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नेपाल के ‘₹100 नियम’ ने सीमावर्ती इलाकों में पैदा की भारी नाराजगी

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नेपाल के ‘₹100 नियम’ ने सीमावर्ती इलाकों में पैदा की भारी नाराजगी
भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सरकार द्वारा भंसार (कस्टम) नियमों में की गई सख्ती का असर अब आम जनजीवन के साथ सामाजिक परंपराओं तक पहुंच गया है। स्थिति यह है कि अब शादी-ब्याह में मिलने वाले उपहार भी जांच और कर के दायरे में आ रहे हैं। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में चिंता और असंतोष बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में नेपाल प्रशासन ने सीमा पार से आने वाले सामान पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, लगभग 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भी भंसार अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में कपड़े, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य घरेलू वस्तुएं भी जांच के बाद ही नेपाल में प्रवेश कर पा रही हैं। इस सख्ती का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोजमर्रा की जरूरतों या छोटे व्यवसाय के लिए सीमा पार करते हैं।

बढ़नी कस्बे से कृष्णानगर जाकर चाट और फुल्की बेचने वाले स्थानीय युवक ईलू और बम्मड़ को नेपाल पुलिस ने लिंक गेट से वापस कर दिया। इसी तरह फुटकर में पेय पदार्थ, अंडा और सरसों का तेल लेकर जाने वाले कई लोगों को भी लौटा दिया जा रहा है, क्योंकि इन वस्तुओं का भंसार नहीं हो पा रहा है।

सामाजिक स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रिश्तेदारी और पारिवारिक आयोजनों में उपहारों का आदान-प्रदान सामान्य परंपरा रही है। अब लोग शादी में मिले सामान को सीमा पार ले जाने से पहले उसकी कीमत और संभावित भंसार को लेकर असमंजस में हैं।

चंद्रौटा शिवपुरी निवासी सुंदर चौधरी और खरेंद्रपुर निवासी रामबरन ने बताया कि इटवा में आयोजित शादी से लौटते समय उनके साथ लाए गए उपहारों को भंसार कर्मियों ने रोक लिया और कर अदा करने के बाद ही उन्हें आगे जाने दिया गया। नेपाल के स्थानीय व्यापारी और नागरिक भी इस सख्ती को लेकर चिंतित हैं।

कृष्णानगर निवासी अनिल अग्रवाल, बिपिन गुप्ता और कौशलेश चतुर्वेदी का कहना है कि इससे न केवल छोटे व्यापार प्रभावित होंगे, बल्कि वर्षों से चले आ रहे सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ेगा। लोगों में इस नियम को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

क्यों लिया गया ये फैसला?
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और अवैध वस्तुओं की आवाजाही पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कृष्णानगर भंसार कार्यालय के सूचना अधिकारी मयंक कुमार कर्ण के अनुसार, यह नियम पहले से लागू था, लेकिन अब सख्ती से इसका पालन कराया जा रहा है। फिलहाल, इस सख्ती ने सीमा क्षेत्र के लोगों की दिनचर्या और सामाजिक जीवन दोनों को प्रभावित कर दिया है, जिससे समाधान की उम्मीद में लोग प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कु. प्रतिभा सिहं को वीडियो कॉल पर दी बधाई

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कु. प्रतिभा सिहं को वीडियो कॉल पर दी बधाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान पर आई पन्ना जिले की छात्रा कु. प्रतिभा सिंह को वीडियो कॉल के माध्यम से बधाई और शाबासी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कु. प्रतिभा के परिजन से भी बातचीत की। पन्ना जिले में रोजगार सहायक के पद पर पदस्थ कु. प्रतिभा के पिता भारतेंदु सिंह सोलंकी को भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बधाई दी। कु. प्रतिभा की माता शिक्षिका हैं। प्रतिभा ने यह उपलब्धि प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बातचीत में कु. प्रतिभा ने बताया कि वो प्रतिदिन सात आठ घटे अध्ययन किया करती थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कु. प्रतिभा ने यह भी बताया कि उसकी इच्छा प्रशासनिक सेवाओं में जाने की है। वो अपने लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कु. प्रतिभा को स्कूली और उच्च शिक्षा स्तर पर निरंतर सफलताएं प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को किया संबोधित

