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40 वर्ष बाद MANIT 1986 बैच का गौरवपूर्ण पुनर्मिलन भोपाल में जीवंत हुईं यादें

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40 वर्ष बाद MANIT 1986 बैच का गौरवपूर्ण पुनर्मिलन भोपाल में जीवंत हुईं यादें
मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल के वर्ष 1986 बैच के पूर्व छात्र-छात्राओं का 40 वर्ष बाद आयोजित भव्य पुनर्मिलन (Reunion) कार्यक्रम 28 फरवरी एवं 01 मार्च 2026 तक भोपाल में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। चार दशक बाद हुए इस मिलन समारोह ने न केवल पुराने साथियों को पुनः एक मंच पर लाया, बल्कि छात्र जीवन की स्मृतियों, संघर्षों और उपलब्धियों को भी फिर से जीवंत कर दिया।

इस विशेष अवसर पर मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा अपने सहपाठियों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहे और लंबे अंतराल के बाद हुए इस मिलन को भावनात्मक एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया। कार्यक्रम में गुजरात कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कमल दयानी सहित देश एवं विदेश में प्रशासन, उद्योग, तकनीक, शिक्षा, प्रबंधन तथा निजी क्षेत्र में उच्च पदों पर कार्यरत अनेक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र शामिल हुए।

रीयूनियन में भोपाल सहित देश के विभिन्न राज्यों के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, हांगकांग एवं अन्य देशों से आए एलुमनाई ने सहभागिता कर आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। लगभग 40 वर्षों बाद एक-दूसरे से मिल रहे मित्रों के बीच आत्मीयता, उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का विशेष वातावरण देखने को मिला।

दो दिवसीय आयोजन : संवाद, स्मृतियाँ और उत्सव का संगम

दो दिनों तक चले इस पुनर्मिलन कार्यक्रम के अंतर्गत पुलिस ऑफिसर्स मेस भोपाल, मोटल शिराज एवं सफल रिट्रीट में विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं। कार्यक्रम में स्वागत सत्र, परिचय एवं अनुभव साझा संवाद, समूह चर्चा, सांस्कृतिक संध्या और अनौपचारिक संवाद जैसे आयोजन शामिल रहे, जहाँ प्रतिभागियों ने अपने व्यावसायिक जीवन की यात्राओं, उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया।

भोपाल के प्रसिद्ध बोट क्लब पर आयोजित शिकारा राइड प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वहीं वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में साइक्लिंग एवं मॉर्निंग वॉक के दौरान सभी ने प्रकृति के बीच मित्रता के पुराने रिश्तों को फिर से महसूस किया।

कैंपस और हॉस्टल विज़िट ने लौटाए सुनहरे दिन

पूर्व छात्रों ने MANIT परिसर का भ्रमण कर अपने विभागों, कक्षाओं और हॉस्टलों का दौरा किया। कई प्रतिभागी दशकों बाद अपने पुराने कमरों और हॉस्टल गलियारों में पहुँचे, जहाँ छात्र जीवन की स्मृतियाँ स्वतः ही ताज़ा हो उठीं।

इस अवसर पर संस्थान परिसर में सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं संस्थान के प्रति स्थायी जुड़ाव का प्रतीक बना।

मनोरंजन, सहभागिता और सांस्कृतिक रंग

रीयूनियन को यादगार बनाने के लिए आरजे अनादि द्वारा फन गेम्स एवं इंटरैक्टिव गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें सभी पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सांस्कृतिक संध्या में लाइव बैंड प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बना दिया और पुराने दौर के गीतों ने सभी को छात्र जीवन के स्वर्णिम समय में पहुँचा दिया।

