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रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए ‘ट्री एटीएम’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘ट्री एटीएम’ लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

‘आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव’ के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को ‘आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव’ के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होता है। छेरा-पहरा की परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वाेच्च धर्म है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच यह पर्व एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्षगण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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ऋग्वेद से जुड़ी है श्री जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा
जगत- अर्थात शरीर, जो क्षयशील है, नाथ- शरीर में स्थित अक्षय आत्मा अर्थात जगत में दृश्यमान प्रत्येक जीव जगन्नाथ का स्वरूप है। जगत- अर्थात दृश्यमान प्रकृति, नाथ- प्रकृति को आलोक प्रदान करने वाले सूर्यनारायण। जगत- अर्थात सोमतत्व, नाथ-अर्थात अग्नि। वह अग्नि ही जगन्नाथजी का स्वरूप है। इसका स्पष्ट उल्लेख गीता में पंचदश अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने किया है।

वेद में कहा गया “अग्निसोमात्मकं जगत”। ‘अग्निर्ह च वृषभश्च धेनुः’ इस ऋग्वेद मंत्र के अनुसार श्रीजगन्नाथ अग्निस्वरूप वृषभ हैं और आल्हादिनी शक्ति राधा अथवा लक्ष्मी जगत रूपी धेनु स्वरूपा है। निरुक्त में विष्णु के लिए ‘नराशंस’- शब्द का प्रयोग हुआ हैं। नरान् शंसते इति विष्णुः। अग्निर्वा अर्थात जो मनुष्यों के द्वारा स्तुति योग्य हो, वह जगन्नाथ हैं। श्रीजगन्नाथ-परब्रह्म परमात्मा, श्रीवलभद्र-जीवात्मा, श्रीसुभद्रा-मायाशक्ति, श्रीसुदर्शन- क्रियाशक्ति के रूप में विद्यमान है।

श्रीजगन्नाथ-अग्नितत्त्व का प्रतीक हैं (पुरुषशक्ति), अन्य सभी शक्तियां- जलतत्व का प्रतीक हैं, जो उनका ही अंश है (स्त्रीशक्ति)। यथा-स्वरूपशक्ति (बलभद्र), मायाशक्ति (सुभद्रा), तटस्थशक्ति (सुदर्शन)। पुरुषोत्तम श्रीजगन्नाथ महाप्रभु ही सकलजगत का सृष्टि का कारण हैं – यह बताकर श्रीभाष्य के रचयिता विशिष्टाद्वैतवाद के वैष्णवसंप्रदाय के आचार्य रामानुजाचार्य ने श्रीजगन्नाथ जी को वैष्णवधर्म का केंद्रबिंदु के रूप मे स्वीकार किया। चतुर्द्धामूर्तियों के बारे में उनका मत हैं- जगन्नाथ- वासुदेव (परमात्मा), वलभद्र-संकर्षण (जीव), सुभद्रा – प्रद्युम्न (मन), सुदर्शन- अनिरुद्ध (अहंकार)।

आर्तिक को वासुदेव स्वरूप, अर्थार्थी को संकर्षण स्वरूप, जिज्ञासु को प्रद्युम्न, ज्ञानी को अनिरुद्ध का स्वरूप माना गया हैं। द्वैतवाद का ब्रह्म संप्रदाय के आचार्य आनंदतीर्थ ने पूर्णप्रज्ञभाष्य में वताया हैं कि श्री जगन्नाथ स्वयं साक्षात विष्णु और ब्रह्म स्वरूप हैं। महालक्ष्मी उनका शक्ति हैं। शुद्धाद्वैतवाद के आचार्य वल्लभाचर्य अणुभाष्य में श्री जगन्नाथ जी को आक्षरब्रह्म एवं श्रीकृष्ण के रूप में स्वीकार किया। माध्ववेदांत के समर्थक गौड़ीय वैष्णवधर्म के आचार्य श्रीचैतन्य महाप्रभु ने श्रीजगन्नाथ जी को राधाकृष्ण का सम्मिलित रूप माना है। ओडिआ भागवत के रचयिता अतिवडी जगन्नाथ दास ने जगन्नाथ जी को श्रीकृष्ण माना।