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण कार्यों को पूरा करते हुए मध्यप्रदेश सहित देश को सशक्त बनाया है। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है। हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं। गुरुवार 16 अप्रैल 2026 महिला सशक्तिकरण की मंगलमय तारीख होगी। देश की विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का विषय आएगा तो वह समय देश में होली-दीवाली एक साथ मनाने जैसा होगा। शासन के सूत्र जब बहनों के हाथ में आते हैं तो संवेदनशीलता से परिपूर्ण कितने नवाचार किए जा सकते हैं, इसके कई उत्कृष्ट उदाहरण हमारे सामने हैं। मध्यप्रदेश रानी दुर्गावती की धरती है। राज्य सरकार ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती मनाई। उनकी शासन व्यवस्था में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बलबूते पर काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम बनाया। सभी तीर्थ स्थलों पर अन्न क्षेत्र और यात्रियों के रुकने की व्यवस्था कराई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक सशक्तिकरण का नया युग आरंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम-प्रबुद्ध जन सम्मेलन” को संबोधित कर रहे थे। रविंद्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में कार्यक्रम वंदे मातरम गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं, नगरीय निकायों तथा पंचायत राज संस्थाओं की प्रतिनिधियों, महिला पत्रकार, छात्राएं शामिल हुईं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोर्ड परीक्षा में टॉपर बालिकाओं को सराहा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंड्री और हाई स्कूल परीक्षा की टॉपर छात्राओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाली छात्राओं का अंगवस्त्रम के साथ नारियल और पौधा भेंट कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, नागरिक विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी, पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह, शिक्षाविद सु शोभा पैठनकर, विधायक एवं पूर्व मंत्री मती अर्चना चिटनिस और सांसद मती लता वानखेड़े विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम में जवाहर बाल भवन की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना का गायन किया।

मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण किए प्रस्तुत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नारी शक्ति के वंदन का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश के नगरीय निकायों में बहनों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के आधे से अधिक स्थानीय निकायों की कमान बहनें संभाल रही हैं। लोकसभा में हमारी 6 बहनें सांसद और विधानसभा में 27 बहनें विधायक हैं। प्रदेश में 5 महिला मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। मध्यप्रदेश में महिलाओं ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ग्वालियर अंचल से राजमाता विजया राजे सिंधिया ने तत्कालीन सरकार को छोड़ा और प्रदेश में पहली संविद सरकार बनाई । विनम्रता की प्रतिमूर्ति राजमाता ने कभी कोई पद नहीं लिया और जनता के लिए कार्य करती रहीं। इंदौर की बहन मती सुमित्रा महाजन लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष रहीं। पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज ने भी लोकसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। आज देश का राष्ट्रपति का पद मती द्रोपदी मुर्मु संभाल रही हैं।

महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में देश सशक्त हो रहा है। महिला कल्याण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास उनकी प्राथमिकता है। इसी क्रम में हमारी बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने का उल्लेखनीय कार्य भी हुआ है। देश में महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। जन चेतना के लिए नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाना आवश्यक है। इससे हमारा लोकतंत्र अधिक समावेशी, सशक्त और संवेदनशील बनेगा।

सभी वर्गों और पार्टियों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग अपेक्षित : भूरिया
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लागू होने जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश में नारी शक्ति को सशक्त नेतृत्व के और अधिक अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं को आरक्षण देने की पहल की है। इससे देश की विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी होगी। देश के नीतिगत निर्णयों में मातृ शक्ति की हिस्सेदारी बढ़ेगी। राज्य सरकार भी नारी सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, जिसका लाभ प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। पहली बार महेश्वर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित कैबिनेट हुई और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पूरा वर्ष नारी कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। अब समय आ गया है कि देश के सभी वर्गों और दलों के प्रतिनिधियों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में सहयोग करना चाहिए। हमारा हर कदम देश-प्रदेश को आगे ले जाने के लिए होगा।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम : राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर
नारी शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाए गए 106वें संविधान संशोधन के माध्यम से देश की करोड़ों महिलाओं को वह सम्मान और संवैधानिक शक्ति मिली है, जिसका 1996 से 2010 तक लंबा इंतजार किया गया था। मती गौर ने वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं के 14% और मध्यप्रदेश विधानसभा में 11% के सीमित प्रतिनिधित्व का उल्लेख करते हुए जोर दिया कि 33% आरक्षण का यह कानून इस खाई को पाटकर महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने वाली निर्णायक भूमिका में लाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि नारी शक्ति को ‘लाभार्थी’ से ‘राष्ट्र निर्माण की सारथी’ बनाने की एक विचार यात्रा है, जहाँ महिलाएँ अंतरिक्ष से लेकर सुरक्षा तक हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की बेटियों के आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी जीवन की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि जब नारी सशक्त और निर्णायक भूमिका में होगी, तभी राष्ट्र पूर्णतः सशक्त होगा।

