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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार को मिली रफ्तार, रोज 11 लाख श्रमिकों को काम; महिलाओं की हिस्सेदारी 57%

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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र से बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में हर दिन करीब 11 लाख ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

 

ग्रामीण परिवारों को मिल रहा रोजगार का सहारा

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से बड़ी संख्या में श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है। इससे उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन करने की जरूरत कम हो रही है। ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के जरिए गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

रोजगार में महिलाओं की मजबूत भागीदारी

कुल रोजगार में महिलाओं की 57 प्रतिशत हिस्सेदारी इस पहल की खास उपलब्धि मानी जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में भी उनका योगदान मजबूत हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार के साथ-साथ आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाएं भी संचालित हैं। राज्य के श्रम विभाग की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए शिक्षा, आवास, कौशल विकास, पेंशन और अन्य सहायता योजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रोजगार के साथ विकास कार्यों पर जोर

ग्रामीण रोजगार से जुड़ी गतिविधियों का उद्देश्य सिर्फ मजदूरी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि गांवों में जल संरक्षण, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े स्थायी संसाधनों का निर्माण करना भी है। इससे रोजगार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है।

प्रदेश में ग्रामीण श्रमिकों को बड़ी संख्या में प्रतिदिन रोजगार मिलने और महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत होने को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

MP कैबिनेट का बड़ा फैसला, लाड़ली बहना योजना अगले 5 साल भी रहेगी जारी

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मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में योजना को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।

 

पांच साल तक जारी रहेगी योजना

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना को अगले पांच वर्षों तक निरंतर चलाया जाएगा। सरकार की ओर से योजना के लिए बड़ी राशि स्वीकृत किए जाने से इसके लाभार्थियों को आगे भी आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।

महिलाओं के सशक्तीकरण पर सरकार का फोकस

मध्य प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए कुल ₹1,32,828 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसमें लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी शामिल है।

सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है।

अन्य योजनाओं के लिए भी बड़ी राशि मंजूर

कैबिनेट ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए ₹16,326 करोड़ और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए ₹2,137 करोड़ मंजूर किए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ₹11,835 करोड़ तथा आईटी और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ₹492 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

सरकार के इस फैसले को प्रदेश में महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को दी जा रही प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है।

CJP प्रदर्शन पर लाठीचार्ज को लेकर पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, ‘असामाजिक तत्वों’ का दिया हवाला

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जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान अधिकतम संयम बरता गया और केवल न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास करीब 30 हजार प्रदर्शनकारी मौजूद थे और व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन बाद में भीड़ के एक हिस्से ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया।

हलफनामे में पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ असामाजिक तत्व और अपराधी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, भीड़ के बीच सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य ऐसे तत्वों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करना था।

‘कील वाली लाठी’ के आरोप से भी इनकार
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान ‘कील वाली लाठी’ या नुकीले डंडों के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया है। पुलिस ने कहा कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने संसद की ओर मार्च को भी अनुमति के बिना किया गया प्रयास बताया।

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में 2,873 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल को पुलिस ने अनुपातिक कदम बताया है।

यह मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट के सामने है जब शीर्ष अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संरक्षित है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

सावन में बेटियों के मायके आने की खास वजह, आरती से स्वागत करने की है परंपरा

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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ पारिवारिक रिश्तों और परंपराओं से भी जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शादी के बाद बेटी का सावन में मायके आना शुभ माना जाता है। खासकर नवविवाहित बेटियों के लिए पहले सावन में मायके आने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। मान्य

ता है कि इससे बेटी और मायके के बीच स्नेह बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

 

आरती उतारकर क्यों किया जाता है स्वागत?

मान्यता के अनुसार, जब बेटी सावन में मायके आती है तो उसका स्वागत आरती, रोली-अक्षत और मिठाई से किया जाता है। कई जगह बेटी को सावन से जुड़े पकवान खिलाने और श्रृंगार सामग्री या उपहार देने की भी परंपरा है। कुछ परिवार बेटी के हाथों से घर में तुलसी का पौधा लगवाना भी शुभ मानते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के साथ इसका एक भावनात्मक पक्ष भी है। शादी के बाद बेटी के मायके आने से परिवार के सदस्यों के बीच अपनापन और रिश्तों की गर्माहट बनी रहती है।

सावन में शादी करना क्यों माना जाता है वर्जित?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में सावन का महीना मुख्य रूप से भगवान शिव की उपासना और साधना के लिए समर्पित माना जाता है। इसी अवधि में चातुर्मास भी रहता है, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए कई परंपराओं में सावन के दौरान विवाह और अन्य बड़े मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।

मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और देवशयन के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है। हालांकि, विवाह की तिथियां और शुभ मुहूर्त क्षेत्र, पंचांग और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

