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मुख्यमंत्री ने RSETI का दौरा किया, सराहा ग्रामीण विकास का मॉडल

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मुख्यमंत्री ने RSETI का दौरा किया, सराहा ग्रामीण विकास का मॉडल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुशासन तिहार के अंतर्गत बलरामपुर जिला प्रवास के दौरान ‘ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान’ (RSETI) पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पशु सखियों से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षण कक्ष का अवलोकन करते हुए विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली और प्रशिक्षणार्थियों से ‘जय बिहान’ कहकर आत्मीय अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रूप से पशुपालन का प्रशिक्षण ले रही पशु सखियों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना और उनके प्रयासों की सराहना की।

इस दौरान विकासखण्ड रामचन्द्रपुर के बगरा क्लस्टर अंतर्गत ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर पशु सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वे गांव में पशुओं का सर्वे कर पशु चिकित्सकों को सहयोग प्रदान करती हैं तथा ग्रामीणों को पशुपालन से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं बीमारियों के प्रति जागरूक करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य को और अधिक दक्षता के साथ करने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि RSETI जैसे संस्थान न केवल प्रशिक्षण के केंद्र हैं, बल्कि ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।

उल्लेखनीय है कि जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से अब तक 16 बैचों में कुल 510 प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न उद्यमी क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार एवं सूक्ष्म उद्यमिता के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

राशि के अनुसार दान का महत्व, मिलेगा भाग्य का पूरा साथ

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राशि के अनुसार दान का महत्व, मिलेगा भाग्य का पूरा साथ
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व बहुत पावन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस साल गंगा दशहरा का पर्व मई के महीने में मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। अगर दान राशि के अनुसार किया जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है, तो आइए यहां जानते हैं कि राशि के अनुसार, क्या दान करना शुभ होता है?

गंगा दशहरा पर 12 राशियों के लिए खास दान सामग्री
मेष – इस राशि के जातकों को गुड़ और तिल का दान करना चाहिए। इससे मानसिक शांति और अच्छी सेहत का वरदान मिलता है।
वृषभ – इस राशि के लोगों को सफेद वस्त्र या दूध का दान करना चाहिए। इससे भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है।
मिथुन – इस राशि के लोगों के लिए मूंग की दाल और हरे वस्त्र का दान शुभ रहेगा। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
कर्क – इस राशि के जातकों के लिए चांदी या चावल का दान करना फलदायी है। ऐसा करने से पारिवारिक जीवन में खुशहाली आएगी।
सिंह – इस राशि के लोगों को तांबे के बर्तन या गेहूं का दान करना चाहिए। इससे मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
कन्या – इस राशि के जातक पक्षियों को दाना खिलाएं और मूंग का दान करें। यह उपाय व्यापार में उन्नति के द्वार खोलेगा।
तुला – इस राशि के लोगों के लिए मिश्री या फल का दान करना शुभ रहेगा। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
वृश्चिक – इस राशि के लोग लाल चंदन या गुड़ का दान करें। इससे शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
धनु – इस राशि के लोग पीले वस्त्र या चने की दाल का दान करें। इससे भाग्य का साथ मिलता है और ज्ञान बढ़ेगा।
मकर – इस राशि के लोग काला तिल या छाता दान करें। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
कुंभ – इस राशि के जातकों के लिए तेल या लोहे के बर्तन का दान करना अच्छा रहेगा।
मीन – इस राशि के लोगों को हल्दी और शहद का दान करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व
गंगा दशहरा के दिन ‘दशविधि’ स्नान और दान का विधान है, जिसका मतलब है कि दस प्रकार के पापों का नाश करने वाला। इस दिन गंगाजल को छूने मात्र से ही व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चुनावी रण में अहम 37 सीटें, कोलकाता समेत यहां से तय होती है सरकार

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चुनावी रण में अहम 37 सीटें, कोलकाता समेत यहां से तय होती है सरकार
पश्चिम बंगाल में 4 मई को आने वाले चुनाव नतीजों पर पूरे देश की नजर है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने की कोशिश में है।

राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और कई जगह कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ऐसे में नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन चुनाव विशेषज्ञ 37 खास सीटों को बेहद अहम मानते हैं। इन सीटों को ‘बेलवेदर सीट्स’ कहा जाता है, क्योंकि 1977 से अब तक जिस पार्टी ने इन सीटों में ज्यादा जीत हासिल की है, वही राज्य में सरकार बनाती रही है।

क्या हैं बेलवेदर सीट्स और क्यों हैं अहम?
ये 37 सीटें कुल 294 सीटों का करीब 13 प्रतिशत हिस्सा हैं। ये पूरे राज्य में फैली हुई हैं और इनमें सामान्य, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सभी तरह की सीटें शामिल हैं।

इनमें से 15 से 20 प्रतिशत सीटें कोलकाता, दक्षिण बंगाल और दक्षिण-पश्चिम बंगाल के इलाकों में स्थित हैं। भवानीपुर, डायमंड हार्बर, आउसग्राम, उदयनारायणपुर और माघराट पूर्व जैसी सीटें अक्सर विजेता पार्टी के साथ जाती रही हैं। चुनाव विश्लेषक दोराब सोपारीवाला के मुताबिक, पूरे देश की ‘सुपर बेलवेदर’ सीटों को जोड़ दिया जाए, तब भी वे बंगाल की इन 37 सीटों के बराबर नहीं ठहरतीं।

दूसरे राज्यों से क्यों अलग है बंगाल?
दोराब सोपारीवाला ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक ऐसी सीट है जिसका रिकॉर्ड पूरी तरह सही रहा है, जबकि बिहार और महाराष्ट्र में एक भी नहीं है। मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में 3-3, ओडिशा और गुजरात में 5-5 ऐसी सीटें हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या 37 है। यह अंतर बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण है, जहां लंबे समय तक एक ही दल का दबदबा रहा।

पिछले करीब 50 वर्षों में बंगाल में मुख्य रूप से दो ही राजनीतिक ताकतें रही हैं 34 साल तक वाम मोर्चा और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस। चूंकि सरकारें बार-बार नहीं बदलीं, इसलिए इन सीटों के मतदाता अक्सर राज्य के कुल रुझान के हिसाब से ही वोट करते रहे। जब पूरे राज्य में कोई पार्टी लोकप्रिय होती थी, तो इन सीटों पर भी वही पैटर्न देखने को मिलता था।

सरकार बनाने के लिए कितनी सीटों की जरूरत
यही वजह है कि समय के साथ ये सीटें चुनाव नतीजों का मजबूत संकेतक बन गईं। बता दें कि 294 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 148 सीटों की जरूरत होती है

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें 4 और 5 मई को कैसा रहेगा मौसम

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें 4 और 5 मई को कैसा रहेगा मौसम
देशभर में शनिवार को मौसम ने करवट ली और कई राज्यों में आंधी-बारिश ने भीषण गर्मी से राहत दिलाई। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जबकि कुछ जगहों पर ओलावृष्टि भी देखने को मिली।

राजस्थान के जयपुर, बीकानेर और जोधपुर में आंधी के बाद तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून और उत्तरकाशी में ओले गिरे। खराब मौसम के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हेलीकॉप्टर भी ओलावृष्टि के दौरान सुरक्षित उतारा गया।

इंदौर में होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल

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इंदौर में होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल
इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। इस वर्ष भारत में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के तहत कृषि मंत्रियों की अहम बैठक 12 और 13 जून को इंदौर में होगी। इससे पहले 9 से 11 जून तक अधिकारियों की तकनीकी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञ कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित कुल 11 देशों के कृषि मंत्री भाग लेंगे। बैठक में खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, तकनीकी आदान-प्रदान और डिजिटल कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

नई दिशा देने में महत्वपूर्ण
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर को इस आयोजन के लिए प्रस्तावित किया था, इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को दी। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर दोनों नेता रविवार को इंदौर में बैठक करेंगे।

