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IPL में संजू सैमसन ने लगाया शतक का ‘पंजा’, वानखेड़े में चेन्नई ने ठोके 207 रन

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IPL में संजू सैमसन ने लगाया शतक का ‘पंजा’, वानखेड़े में चेन्नई ने ठोके 207 रन
चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 207 रन बना लिए हैं. संजू सैमसन ने अपने आईपीएल करियर का पांचवां और IPL 2026 सीजन का दूसरा शतक लगा दिया है. उन्होंने पारी की सबसे आखिरी गेंद पर शतक पूरा किया. इंडियन प्रीमियर लीग में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में उन्होंने केएल राहुल की बराबरी कर ली है. उन्होंने भी आईपीएल में कुल 5 शतक जड़े हैं. चेन्नई द्वारा बनाए गए 207 रन, यह CSK का मुंबई इंडियंस के खिलाफ तीसरा सबसे बड़ा स्कोर भी है.

सैमसन ने लगाया शतक का पंजा
संजू सैमसन ने अपने IPL करियर की 179वीं पारी में पांचवां शतक लगाया है. अब इंडियन प्रीमियर लीग में शतक लगाने के मामले में केवल विराट कोहली, क्रिस गेल, जोस बटलर ही उनसे आगे हैं. विराट ने 8 शतक लगाए हैं, बटलर के नाम 7 शतक और गेल ने अपने ऐतिहासिक करियर में सेंचुरी लगाई थीं. केएल राहुल और संजू सैमसन पांच-पांच बार शतक लगा चुके हैं. सैमसन ने मुंबई के खिलाफ 101 रन बनाए. वो 3 रन और बना लेते तो अपने आईपीएल करियर मीइन 5000 रनों का आंकड़ा छू लेते.

वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन ने इंदौर में लेंसकार्ट के शोरूम के बाहर किया प्रदर्शन

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वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन ने इंदौर में लेंसकार्ट के शोरूम के बाहर किया प्रदर्शन
इंदौर में लेंसकार्ट शोरूम के बाहर गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। दरअसल वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने कंपनी की ड्रेस कोड नीति का विरोध करते हुए चश्मे तोड़कर अपना गुस्सा जताया। वहीं प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ नारे लगाए गए। दरअसल प्रदर्शन स्कीम-54 इलाके में स्थित लेंसकार्ट के शोरूम के बाहर किया गया। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने महिला कर्मचारियों को तिलक लगाया और कहा कि वे बिना किसी डर के अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ काम करें।

दरअसल सिद्धेश्वर धाम के पीठाधीश्वर स्वामी अतुल आनंद महाराज भी इस दौरान मौजूद रहे। विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर किसी धर्म के प्रतीकों को अनुमति दी जा सकती है, तो दूसरे धर्म के प्रतीकों पर रोक लगाना गलत है।

ड्रेस कोड नीति पर वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन का विरोध
वहीं ड्रेस कोड को लेकर यह विवाद तब बढ़ा जब संगठन के नेताओं ने दावा किया कि कंपनी की आंतरिक नीति में कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका गया है। इस आरोप के बाद वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू किया। वहीं संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को हिजाब पहनने की अनुमति दी जाती है तो हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाना भेदभाव माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती है।

कंपनी का जवाब क्या है?
दरअसल प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के चश्मों को तोड़कर कंपनी के खिलाफ गुस्सा जताया। संगठन ने यह भी घोषणा की कि अगर कंपनी ने अपनी नीति में स्पष्ट बदलाव नहीं किया तो पूरे मध्य प्रदेश में उसके उत्पादों का बहिष्कार किया जाएगा। महिला प्रदेश अध्यक्ष सुनीता जायसवाल समेत कई महिलाओं ने भी इस विरोध में हिस्सा लिया और कहा कि धार्मिक पहचान पर रोक लगाना गलत है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद कंपनी की ओर से सफाई भी सामने आई है। दरअसल लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने कहा है कि सोशल मीडिया पर जो दस्तावेज वायरल हो रहा है वह पुराना है और वर्तमान नीति अलग है।

कंपनी के अनुसार नई स्टाइल गाइड में किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक पर प्रतिबंध नहीं है। इसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों की अनुमति दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि अगर पुराने दस्तावेज की वजह से लोगों में भ्रम पैदा हुआ है तो इसके लिए खेद है।