द्वैताद्वैतवाद के प्रवर्तक आचार्य निंबार्क ने वेदांतपारिजात भाष्य में श्री जगन्नाथ जी को सगुण साकार ब्रह्म के रूप में वर्णन किया। उनके मत में श्री जगन्नाथ जी उत्पत्ति, स्थिति, संहार, नियमन, ज्ञान, आवरण, बंध तथा मोक्ष के कर्ता हैं। आचार्यशंकर के अद्वैत दर्शन में चार मुख्य तत्त्व हैं – १.ब्रह्म (जगन्नाथ), २.जीव (बलभद्र), ३. माया (सुभद्रा) ४. सुदर्शन (जगत)। जीव और ब्रह्म एक है, यह वैदिक सिद्धांत हैं – जीवब्रह्मैवनापरः, जीवतस्तत्प्रजायते (बृह.उप-३.९.३२) अहं ब्रह्मास्मि (बृह.उप-१.४.१०) । जैसे सभी नदी समुद्र में अपने अस्तित्व को खो देते है, इस प्रकार माया द्वारा जीव अलग प्रतीत होते हुए भी ब्रह्म ही हैं। वस्तु में अवस्तु का केवल मात्र आरोप हैं।

प्रॉपर्टी के लिए रची खौफनाक साजिश, दंपति गिरफ्तार

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प्रॉपर्टी के लिए रची खौफनाक साजिश, दंपति गिरफ्तार
दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट में 3 जून को हुई दिल्ली विश्वविद्यालय की Assistant Professor देबोस्मिता पॉल (39) की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल से फरार चल रहे किरायेदार दंपती राम प्रसाद दास और उसकी पत्नी बनश्री दास को गिरफ्तार कर लिया है। जांच के दौरान हुए खुलासों ने इस सनसनीखेज Murder Case के पीछे छिपी एक बड़ी साजिश को उजागर कर दिया है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी राम प्रसाद ने कबूल किया कि उसने करीब डेढ़ महीने पहले ही प्रोफेसर देबोस्मिता की हत्या की Planning शुरू कर दी थी। उसका मकसद पश्चिम बंगाल के बर्धवान स्थित प्रोफेसर की करोड़ों रुपये की Property पर कब्जा जमाना था।

जांच में सामने आया है कि राम प्रसाद पिछले तीन वर्षों से प्रोफेसर के बर्धवान स्थित लगभग 1200 गज के मकान में किराए पर रह रहा था। इस Property की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। जब प्रोफेसर देबोस्मिता ने उससे मकान खाली करने को कहा और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तभी आरोपी की नीयत बदल गई और उसने हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी।

आरोपी दंपती ने अपने 13 वर्षीय बेटे के साथ दो बार दिल्ली आकर प्रोफेसर के घर की रेकी की थी। इस दौरान उन्होंने घर की तस्वीरें भी खींचीं और Entry-Exit Points का अध्ययन किया। योजना को अंतिम रूप देने के बाद वे 1 जून को दिल्ली पहुंचे और 2 जून को दल्लूपुरा के एक Guest House में ठहरे।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने अपने कपड़े बदले और लिफ्ट के जरिए नीचे उतरकर एक Cab से आनंद विहार पहुंचे। वहां से उन्होंने ऑटो लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का रुख किया। स्टेशन पहुंचने पर उन्होंने दोबारा कपड़े बदले, General Ticket खरीदा और पूर्वा एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए।

47 साल बाद भी Jaya Bachchan के इस चुलबुले गाने पर बनती हैं खूब रील्स

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47 साल बाद भी Jaya Bachchan के इस चुलबुले गाने पर बनती हैं खूब रील्स
47 साल पहले बॉलीवुड में एक ऐसा गाना बना जो आज की ऑडियंस के बीच भी काफी पॉपुलर है। इस गाने को इतनी बार रीक्रिएट किया गया कि इसके बोल बच्चे-बच्चे को पता होंगे।