बेटी के लिए सावन का खास महत्व

सावन में मायके आने की परंपरा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है। यह बेटी को अपने माता-पिता और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर भी देती है। हरियाली तीज जैसे पर्वों पर भी विवाहित महिलाओं के मायके जाने और परिवार के साथ त्योहार मनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

इस तरह सावन में बेटी का मायके आना जहां धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है, वहीं यह परिवार और बेटी के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने वाली सदियों पुरानी परंपरा भी है।

24 दिन के छात्र आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम, विवादित नियुक्ति परीक्षाएं रद्द

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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर करीब 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL के जरिए कराई गई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम को आंदोलन कर रहे छात्रों की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच

सरकार ने TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited के जरिए वर्ष 2014 से अब तक कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणाम और उनसे हुई नियुक्तियों की जांच का फैसला भी किया है। JSSC-CGL के अलावा अन्य परीक्षाएं भी इस जांच के दायरे में आएंगी।

क्यों शुरू हुआ था छात्रों का आंदोलन?

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, गड़बड़ियों की जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना थी। आंदोलन के दौरान छात्रों ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई।

JSSC-CGL रद्द होने से चयनित अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

जहां आंदोलन कर रहे छात्रों ने परीक्षा रद्द होने के फैसले का स्वागत किया है, वहीं JSSC-CGL में सफल होकर नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई सफल उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है और कहा है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो उसका खामियाजा सभी चयनित अभ्यर्थियों को क्यों भुगतना पड़े।

सरकार ने जांच और सुधार का भरोसा दिया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि अगर निर्धारित SOP का सही तरीके से पालन किया गया होता तो इस तरह की गड़बड़ियां सामने नहीं आतीं। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा और जांच का रास्ता अपनाया है। वहीं, आंदोलनकारी छात्र अभी भी पूरी पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की गारंटी की मांग कर रहे हैं।

इस फैसले के बाद झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब और किस नई व्यवस्था के तहत कराया जाता है और पहले से चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है।

नितिन नवीन की टीम में MP के नेताओं को बड़ा स्थान, लाल सिंह आर्य समेत कई चेहरे शामिल

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में मध्य प्रदेश से भी कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी ने संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्य, राजेंद्र पटेल, कविता पाटीदार, विष्णु दत्त शर्मा, बंशीलाल गुर्जर, आशीष और उषा अग्रवाल को नई टीम में जगह मिली है। इन नेताओं के शामिल होने से प्रदेश संगठन में भी उत्साह का माहौल है।

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों से जुड़े चेहरों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी नेतृत्व का फोकस संगठन को और मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने पर है।

मध्य प्रदेश से नेताओं को मिली जगह को प्रदेश भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की भागीदारी बढ़ने के साथ ही संगठनात्मक गतिविधियों में मध्य प्रदेश की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

‘बंटवारा 1947’ ने विदेशों में भी जमाई धाक, वीकेंड पर 37 करोड़ के पार पहुंचा वर्ल्डवाइड कलेक्शन

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सनी देओल और प्रीति जिंटा स्टारर फिल्म ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर अपने शुरुआती वीकेंड में 37 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने में कामयाब रही। फिल्म ने तीसरे दिन रविवार को भारत में 7.25 करोड़ रुपये की नेट कमाई की, जबकि विदेशों से करीब 2 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का तीन दिनों का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 37.11 करोड़ रुपये पहुंच गया।

विदेशों में भी फिल्म को मिला रिस्पॉन्स
‘बंटवारा 1947’ ने भारतीय बाजार के साथ-साथ विदेशी मार्केट में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। तीसरे दिन फिल्म ने विदेशों में करीब 2 करोड़ रुपये जोड़े, जिससे इसका कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन लगभग 5.50 करोड़ रुपये हो गया।

दूसरे दिन मिली थी जबरदस्त बढ़त
फिल्म ने रिलीज के पहले दिन भारत में 5.75 करोड़ रुपये की नेट कमाई की थी। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दूसरे दिन कलेक्शन में बड़ा उछाल आया और फिल्म ने 13.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। हालांकि तीसरे दिन कमाई में करीब 46 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

सनी देओल और प्रीति जिंटा की जोड़ी फिर चर्चा में
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म में शबाना आजमी और अली फजल भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं। कहानी भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि में इंसानियत और रिश्तों पर केंद्रित है।

तीन दिनों के प्रदर्शन के बाद अब फिल्म के सामने असली चुनौती वीकडेज में अपनी कमाई की रफ्तार बनाए रखने की है।

रक्षाबंधन पर रोडवेज कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, ड्राइवर-कंडक्टर को मिलेगी ₹1200 प्रोत्साहन राशि

