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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा से पहले विद्यार्थियों से रूबरू चर्चा में की अपील

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा से पहले विद्यार्थियों से रूबरू चर्चा में की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। देश की बागडोर आगे चलकर इन्हें ही संभालनी है। इसलिए सभी विद्यार्थी अपने कौशल, ज्ञान और प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर खुद को निखारें। परीक्षा की तैयारी पूरी मेहनत और लगन से करें, तनाव बिलकुल भी न लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा हमारे जीवन का एक पड़ाव मात्र है, अंतिम लक्ष्य नहीं। मेहनत करना आपकी आदत में होना चाहिए, लेकिन तनाव को खुद पर हावी न होने दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए परीक्षा के वक्त आत्मविश्वास, अनुशासन और संतुलित दिनचर्या ही सफलता की अंतिम कुंजी है। स्वयं पर सदैव विश्वास बनाए रखें, किसी बात से डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़िए और अपने सभी सपनों को साकार कीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को शासकीय सुभाष उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय में बोर्ड परीक्षाओं से पहले “परीक्षा पर संवाद – 2026” कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी के लिये मार्गदर्शन भी दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों से परीक्षा के समय खुद को तनाव से दूर रखते हुए निरंतर भरपूर मेहनत करने और जितना भी हो सके, अच्छे अंक लाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, नियमित अभ्यास और किसी भी हालात में खुद पर विश्वास बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने की बजाए उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही एक सशक्त व्यक्तित्व की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ अपना भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की समझाइश दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा के समय सभी विद्यार्थी पर्याप्त नींद लें। पढ़ाई का एक शेड्यूल निर्धारित करें। किसी विषय के अध्ययन के बाद उस पर चिंतन-मनन की आदत डालें। केवल अक्षर ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपने मित्रों और शिक्षकों के साथ पाठ्यक्रम के विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रा लक्ष्मी तिवारी के प्रश्न पर कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच परस्पर संवाद होते रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से पूछा कि परीक्षा से कौन-कौन डरते हैं या किसको डर नहीं लगता है? इस पर छात्र आदित्य ने कहा कि रेगुलर तैयारी करेंगे तो परीक्षा से बिल्कुल भी डर नहीं लगेगा। सिलेबस को डिवाइड कर रिवीजन करना चाहिए। छात्रा सरस्वती ने कहा कि हमें परीक्षा देते समय खुद पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि परीक्षा एक उत्सव की तरह है। छात्रा तान्या दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि वे हमेशा आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों से पूछा कि परीक्षा के समय में पेपर में आए प्रश्नों का उत्तर देने में चयन कैसे करते हैं? इस पर छात्र हिमांशु ने कहा कि वह सबसे पहले अच्छी तरह से आने वाले प्रश्नों को हल करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर विद्यार्थियों में भारी उमंग और उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीधे संवाद का अवसर पाकर विद्यार्थियों ने बेहिचक सवाल किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी एक गुरू, एक शिक्षक, एक अभिभावक और एक मनोविज्ञान विशेषज्ञ की भांति पहले विद्यार्थियों के मन का भाव जाना, उनसे खुलकर बात की, फिर पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए। विद्यार्थियों ने अपनी परीक्षा की तैयारियों और इस दौरान आई कठिनाईयां भी शेयर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ इस आत्मीय संवाद से सभी विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले मानसिक संबल और हर परिस्थिति में पॉजीटिव रहने की नई ऊर्जा मिली।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि परीक्षा हर वर्ष एक चुनौती की तरह होती है। विद्यार्थियों को समुचित समय नियोजन करते हुए अपनी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए और तनाव को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतत रूप से विद्यार्थियों के साथ परस्पर संवाद करते हैं एवं उनकी कठिनाईयों को समझकर निराकरण करने का हरसंभव प्रयास करते हैं। वे लीडर विथ लेटेस्ट नॉलेज हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरंभ में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विद्यार्थियों से संवाद की शुरूआत की। कार्यक्रम में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण मती शिल्पा गुप्ता सहित सुभाष स्कूल के प्राचार्य, सभी शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

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भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना
हा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है और इसे प्रभु राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे।

उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।

बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, यह बस्तर की पहचान का उत्सव- मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के प्रति गृह मंत्री अमित शाह के स्नेह और लगाव के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी शाह की मौजूदगी ने बस्तरवासियों का हौसला बढ़ाया था और आज फिर उनकी उपस्थिति ने कलाकारों और यहां के लोगों में नई ऊर्जा भर रही है।

समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम का आयोजन
साय ने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, प्रतिभागियों को बधाईयां। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया और इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया है और बस्तर की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि चित्रकला, वाद्ययंत्र, नाटक की विद्या सहित 12 विद्याओं का प्रदर्शन कलाकारों के द्वारा किया गया। बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया के समक्ष प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया गया।

बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुकी है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, किन्तु अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है।

बस्तर तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी, लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करेंगे।

आत्म समर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। नियद नेल्ला नार – (आपका अच्छा गांव) योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव में पहुंचाई हैं। आत्मसमर्पण नीति को और अधिक मानवीय और संवदेनशील बनाया है, जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका सम्मान के साथ पुनर्वास कराया जा रहा है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में भी बस्तर के विकास की चर्चा की। साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया जाना हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म, होम-स्टे, ट्रेकिंग जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सतत पर्यत्नशील है, जिससे बस्तर ही नहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता की जानकारी पर्यटकों को मिल सके और पर्यटन छत्तीसगढ़ की ओर आर्कर्षित हो सके।

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर पांडुम के भव्य आयोजन से बस्तर की समृद्ध और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति की सराहना करते हुए क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और स्थायी शांति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। शर्मा ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने छेरछेरा पंडुम, तिहार और विजा पंडुम जैसे पारंपरिक उत्सवों को जनजातीय जीवन, प्रकृति और कृषि से जुड़ी अमूल्य परंपराएं बताया। नक्सलवाद पर दृढ़ प्रहार की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर के दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय ध्वज की उपस्थिति पहुँची है, जो विकास और विश्वास की नई शुरुआत है। शर्मा ने बस्तर पांडुम को समाज-नेतृत्वत आयोजन बताते हुए कहा कि इसके असली सूत्रधार मांझी-चालकी, गयाता और पुजारी जैसे पारंपरिक समाज प्रमुख हैं, जिनके सहयोग से बस्तर पंडुम का आयोजन सफल हुआ। उन्होंने इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर पंडुम 2026 के उद्देश्य और 12 विद्याओं पर भाग लेने वाले कलाकारो की विस्तृत जानकारी दी, और कहा कि यह आयोजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा जिससे हमारी संस्कृति और सभ्यता की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी।

इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, पद्म अजय मंडावी, मती बुधरी ताती, हेमचंद मांझी, पंडीराम मांझी, सांसद भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सु लता उसेंडी सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

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बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है। मतदाता सूची से जुड़ा यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने आज इस मामले में अहम दिशा-निर्देश दिए। चीफ जस्टिस ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने का भी निर्देश दिया। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) की डेडलाइन एक सप्ताह और बढ़ाई जा रही है।

डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ाई गई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निर्वाचन आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल एसआईआर प्रक्रिया के बाद फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने के लिए और समय दिया जा रहा है। एसआईआर की डेडलाइन 14 फरवरी से एक हफ्ते आगे बढ़ाई जा रही है।

कोर्ट ने इस आधार पर बढ़ाई समयसीमा
माइक्रो ऑब्जर्वर या राज्य सरकार के अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी केवल ईआरओ की सहायता करना होगी, क्योंकि अंतिम निर्णय ईआरओ का ही होगा। चूंकि सरकारी अधिकारियों का एक नया समूह शामिल किया गया है, इसलिए प्रभावित व्यक्तियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में अधिक समय लगने की संभावना है। इसलिए ईआरओ को जांच पूरी करने और निर्णय लेने के लिए 14 फरवरी के बाद एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए।

सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को आसान बनाने और चिंताओं के समाधान के लिए कोर्ट अंतरिम निर्देश जारी कर रही है। राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि सभी 8,555 ग्रुप बी अधिकारी, जिनकी सूची आज सौंपी गई है, शाम 5 बजे तक जिला चुनाव अधिकारियों (डीआरओ) को रिपोर्ट करें। चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास मौजूदा ईआरओ और एईआरओ को बदलने और योग्य पाए जाने पर अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा।

तीन जजों की पीठ ने बंगाल सरकार को दिए अहम आदेश
तारीख बढ़ाने का आदेश पारित करने से पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में लगे सभी अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को रिपोर्ट करेंगे। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। उन्होंने कहा कि सब एक साथ बोल रहे हैं और एक-दूसरे की बात काट रहे हैं, जिससे सुनवाई करना मुश्किल हो रहा है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजरिया भी शामिल हैं।

बॉर्डर 2 की सुनामी के बीच सनी देओल की लाहौर की रिलीज डेट कन्फर्म

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बॉर्डर 2 की सुनामी के बीच सनी देओल की लाहौर की रिलीज डेट कन्फर्म
आमिर खान प्रोडक्शंस ने अपनी अपकमिंग पीरियड ड्रामा लाहौर 1947 की थिएट्रिकल रिलीज़ डेट का ऐलान कर दिया है. ये फिल्म इंडिपेंडेंस डे वीक के दौरान 13 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. ये फिल्म पहली बार सनी देओल, निर्देशक राजकुमार संतोषी और निर्माता आमिर खान को एक साथ ला रही है.