जब चार दशक पहले इस गाने को बनाया गया, तब तक यह सिर्फ राजस्थानी लोगों के बीच ही पॉपुलर था। मगर बॉलीवुड में आने के बाद इसने पूरे देश को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
किशोर-आशा की आवाज में हुआ सदाबहार

इस गीत की खास बात यह भी थी कि इस लोकगीत को मॉडर्न तरीके से बनाया गया था। जया बच्चन (Jaya Bachchan) और संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) की चुलबुली केमिस्ट्री और किशोर कुमार (Kishore Kumar) व आशा भोसले (Asha Bhosle) की आवाज ने इस गाने को सदाबहार बना दिया।
राजस्थानी लोकगीत से है प्रेरित

यह गाना कोई और नहीं बल्कि 47 साल पहले बना ‘पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके’ (Pallo Latke Re Mhaaro Pallo Latke)है। यह एक राजस्थानी लोकगीत है जिस पर महिलाएं थिरका करती थीं। इस गाने को बॉलीवुड फिल्म में लाने का आइडिया आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा का था।

पंचम दा ने नए वर्जन में किया पेश
पंचम दा को संजीव कुमार और जया बच्चन की फिल्म नौकर (1979) के लिए एक गाना बनाना था। लोकगीत को नए वर्जन में क्रिएट करने के लिए मशहूर पंचम दा को ‘पल्लो लटके’ गाने का आइडिया आया। इस राजस्थानी लोकगीत को उन्होंने नए सिरे से तैयार किया। गाने की धुन को वेस्टर्न बीट्स और ढोलक के साथ फ्यूजन तरीके से बनाया गया और इसके बोल लिखे मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने।

अमेरिका ने लगातार पांचवे दिन ईरान पर दागीं मिसाइलें, एक जहाज तबाह

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अमेरिका ने लगातार पांचवे दिन ईरान पर दागीं मिसाइलें, एक जहाज तबाह
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के पांचवें दिन भी ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान अमेरिकी बलों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहे एक खाली ऑयल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया।

एक जहाज पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने जहाज के स्मोकस्टैक में हेलफायर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद एक जहाज डिसेबल हो गया और वह ईरान की ओर आगे नहीं बढ़ सका।

अमेरिकी सेना ने बताया कि बुधवार को एक अमेरिकी विमान ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक खाली तेल टैंकर पर गोलीबारी करके उसे निष्क्रिय कर दिया।

इसके अलावा, अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले जारी रखे। गौरतलब है कि इससे पहले भी अमेरिका ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक कर चुका है, जिस दौरान कई जहाजों को प्रभावित किया जा चुका है।

बंदर अब्बास, अहवाज और चाबहार में विस्फोट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित अमेरिकी हवाई हमलों के एक नए दौर के बाद, ईरान के कई हिस्सों में विस्फोटों की खबरें आईं, जिनमें दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और शहर अहवाज और चाबहार शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ किया आत्मीय व प्रेरक संवाद

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ किया आत्मीय व प्रेरक संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवा, नारी, किसान और गरीब वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए सतत प्रयासरत है। इन वर्गों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही है और उससे समाज सशक्त भी हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन पशुपालन, डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में पशुधन बढ़े और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो, यह जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज इंदौर में लक्ष्मीबाई नगर कृषि उपज मण्डी में बलराम कृषि महोत्सव में आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषिगत कार्यों से जुड़े विषयों पर प्रेरक विषयवस्तु बनाने वाले युवा इन्फ्लुएंसर्स से आत्मीय व प्रेरक संवाद किया। उन्होंने युवा इन्फ्लुएंसर्स के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि फसल चक्र में बदलाव करते रहे ताकि मिट्टी उर्वरा बनी रहे। वहीं अल्पवर्षा की स्थिति में किसानों को नुकसान नहीं हो। इसके लिये किसान कम अवधि की फसलों की बुवाई करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश भर से आये सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को आव्हान किया कि वे राज्य शासन द्वारा चलायी जा रही योजनाओं पर केन्द्रीत रील्स बनायें, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना सतीश मालवीय, विधायक मधु वर्मा, मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, श्रवण चावड़ा, कपिल यार्दें सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