झालमुड़ी मैंने खाई और मिर्ची TMC को लगी -पीएम मोदी

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झालमुड़ी मैंने खाई और मिर्ची TMC को लगी -पीएम मोदी
पश्चिम बंगाल में आज 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हो रहा है, पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो रहा है, दो तीन जगहों पर हंगामे और मारपीट की घटनाओं को छोड़कर प्रदेश में मतदान शांतिपूर्ण बताया जा रहा है, लोगों में वोटिंग के लिए भारी उत्साह देखा जा रहा है, लोग घरों से निकल रहे हैं मतदान केंद्रों पर लम्बी लम्बी लाइन लगी है उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे चरण के चुनाव के लिए आज बंगाल में दौरे पर है उन्होंने ममता बनर्जी और टीएमसी सरकार पर बड़ा हमला बोला है और उत्साहपूर्ण मतदान के लिए मतदाताओं का अभिनन्दन किया है।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से पहले चरण में 152 सीटों पर आज मतदान हो रहा है दूसरे चरण में शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा, भाजपा ने दूसरे चरण की तैयारियां भी तेज कर दी है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इसी क्रम में बंगाल में मौजूद हैं वे उन सीटों पर प्रचार कर रहे हैं जहाँ दूसरे चरण में वोट डाले जायेंगे, पीएम ने कृष्णानगर में चुनावी सभा को संबोधित किया, उन्होंने कहा कृष्णानगर में आज भय पर भरोसे की विजय का विश्वास दिख रहा है। ये उत्साह, ये उमंग, ये जोश भरोसे का है। भय जा रहा है, भरोसा आगे बढ़ रहा है। बरसों से जिनकी आवाज को दबाकर रखा गया था, वो अब एक सुर में बोल रहे हैं।

इस बार मतदान के नए रिकॉर्ड बनने चाहिए
पीएम मोदी ने कहा आज पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग चल रही है। मैं सभी मतदाता साथियों का अभिनंदन करता हूं। मेरा सभी मतदाताओं से आग्रह है कि इस बार मतदान के नए रिकॉर्ड बनने चाहिए। लोकतंत्र का ये उत्सव हमें पूरे जोश से मनाना है। मैं देख रहा हूं, मैं जबसे राजनीति में आया हूं, मैं कह सकता हूं कि पिछले 50 साल में ये पहला चुनाव ऐसा है, जिसमें हिंसा कम से कम हुई है।

चुनाव आयोग और सरकारी कर्मचारियों का जताया आभार
वरना हर हफ्ते किसी न किसी को फांसी पर लटका देते थे और बोल देते थे कि आत्महत्या कर ली। एक प्रकार से गुंडाराज चलता था। मैं चुनाव आयोग का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने फिर से एक बार बंगाल की धरती पर लोकतंत्र की प्रतिष्ठा की है। शांतिपूर्ण मतदान कराने में चुनाव आयोग की ये सफलता बहुत बड़ी सिद्धि है। मैं यहां के सरकारी कर्मचारियों का भी अभिनंदन करता हूं कि वे भी इस बार शांतिपूर्ण मतदान में बहुत जिम्मेदारी पूर्वक अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं।

शिक्षकों के लिए हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पेंशन का रास्ता साफ

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शिक्षकों के लिए हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पेंशन का रास्ता साफ
शिक्षकों के लिए हाई कोर्ट का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने शिक्षक एलबी राजेंद्र प्रसाद पटेल की याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य शासन की अपील को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने शिक्षाकर्मी एलबी राजेंद्र की पूर्व सेवा गणना के आधार पर पेंशन के प्रकरणों का निर्धारण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ओपीएस में पूर्व सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ओल्ड पेंशन स्कीम में शामिल करने की मांग की थी
चिरमिरी नगर निगम में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर संविलियन से पूर्व की सेवा को ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) में शामिल करने की मांग की थी। याचिका में कहा है कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में नहीं जोड़ा जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।

सरकार ने फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे। इसके लिए सरकार को 120 दिनों का समय भी दिया गया था। हालांकि, इस निर्देश पर अमल करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी थी।

कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया
डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल भी पक्षकार के रूप में शामिल रहे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में हुई। राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविलियन की शर्तों का हवाला दिया। सरकार का तर्क था कि संविलियन के समय जो शर्तें तय की गई थीं, उसी के आधार पर पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संविलियन के दौरान पूर्व सेवा की गणना को मान्यता दी गई है, तो फिर पुरानी पेंशन योजना में उसे शामिल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने माना कि पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।