मित्रता, मूल्यों और संस्थान से जुड़ाव का प्रतीक

प्रतिभागियों ने कहा कि MANIT ने उन्हें केवल तकनीकी शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीवन मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और आजीवन मित्रता का मजबूत आधार भी प्रदान किया। चार दशक बाद आयोजित यह पुनर्मिलन कार्यक्रम मजबूत एलुमनाई नेटवर्क, संस्थान के प्रति गहरे भावनात्मक संबंध और समय से परे मित्रता के बंधन का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि वर्षों की दूरी के बावजूद शिक्षा संस्थान से जुड़ी स्मृतियाँ और मित्रता का संबंध सदैव जीवित रहता है तथा नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।

राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौजन्य भेंट

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राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौजन्य भेंट
राज्यपाल मंगुभाई पटेल से रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकभवन में सौजन्य भेंट की। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परस्पर पुष्प-गुच्छ भेंट किया। होली पर्व की शुभकामनाओं का आदान -प्रदान किया।

राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण संबंधी विभिन्न विषयों की जानकारी दी और औपचारिक चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

सिख गुरुओं की सीख और बलिदान हम सभी को देती है प्रेरणा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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सिख गुरुओं की सीख और बलिदान हम सभी को देती है प्रेरणा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित रेलवे स्टेशन गुरुद्वारा पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए अरदास की। इस अवसर पर उन्होंने सिख संगत द्वारा आयोजित होला मोहल्ला यात्रा के लिए निःशुल्क बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