धर्मेंद्र की फेवरेट स्क्रिप्ट
ऐसे में इस बारे में बात करते हुए आमिर खान ने कहा है , “ये धरमजी की सबसे पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी और मुझे बेहद खुशी होती अगर वो ये फिल्म देख पाते.”

लाहौर 1947 में सनी देओल, शबाना आज़मी, प्रीति ज़िंटा और करण देओल अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म का म्यूजिक एआर रहमान ने दिया है और गाने जावेद अख्तर ने लिखे हैं. हालिया ब्लॉकबस्टर सफलताओं के बाद ये सनी देओल की अगली फिल्म है. फिल्म में प्रीति जिंटा और सनी देओल की केमिस्ट्री देखने को मिलेगी.

बता दें कि सनी देओल इन दिनों फिल्म बॉर्डर 2 में नजर आ रहे हैं. सनी देओल की इस फिल्म को बहुत शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म को अनुराग सिंह ने डायरेक्ट किया है. वहीं फिल्म में वरुण धवन, अहान शेट्टी, दिलजीत दोसांझ जैसे स्टार्स हैं. फिल्म ने 300 करोड़ क्लब में एंट्री कर ली है.

बॉर्डर 2 से पहले सनी देओल को जाट, गदर 2 जैसी फिल्मों में देखा गया था. गदर 2 ने भी धमाका कर दिया था. फिल्म ने रिकॉर्ड ब्रेकिंग कमाई की थी. गदर 2 के बाद सनी देओल के करियर ने छलांग लगाई. सनी के हाथ में कई शानदार प्रोजेक्ट्स हैं. लाहौर 1947 के अलावा वो फिल्म गबरू, इक्का, रामायण: पार्ट 1 और पार्ट 2 में दिखेंगे. रामायण में वो हनुमान के किरादर में नजर आएंगे. रामायण का पहला पार्ट पोस्ट प्रोडक्शन में हैं. फिल्म का फर्स्ट टीजर भी रिलीज हो गया हैं. हालांकि, अभी एक्टर्स के लुक रिवील नहीं हुए हैं.

मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरने से हादसा

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मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरने से हादसा
मध्य प्रदेश के मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरने से सोमवार (9 फरवरी) को बड़ा हादसा हो गया. घटना में प्रसाद ग्रहण कर रहीं तीन बच्चियों की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि प्रसाद वितरण कर रहे पति-पत्नी सहित पांच लोग घायल हो गए.

ग्रामीणों ने हादसे की सूचना पुलिस प्रशासन को दी. ग्रामीणों ने मलबे से मृतक व घायलों को बाहर निकाला, सभी को कैलारस अस्पताल पहुंचाया. दरअसल, ये घटना कैलारस थाना क्षेत्रान्तर्गत एहरोली गांव के चामड़ माता मंदिर की बताई जा रही है, जहां सोमवार को अष्टमी के दिन मुंगावली निवासी सतीश गौड़ अपनी पत्नी व बच्ची के साथ गृहग्राम एहरोली के मंदिर पूजा करने गए थे. मंदिर में प्रसाद वितरण के दौरान निर्माणाधीन छत गिर गई.

5 बच्चियों का इलाज जारी
मृतक तीन बच्चियों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है. कैलारस चिकित्सालय में सामान्य घायल दो बच्चियों इलाज किया जा रहा है. वहीं गंभीर घायल सतीश और उनकी पत्नी सहित 5 बच्चियों को इलाज के लिए मुरैना लाया गया है.

गंभीर घायल को ग्वालियर किया रैफर
वहीं एक गंभीर रूप से घायल बच्ची को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया है. घटना को लेकर प्रशासन ने कहा है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. वहीं हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक पंकज उपाध्याय पहुंचे मौके पर और चिकित्सकों से बेहतर इलाज का अनुरोध किया.

महाशिवरात्रि की रात करें ये अचूक उपाय, करियर में मिलेगी उड़ान और कारोबार में होगा चार गुना मुनाफा

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महाशिवरात्रि की रात करें ये अचूक उपाय, करियर में मिलेगी उड़ान और कारोबार में होगा चार गुना मुनाफा
महाशिवरात्रि का पर्व बहुत शुभ माना जाता है। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र में इस रात को ‘महा-निशिता काल’ कहा गया है, जिसमें किए गए छोटे से उपाय भी जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा को दूर करने की शक्ति रखते हैं।

करियर में सफलता के लिए
अगर आप नौकरी में प्रमोशन चाहते हैं, तो महाशिवरात्रि की रात किसी पुराने शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर शहद चढ़ाएं। अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। शहद चढ़ाने से वाणी में मिठास आती है और कार्यक्षेत्र में सीनियर्स का सहयोग मिलता है।

कारोबार में फायदा
कारोबार में घाटा हो रहा हो रहा है, तो महाशिवरात्रि के दूसरे पहर की पूजा में शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गन्ने का रस लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इससे रुका हुआ धन वापस मिलता है और ऊंचाइयों के नए रास्ते खुलते हैं।

ग्रह दोष के लिए
महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि शिव मंदिर में जाकर या बेल के पेड़ के नीचे 11 घी के दीपक जलाएं। ऐसा करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और अटके हुए काम बनने लगते हैं। अगर आप कर्ज से घिरे हुए हैं, तो यह उपाय आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है।

शनि दोष से मुक्ति के लिए
जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव है, उन्हें महाशिवरात्रि की रात जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही शमी के पत्र चढ़ाने चाहिए। इससे शनि कृपा मिलती है और जीवन की मुश्किलों से छुटकारा मिलता है।

सुख-समृद्धि के लिए
सभी कष्टों से छुटकारा पाने के लिए 21 या 108 बिल्व पत्र लें और उन पर सफेद चंदन से ‘राम’ लिखें। इन्हें माता पार्वती और भगवान शिव को एक-एक कर अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान शिव बहुत खुश होते हैं और भक्त की झोली खुशियों से भर देते हैं।

पाकिस्तान ने लिया यू-टर्न, 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के साथ खेलने को राजी

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पाकिस्तान ने लिया यू-टर्न, 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के साथ खेलने को राजी
पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के साथ खेलने को राजी हो गया है. तय शेड्यूल अनुसार यह मैच 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाना है. पाकिस्तान ने लाहौर में हुई मीटिंग के बाद यह फैसला लिया है. इस बैठक में पाकिस्तान और बांग्लादेश ने आईसीसी के सामने कई डिमांड रखी थीं, जिनमें से कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया गया है.

बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर कर दिया गया था. लाहौर में हुई बैठक में मांग रखी गई कि वर्ल्ड कप से बाहर होने पर भी बांग्लादेश को मुआवजा दिया जाए. इस पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद राजी हो गया है. मुआवजे के रूप में बांग्लादेश को अंडर -19 वर्ल्ड कप और महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप की मेजबानी दी जा सकती है.

दूसरी ओर पाकिस्तान ने आईसीसी राजस्व में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की थी. रिपोर्ट्स अनुसार अभी आईसीसी राजस्व में हिस्सेदारी 5.75 प्रतिशत है, जो लगभग 34-35 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर बताया जाता है. आईसीसी ने पाकिस्तान की इस मांग पर भी विचार करने की बात कही है.

नहीं होगी भारत-पाकिस्तान सीरीज
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2012 के बाद कभी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली गई है. पाकिस्तान ने द्विपक्षीय सीरीज को दोबारा शुरू करने की मांग की थी, लेकिन आईसीसी ने इस डिमांड को ठुकरा दिया है. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का कहना है कि किन्हीं 2 देशों के बीच सीरीज करवाना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान का मैच हाइब्रिड मॉडल के तहत न्यूट्रल वेन्यू यानी श्रीलंका में खेल जाएगा. दोनों देशों के बोर्डस के बीच चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के समय हाइब्रिड मॉडल पर सहमति बनी थी. उसके बाद भारत-पाक मैच न्यूट्रल वेन्यू पर खेले जाते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा असम CM का शूटिंग वीडियो विवाद

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा असम CM का शूटिंग वीडियो विवाद
सुप्रीम कोर्ट में उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर एक जनहित याचिका दायर हुई है. उन पर नफरत भड़काने वाले गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के आरोप हैं. याचिकाकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और राज्यपालों के मुस्लिम-विरोधी बयानों का जिक्र किया है. इन्हें उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों की तरफ से संवैधानिक जिम्मेदारी के उल्लंघन का उदाहरण बताया है.

12 लोगों ने असम CM के खिलाफ दायर की याचिका
इस जनहित याचिका को पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और जॉन दयाल समेत 12 लोग शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं ने अदालत में इस गंभीर मुद्दे पर दखल देने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सरमा, वरिष्ठ मंत्री और राज्यपाल लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं.

ओवैसी ने हैदराबाद में FIR दर्ज कराई
हैदराबाद के सांसद और AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘दुर्भाग्य से नरसंहार वाले नफरती भाषण फैलाना आम बात बन गई है.’ ओवैसी ने मांग की है कि कानून के तहत असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने हैदराबाद पुलिस कमिश्नर से गुजारिश की है कि नफरती भाषण फैलाने वालों पर लगाम लगाई जाए.

बवाल के बाद बीजेपी ने वीडियो डिलीट किया
कांग्रेस ने 8 फरवरी 2026 को दावा किया कि असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो अल्पसंख्यकों की टार्गेटेड पॉइंट-ब्लैंक हत्या को बढ़ावा देने जैसा है. कांग्रेस का दावा है कि वीडियो डिलीट कर दिया गया है.

पहले भी मुसलमानों के खिलाफ दिए नफरती भाषण
असम के CM सरमा अक्सर मुसलमानों के खिलाफ बयान देते रहते हैं. उन्होंने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मियां मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि हिमंत बिस्व सरमा और बीजेपी सीधे तौर पर मियां समुदाय के खिलाफ है. उन्होंने लोगों से मियां समुदाय को परेशान करने की अपील की. सरमा का कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे.

आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु

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आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु
राज्यपाल डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

अब नया बस्तर – डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।

जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।

युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।

बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

एसबीआई ने रचा इतिहास, मुनाफा ₹21,000 करोड़ के पार

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एसबीआई ने रचा इतिहास, मुनाफा ₹21,000 करोड़ के पार
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक ने बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए अब तक का सबसे अधिक त्रैमासिक स्टैंडअलोन मुनाफा दर्ज किया है। ऊंचे प्रोविजनिंग बफर और ब्याज आय में वृद्धि के दम पर बैंक की बैलेंस शीट पहले से और मजबूत हुई है।

रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा और ब्याज आय में वृद्धि
एसबीआई ने दिसंबर तिमाही में ₹21,028 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जो बैंक के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है। वहीं, समेकित आधार पर बैंक का मुनाफा 13.06 प्रतिशत बढ़कर ₹21,317 करोड़ हो गया है।

बैंक की कमाई का मुख्य जरिया, यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई), सालाना आधार पर 9.04 प्रतिशत बढ़कर ₹45,190 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹41,446 करोड़ थी। यह वृद्धि 15.14 प्रतिशत की मजबूत लोन ग्रोथ के कारण संभव हो सकी है, हालांकि घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) में 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई और यह 3.12 प्रतिशत पर आ गया।

एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन प्रोविजनिंग बढ़ी
बैंक की एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर अच्छी खबर है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 31 दिसंबर, 2025 तक घटकर 1.57 प्रतिशत हो गया है, जो सितंबर तिमाही में 1.73 प्रतिशत था। हालांकि, बैंक ने सतर्कता बरतते हुए प्रोविजनिंग में भारी बढ़ोतरी की है। इस तिमाही में कुल प्रोविजन ₹4,507 करोड़ रहे, जो पिछले साल की इसी तिमाही में मात्र ₹911 करोड़ थे। वहीं, नए स्लिपेज (नए फंसे कर्ज) का आंकड़ा बढ़कर ₹4,458 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹3,823 करोड़ था।

अन्य आय और व्यय का गणित
बैंक की नॉन-इंटरेस्ट इनकम में 15.65 प्रतिशत की शानदार उछाल दर्ज की गई, जो बढ़कर ₹8,404 करोड़ हो गई। एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस मुनाफे में एसबीआई म्यूचुअल फंड से मिले ₹2,200 करोड़ के विशेष लाभांश का बड़ा योगदान है। इसके अलावा, फीस आय और राइट-ऑफ खातों से रिकवरी ने भी मुनाफे को सहारा दिया। हालांकि, बैंक का कुल खर्च भी बढ़ा है। यह आंकड़ा पिछले साल के ₹1,04,917 करोड़ से बढ़कर ₹1,08,052 करोड़ हो गया है।