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रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए रोडवेज ने यात्रियों की सुविधा के लिए खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। बहनों को अपने भाइयों तक सुरक्षित और आसानी से पहुंचाने के लिए बस सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, त्योहार के दौरान बेहतर सेवा देने वाले रोडवेज के चालकों और परिचालकों को प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया गया है।

रोडवेज की ओर से रक्षाबंधन के दौरान ड्यूटी करने वाले पात्र चालकों और परिचालकों को 1,200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य त्योहार के दौरान अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ के बीच कर्मचारियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

बहनों के लिए बस सेवा पर विशेष फोकस
रक्षाबंधन के मौके पर बसों में यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। इसे देखते हुए प्रमुख रूटों पर बसों की उपलब्धता और संचालन को बेहतर रखने की तैयारी की गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुसार अतिरिक्त बसों के संचालन और फेरे बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

भीड़ को देखते हुए किए जाएंगे इंतजाम
रोडवेज प्रशासन की ओर से बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की तैयारी है। यात्रियों को बसों की उपलब्धता, संचालन और अन्य जरूरी जानकारी समय पर मिल सके, इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं।

रक्षाबंधन के दौरान बहनों की यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ रोडवेज का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। त्योहार के चलते बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए कर्मचारियों की ड्यूटी और बस संचालन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

LPG e-KYC की डेडलाइन बढ़ी, ग्राहकों को मिली बड़ी राहत; घर बैठे मोबाइल से करें अपडेट

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एलपीजी ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। e-KYC पूरा करने की समयसीमा बढ़ाकर 23 अगस्त 2026 कर दी गई है। पहले इसकी अंतिम तारीख 16 अगस्त निर्धारित थी। तकनीकी दिक्कतों और सर्वर संबंधी परेशानियों के चलते बड़ी संख्या में ग्राहक समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे, जिसके बाद उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया है।

सभी घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक e-KYC जरूरी है। इसे घर बैठे मोबाइल के जरिए भी पूरा किया जा सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, उपभोक्ता अपनी संबंधित तेल कंपनी के मोबाइल ऐप और Aadhaar FaceRD ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन कर सकते हैं।

मोबाइल से घर बैठे ऐसे करें e-KYC
सबसे पहले अपनी LPG कंपनी का आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें।
इसके बाद Aadhaar FaceRD ऐप इंस्टॉल करें।
LPG कनेक्शन से जुड़े मोबाइल नंबर से ऐप में लॉगिन करें।
e-KYC या Aadhaar Authentication का विकल्प चुनें।
अपना आधार विवरण दर्ज कर जरूरी अनुमति दें।
Face Authentication के जरिए अपना चेहरा स्कैन करें।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद e-KYC का स्टेटस चेक कर लें।

इंडेन, भारत गैस और HP गैस के ग्राहक अपनी संबंधित आधिकारिक ऐप के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। जिन ग्राहकों को ऑनलाइन सत्यापन में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी LPG वितरक के पास जाकर भी e-KYC करा सकते हैं।

e-KYC नहीं कराने पर क्या होगा?
e-KYC लंबित रहने पर LPG से जुड़ी सरकारी सुविधाओं और सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपना सत्यापन पूरा नहीं किया है, उन्हें 23 अगस्त 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी कर लेने की सलाह दी गई है।

यह प्रक्रिया निःशुल्क है। किसी अनजान व्यक्ति या एजेंट के साथ OTP, आधार की जानकारी या बैंक संबंधी संवेदनशील विवरण साझा न करें।

आजादी के जश्न में निकली तिरंगा यात्रा, बड़ी संख्या में जुटे मानवाधिकार कार्यकर्ता

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कोलार रोड पर राष्ट्रीय संस्था मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन द्वारा उपनगर कोलार में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनाधिकारों के प्रति जागरूकता लाने, शहीदों को नमन और सैनिकों की वीरता का सम्मान करने के उद्देश्य से रविवार दोपहर ईनायतपुर से चुनाभट्टी तिराहा तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। यहाँ यात्रा 10 वर्षों से लगातार निकली जा रही है।

यात्रा में सैकड़ों युवा और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। युवा वाहनों पर तिरंगा लहराते हुए यात्रा में शामिल हुए। डीजे की धुन पर युवाओं ने नाच-गाकर स्वतंत्रता उत्सव मनाया। पूरे मार्ग में देशभक्ति का माहौल नजर आया।

आयोजक रवि पाराशर ने कहा देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की शौर्य और वीरता को हम नमन करते हैं।

संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी डॉ. श्रीकांत अवस्थी, राकेश चतुर्वेदी, अरुण द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य नागरिक शामिल रहे।