नारी अब प्रतिभागी नहीं, नेतृत्व की भूमिका में है : पैठणकर
मातृशक्ति वंदन कार्यक्रम में शिक्षाविद शोभा पैठणकर ने नारी के गौरवशाली स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को केवल संघर्ष की ‘चिंगारी’ ही नहीं, बल्कि स्नेह और सुगंध बिखेरने वाला ‘फूल’ भी माना गया है। उन्होंने भगवद गीता के संदर्भ से स्त्री के सात दिव्य गुणों— वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा—को उनकी स्वाभाविक शक्ति बताया, जो परिवार को संस्कारों से जोड़े रखती है। अपने संबोधन में उन्होंने सावित्रीबाई फुले के शिक्षा के प्रति संघर्ष, जीजाबाई के संस्कारों, रानी लक्ष्मीबाई व दुर्गावती के शौर्य और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के आदर्श प्रशासन का उल्लेख करते हुए बताया कि इतिहास से वर्तमान तक नारी ने हर कठिन परिस्थिति में समाज के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कारण ही आज महिलाएँ सेना, विज्ञान, खेल और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। सु पैठणकर ने आह्वान किया कि नारी अब केवल प्रतिभागी नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका में है और अपनी सृजनशीलता व सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में निर्णायक योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की योजनाओं की समीक्षा

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की योजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को निर्बाध रूप से सस्ती बिजली सुलभ कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस काम केलिए सरकार किसानों को हर जरूरी मदद देने को तैयार है। किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, तो वे अपना उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे और प्रदेश की प्रगति में भी योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा प्राप्ति के लिए उन्हें स्वयं ऊर्जा उत्पादक बनाया जाए। इसके लिए किसानों को हरित ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर ही हम किसानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सोलर पम्प का उपयोग करने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को जो इससे जुड़ना चाहते हैं, विभाग उनका हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन भी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की प्रचलित योजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राज्य के हित में किसानों और नागरिकों सभी को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए समर्पित और फोकस्ड होकर आगे बढ़ें। किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की प्रगति में भी तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 2 लाख से अधिक किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। विभाग अपनी योजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और नई जरूरतों के मुताबिक इन लक्ष्यों में वृद्धि करें, ताकि कम समय में अधिकतम लोगों को लाभ मिले। इसके लिए विभाग अपनी योजनाओं को टाइम फ्रेम में लेकर आएं और तय समय सीमा में ही लक्ष्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। इससे तेज और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

निकाय पदाधिकारियों के साथ भोपाल में होगा एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीयनिकाय कचरा बेचकर और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (रूफ टॉप स्कीम) में तेजी से प्रगति लाकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को इस विषय में प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाए। यह कार्यक्रम जल्दी ही किया जाए, ताकि निकायों को काम करने के लिए अधिकतम समय मिल सके।

राज्य के ऊर्जा हितों का रखें विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुरैना में 2 हजार मेगावॉट (2 गीगावॉट) की अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क की स्थापना की प्रगति की जानकारी लेकर कहा कि इस मेगा परियोजना में राज्य के ऊर्जा हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु वास्तव ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मात्र पीक पीरियड में ही ग्रीन एनर्जी सप्लाय की मंशा व्यक्त की गई है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार के वरिष्ठतम विभागीय अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन में शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का पारित होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में नारी का स्थान सर्वोच्च है। हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं और ऐश्वर्य के लिए माता लक्ष्मी, बुद्धि के लिए सरस्वती और बल के लिए दुर्गा की आराधना की जाती हैं। साय ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के प्रयास पहले भी हुए, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू करने का साहसिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम इस वर्ष को प्रदेश में ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रहे हैं और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हुआ है और प्रदेश विकास के नए मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नया संबल मिलेगा। कार्यक्रम में “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” के संकल्प को दोहराया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही 14 लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस दौरान पुष्प के साथ महिलाओं का अभिनंदन कर बधाई और शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति और संकल्प उन्हें बड़े निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं। महिलाओं को जिम्मेदारी मिले तो वे देश की तस्वीर बदल सकती हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक लागू होगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
कार्यक्रम में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पद्म ऊषा बारले, विधायक पुरंदर मिश्रा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, पद्म ऊषा बारले, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी नीता डोंगरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से शिक्षा के अधिकार को मिला नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से शिक्षा के अधिकार को मिला नया विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।

उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो।

पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।

यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ

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मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी। साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

2026 में 19 साल बाद बन रहा 8 ‘बड़े मंगल’ का महासंयोग

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2026 में 19 साल बाद बन रहा 8 ‘बड़े मंगल’ का महासंयोग
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ (जेठ) के महीने का एक अलग ही महत्व है, खासकर हनुमान भक्तों के लिए। इस महीने में पड़ने वाले मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है। लेकिन, साल 2026 कोई साधारण साल नहीं होने वाला है। इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है जो पिछले 19 सालों में नहीं हुआ।

क्यों खास है 2026 का बड़ा मंगल?
आमतौर पर ज्येष्ठ के महीने में 4 या 5 बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन साल 2026 में हनुमान जी की कृपा बरसाने के लिए पूरे 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, यह एक बेहद दुर्लभ संयोग है जो करीब 19 साल बाद बन रहा है।

इस साल ज्येष्ठ का महीना थोड़ा लंबा होने के कारण भक्तों को बजरंगबली की सेवा करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। लखनऊ सहित पूरे उत्तर भारत में इस दौरान भंडारों और सेवा की एक अलग ही लहर देखने को मिलती है।

क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा?
धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों (जैसे रामचरितमानस और क्षेत्रीय लोक कथाओं) के अनुसार, ज्येष्ठ के महीने में ही भगवान राम की मुलाकात अपने परम भक्त हनुमान जी से हुई थी। इसी महीने में हनुमान जी ने भीम का घमंड भी तोड़ा था, इसलिए उन्हें ‘बुढ़वा मंगल’ (वृद्ध हनुमान) के रूप में पूजा जाता है।

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हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी तिथियों का ऐसा संयोग बनता है, तो वह कालखंड पूजा-पाठ के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

2026 बड़े मंगल की महत्वपूर्ण तारीखें
अगर आप भी हनुमान जी के दर्शन और भंडारे की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को नोट कर लें:

पहला बड़ा मंगल: 5 मई 2026

दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई 2026

तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई 2026

चौथा बड़ा मंगल: 26 मई 2026

पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून 2026

छठा बड़ा मंगल: 9 जून 2026

सातवां बड़ा मंगल: 16 जून 2026

आठवां बड़ा मंगल: 23 जून 2026

कैसे करें बजरंगबली को प्रसन्न?
इस खास संयोग का लाभ उठाने के लिए आप कुछ सरल उपाय कर सकते हैं:

सुंदरकांड का पाठ: इन आठों मंगल के दौरान सुंदरकांड का पाठ करना मानसिक शांति और तरक्की दिलाता है।

भंडारा और सेवा: राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना या शरबत का वितरण करना इस चिलचिलाती गर्मी में सबसे बड़ी सेवा मानी गई है।

चोला अर्पण: हनुमान जी को सिंदूरी चोला और चमेली का तेल अर्पित करने से कष्ट दूर होते हैं।

युद्ध रोकने की आखिरी कोशिश- ‘शांति दूत’ बनकर ईरान पहुंचे मुनीर, क्या टल जाएगा महाविनाश

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युद्ध रोकने की आखिरी कोशिश- ‘शांति दूत’ बनकर ईरान पहुंचे मुनीर, क्या टल जाएगा महाविनाश
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान पहुंच गए हैं। मुनीर अमेरिका का संदेश लेकर तेहरान गए हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सरकारी मीडिया ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल US का संदेश तेहरान तक पहुंचाने और दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी के लिए ईरान आया है।

ट्रंप का संदेश लेकर ईरान पहुंचे मुनीर
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत हुई थी। हालांकि इस शांति-वार्ता से कोई हल नहीं निकला। लेकिन दोनों देशों के बीच अभी भी बातचीत जारी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 14 अप्रैल को न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में कंफर्म किया कि अमेरिका और ईरान फिर एक बार बातचीत के लिए इस्लामाबाद में ही मिलेंगे।

ट्रंप ने पाकिस्तान में होने वाली दूसरी वार्ता को लेकर कहा, ‘इस बात की ज्यादा संभावना है कि हम वहीं वापस जाएंगे। हम किसी ऐसे देश में क्यों जाएं जिसका इस मामले से कोई लेना-देना ही न हो।’