सिख संगत द्वारा आयोजित इस यात्रा में लगभग 1200 श्रद्धालु 17 बसों, 2 ट्रकों एवं अन्य वाहनों के साथ हजूर साहिब नांदेड़ (महाराष्ट्र) तथा गुरुद्वारा नानक झीरा साहिब, बीदर (कर्नाटक) के लिए रवाना हुए। यह यात्रा सिख समाज की आस्था, परंपरा और सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने संगत को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिख गुरुओं का त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा का संदेश पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े पवित्र स्थलों पर आयोजित होला मोहल्ला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि साहस, सेवा और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत परंपरा का प्रतीक है। सिख गुरुओं द्वारा स्थापित शौर्य और समर्पण की विरासत सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि सिख संगत द्वारा लगातार 25वें वर्ष इस भव्य आयोजन का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने इस उत्कृष्ट आयोजन के लिए सिख समाज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह छाबड़ा सहित सिख समाज के प्रतिनिधिगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
संत परंपरा और आध्यात्मिक चेतना समाज को सही दिशा देती है, और जब शासन व्यवस्था इन मूल्यों से जुड़ती है, तो विकास और संस्कार दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम नादिया स्थित कबीर मठ आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन फाल्गुन महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर आश्रम में विकास कार्य के लिए 11 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने मठ आश्रम परिसर में स्थायी डोम निर्माण और प्रतिवर्ष आयोजन के लिए बजट में राशि का प्रावधान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम नादिया में मिनी स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की, साथ ही राजनांदगांव शहर में कबीर साहेब के नाम भव्य प्रवेश द्वार निर्माण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 202 साल पहले पूज्य सद्गुरु सेवा साहब जी ने नादिया जैसे गांव में कबीर मठ की स्थापना की। हलबा समाज के संत स्वरूप मंतू ठाकुर जी ने आश्रम की सेवा के लिए अपनी समस्त संपत्ति अर्पित कर दी। साय ने कहा कि हलबा समाज का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास रहा है। हलबा समाज से गेंदसिंह जी जैसे महानायक हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में सद्गुरु कबीर के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्रदेश में सद्गुरु संत कबीर का बड़ा प्रभाव है। उन्होंने अपने बचपन से ही कबीर पंथ से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुनकुरी में कबीरपंथ का बड़ा आश्रम है। बचपन से ही पंथ के रीति-रिवाजों से मैं भलीभांति परिचित रहा।छत्तीसगढ़ का जिला कबीरधाम सद्गुरु के नाम पर है। यहां के लोकजीवन में कबीर की वाणी का प्रभाव है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कबीर दास जी के दोहों में जीवन का संदेश है। उन्होंने ‘निंदक नियरे राखिए’ जैसे कबीर संत के दोहों को दोहराया। साय ने कहा कि संत कबीर कहते थे कि हमारे भीतर अपनी कमियों को सुनने का साहस होना चाहिए, ताकि हम खुद को बेहतर बना सकें। उनके दोहों में आदर्श जीवन और मानव समाज के हित के संदेश हैं, इसलिए हमें कबीरदास जी के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है, जहां की 80 प्रतिशत आबादी कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। हमने सुव्यवस्थित धान खरीदी की। धान बेचने के 48 घंटे के भीतर किसानों के खाते में राशि पहुंचे, यह सुनिश्चित किया। शनिवार को हमने 25 लाख 28 हजार से अधिक किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के माध्यम से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की। महतारी वंदन योजना अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोदी की गारंटी में हमने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्राथमिकता के आधार पर 18 लाख आवास प्रदान करेंगे। हमने शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही पहली कैबिनेट बुलाकर 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दे दी। आज 8 लाख से ज्यादा मकान बन चुके हैं, जिनका गृह प्रवेश भी हो चुका है। इतना ही नहीं, बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की अलग से स्वीकृति हुई है। पीवीजीटी समुदाय के लोगों के लिए अलग से 32,000 पीएम आवासों की स्वीकृति हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि जैसे-जैसे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है, बस्तर के पिछड़े क्षेत्रों में विकास हो रहा है। जिन गांवों में कभी सर्वे नहीं होता था, आज वहां की 7,000 से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दो साल में 32,000 से ज्यादा नौकरियों की प्रक्रिया शुरू की। 5,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती निकाली जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्रीराम ने 14 साल में सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में बिताया। 500 साल के संघर्ष के बाद अयोध्या धाम में हमारे भांचा राम विराजमान हुए तो हमने छत्तीसगढ़ से श्रीराम लला दर्शन योजना की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक 42,000 से अधिक लोगों को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम का दर्शन कराया जा चुका है। हमने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की भी पुनः शुरुआत की है, जिसमें 5,000 से ज्यादा लोगों को देश के 19 चिन्हांकित तीर्थस्थलों का दर्शन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है। डीएमएफ, कोयला और पीएससी घोटाले के दोषी जेल के भीतर हैं। आज राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था है, इसलिए गरीब का बेटा भी बड़ा अधिकारी बन रहा है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यदि पूरे भारतवर्ष में देवभूमि, संस्कारभूमि और समर्पण की परंपरा की बात की जाए, तो छत्तीसगढ़ का स्थान अत्यंत विशिष्ट और सम्मानजनक है। यहां की मिट्टी में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना रची-बसी है, जो प्रदेशवासियों के जीवन और व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग सरल, संवेदनशील और संस्कारों से परिपूर्ण हैं, यही इस प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी समान महत्व दे रही है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाता है।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संत-महात्माओं के प्रति गहरा सम्मान और आस्था है। ऐसा कोई दिन शायद ही गुजरता हो, जब मुख्यमंत्री निवास में किसी संत, महात्मा या आध्यात्मिक व्यक्तित्व का आगमन न होता हो। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, मार्गदर्शन और मूल्यों के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम भी है।

सांसद संतोष पांडेय ने छत्तीसगढ़ की धरती को रत्नगर्भा बताते हुए कहा कि हमारी धरती को समय-समय पर संतों का मार्गदर्शन मिलता रहा है। संतों की वाणी में जीवन का आदर्श और दर्शन मिलता है।

इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं महापौर मधुसूदन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद प्रदीप गांधी,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश गांधी, जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा,श्रम मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, जिला पंचायत के अध्यक्ष किरण वैष्णव, डोंगरगांव जनपद पंचायत के अध्यक्ष रंजीता ग्राम पंचायत नदिया के सरपंच वंदिता ठाकुर, आचार्य स्वामी मंगल साहेब,धर्माधिकारी सत्येंद्र साहेब, डॉक्टर भागीरथी साहेब, सु साध्वी सुमेधा साहेब संत राम रतन स्वरूप साहेब, लेख चंद्र साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक गण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यपाल रमेन डेका को जन्मदिन की दी शुभकामनाएँ