सीएम मोहन यादव ने सागर में महिला आरक्षण पर कांग्रेस को घेरा

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सीएम मोहन यादव ने सागर में महिला आरक्षण पर कांग्रेस को घेरा
विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन करने के लिए सागर जिले के नरयावली पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की भावना थी कि हमारी बहनों के लिए उनका अधिकार दिया जाए। इसके लिए उन्होंने जितने प्रयास करने थे, सब कर लिए। मगर कौरवों की तरह इस कांग्रेस का मन नहीं था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहनों को विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण दिलवाने के लिए हमारी सरकार लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस को बहनों को उनका अधिकार देने में जरा भी दया नहीं आई।

तीन तलाक और लाडली बहना योजना का उल्लेख
तीन तलाक के मामले में भी राहुल गांधी के पिता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठुकरा दिया था। यहां राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के माध्यम से बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सौगात दे रही है। 17 जिलों में महिला कलेक्टर हैं। 10 से अधिक जिलों में एसपी महिलाएं हैं। सागर जिले में ही सांसद, महापौर महिलाएं हैं। कांग्रेस को यह नहीं सुहाता है। बहनों गांठ बांधकर रखना, जिस दिन जरूरत पड़ी तो कांग्रेस से हिसाब जरूर लेना। हमारा पूर्ण संकल्प है कि आज नहीं तो कल इन बहनों को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलवा कर रहेंगे।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी
आयोजन में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, सागर विधायक शैलेंद्र जैन, देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, बीना विधायक निर्मला सप्रे आदि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल गेहूं का उत्पादन दोगुना हुआ है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण बारदाने की जो समस्या आई उसका विकल्प तैयार किया जा रहा है। किसान चिंता न करें, सरकार उनकी उपज का दाना-दाना खरीदेगी।

मध्यप्रदेश SC-ST आयोग में नए अध्यक्ष और सदस्य नियुक्त किए गए

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मध्यप्रदेश SC-ST आयोग में नए अध्यक्ष और सदस्य नियुक्त किए गए
मध्य प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजाति आयोग और अनुसूचित जाति आयोग में नए अध्यक्ष और सदस्यों की अस्थाई नियुक्ति (MP Posting 2026) की गई है। यह कदम पुनर्गठन संबंधित अधिनियम 1995 के प्रवधानों के तहत उठाया गया है। नियुक्ति से संबंधित दो अलग-अलग आदेश 23 अप्रैल 2026 को जारी किए गए हैं।

अनुसूचित जाति (SC) आयोग में अध्यक्ष के तौर पर कैलाश जाटव को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा दो सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है। अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग में रामलाल रौतेल को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा दो मेंबर्स की नियुक्ति भी की गई है। सभी तीन वर्षों की अवधि के लिए यह कार्यभार ग्रहण करेंगे।

एमपी SC आयोग नियुक्ति
मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग में रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है। अनुसूचित जाति विकास विभाग/आयुक्त या संचालक पदेन सदस्य के रूप में आयोग का हिस्सा रहेंगे। इसे संबंधित आदेश अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के उप सचिव शंकर लाल सिंगाड़े ने गुरुवार को राज्यपाल से नाम से जारी किया है।

अनुसूचित जनजाति आयोग नियुक्तियाँ
मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग में भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है। राज्यपाल ने अध्यक्ष और सदस्यों की ने नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। जनजातिय कार्य विभाग के अवर सचिव आर.एस. वर्मा ने संबंधित आदेश जारी किया है, जो अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

ज्येष्ठ का महीना और भक्ति का संगम, इन 5 नियमों के पालन से दूर होंगे सारे कष्ट

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ज्येष्ठ का महीना और भक्ति का संगम, इन 5 नियमों के पालन से दूर होंगे सारे कष्ट
हिंदू धर्म में केवल व्रत और त्योहारों का नहीं बल्कि महीनों का भी विशेष महत्व माना गया है। ज्येष्ठ मास भी एक ऐसा ही समय है, जिसे दान पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। यह हिंदू वर्ष का तीसरा महीना है जिसका स्वामी ग्रह मंगल को बताया गया है। इस साल 2 मई से इसकी शुरुआत हो रही है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र होने की वजह से इस महीने का नाम ज्येष्ठ पड़ गया है। इस साल इस महीने में अधिक मास का अद्भुत सहयोग भी बन रहा है। अगर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करनी है तो इस महीने को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस महीने में हनुमान जी को भी प्रसन्न किया जा सकता है। चलिए हम आपको इससे जुड़े कुछ नियम बता देते हैं।

बड़ा मंगल का है विशेष महत्व
ज्येष्ठ के महीने में आने वाला मंगलवार बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल के नाम से पहचाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस समय हनुमान जी की मुलाकात भगवान राम से हुई थी। यही वजह है कि इस महीने में बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है।

कैसे करें प्रसन्न
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें पूजा पाठ करने के बाद बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। इस उपाय से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी दूर हो जाती है। इस महीने में निर्जला एकादशी, वट सावित्री और गंगा दशहरा जैसे पर्व भी आते हैं।

ज्येष्ठ मास में क्या करें
ज्येष्ठ के महीने में गर्मी काफी होती है इसलिए प्यासे को पानी पिलाना सबसे पुण्य का काम माना गया है। आप चाहे तो राहगीरों के लिए प्याऊ लगवा सकते हैं या फिर पशु पक्षियों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था कर सकते हैं। इससे मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस महीने में अन्न, तिल और सत्तू का दान शुभ माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो व्यक्ति इस महीने में सात्विक भोजन करता है, वह हमेशा निरोगी रहता है और धनवान भी बनता है।

इस समय सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर वरुण देव की आराधना करनी चाहिए।

MP में दोबारा शुरू होंगे RTO चेक पोस्ट, हाई कोर्ट का आदेश

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MP में दोबारा शुरू होंगे RTO चेक पोस्ट, हाई कोर्ट का आदेश
मध्यप्रदेश में आरटीओ चेक पोस्ट को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश में बंद पड़े सभी आरटीओं चेक पोस्ट को 30 दिनों के भीतर दोबार शुरू किया जाए.

ईरान के साथ शुक्रवार को हो सकती है शांति वार्ता – राष्ट्रपति ट्रंप

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ईरान के साथ शुक्रवार को हो सकती है शांति वार्ता – राष्ट्रपति ट्रंप
ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर आज समाप्त होने वाला था, इससे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एकतरफा संघर्षविराम की समयसीमा बढ़ा दी. इसके बाद ट्रंप ने एक नया बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ शांतिवार्ता के दूसरे दौर को लेकर शुक्रवार तक अच्छी खबर आ सकती है.

सीएम डॉ. यादव ने किसानों के सपने किए साकार, अब उनकी जमीन लेने पर देंगे 4 गुना दाम

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सीएम डॉ. यादव ने किसानों के सपने किए साकार, अब उनकी जमीन लेने पर देंगे 4 गुना दाम

– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ऐतिहासिक फैसला
– सरकार पहले किसानों को देती थी गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा
– मध्यप्रदेश के विकास को मिलेगी तेज रफ्तार
– किसानों के साथ खड़ी है मध्यप्रदेश सरकार

भोपाल। अन्नदाता के कल्याण के लिए संकल्पित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 अप्रैल को अद्भुत-अकल्पनीय और ऐतिहासिक फैसला किया। उन्होंने फैसला किया है कि अब प्रदेश सरकार किसी भी किसान की जमीन लेने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना भुगतान करेगी। यानी, किसान को भू-अर्जन की जाने वाली भूमि का 4 गुना मुआवजा मिलेगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भू-अर्जन मुआवजे का फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया। इस निर्णय से अब किसानों को उनकी भूमि का वाजिब मूल्य और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिलेगा। प्रदेश में परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी, विकास को तेज रफ्तार मिलेगी और किसान भी समृद्ध होंगे।