पहली बार ईरान गए आर्मी चीफ
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस युद्ध के बीच पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर पहली बार ईरान गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का जरिया पाकिस्तान ही बना हुआ है।

सम्राट कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे 29 मंत्रालय, गृह और स्वास्थ्य की भी कमान

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सम्राट कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे 29 मंत्रालय, गृह और स्वास्थ्य की भी कमान
बिहार में सत्ता परिवर्तन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद विभागों का जो बंटवारा हुआ है, वह महज एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है। इस आवंटन के पीछे 2025 के विधानसभा चुनावों के नतीजों का प्रभाव और भविष्य की दूरगामी राजनीतिक रणनीति साफ नजर आती है। इस बंटवारे को मुख्य रूप से चार बड़े पैमानों पर कसकर तैयार किया गया है। पिछले दो दशकों में भाजपा बिहार में हमेशा JDU की जूनियर पार्टनर रही थी। लेकिन अब स्थिति उलट गई है। विभागों के बंटवारे में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का रखा गया है कि राज्य की ‘हार्ड पावर’ भाजपा के पास रहे। गृह मंत्रालय और सामान्य प्रशासन सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखा है। इसका मतलब है कि पुलिस, कानून-व्यवस्था, और नौकरशाही की पूरी कमान अब भाजपा मुख्यालय के विजन से चलेगी ज्यादातर अहम विभाग CM के पास हैं। 29 विभागों का सीधा नियंत्रण मुख्यमंत्री के पास रखना यह संदेश देता है कि सरकार का चेहरा और स्टीयरिंग दोनों भाजपा के ही हाथ में हैं।

सोशल इंजीनियरिंग और जातीय समीकरण
बिहार की राजनीति बिना जातीय गणित के पूरी नहीं होती। कैबिनेट बंटवारे में इसका विशेष ध्यान रखा गया है।

‘लव-कुश’ और ‘यादव’ कार्ड: सम्राट चौधरी (कुशवाहा) के रूप में मुख्यमंत्री देकर भाजपा ने ‘लव-कुश’ समीकरण को साधा है। वहीं, बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाकर सीधे तौर पर RJD के ‘यादव’ वोट बैंक में यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि NDA में भी उनके समुदाय को सत्ता के शीर्ष पर हिस्सेदारी मिल रही है।

सवर्ण संतुलन: विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) को अहम पद और मंत्रालय देकर सवर्ण मतदाताओं, जो भाजपा का कोर वोटर बेस रहे हैं, को यह भरोसा दिलाया गया है कि नई व्यवस्था में उनका वर्चस्व कायम रहेगा।

JDU का सम्मान और गठबंधन धर्म
नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति (राज्यसभा) में शिफ्ट होने के बाद, JDU विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी तरह के असंतोष को रोकना जरूरी था। विभागों का बंटवारा करते समय भाजपा ने ‘विनर टेक्स ऑल’ की नीति नहीं अपनाई। JDU के दोनों वरिष्ठ नेताओं (विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव) को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वित्त, ऊर्जा, शिक्षा और जल संसाधन जैसे भारी-भरकम और जनता से सीधे जुड़े विभाग JDU के कोटे में रखकर उन्हें यह महसूस कराया गया है कि सरकार के विकास कार्यों में उनकी भूमिका अभी भी बराबर की है।

अनुभव और सुशासन पर जोर
प्रशासनिक अनुभव को भी तरजीह दी गई है ताकि विपक्ष (RJD) को सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठाने का मौका न मिले।

वित्तीय प्रबंधन: बिजेंद्र प्रसाद यादव दशकों से ऊर्जा और वित्त विभाग संभाल रहे हैं। राज्य का राजकोषीय घाटा न बढ़े और आर्थिक नीतियां स्थिर रहें, इसलिए इन विभागों के साथ कोई नया प्रयोग नहीं किया गया।

शिक्षा और ग्रामीण विकास: ये विभाग सीधे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य से जुड़े हैं। इन्हें विजय कुमार चौधरी जैसे संयमित और विवादरहित छवि वाले अनुभवी नेता को सौंपा गया है।

जातीय समीकरणों का पूरा रणनीतिक इस्तेमाल किया
बहरहाल सम्राट चौधरी की कैबिनेट का यह पहला स्वरूप बताता है कि विभागों का बंटवारा ‘नियंत्रण, अनुभव और संतुलन’ की शानदार पटकथा पर आधारित है। भाजपा ने कमान अपने हाथ में रखी है, लेकिन JDU के अनुभव और जातीय समीकरणों का पूरा रणनीतिक इस्तेमाल किया है।

ये है विभागों के बंटवारे के पीछे की कहानी
बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव और नीतीश कुमार के 21 साल के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद सत्ता का केंद्र पूरी तरह से बदल गया है। 15 अप्रेल 2026 को बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी ने अपनी नई कैबिनेट के विभागों का बंटवारा कर दिया है। सत्ता के इस नए दौर में विभागों का संकेंद्रण मुख्यमंत्री और JDU कोटे के दो उप मुख्यमंत्रियों के बीच ही रखा गया है, जो एक सोची-समझी सियासी रणनीति का हिस्सा हैं। आइए समझते हैं कि नई सरकार में किस नेता को कौन सा विभाग मिला है और इसके पीछे एनडीए का रणनीतिक गणित क्या है:

सम्राट चौधरी (मुख्यमंत्री) – 29 विभाग
प्रमुख विभाग: गृह, सामान्य प्रशासन, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, नगर विकास, पर्यटन, और कला एवं संस्कृति।

ये विभाग अपने पास क्यों रखे ?
कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण: मुख्यमंत्री ने सबसे महत्वपूर्ण ‘गृह मंत्रालय’ अपने पास ही रखा है। इसका सीधा संदेश है कि राज्य की पुलिस, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर अब भाजपा का पूर्ण और सीधा नियंत्रण रहेगा।

प्रशासनिक सत्ता का केंद्रीयकरण: 29 प्रमुख विभागों की कमान अपने हाथों में रखकर सम्राट चौधरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के कोर गवर्नेंस और प्रशासनिक फैसलों में भाजपा का विजन ही सर्वोपरि होगा।

विकास का एजेंडा: स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सीधे तौर पर जनता और राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े विभाग हैं। ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास मॉडल को अपनी लीडरशिप में तेज गति देने के लिए सीएम ने इन्हें खुद संभाला है।

विजय कुमार चौधरी (उप मुख्यमंत्री) – 10 विभाग
प्रमुख विभाग: जल संसाधन, शिक्षा, उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, परिवहन, अल्पसंख्यक कल्याण और संसदीय कार्य।

इन्हें ये विभाग क्यों दिए गए?
गठबंधन का संतुलन : नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद JDU के भीतर सत्ता का संतुलन साधना जरूरी था। विजय चौधरी, नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक हैं, इसलिए उन्हें बड़े और अहम मंत्रालय देकर JDU कोटे को संतुष्ट किया गया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमन कैपिटल पर फोकस: शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे बड़े बजट और व्यापक जन-संपर्क वाले विभागों की जिम्मेदारी एक ऐसे अनुभवी नेता को दी गई है, जिनके पास लंबा और विवादरहित प्रशासनिक अनुभव है।

बिजेंद्र प्रसाद यादव (उप मुख्यमंत्री) – 8 विभाग
प्रमुख विभाग: वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, और उत्पाद व निबंधन।

इन्हें ये विभाग क्यों दिए गए ?
मजबूत जातीय समीकरण (यादव कार्ड): बिजेंद्र प्रसाद यादव की उपमुख्यमंत्री के रूप में पदोन्नति एक बहुत बड़ा सियासी दांव है। बिहार में NDA सरकार के दौरान सत्ता के शीर्ष केंद्र में यादव समुदाय की यह पहली इतनी बड़ी और निर्णायक एंट्री है। यह सीधे तौर पर विपक्ष (RJD) के कोर ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति है।

राजकोषीय प्रबंधन का अनुभव
ऊर्जा और वित्त राज्य के खजाने और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बिजेंद्र यादव पिछले कई दशकों से इन विभागों को सफलतापूर्वक संभालते रहे हैं, इसलिए राज्य की माली हालत दुरुस्त रखने के मोर्चे पर उन्हीं पर भरोसा जताया गया है।

भाजपा अब बिहार में ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका से पूरी तरह बाहर आ चुकी
बहरहाल सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुआ यह पोर्टफोलियो आवंटन स्पष्ट करता है कि भाजपा अब बिहार में ‘जूनियर पार्टनर’ की अपनी पुरानी भूमिका से पूरी तरह बाहर आ चुकी है। 2025 के विधानसभा चुनावों में मिली भारी जीत के बाद, सरकार ने JDU कोटे को अहम जिम्मेदारियां देकर सम्मान तो दिया है, लेकिन भाजपा ने सत्ता का असली स्टीयरिंग पूरी तरह से अपने हाथों में ले ले लिया है।