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यपाल रमेन डेका को जन्मदिन की दी शुभकामनाएँ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज लोकभवन पहुँचकर राज्यपाल रमेन डेका को उनके जन्मदिन के अवसर पर आत्मीय शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका को पुष्पगुच्छ, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ढोकरा शिल्प की आकर्षक कलाकृति तथा शॉल भेंट किया। उन्होंने राज्यपाल रमेन डेका के उत्तम स्वास्थ्य, सुखमय जीवन तथा दीर्घायु की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में अजमेर में हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली से वर्चुअली हुए शामिल

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प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में अजमेर में हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली से वर्चुअली हुए शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में प्रिवेंटिव हेल्थ केयर को सशक्त करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी कड़ी में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु एचपीवी टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य के क्षेत्र में दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। भारत बेटियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है, एचपीवी टीकाकरण अभियान उसी संकल्प का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में बेटियों और महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्यव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया है। जिसके अंतर्गत म.प्र. सरकार ने लगभग 8 लाख किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए केंद्र से 7 लाख 58 हजार 500 से अधिक वैक्सीन डोज प्राप्त हो चुके हैं। यह टीका 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की पात्र बालिकाओं को लगाया जाएगा। उन्हें वैक्सीन की केवल एक डोज दी जाएगी। बाज़ार में लगभग 4 हजार रुपये कीमत वाला यह टीका चिन्हित शासकीय संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, अभियान अगले तीन माह तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार सदैव महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित भविष्य के प्रति प्रतिबद्ध रही है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राजस्थान के अजमेर से राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान आरंभ करने के लिए प्रदेशवासी उनके आभारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को नई दिल्ली से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है और इससे बचाव के लिए एचपीवी टीका अत्यंत प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से राज्य में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिभावकों से अपनी बेटियों के उज्ज्वल और कैंसर-मुक्त भविष्य के लिए उनका टीकाकरण अवश्य करवाने और अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के तहत “मिशन मधुहारी” की शुरुआत की जा रही है, जिसके अंतर्गत टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए सभी जिला अस्पतालों में साप्ताहिक क्लीनिक संचालित होंगे, जहाँ इंसुलिन जाँच और विशेषज्ञ परामर्श मिलेगा।

सर्वाइकल कैंसर मुक्त मध्यप्रदेश और स्वस्थ, आत्मनिर्भर नई पीढ़ी का निर्माण सरकार का संकल्प: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मध्यप्रदेश में डॉ. कैलाशनाथ काटजू हॉस्पिटल भोपाल से अभियान का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने किया। उन्होंने कहा कि “आज का दिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है, जिसकी प्रिवेलेंस दर लगभग 1 लाख में 156 है। एचपीवी वैक्सीनेशन भविष्य में सर्वाइकल कैंसर को नियंत्रित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बीमारी होने के बाद इलाज करने से बेहतर है कि हम उसे होने ही न दें। यह अभियान प्रिवेंशन केयर की दिशा में एक बड़ा कदम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर मुक्त मध्यप्रदेश और स्वस्थ, आत्मनिर्भर नई पीढ़ी का निर्माण सरकार का संकल्प है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में निरोगी काया अभियान, सिकल सेल उन्मूलन मिशन, स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान, स्वस्थ यकृत मिशन सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समर्पण, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों की सक्रिय सहभागिता और नागरिकों की जागरूकता से हम निःसंदेह अभियान के लक्ष्य को समय से पूर्व प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की सतत देखभाल और मानकों में सुधार के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच अहम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हब एंड स्पोक मॉडल पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 85 प्रकार की जांचें उपलब्ध कराई जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण हेतु टेलीमेडिसिन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श उपलब्ध होगा और अनावश्यक रेफरल में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे प्रदेशवासियों को हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।

प्रदेश के 16 जिलों में मिशन मधुहारी का किया शुभारंभ

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने “मिशन मधुहारी” का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कहा कि मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आदर्श जीवनशैली, संतुलित आहार और समय पर पहचान अत्यंत आवश्यक है। यह पहल टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों एवं किशोरों के समग्र उपचार एवं देखभाल के लिए प्रारंभ की गई है। टाइप-1 मधुमेह ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में इंसुलिन का निर्माण नहीं होता और आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है। मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में साप्ताहिक विशेष टाइप-1 डायबिटीज क्लिनिक प्रारंभ किए जा रहे हैं, जहां इंसुलिन की सतत उपलब्धता, ब्लड ग्लूकोज जांच, विशेषज्ञ परामर्श एवं नियमित फॉलो-अप की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी। इस अवसर पर 5 बेटियों को टी1डी (टाइप-1 डायबिटीज) जांच किट का वितरण भी किया गया। इन किटों में ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स तथा आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं ताकि बच्चे समय पर शुगर की जांच कर सकें और बीमारी को नियंत्रित रख सकें। दो संभागों के 16 जिलों में 759 किशोर-किशोरियों को किट निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास के साथ स्वास्थ्य अमले के हितों को संरक्षित करने और मैनपावर सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चिकित्सकों एवं प्रोफेसरों के एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस) स्वीकृति और सुपरस्पेशियलिटी अस्पतालों में आयुष्मान इंसेंटिव की के शीघ्र भुगतान की व्यवस्था का उल्लेख किया। विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर श्रीमती मालती राय, अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्नवाल, आयुक्त धनराजू एस, एमडी एनएचएम डॉ सलोनी सिडाना, संचालक आईईसी डॉ रचना दुबे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में टीकाकरण के लिए पात्र किशोरी बालिकाएँ उपस्थित थीं।

प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक होंगे टीकाकरण सत्र

प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण सत्र प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किए जाएंगे। टीकाकरण स्वैच्छिक है तथा अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होगी। पात्रता के अंतर्गत वे बालिकाएं शामिल हैं, जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन पूरा कर लिया है लेकिन 15वां नहीं मनाया है, साथ ही अभियान प्रारंभ होने के 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष पूर्ण करने वाली बालिकाएं भी पात्र होंगी। समस्त जिलों के लगभग 471 स्वास्थ्य केन्द्रों (चिकित्सा महाविद्यालय, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इत्यादि) पर टीकाकरण किया जायेगा। आगामी 90 दिवसों (मार्च, अप्रैल एवं मई 2025) तक चलाकर, पात्र किशोरियों को HPV वैक्सीन का टीका निःशुल्क लगाया जायेगा। टीकाकरण प्रशिक्षित टीकाकमिर्यों एवं मेडिकल ऑफिसर की निगरानी में किया जायेगा। टीकाकरण हेतु सभी पात्र किशोरी बालिकाओं को यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण किया जायेगा। यह प्रक्रिया हितग्राही अपने पहचान-पत्र तथा अभिभावक के मोबाईल नंबर से स्वयं भी पूर्ण कर सकते हैं। प्रदेश में कन्ट्रोल कमाण्ड रूम स्थापित कर, हेल्पलाईन नंबर 104 जारी किया गया है। टीकाकरण के पश्चात बालिका को 30 मिनट तक स्वास्थ्य केंद्र पर अवलोकन में रखा जाएगा। टीकाकरण से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बालिका खाली पेट न हो। संभावित हल्के दुष्प्रभाव जैसे इंजेक्शन स्थल पर दर्द, सिरदर्द या थकान सामान्य हैं और शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में विधायक भगवान दास सबनानी, महापौर मालती राय, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अशोक बर्णवाल, आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रणजी ट्रॉफी फाइनल में कर्नाटक को हराकर पहली बार जीता खिताब, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

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रणजी ट्रॉफी फाइनल में कर्नाटक को हराकर पहली बार जीता खिताब, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक नया अध्याय लिखते हुए जम्मू-कश्मीर की टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में टीम ने कर्नाटक जैसी मजबूत टीम को पहली पारी में मिली विशाल बढ़त के आधार पर मात दी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश से टीम को बधाइयां मिल रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जम्मू-कश्मीर टीम की इस शानदार उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर टीम को बधाई देते हुए इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

मैच का लेखा-जोखा: कैसे मिली जीत
मैच में जम्मू-कश्मीर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 584 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस बड़े स्कोर के दबाव में कर्नाटक की पूरी टीम अपनी पहली पारी में महज 293 रनों पर सिमट गई। इस प्रदर्शन के आधार पर जम्मू-कश्मीर को 291 रनों की निर्णायक बढ़त हासिल हुई।

इसके बाद, अपनी दूसरी पारी में जम्मू-कश्मीर ने 4 विकेट के नुकसान पर 342 रन बनाए और अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। मैच के पांचवें और अंतिम दिन जब खेल ड्रॉ पर समाप्त करने का निर्णय लिया गया, तब पहली पारी की बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।

जीत के बाद जश्न का माहौल
जैसे ही अंपायरों ने मैच समाप्ति की घोषणा की, जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ खुशी से झूम उठे। मैदान पर जश्न का माहौल देखने लायक था, जिसमें खिलाड़ी और कोच अजय एक-दूसरे को इस ऐतिहासिक जीत की बधाई दे रहे थे। यह जीत न केवल टीम के लिए बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए एक अविस्मरणीय पल है।

होलिका दहन में किन महिलाओं को दूर रहना चाहिए

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होलिका दहन में किन महिलाओं को दूर रहना चाहिए
साल 2026 का होलिका दहन सिर्फ रंगों के त्योहार की शुरुआत नहीं है, बल्कि इस बार यह एक खास संयोग के कारण सुर्खियों में है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात चंद्र ग्रहण लगने की खबर ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया और गूगल पर यह सवाल खूब सर्च किया जा रहा है कि होलिका दहन 2 मार्च को करें या 3 मार्च को। इसके साथ ही एक और सवाल तेजी से सामने आया है, आखिर किन लोगों को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए?

हम सब जानते हैं कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा यह पर्व आस्था और विश्वास से भरा हुआ है। लेकिन परंपराओं में कुछ ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिनके अनुसार कुछ खास महिलाओं और बच्चों को जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए।

होलिका दहन का महत्व और प्रह्लाद की कथा
होलिका दहन की जड़ें पुराणों में मिलती हैं। कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। पिता ने उसे कई बार मारने की कोशिश की। अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई।

इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है। यह संदेश देता है कि सच्चाई और भक्ति की जीत होती है। लेकिन इसी अग्नि से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी हैं, जिनके कारण कुछ लोगों को इसे देखने से मना किया जाता है।

प्रेग्नेंट महिलाओं को क्यों नहीं देखना चाहिए होलिका दहन?
परंपरागत मान्यता के अनुसार गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। इसका कारण सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है। पहला कारण यह बताया जाता है कि होलिका की अग्नि तेज होती है और उससे निकलने वाला धुआं गर्भवती महिला के लिए ठीक नहीं होता। तेज गर्मी और धुआं उनके और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

दूसरी मान्यता यह है कि फाल्गुन पूर्णिमा की रात कुछ नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। ऐसे में गर्भवती महिला को घर के अंदर सुरक्षित रहने की सलाह दी जाती है। कई लोग यह भी कहते हैं कि गर्भवती महिला को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता, लेकिन परिवारों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है।

नवजात शिशु को होलिका दहन में क्यों नहीं ले जाना चाहिए?
मान्यता है कि नवजात शिशु बहुत कोमल और संवेदनशील होता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में होलिका दहन के दौरान आग का धुआं, भीड़ और शोर उसके लिए हानिकारक हो सकता है।

कई बुजुर्गों का मानना है कि इस रात नकारात्मक शक्तियां ज्यादा सक्रिय रहती हैं। इसलिए छोटे बच्चों को बाहर नहीं ले जाना चाहिए। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो भीड़ और धुएं से दूर रखना शिशु के लिए सुरक्षित होता है।

सास-बहू को साथ में क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती होली?
कुछ इलाकों में यह मान्यता है कि सास और बहू को एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से उनके रिश्तों में तनाव आ सकता है। यह पूरी तरह लोक परंपरा पर आधारित मान्यता है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन कई परिवार इसे आज भी मानते हैं। रिश्तों की मिठास बनाए रखने के लिए कुछ लोग इस परंपरा का पालन करते हैं।

इकलौती संतान की मां के लिए क्या है मान्यता?
यह भी माना जाता है कि जिन महिलाओं की सिर्फ एक संतान है, उन्हें होलिका दहन देखने से बचना चाहिए। इसका संबंध भक्त प्रह्लाद की कथा से जोड़ा जाता है, क्योंकि वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। ऐसा माना जाता है कि अग्नि से जुड़ी इस कथा के कारण इकलौती संतान की मां को सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है।

जिसकी शादी तय हो चुकी हो, वह क्यों न देखे होलिका दहन?
कई जगह यह परंपरा है कि जिस लड़की की शादी तय हो चुकी हो और वह नए जीवन की शुरुआत करने वाली हो, उसे होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि विवाह जीवन का नया अध्याय है और इस समय लड़की को किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहना चाहिए। इसलिए उसे जलती हुई होली देखने से मना किया जाता है।

होलिका दहन 2026 और चंद्र ग्रहण का संयोग
साल 2026 में होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग चर्चा में है। ग्रहण के समय पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों को लेकर अलग-अलग मत होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण का समय संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि लोग तिथि और मुहूर्त को लेकर भ्रम में हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानकर ही होलिका दहन करना चाहिए।

‘भय्यु लाला’ हत्याकांड का खुलासा, पत्नी रुखसाना ने ही गोली मारकर की हत्या

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‘भय्यु लाला’ हत्याकांड का खुलासा, पत्नी रुखसाना ने ही गोली मारकर की हत्या
मध्य प्रदेश के मंदसौर में 18 फरवरी को वांटेड आरोपी भय्यु लाला उर्फ वाहिद की संदिग्ध हत्या के मामले में पुलिस ने गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार मृतक की पत्नी रुखसाना ने ही आपसी विवाद के चलते गोली मारकर उसकी हत्या की थी, जबकि अन्य दो आरोपियों ने साक्ष्यों को छुपाने में रुकसाना की मदद की. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रुखसाना फिलहाल फरार है. गौरतलब है कि इस मामले में रुखसाना द्वारा पति की पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली से मृत्यु होने की वजह सामने आई जिससे पुलिस पर लगे आरोप झूठे साबित हुए.

पुलिस के डर से पलंग की पेटी में छुपा था मृतक
एडिशनल एसपी गरोठ हेमलता कुरील ने बताया कि, 18 फरवरी को सूचनाकर्ता याकुब पिता बाबर खान निवासी सुरजनी के द्वारा सूचना दी गई की मृतक वाहीद उर्फ भय्यु लाला पिता बाबर खान उम्र 42 साल निवासी सुरजनी पुलिस के डर से पलंग पेटी में छुपा था. जिसके बाद दम घुटने से उसकी मृत्यु हो गई थी.

उक्त सूचना पर धारा 194 बीएनएसएस के तहत मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई. मर्ग जांच के दौरान मृतक भय्यु लाला का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय मंदसौर में डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि मृतक भय्यु की मृत्यु गोली लगने से हुई है.

सहयोगी आरोपियों ने घटना के साक्ष्यों को छुपाने का किया प्रयास
घटना से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर अपराध क्रमांक 83/2026 धारा 103(1) और 238(ए) बीएनएस के तहत अज्ञात आरोपी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ के पर्यवेक्षण में एसआईटी टीम गठित की गई. गठित टीम ने घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर मौके पर उपस्थित संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की.