वृद्ध, दिव्यांग और निराश्रितों के घर तक पहुंचाया जाएगा मुफ्त राशन, योगी सरकार शुरू करेगी नई पहल

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वृद्ध, दिव्यांग और निराश्रितों के घर तक पहुंचाया जाएगा मुफ्त राशन, योगी सरकार शुरू करेगी नई पहल
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने कहा है कि अब राज्य के प्रत्येक वृद्ध, दिव्यांग, असहाय और निराश्रित व्यक्ति के घर तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का खाद्यान्न पहुंचाया जाएगा। अब उन्हें सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों तक नहीं जाना होगा। इसमें शिथिलता करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।

ऐसे लोगों को चिन्हित करने का कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त दो माह में 47 लाख लोगों को मुफ्त खाद्यान्न योजना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस दिशा में अभियान चल रहा है।

बुधवार को लोकभवन में पत्रकार वार्ता में मंत्री पांडेय ने कहा कि वह अब तक 16 जिलों में चौपाल लगाकर जनता की समस्या सुन चुके हैं। बिना भेदभाव, राजनीतिक कटुता के 16 करोड़ नागरिकों को खाद्यान्न योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सीधा निर्देश है कि एक भी पात्र वंचित नहीं रहना चाहिए, राजनीतिक कारणों या ग्रामीण स्तर पर प्रतिद्वंदिता चलते अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम लाभार्थी सूची से कट गया है तो ग्रामीण चौपालों में ही उसे जोड़ा जाएगा।

प्रत्येक पंचायत में बनाए जाएंगे अन्नपूर्णा भवन
इसी निगरानी वह खुद कर रहे हैं हैं। सीधे ग्रामीणों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को गांव-गांव जाने का निर्देश दिया गया है। वह खुद गांवों में प्रवास करेंगे और लोगों की बात सुनेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से किया राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से किया राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में समर्पित किया है। इस उद्देश्य से कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, राजस्व, ऊर्जा सहित 16 विभागों को एक साथ लाकर किसानों के समग्र विकास का अभियान प्रारंभ किया गया है और किसानों की आय बढ़ाने के लिये रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान है, जो अब पूरे प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक अनेक आयोजन होंगे और खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि देश के इन चार वर्गों का विकास सुनिश्चित हो जाता है तो भारत की उन्नति स्वतः सुनिश्चित हो जाएगी। किसान इन चारों वर्गों के केंद्र में है, इसलिए सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने उद्योग एवं रोजगार वर्ष मनाया था, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश धरातल पर उतर रहे हैं। अब उसी प्रकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा रहा है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक मधु वर्मा, श्रीमती मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, श्रवण चावड़ा, कपिल यार्दें सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रदेश की 250 से अधिक नदियाँ लाखों लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी के जल का समुचित उपयोग नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी परियोजनाओं को नई गति मिली। अनेक योजनाओं ने मालवा अंचल को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया तथा प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1956 से लेकर 2003 तक प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि हमारी सरकारों ने इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया है। आगामी वर्षों में सिंचित क्षेत्र को और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की समृद्धि का आधार पानी, बिजली और सड़क है। इन तीनों क्षेत्रों में सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को अब रात्रि के बजाय दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और खेती करना अधिक सुविधाजनक होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की गई। इसी प्रकार सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों को छोड़कर अन्य पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को न उचित मूल्य मिलता था और न ही समर्थन मूल्य पर व्यवस्थित खरीदी होती थी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसानों को हर छह माह में ऋण नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान यदि जून में ऋण लेते हैं तो अगले वर्ष जून में ही राशि जमा कर सकेंगे। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

नदी जोड़ों परियोजनाओं से मिलेगा 13 जिलों को लाभ

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के समय परिकल्पित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना मध्यप्रदेश के जल इतिहास को बदल देंगी। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच, मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई एवं पेयजल का लाभ मिलेगा। इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश और मालवा क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि “खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार” तक संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रदेश में तेजी से फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं। हाल ही में उज्जैन में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई प्रदेश के 32 जिलों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। इसी प्रकार इंदौर, आगर, उज्जैन सहित अनेक जिलों में कृषि आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।