पहले नहीं मिलता था वाजिब दाम
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को बताया कि वर्ष 2014 में प्रदेश में फैक्टर-1 निर्धारित किया गया था। इसके तहत किसानों को गाइडलाइन दर का दोगुना मुआवजा दिया जाने लगा। अधिनियम में तय दर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से लागू होती थी। चूंकि, व्यवहारिक दृष्टि से जमीन की गाइडलाइन दर कम होने के कारण किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था, जबकि विकास परियोजनाओं की गति तेज हो रही थी। इस वजह से सरकार ने इस दोगुना मुआवजे को बढ़ाकर 4 गुना कर दिया। यह निर्णय भू-अर्जन परियोजनाओं पर लागू होगा। इस निर्णय का सीधा सकारात्मक प्रभाव सिंचाई परियोजनाओं, नई सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों और बांधों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण अधोसंरचना कार्यों पर पड़ेगा। विशेष रूप से, यह लाभ उन सभी लंबित प्रकरणों में भी दिया जाएगा जहाँ आज तक अंतिम अवॉर्ड पारित नहीं किया गया है।
राज्य सरकार ने इस बदलाव के लिए जिस अधिनियम का उपयोग किया उसे मध्य प्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 कहते हैं। संक्षेप में इसे भू-अर्जन अधिनियम-2013 भी कहा जाता है। इसमें धारा 26 के अंतर्गत भूमि के मूल्य निर्धारण के सिद्धांत निर्धारित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उचित प्रतिकर सुनिश्चित करना है। इसके अलावा इसके जरिये पारदर्शिता एवं पुनर्वास की व्यवस्था भी की जाती है।

इसलिए जरूरी था संशोधन
किसानों का कल्याण मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहली प्राथमिकता है। ऐसे में किसानों को उनकी भूमि का सही दाम मिल सके, इसलिए राज्य सरकार ने अधिनियम में संशोधन करने का निर्णय लिया। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 नवंबर 2025 को संशोधन के निर्देश भी दिए थे। चूंकि हर साल प्रदेश में अनुमानित रूप से 70,000–75,000 करोड़ रुपयों का पूंजी निवेश सड़क, पुल, रेलवे लाइन, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई परियोजनाओं, अधोसंरचना विकास के लिए किया जाता है। इस बदलाव के बाद अब प्रदेश में विकास कार्य तेज गति से होंगे।

समिति बनाकर किया वास्तविकता का अध्ययन
किसानों के जीवन में यह बदलाव करने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया। लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट इसके सदस्य बनाए गए। इस समिति की पहली बैठक 21 जनवरी को हुई। इस बैठक में मंत्रियों-विधायकों के अलावा फिक्की, क्रेडाई, सीआईआई, किसान संघ और कृषक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सभी ने इस बात की अनुशंसा की, कि फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 किया जाए।

अब इतना होगा मुआवजा
गौरतलब है कि, लोक निर्माण विभाग पिछले 3 वर्षों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये मुआवजा दे चुका है। नई व्यवस्था में यह करीब 20 हजार करोड़ रुपये होगा, जो सीधे किसानों के खातों में जमा होगा। पिछले तीन वर्षों में जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास द्वारा 4500 हेक्टेयर जमीन का भू-अर्जन किया गया। इसके लिए 1 हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था में यह राशि दोगुनी होगी।

विकास परियोजनाओं-किसान हित के बीच का संतुलन
सीएम डॉ. मोहन यादव का मानना है कि किसानों को 4 गुना मुआवजा देना केवल निर्णय नहीं है, यह किसान सम्मान का संकल्प है। किसान हित सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार चाहती है कि विकास और किसान हित साथ-साथ आगे बढ़ें। सीएम डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार किसानों के सम्मान, अधिकार और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय विकास परियोजनाओं और किसान हित, दोनों के बीच संतुलन स्थापित करेगा।

किसान कल्याण के लिए संकल्पित सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि विकास को लेकर आगे बढ़ना है तो भूमि अधिग्रहण पर बड़े फैसले लेने होंगे। हम विकास में किसानों को सहभागी बना रहे हैं। कई पुराने प्रोजेक्ट हैं जो वर्षों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन भूमि की वजह से पूरे नहीं हो पाए। अब हमने इसका हल निकाला है। उन्होंने कहा कि हमने सरल नियम इसीलिए बनाए हैं ताकि मामले लंबित न रहें। हमारी गाइडलाइन कम होती है, बाजार की अधिक तो यह काफी लोगों को असंगत लगता है। हमारी सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। सरकार ने किसानों को बोनस भी बढ़ाकर दिया है। पिछले साल का गेहूं अभी भी गोदामों में भरा है। इसके बावजूद हम इसे खरीद रहे हैं। भूमि अधिग्रहण में बड़ा विवाद मुआवजे का होता है, यह निर्णय लेकर हमने विकास के रास्ते खोले हैं।