतीर्थ ने पूर्णप्रज्ञभाष्य में वताया हैं कि श्री जगन्नाथ स्वयं साक्षात विष्णु और ब्रह्म स्वरूप हैं। महालक्ष्मी उनका शक्ति हैं। शुद्धाद्वैतवाद के आचार्य वल्लभाचर्य अणुभाष्य में श्री जगन्नाथ जी को आक्षरब्रह्म एवं श्रीकृष्ण के रूप में स्वीकार किया। माध्ववेदांत के समर्थक गौड़ीय वैष्णवधर्म के आचार्य श्रीचैतन्य महाप्रभु ने श्रीजगन्नाथ जी को राधाकृष्ण का सम्मिलित रूप माना है। ओडिआ भागवत के रचयिता अतिवडी जगन्नाथ दास ने जगन्नाथ जी को श्रीकृष्ण माना।

द्वैताद्वैतवाद के प्रवर्तक आचार्य निंबार्क ने वेदांतपारिजात भाष्य में श्री जगन्नाथ जी को सगुण साकार ब्रह्म के रूप में वर्णन किया। उनके मत में श्री जगन्नाथ जी उत्पत्ति, स्थिति, संहार, नियमन, ज्ञान, आवरण, बंध तथा मोक्ष के कर्ता हैं। आचार्यशंकर के अद्वैत दर्शन में चार मुख्य तत्त्व हैं – १.ब्रह्म (जगन्नाथ), २.जीव (बलभद्र), ३. माया (सुभद्रा) ४. सुदर्शन (जगत)। जीव और ब्रह्म एक है, यह वैदिक सिद्धांत हैं – जीवब्रह्मैवनापरः, जीवतस्तत्प्रजायते (बृह.उप-३.९.३२) अहं ब्रह्मास्मि (बृह.उप-१.४.१०) । जैसे सभी नदी समुद्र में अपने अस्तित्व को खो देते है, इस प्रकार माया द्वारा जीव अलग प्रतीत होते हुए भी ब्रह्म ही हैं। वस्तु में अवस्तु का केवल मात्र आरोप हैं।

प्रॉपर्टी के लिए रची खौफनाक साजिश, दंपति गिरफ्तार

0

प्रॉपर्टी के लिए रची खौफनाक साजिश, दंपति गिरफ्तार
दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट में 3 जून को हुई दिल्ली विश्वविद्यालय की Assistant Professor देबोस्मिता पॉल (39) की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल से फरार चल रहे किरायेदार दंपती राम प्रसाद दास और उसकी पत्नी बनश्री दास को गिरफ्तार कर लिया है। जांच के दौरान हुए खुलासों ने इस सनसनीखेज Murder Case के पीछे छिपी एक बड़ी साजिश को उजागर कर दिया है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी राम प्रसाद ने कबूल किया कि उसने करीब डेढ़ महीने पहले ही प्रोफेसर देबोस्मिता की हत्या की Planning शुरू कर दी थी। उसका मकसद पश्चिम बंगाल के बर्धवान स्थित प्रोफेसर की करोड़ों रुपये की Property पर कब्जा जमाना था।

जांच में सामने आया है कि राम प्रसाद पिछले तीन वर्षों से प्रोफेसर के बर्धवान स्थित लगभग 1200 गज के मकान में किराए पर रह रहा था। इस Property की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। जब प्रोफेसर देबोस्मिता ने उससे मकान खाली करने को कहा और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तभी आरोपी की नीयत बदल गई और उसने हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी।

आरोपी दंपती ने अपने 13 वर्षीय बेटे के साथ दो बार दिल्ली आकर प्रोफेसर के घर की रेकी की थी। इस दौरान उन्होंने घर की तस्वीरें भी खींचीं और Entry-Exit Points का अध्ययन किया। योजना को अंतिम रूप देने के बाद वे 1 जून को दिल्ली पहुंचे और 2 जून को दल्लूपुरा के एक Guest House में ठहरे।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने अपने कपड़े बदले और लिफ्ट के जरिए नीचे उतरकर एक Cab से आनंद विहार पहुंचे। वहां से उन्होंने ऑटो लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का रुख किया। स्टेशन पहुंचने पर उन्होंने दोबारा कपड़े बदले, General Ticket खरीदा और पूर्वा एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए।

47 साल बाद भी Jaya Bachchan के इस चुलबुले गाने पर बनती हैं खूब रील्स

0

47 साल बाद भी Jaya Bachchan के इस चुलबुले गाने पर बनती हैं खूब रील्स
47 साल पहले बॉलीवुड में एक ऐसा गाना बना जो आज की ऑडियंस के बीच भी काफी पॉपुलर है। इस गाने को इतनी बार रीक्रिएट किया गया कि इसके बोल बच्चे-बच्चे को पता होंगे।

जब चार दशक पहले इस गाने को बनाया गया, तब तक यह सिर्फ राजस्थानी लोगों के बीच ही पॉपुलर था। मगर बॉलीवुड में आने के बाद इसने पूरे देश को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
किशोर-आशा की आवाज में हुआ सदाबहार

इस गीत की खास बात यह भी थी कि इस लोकगीत को मॉडर्न तरीके से बनाया गया था। जया बच्चन (Jaya Bachchan) और संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) की चुलबुली केमिस्ट्री और किशोर कुमार (Kishore Kumar) व आशा भोसले (Asha Bhosle) की आवाज ने इस गाने को सदाबहार बना दिया।
राजस्थानी लोकगीत से है प्रेरित

यह गाना कोई और नहीं बल्कि 47 साल पहले बना ‘पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके’ (Pallo Latke Re Mhaaro Pallo Latke)है। यह एक राजस्थानी लोकगीत है जिस पर महिलाएं थिरका करती थीं। इस गाने को बॉलीवुड फिल्म में लाने का आइडिया आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा का था।

पंचम दा ने नए वर्जन में किया पेश
पंचम दा को संजीव कुमार और जया बच्चन की फिल्म नौकर (1979) के लिए एक गाना बनाना था। लोकगीत को नए वर्जन में क्रिएट करने के लिए मशहूर पंचम दा को ‘पल्लो लटके’ गाने का आइडिया आया। इस राजस्थानी लोकगीत को उन्होंने नए सिरे से तैयार किया। गाने की धुन को वेस्टर्न बीट्स और ढोलक के साथ फ्यूजन तरीके से बनाया गया और इसके बोल लिखे मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने।