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मलेशिया के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी

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मलेशिया के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए। मलेशिया रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि भारत मलेशिया के साथ रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने तथा आर्थिक और नवोन्मेष के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ”भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों में हाल के वर्षों में निरंतर प्रगति हुई है।” उन्होंने कहा, ”मैं प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ अपनी चर्चाओं और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर उत्साहित हूं।” उन्होंने कहा, ”हमारा लक्ष्य अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को गहरा करना, अपनी आर्थिक और नवाचार साझेदारी को बढ़ाना तथा नए क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करना है।”

क्यों खास है यह दौरा?
पीएम मोदी के इस दौरे का मकसद व्यापार, निवेश, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया की तीसरी यात्रा है। अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है।

पीएम मोदी इस दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया सीईओ मंच भी आयोजित होगा।

मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त ने क्या बताया?
मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त बी.एन. रेड्डी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए इस रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत के ‘महासागर’ विजन और व्यापक इंडो-पैसिफिक विजन के तहत दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में 2024 में शुरू की गई पहलों को लागू करने और सहयोग के नए आयाम जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत और मलेशिया के इतिहास में पहली बार दोनों देशों ने ‘सुरक्षा संवाद’ शुरू किया है। यह संवाद जो रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

वहीं मलेशिया डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी भारत के साथ जुड़ने के लिए बेहद इच्छा रखता है है। रेड्डी ने बताया कि डिजिटल टेक्नोलॉजी पर हुए MoUके बाद ‘मलेशिया-भारत डिजिटल काउंसिल’ की स्थापना की गई है, जो इस क्षेत्र में क्रांति लाएगी।

फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा, झूला टूटने से आधा दर्जन लोग घायल

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फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा, झूला टूटने से आधा दर्जन लोग घायल
फरीदाबाद में चल रहे सूरजकुंड मेले में सुनामी झूला टूटने से कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है. घटना के बीच बचाव के लिए पहुँचे इंस्पेक्टर समेत आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं. इसमें घायल इंस्पेक्टर को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई है. पलवल में तैनात इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की बचाव के दौरान मौत हो गई है. डीसी आयुष सिंह ने कहा कि इस हादसे में कुल 13 लोग घायल हुए हैं जिनमें से एक की मौत हुई है. यह झूला शाम 6.15 के आस पास गिरा था.

मौके पर पहुंचे जिला उपायुक्त एमडी टूरिज्म और पुलिस के आला अधिकारी पहुंच गए हैं. हादसे के बाद इलाके की बेरिकैडिंग की गई है. बता दें कि इससे पहले फ़ूड कोर्ट में हवा से गेट के गिरने से भी हादसा हुआ था. जिसमें दो लोग घायल हुए थे.

शनिवार को हुए दो हादसे
सूरजकुंड मेले में शनिवार ( 7 फरवरी) को दो हादसों की खबर सामने आई है. इस कई लोग घायल हुए हैं. पहले हादसे में गेट के गिरने से हादसा हुआ, जबकि दूसरे हादसे में सुनामी झूला गिरने की खबर आ रही है. इन दो हादसों की वजह से मेला कमेटी और आयोजकों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. पहले हादसे में एक बच्चे को मामूली चोटें आई हैं. वहीं एक युवक को अस्पताल पहुंचाया गया. जिसके बाद अब उसकी छुट्टी कर दी गई है.

इस बीच मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे. झूले के गिरने से परिसर में अफरा-तफरी मच गई. चारों तरफ लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए नजर आए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे.

प्रशासन द्वारा किए जा रहे बचाव के प्रयास
हादसे के बाद प्रशासन की तरफ से कई टीमें बचाव अभियान में जुट गई हैं. झूले के नीचे दबे लोगों को तुरंत बचाने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही पुलिस द्वारा लोगों को मौके से दूर हटने के निर्देश दिए गए हैं.

पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि आयोजकों की भूमिका की जांच-पड़ताल की जा रही है. पुलिस द्वारा इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

ICC हुआ सख्त, तो पाकिस्तान की निकल गई सारी हेकड़ी

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ICC हुआ सख्त, तो पाकिस्तान की निकल गई सारी हेकड़ी
2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मैच होगा या नहीं, इसपर सवालिया निशान लगे हैं. हालांकि पाकिस्तान सरकार कह चुकी है कि उसकी राष्ट्रीय टीम 15 फरवरी को टीम इंडिया के साथ मैच नहीं खेलेगी. पाकिस्तान इसे असाधारण परिस्थिति से जुड़ा मामला बताया चुका है. इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है क्योंकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से बातचीत की मांग की है.

पाकिस्तान ने आइसीसी को पत्र लिखकर इसे असाधारण परिस्थितियों से जुड़ा मामला बताया और अपनी सरकार के ट्वीट को भी इसी से जोड़ा. मगर आईसीसी ने इसके जवाब में आईसीसी ने कहा है कि भारत के साथ मैच ना खेलने की स्थिति में पाकिस्तान को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही कानूनी कार्यवाई भी की जा सकती है. साथ ही आईसीसी ने इस विषय पर भी स्पष्टता मांगी है कि आखिर PCB किन असाधारण परिस्थितियों का हवाला दे रहा है.

क्रिकबज की एक रिपोर्ट अनुसार सूत्रों ने बताया कि आईसीसी ने पाकिस्तान के बॉयकॉट मामले में पूरी तरह निष्पक्षता बनाए रखने और नियमों का पालन करने की बात दोहराई. आईसीसी ने यह भी साफ किया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले टूर्नामेंट की अखंडता और नियमों को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी. आईसीसी ने यह भी समझाने का प्रयास किया कि असाधारण परिस्थितियों का दावा किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और ऐसा दावा करने के लिए सबूत आवश्यक होते हैं. वहीं किसी विशेष मैच से हटने के दुष्परिणाम भी सामने रखे.

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का कहना है कि किसी भी हालत में नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और वह मुद्दे को सुलझाने हेतु बातचीत के लिए तैयार है. इसके जवाब में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी बातचीत के लिए तैयार हो गया है. फिलहाल आईसीसी और पीसीबी के बीच समस्या का समाधान निकालने के लिए बातचीत जारी है.

सोम डिस्टलरी लायसेंस निलंबन आदेश पर उठे सवाल,कांग्रेस ने आदेश का कमजोर करने वाला बताया

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सोम डिस्टलरी लायसेंस निलंबन आदेश पर उठे सवाल,कांग्रेस ने आदेश का कमजोर करने वाला बताया
भोपाल। मध्य प्रदेश की शराब कंपनी सोम डिस्टलरी के लायसेंस निलंबन मामले में जिम्मेदार अफसरों की मंशा व आदेश अब सवालों के दायरे में है। कांग्रेस सांसद व अधिवक्ता विवेक तन्खा ने निलंबन आदेश में महाधिवक्ता की राय का जिक्र करने पर इसे केस को कमजोर करने वाला बताया है। वहीं कांग्रेस ने अदालत के आदेश पर दो साल बाद अमल पर सवाल खड़े करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

इंदौर जिले की देपालपुर अदालत के फैसले के दो साल बाद,यानी तीन दिन पहले सोम डिस्टलरी रायसेन की दो इकाईयों का लाइसेंस निलंबित हुआ। इस मामले में नया विवाद निलंबन आदेश की भाषा पर खड़ा हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल के आदेश पर सवाल खड़े किए। वरिष्ठ अधिवक्ता व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने आदेश में महाधिवक्ता व उनकी राय का जिक्र किए जाने पर सख्त ऐतराज जताया। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह केस को कमजोर करने वाली व गलत परंपरा है।

अब कैसे पैरवी करेंगे महाधिवक्ता?
कांग्रेस सांसद ने लिखा—महाधिवक्ता संवैधानिक पद है। वही न्यायालय में सरकार की ओर से पैरवी करते हैं। ऐसे में लाइसेंस निलंबन आदेश में उनकी राय का उल्लेख होने से वह कैसे इस केस की पैरवी कर पाएंगे। तन्खा ने लिखा कि आबकारी विभाग की यह गलत परंपरा आगे केस की पैरवी को प्रभावित कर सकती है।

जांच की मांग, फाइल दबाए रखने का आरोप
इधर,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के.मिश्रा ने सवाल उठाया कि अदालत के आदेश के बावजूद फाइल दो साल तक क्यों दबाई गई? उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि आदेश में महाधिवक्ता की राय का जिक्र कर कंपनी के बचाव के लिए कानूनी रास्ते छोड़ दिए गए।

आदेश में कार्रवाई का बताया कानून सम्मत
गत 4 फरवरी को जारी निलंबन आदेश को आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने कानून सम्मत बताया। इसमें कहा गया कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 31 के तहत लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई वैध है। उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। आरोपियों की दोषसिद्धि पर नहीं। इसी आधार पर यह कदम उठाया गया।

कोर्ट का दो साल पुराना आदेश बना आधार
दरअसल,आबकारी विभाग ने साल 2021 में सोम डिस्टलरी के कर्ताधर्ताओं को फर्जी परमिट पर शराब का अवैध परिवहन करते पकड़ा था। इस मामले में अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर ,जिला इंदौर ने शराब कंपनी से जुड़े संचालकों, प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। इस पर आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से स्थगन आदेश लिया। इसी का ​खुलासा आबकारी आयुक्त ने अपने हाल के आदेश में किया है।

सैकड़ों की तादाद में बनाए थे फर्जी परमिट
प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आए कि शराब कंपनी द्वारा शराब के अवैध परिवहन के लिए बड़ी संख्या में फर्जी परिवहन परमिट तैयार किए गए। इनके जरिए रायसेन से लेकर दमन,दीव तक शराब का अवैध परिवहन हुआ। परमिट जारी करने में आबकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई। इसके चलते आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितंबर 2025 को बर्खास्त किया गया। अन्य के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई जारी है, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

स्थानीय जरूरतों और जन आकांक्षा के अनुरूप स्वीकृत होंगे विकास कार्य: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्थानीय जरूरतों और जन आकांक्षा के अनुरूप स्वीकृत होंगे विकास कार्य: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की प्रथम बैठक जिला मुख्यालय दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख विकास कार्यों, प्राधिकरण मद से निर्माणाधीन कार्यों के अनुमोदन, प्रावधानित बजट तथा नवीन स्वीकृत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान हेतु संचालित योजनाओं की प्रगति का आकलन करना तथा भावी विकास रणनीतियों का निर्धारण करना था, ताकि विकास का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।

मुख्यमंत्री साय ने प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का समय पर एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर सतत निगरानी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले के अंतर्गत स्वीकृत सभी विकास कार्यों, सेवाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के हित को प्राथमिकता में रखते हुए सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को अविलंब पूर्ण किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024-25 तक स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों की जिलेवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रगति की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐसे विकास कार्य जो अब तक अप्रारंभ हैं अथवा प्रगतिरत हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए दो माह की समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रत्यक्ष संवाद कर कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय नेतृत्व से परामर्श लेकर अल्पकालिक योजनाओं का निर्माण, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा जन अपेक्षाओं के अनुरूप छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की त्वरित स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। प्राधिकरण के अंतर्गत राज्य के 35 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आधारभूत नागरिक सुविधाओं के विकास, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन, शैक्षणिक सुविधाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही शिक्षा एवं छात्रावासों के विकास पर प्रमुख रूप से जोर दिया गया है और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ललित चंद्राकर सहित अन्य विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव बसवराजू एस, शासन के विभिन्न विभागों के सचिव, आईजी, कमिश्नर, कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

सुखोई-30 और तेजस के बाद अब राफेल में इंटीग्रेट होंगी ‘Astra’

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सुखोई-30 और तेजस के बाद अब राफेल में इंटीग्रेट होंगी ‘Astra’
भारतीय एयरफोर्स अपने बेड़े में फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस से 114 नए राफेल खरीदने की तैयारी कर रही है. इसको लेकर रक्षा मंत्रालय गहन मंथन में जुटा हुआ है. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस डील पर मुहर लग सकती है. इस बीच बीच भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है.

फ्रांस से खरीदे गए अपने फाइटर जेट्स के बेड़े को भारत स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली Astra MK1 और Astra MK2 बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों (BVRAM) से लैस करने की तैयारी में है. इसको लेकर अगले दो सालों यानी 2028 तक टेस्टिंग शुरू हो जाएगी.

Su-30MKI और तेजस फाइटर जेट भी Astra से लैस
रक्षा संबंधी खबरों से जुड़ी वेबसाइट डिफेंस डॉट इन के मुताबिक, यह पहल रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए परिचालन लचीलेपन को बढ़ाने के भारतीय वायु सेना के रोडमैप में एक महत्वपूर्ण है. बता दें कि Astra MK1, जो पहले से ही सुखोई-30MKI और LCA तेजस जैसे फाइटर जेट्स में लैस है, वो 100 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता प्रदान करती है.

Astra MK2 से बढ़ेगी मारक क्षमता
इतना ही नहीं, आने वाले कुछ समय में राफेल और सुखोई-30 को Astra MK2 से भी अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इनकी मारक क्षमता 100 किमी से बढ़कर 160 किलोमीटर तक बढ़ जाएगी. इसके साथ ही ये मिसाइल यूरोपीय देशों की ओर से बनाई गई मेटियोर जैसी मिसाइलों की बराबरी करेगी. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फाइटर जेट और उसके निर्माता डसॉल्ट एविएशन और थेल्स इस कार्यक्रम के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करने पर सहमत हो गए हैं.

भारतीय मिसाइलों को राफेल के उन्नत RBE2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार और उसके कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ प्रभावी ढंग से कॉर्डिनेट करने में सक्षम बनाने वाले विशिष्ट सॉफ्टवेयर अपग्रेड विकसित करने के लिए उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण है. यह सहयोग सुनिश्चित करता है कि फाइटर जेट Astra मिसाइलों की मार्गदर्शन और टारगेट कर सकने वाली क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग कर सके. युद्ध जैसी स्थिति में जाने से पहले इसको कई चरणों से होकर गुजरना होगा.

चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन!
राफेल फाइटर जेट्स के अपग्रेड होने की खबर सुनते ही पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की भी टेंशन बढ़ने वाली है. दरअसल भारत जिस तरह से अपने फाइटर जेट्स को Astra जैसी मिसाइलों से लैस कर रहा है, ऐसी तकनीकी का इस्तेमाल यूरोपीय देश और अमेरिका भी करते हैं. इसलिए भारतीय स्वदेशी मिसाइलों को अपग्रेडेशन से राफेल और भी खतरनाक हो जाएगा.

भारत अंडर-19 वर्ल्ड कप का छठी बार बना वर्ल्ड चैंपियन

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भारत अंडर-19 वर्ल्ड कप का छठी बार बना वर्ल्ड चैंपियन
भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीत लिया है. फाइनल में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराया. यह छठी बार है जब भारत अंडर-19 लेवल पर विश्व विजेता बना है. वैभव सूर्यवंशी के 175 रन और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन ने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई है. इंग्लैंड के पास मौका था कि वो 28 सालों से चले आ रहे अपने खिताबी सूखे का अंत करे, लेकिन
अंग्रेज भारतीय टीम की चुनौती को भेद नहीं पाए.
जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में खेले गए इस फाइनल मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 411 रनों का स्कोर खाद्य किया था. यह अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में किसी भी टीम द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर रहा. वैभव सूर्यवंशी ने 80 गेंदों में 175 रन बनाए, इस दौरान उन्होंने 15 चौके और 15 छक्के लगाए. मगर जवाब में इंग्लैंड की टीम 311 रन ही बना सकी.

इंग्लैंड ने 177 के स्कोर तक 7 विकेट खो दिए थे, लेकिन कैलब फैल्कनर ने जुझारू अंदाज में शतकीय पारी खेल इंग्लैंड को जीत के करीब ले जाने की पुरजोर कोशिश की. उन्होंने 67 गेंद में 115 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन इंग्लैंड के खिताबी सूखे का अंत नहीं कर पाए.

भारत छठी बार बना चैंपियन
भारतीय टीम ने सबसे ज्यादा बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने के अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर कर लिया है. भारत अब छठी बार चैंपियन बना है, इस सूची में दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया है, जिसने 4 बार अंडर-19 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीती है. भारत इससे पहले 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में भी अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीत चुका है. आयुष म्हात्रे के नाम ने इतिहास में एक खास स्थान हासिल कर लिया है, उन्हीं की कप्तानी में भारत की यह ऐतिहासिक जीत आई है.

वैभव सूर्यवंशी रहे जीत के हीरो
भारत की वर्ल्ड कप जीत की नींव वैभव सूर्यवंशी ने रखी. उन्होंने इस मैच में मात्र 55 गेंदों में शतक पूरा कर लिया था, जो अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल इतिहास में किसी खिलाड़ी द्वारा बनाया गया सबसे तेज शतक भी रहा. इसके बाद उन्होंने 71 गेंदों में 150 रनों का आंकड़ा पार किया. फाइनल मैच में वैभव की 80 गेंद में 175 रनों की तूफानी पारी ने मैच में बहुत बड़ा अंतर पैदा किया.

‘बॉर्डर 2’ आंधी में उड़ गईं ‘वध 2’ सहित आज रिलीज हुई नईं फिल्में

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‘बॉर्डर 2’ आंधी में उड़ गईं ‘वध 2’ सहित आज रिलीज हुई नईं फिल्में
बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों वॉर-एक्शन फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने कब्जा जमा रखा है. सनी देओल की फिल्म की रिलीज को 14 दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन ऑडियंस में क्रेज बरकरार है. ये फिल्म हर दिन अच्छी कमाई कर रही है. आज शुक्रवार है और थियेटर में कई नई फिल्मों की एंट्री हो चुकी है, लेकिन ‘बॉर्डर 2’ के तूफान में ये फिल्म पूरी तरह बह चुकी है. आपको बताते हैं कि आज रिलीज होने वाली फिल्मों ने अब तक कितनी कमाई की है.

‘वध 2’ बॉक्स ऑफिस डे 1 (Vadh 2)
सैकनिक के आंकड़ों के मुताबिक शाम चार बजे तक वध 2 ने 21 लाख का कलेक्शन कर लिया था. तो वहीं रात 8 बजे तक इस फिल्म का कलेक्शन 33 लाख हो चुका है. बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म की मॉर्निंग शोज में ऑक्यूपेंसी 4.34% और दोपहर के शोज में ऑक्यूपेंसी 6.85% दर्ज की गई है. Vadh 2 के डायरेक्टर जसपाल सिंह संधू हैं और इसमें नीना गुप्ता, संजय मिश्रा, योगिता बिहानी, अक्षय डोगरा, कुमुद मिश्रा, अमित सिंह, शिल्पा शुक्ला जैसे एक्टर्स लीड रोल में हैं.

‘भाभीजी आप घर पर हैं’ बॉक्स ऑफिस डे 1 (Bhabiji Ghar par hain)
‘भाभीजी आप घर पर हैं’ फिल्म ने शाम चार बजे तक चार लाख का कलेक्शन किया है. तो वहीं रात के आठ बजे तक इस फिल्म का कलेक्शन 19 लाखहो गया है. सैकनिक के मुताबिक मॉर्निंग शोज में इसकी ऑक्यूपेंसी 5.10% और दोपहर के शोज में ऑक्यूपेंसी 5.52% है. शशांक बाली ने इसके डायरेक्टर हैं. इसमें रोहिताश्व गौर, आसिफ शेख, रवि किशन, मुकेश तिवारी, शुभांगी आत्रे और विदिशा श्रीवास्तवा लीड रोल में हैं.

‘विद लव’ बॉक्स ऑफिस डे 1 (With Love)
विद लव फिल्म ने शाम चार बजे तक 3 लाख का कलेक्शन कर लिया है. रात 8 बजे तक इस फिल्म ने 76 लाख रुपये कमा लिए हैं. मॉर्निंग शो में इसकी ऑक्यूपेंसी 13.69% और दोपहर के शोज में इसकी ऑक्यूपेंसी 22.15% दर्ज की गई है. तमिल और तेलुगु में रिलीज हुई इस रोमांटिक फिल्म में अबिशन जीविंथ, अनस्वरा राजन, हरीश कुमार और काव्या अनिल मुख्य भूमिकाओं में हैं.

‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस डे 15 (Border 2 Box Office)
सनी देओल और वरुण धवन स्टारर फिल्म ‘बॉर्डर 2’ का आज थियेटर में 15वां दिन है. ‘बॉर्डर ‘2 ने शाम चार बजे तक करीब 1.16 करोड़ की कमाई कर ली है. तो वहीं रात आठ बजे तक इस फिल्म ने 1.95 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. कुल मिलाकर इंडिया में ये फिल्म अब तक 296.35 करोड़ कमा चुकी है.

‘मर्दानी 3’ बॉक्स ऑफिस डे 8 (Mardaani 3 Box Office)
रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3 की रिलीज का आज 8वां दिन है. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रात 8 बजे तक 1.13 करोड़ कमा चुकी है. इस फिल्म का इंडिया में कुल कलेक्शन 27.43 करोड़ हो चुका है.

होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

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होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय
इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है. 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा. ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं.

होली का त्योहार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा. पहले दिन यानी सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलंडी पर रंग खेला जाएगा. हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है. खास बात यह भी है कि इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा.

होलिका दहन पर भद्रा का समय

2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा. वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा. भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है.

चंद्र ग्रहण के साए में होली

इस बार होली चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी. 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. जयपुर में चंद्र उदय शाम
6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा.
ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा.
चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा. इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा.

होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोषकाल)

फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. इस वर्ष फाल्गुनशुक्ल चतुर्दशी सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05:56 तक है जो कि अगले दिन मंगलवार, 03 मार्च 2026 को सायं 05:07 तक है.

प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा.

इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है.

यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ – मुहूर्तचिन्तामणि
होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

धर्मसिन्धु के प्रमाणानुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा.
निष्कर्ष :- यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए.
2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं. इसलिए प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं.

वेटलैंड संरक्षण पर NGT का कड़ा रुख: केरवा डैम के FTL क्षेत्र में अवैध भराव अस्वीकार्य

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वेटलैंड संरक्षण पर NGT का कड़ा रुख: केरवा डैम के FTL क्षेत्र में अवैध भराव अस्वीकार्य
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने कालीयसोत–केरवा डैम क्षेत्र में अवैध मिट्टी भराव और ठोस अपशिष्ट डंपिंग के गंभीर मामले में अहम आदेश पारित किया है। यह मामला अधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Moto) में लिया गया था, जिसकी पृष्ठभूमि समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टें थीं। हालांकि, अधिकरण ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में रशीद नूर खान मूल शिकायतकर्ता रहे, जिनके द्वारा इस गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन को लगातार प्रशासन और न्यायिक मंच के समक्ष उठाया गया। प्रकरण में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने प्रभावी रूप से पक्ष प्रस्तुत किया।

समाचार रिपोर्टों में यह आरोप सामने आया था कि भोपाल जिले के ग्राम महुआखेड़ा क्षेत्र में स्थित केरवा डैम, जो कालीयसोत प्रणाली का हिस्सा है, उसके फुल टैंक लेवल (FTL) और आसपास के क्षेत्र में 2000 से अधिक डंपरों के माध्यम से कोपरा, मुर्रम एवं काली मिट्टी डाली गई। इस भराव का उद्देश्य जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियाँ करना बताया गया। यह गतिविधियाँ वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रत्यक्ष उल्लंघन के रूप में सामने आईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने एक संयुक्त समिति का गठन किया, जिसमें जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि केरवा डैम के FTL की विधिवत चिन्हांकित सीमा के भीतर भी अवैध भराव मौजूद है। समिति ने पाया कि लगभग 10 फीट तक ऊँचाई में मिट्टी और कोपरा डाला गया है, जिससे जलाशय की भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। समिति ने यह भी दर्ज किया कि कुछ भराव निजी भूमि पर है, किंतु उसका प्रभाव सीधे FTL और जल निकाय पर पड़ रहा है।

अधिकरण के समक्ष यह तर्क भी रखा गया कि संबंधित भूमि निजी स्वामित्व की है और वह FTL क्षेत्र में नहीं आती। इस पर NGT ने स्पष्ट रूप से कहा कि भूमि का निजी होना पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को वैध नहीं बना सकता। यदि किसी गतिविधि से डैम, जलाशय, कैचमेंट क्षेत्र या FTL प्रभावित होता है, तो उस पर रोक लगाना और सुधारात्मक कार्रवाई करना राज्य का दायित्व है। अधिकरण ने माना कि संबंधित भूमि स्वामियों द्वारा 33 मीटर बफर जोन का उल्लंघन किया गया है और उन्हें मिट्टी व कोपरा हटाने के लिए जारी किए गए नोटिस विधिसम्मत हैं।

NGT ने यह भी स्पष्ट किया कि केरवा डैम एक वेटलैंड श्रेणी का जल निकाय है, जिसका संरक्षण अनिवार्य है। यह डैम भोपाल शहर के लिए वैकल्पिक पेयजल स्रोत होने के साथ-साथ हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई से भी जुड़ा है। अधिकरण ने कहा कि कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध भराव और वनस्पति क्षरण से डैम की आयु और जल भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो जनहित के विपरीत है।

अपने आदेश में NGT ने विभिन्न विभागों को स्पष्ट और बाध्यकारी निर्देश जारी किए। जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया गया कि वह केरवा डैम के FTL क्षेत्र की महीने में कम से कम दो बार नियमित निगरानी के लिए एक विशेष पेट्रोलिंग टीम गठित करे और किसी भी अवैध डंपिंग या अतिक्रमण की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे। जिला कलेक्टर, वन विभाग और पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले कैचमेंट क्षेत्रों से अवैध अतिक्रमण हटाएँ और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वृक्षारोपण एवं मृदा संरक्षण के कार्य करें।

इसके अतिरिक्त, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को निर्देशित किया गया कि वह केरवा डैम के आसपास Zone of Influence की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया दो माह की अवधि के भीतर पूर्ण करे, ताकि भविष्य में अनियंत्रित विकास गतिविधियों को रोका जा सके। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह क्षेत्र की निरंतर निगरानी करे और किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन की स्थिति में त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

अधिकरण ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है। राज्य किसी भी परिस्थिति में वित्तीय या प्रशासनिक कठिनाइयों का बहाना बनाकर पर्यावरण संरक्षण के दायित्व से नहीं बच सकता।

इन सभी टिप्पणियों और निर्देशों के साथ राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मूल आवेदन का निस्तारण कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि केरवा डैम और उसके कैचमेंट क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निरंतर बनी रहेंगी। यह आदेश प्रदेश के अन्य जलाशयों और वेटलैंड क्षेत्रों में हो रही अवैध प्लॉटिंग और मिट्टी भराव गतिविधियों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।