इस बार सम्मेलन की थीम रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सतत विकास रखी गई है, जो वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। गौरतलब हे कि पहले भी इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन और कृषि समूह की बैठक सहित कई बड़े आयोजन हो चुके हैं।

भोरमदेव में शुरू हो गई जंगल सफारी, 34 किलोमीटर लंबे ट्रैक में दुरदुरी झरना, बावापारा सकरी नदी का व्यू मोह लेगा मन

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भोरमदेव में शुरू हो गई जंगल सफारी, 34 किलोमीटर लंबे ट्रैक में दुरदुरी झरना, बावापारा सकरी नदी का व्यू मोह लेगा मन
कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने, स्थानीय रोज़गार पैदा करने और अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता को दिखाने के लिए जंगल सफारी शुरू की गई है। वर्ष 2001 में स्थापित अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। नया शुरू किया गया सफारी मार्ग लगभग 34 किलोमीटर लंबा है और इसमें दुरदुरी झरना, बावापारा 360-डिग्री पहाड़ी व्यू- प्वाइंट और सकरी नदी के कई रास्ते शामिल हैं। शुरुआती चरण में तीन छह-सीटर सफारी वाहन तैनात किए गए हैं, साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण है गलियारा
वन अधिकारियों ने बताया कि यह अभयारण्य महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में काम करता है, जो छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिज़र्व को मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ता है। यह वन्यजीवों की आवाजाही, आनुवंशिक विविधता और पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इको टूरिज्म की पहल के रूप में होगा काम
इको-टूरिज़्म पहल के हिस्से के रूप में, इको-कॉटेज, नेचर ट्रेल्स और गाइडेड सफारी जैसी सुविधाओं की भी योजना बनाई गई है। स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह वनांचल रसोई नाम का फ़ूड आउटलेट चलाएंगे, जहां क्षेत्रीय व्यंजन परोसे जाएंगे, साथ ही हस्तशिल्प गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

30 लोगों को सीधा रोजगार
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से करीब 30 स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर रोज़गार मिलने की उम्मीद है, और आस-पास के इलाके में मौजूद होटलों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और छोटे व्यवसायियों के लिए आजीविका के अप्रत्यक्ष अवसर भी पैदा होंगे।

भोरमदेव और चिल्फी वन रेंज में फैला है अभयारण्य
वर्ष 2001 में स्थापित यह अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें भोरमदेव तथा चिल्फी वन रेंज शामिल हैं। यह अपनी विविध वन्यजीव आबादी के लिए जाना जाता है, जिसमें बाइसन (वन भैंसा), बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, हिरण और नीलगाय जैसे जानवर शामिल हैं। अभयारण्य 134 तितली प्रजातियों और 126 पक्षी प्रजातियों का भी घर है।

सीएम ने किया इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर का शिलान्यास, किसानों को बड़ा फायदा

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सीएम ने किया इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर का शिलान्यास, किसानों को बड़ा फायदा
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत सरकार ने किसानों को उनकी जमीन का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड लौटाने का फैसला लिया है, जिससे उन्हें सीधे विकास का भागीदार बनाया गया है। योजना के चलते कई किसान करोड़पति बने हैं। हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार किसानों को विकास में पार्टनर बना रही है।

किसानों को विकास में बनाया भागीदार
इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से 60 प्रतिशत भूमि किसानों को दे रहे हैं। उनको विकास में भागीदार बना रहे हैं। किसानों को 650 करोड़ के प्लाट मिले हैं। किसानों को समृद्ध होना ही चाहिए। अगर हम किसी किसान से उसकी जमीन लेते हैं, तो हमारा पहला फर्ज बनता है कि हम किसान के गुजर-बसर की स्थाई व्यवस्था करें। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 2360 करोड़ रुपये लागत वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन नैनोद गांव में किया।

औद्योगिक विकास और भाग्योदय का शंखनाद
उन्होंने कहा पूरे देश में किसी ने किसानों को 60 प्रतिशत का भागीदार नहीं बनाया। इसे “भाग्योदय का शंखनाद” बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवा व किसान अधिक समृद्ध होंगे। चार गुना मुआवजे के निर्णय से खुश किसानों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया और प्रतीक स्वरूप हल व मुकुट भेंट किए। आज 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित हो चुके हैं। हमने 9 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर उतारा है।

मध्यप्रदेश: उद्योगों में देश का दूसरा अग्रणी राज्य
पूरे देश में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर का राज्य है, जहां तेज गति से उद्योग स्थापित हो रहे हैं। आज से जिस विकास मॉडल की शुरुआत हुई है, वह पूरे प्रदेश में छाएगा। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह भाग्योदय का शंखनाद है। इससे इंदौर निवेश में भी आगे होगा और किसानों की समृद्धि का भागीदार होगा।

मेट्रोपॉलिटन रीजन की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन-धार-देवास-शाजापुर-रतलाम को जोड़कर बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित हो रहा है। यह कॉरिडोर पीथमपुर से आगे उज्जैन तक कनेक्टिविटी देगा और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़कर परिवहन को नई गति देगा। एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा।

कनेक्टिविटी का विस्तार और कांग्रेस पर तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़कों और कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे प्रदेश को भी फायदा मिल रहा है। अगला कदम कॉरिडोर के बाद इंदौर-उज्जैन 4 लेन सड़क का भूमि पूजन होगा, जिससे पारंपरिक मार्ग भी आधुनिक रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार किसानों को चार गुना मुआवजा दे रही है और उन्हें विकास में भागीदार बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में बिजली और सिंचाई व्यवस्था कमजोर थी, जबकि वर्तमान सरकार ने सिंचाई रकबा बढ़ाकर किसानों की स्थिति मजबूत की है।

मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर

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मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर
मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे।

वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी
यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा और जीएडी की सख्ती
घोषणाओं को पूरा कराने के लिए संविदा कर्मचारियों का भोपाल में महासम्मेलन बुलाया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि सभी प्रविधानों को लागू कराया जाएगा। यदि किसी प्रविधान को लेकर समस्या है तो संगठन के पदाधिकारी, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी बैठकर उसका रास्ता निकालेंगे। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र जारी कर सभी विभागाध्यक्षों से संविदा नियम के क्रियान्वयन का फीडबैक मांगा।

विभागों को निर्देश और स्कूल शिक्षा विभाग की पहल
इसमें पूछा गया कि किसने नियम लागू किए और किसने नहीं। जहां लागू नहीं हुए, उसके कारण क्या रहे। विभागों को स्पष्ट रूप से कह दिया गया है कि सरकार ने जब निर्णय ले लिया है तो फिर सेवा भर्ती नियम में संशोधन किए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसमें पहल की और नियम संशोधित कर अधिसूचित कर दिए।

5 साल की सेवा पर मिलेगा नियमित भर्ती का लाभ
मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि वर्ष 2018 की संविदा नीति में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान था जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती में नहीं दिया। कई मामले न्यायालय पहुंचे। इसमें विभागीय अधिकारी यह जवाब नहीं दे पाए कि उन्होंने पद आरक्षित कर लाभ क्यों नहीं दिया। अब विभाग ने गलती सुधारी है। यह प्रविधान किया गया है कि जिन संविदा कर्मचारियों ने पांच साल निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नियमित भर्ती के समय लाभ मिलेगा।

जीत की पटरी पर कोलकाता, लगातार तीसरी बार फतह

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जीत की पटरी पर कोलकाता, लगातार तीसरी बार फतह
कोलकाता नाइट राइडर्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को 7 विकेट से हरा दिया है. IPL 2026 में कोलकाता ने जीत की हैट्रिक लगा दी है, ये वही टीम है जो पहले 6 मुकाबलों में एक भी जीत दर्ज नहीं कर सकी थी. अंगकृष रघुवंशी ने 59 रनों की पारी खेल कोलकाता की जीत में बड़ा योगदान दिया. उनके अलावा कप्तान अजिंक्य रहाणे अर्धशतक लगाने से चूक गए. इससे पहले सुनील नरेन ने आईपीएल में 200 विकेट पूरे कर इतिहास रच दिया है.

हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में हैदराबाद की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 165 रन बनाए थे. बढ़िया शुरुआत के बाद SRH की बैटिंग धराशाई हो गई और अपने आखिरी 9 विकेट महज 60 रनों के भीतर खो दिए. जवाब में रहाणे और रघुवंशी की 84 रनों की पार्टनरशिप ने कोलकाता की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

सुनील नरेन ने रचा इतिहास
सुनील नरेन ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ इस मुकाबले में इतिहास रच दिया. उन्होंने इस मैच में कुल 2 विकेट चटकाए, जिससे वे इंडियन प्रीमियर लीग में 200 विकेट का आंकड़ा छूने वाले पहले विदेशी गेंदबाज बन गए हैं. नरेन के नाम अब 197 मैचों में कुल 201 विकेट हो गए हैं. सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में सिर्फ भुवनेश्वर कुमार (215) और युजवेन्द्र चहल (228) उनसे आगे हैं.

SRH नहीं लगा पाई जीत का ‘सिक्सर’
सनराइजर्स हैदराबाद सीजन के पहले 4 में से तीन मैच हार गई थी. मगर उसके बाद SRH ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार 5 जीत दर्ज की. आज कोलकाता को हराते ही वह जीत का ‘सिक्सर’ लगाते हुए प्लेऑफ के एक कदम करीब पहुंच सकती थी, मगर कोलकाता की टीम गेंदबाजी और बल्लेबाजी में एकजुट होकर खेली और हैदराबाद को लगातार छठी जीत हासिल करने से रोका. अंतिम ओवरों में रिंकू सिंह ने 11 गेंदों में 22 रनों की कैमियो पारी खेल कोलकाता के लिए मैच को फिनिश किया.

‘राजा शिवाजी’ का जलवा बरकरार, दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स

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‘राजा शिवाजी’ का जलवा बरकरार, दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स
रितेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’ रिलीज के साथ ही छा गई है. फिल्म ने पहले दिन ही रिकॉर्ड ब्रेक कमाई की. मराठी वर्जन नो तो धूम मचा दी है.

‘राजा शिवाजी’ का तीसरे दिन का कलेक्शन
Sacnilk के मुताबिक, फिल्म ने संडे को शाम 7.30 बजे तक 7.75 करोड़ का कलेक्शन किया है. फिल्म ने हिंदी भाषा में 2.68 करोड़ कमा लिए. वहीं फिल्म ने मराठी में 5.07 करोड़ का कलेक्शन किया. फिल्म की ऑक्यूपेंसी 37.9% है.

फिल्म के हिंदी वर्जन ने 9.43 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. वहीं, मराठी वर्जन ने 20.22 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. फिल्म मराठी सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनर बन गई है.

‘राजा शिवाजी’ के बारे में
फिल्म को रितेश देशमुख ने ही डायरेक्ट किया है. वो फिल्म में लीड रोल में हैं. फिल्म में अभिषेक बच्चन, संजय दत्तस भाग्यश्री, जेनेलिया, फरदीन खान, विद्या बालन जैसे स्टार्स हैं. रितेश देशमुख फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के रोल में हैं. फिल्म में सलमान खान ने कैमियो रोल भी किया है. उनके कैमियो ने धूम मचा दी है. रितेश देशमुख की एक्टिंग और डायरेक्शन की फैंस जमकर तारीफ कर रहे हैं.

इस फिल्म का क्लैश जुनैद खान की ‘एक दिन’ से हुआ. हालांकि, ‘एक दिन’ रितेश की ‘राजा शिवाजी’ के सामने टिक नहीं पाई है. जुनैद खान की फिल्म को फैंस पसंद नहीं कर रहे हैं. इस फिल्म में साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी नजर आई हैं. साई पल्लवी ने इस फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया है. इसके बाद साई फिल्म ‘रामायण’ में भी दिखेंगी.