पूछताछ के दौरान संदिग्धों ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उक्त घटना मृतक भय्यु की पत्नी रुकसाना द्वारा घटित की गई थी और सहयोगी आरोपी सलमान खान और बबलु खान ने घटना के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें छुपाने का प्रयास किया. घटना में इस्तेमाल अवैध पिस्टल आरोपियों की निशानदेही पर बरामद कर ली गई है. आरोपी सलमान खान पिता जमाल खान पठान निवासी सुवासरा हाल मुकाम सुरजनी और बबलु खान पिता अब्दुल गनी पठान निवासी सुरजनी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा.

केन्द्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने तीन चीतों को बाड़े में किया रिलीज

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केन्द्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने तीन चीतों को बाड़े में किया रिलीज
विश्व प्रसिद्द कूनो नेशनल पार्क में आज बोत्स्वाना से 9 चीते पहुंचे, एक सादे समारोह में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इनमें से 3 चीतों को प्रतीकात्मक रूप से क्वारंटीन के लिए बनाये गये बाड़ों में रिलीज किया। उन्होंने चीता प्रोजेक्ट के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया और मध्य प्रदेश सरकार को शुभकामनायें दी, उन्होंने कहा मध्य प्रदेश की धरती को चीतों ने इसे अपना घर बना लिया है ये अच्छे संकेत हैं।

केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि बोत्सवाना से कूनो नेशनल पार्क में लाये गये चीतों से बोत्सवाना और भारत के बीच जैव विविधता संरक्षण की एक ऐतिहासिक साझेदारी प्रारंभ हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल और प्रयासों से भारत में चीतों के प्रतिस्थापन की योजना पूरी तरह से सफल रही है। बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन की दिशा में कई देश साथ आये हैं। भारत में चीता प्रोजेक्ट को साढ़े तीन साल का समय हो गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है।

45 कूनो नेशनल पार्क और 3 गांधी सागर अभ्यारण में
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 48 हो गई है, जिनमें 45 कूनो नेशनल पार्क और 3 गांधी सागर अभ्यारण में हैं। केन्द्रीय वन मंत्री ने कहा कि भारत के प्रयासों से विश्व में जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है और 97 देश इस मंच के सदस्य बन गये हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने 3 चीतों को बाड़े में छोड़ा
केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री यादव ने बोत्सवाना से आये 9 चीतों में से तीन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से क्वारंटीन के लिए बनाये गये बाड़ों में रिलीज किया। बता दें भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए तीन वर्ष पूर्व शुरू हुए चीता प्रोजेक्ट के तहत बोत्सवाना से लाये गये 9 चीते शनिवार को सुबह लगभग 9.30 बजे कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। वायुसेना के तीन हैलीकॉप्टर से ग्वालियर एयरपोर्ट से इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क में एयरलिफ्ट किया गया। इन चीतों में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने चीता रिलीज कार्यक्रम उपरांत बोत्सवाना से आये चीता विशेषज्ञ दल से भेंट कर चर्चा की, साथ ही उन्हें कूनो नेशनल पार्क की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किये।

बोत्सवाना से आये 9 चीतों में 3 नर 6 मादा
बोत्सवाना से 9 चीतों के आने के बाद अब प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है, इनमें से 45 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं। मंत्री यादव ने X पर लिखा- 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को भारत में लाया गया था और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया था। अब मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि बोत्सवाना से नौ चीते – 6 मादा और 3 नर – मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में आ गए हैं। भारत में 39 चीतों की अच्छी-खासी आबादी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। प्रधानमंत्र नरेंद्र मोद के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना ‘प्रोजेक्ट चीता’ एक बड़ी सफलता रही है। मैं बोत्सवाना से आए इन नए दोस्तों का स्वागत करता हूं और कामना करता हूं कि वे भारत के वन्य जीवन में खूब फलें-फूलें और अपनी संख्या बढ़ाएं।