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एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित

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एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित
राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में न्याय व्यवस्था पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे अदालतों की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रदेश की विभिन्न न्यायालयों में 20 लाख 96 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से एक मामला ऐसा है जिसका निपटारा 72 साल बाद भी नहीं हो पाया है।

न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा
पुराने मामलों का अंबार न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलना चुनौती बनता जा रहा है। सिविल प्रकृति का यह मुकदमा 1954 में दायर हुआ था। 1982 का एक आपराधिक मामला अब तक निर्णय की प्रतीक्षा में है। इसके अलावा 26 वर्ष से अधिक पुराने 250 मामले भी अब तक निपटारे का इंतजार कर रहे हैं।

सुनवाई की गति प्रभावित

बड़ी संख्या में पुराने मामलों के कारण अदालतों में सुनवाई की गति प्रभावित हो रही है और लोगों को न्याय पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की विभिन्न अदालतों में कुल 20,96,824 मामलों में से 14,44,306 यानी लगभग 68.88 प्रतिशत मामले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।

कुल लंबित मामलों में 4,22,905 सिविल और 16,73,919 आपराधिक केस शामिल हैं। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में सबसे ज्यादा लंबित मामले सामने आए हैं। यहां कुल 2,38,279 मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,82,201 (76.74%) एक वर्ष से अधिक पुराने हैं, जो अन्य शहरों की तुलना में अधिक है। वहीं भोपाल, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

सबसे दबाव में आपराधिक न्यायालय
आंकड़े बताते हैं कि आपराधिक मामलों का बोझ सबसे ज्यादा है, जिनमें से 12,08,062 मामले यानी लगभग 72.17 प्रतिशत एक वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं। वहीं सिविल मामलों में भी 2,36,244 केस एक साल से अधिक समय से लंबित हैं।

महिलाओं के मामलों में भी वृद्धि
इन न्यायालयों में महिलाओं द्वारा दायर 1,96,450 मामले लंबित हैं। इनमें 93,814 सिविल और 1,02,636 आपराधिक प्रकृति के हैं। बुजुर्गों द्वारा दायर 1,12,371 मामले भी अभी तक लंबित हैं, जिनमें 91,794 सिविल और 20,577 आपराधिक मामले शामिल हैं।

प्रदेश में कुल लंबित मामलों की स्थिति
लंबित मामले – संख्या – एक वर्ष से पुराने

कुल लंबित मामले – 20,96,824 – 14,44,306 (68.88%)

सिविल मामले – 4,22,905 – 2,36,244 (55.86%)

आपराधिक मामले – 16,73,919 – 12,08,062 (72.17%)

प्री-लिटिगेशन/प्री-ट्रायल मामले – 1,24,010 – 58,563 (47.22%)

पांच शहर जहां सबसे ज्यादा मामले

शहर – संख्या – एक वर्ष से पुराने

इंदौर – 2,38,279 – 1,82,201 (76.74%)

भोपाल – 1,46,200 – 1,04,593 (71.54%)

जबलपुर – 1,44,809 – 1,03,465 (71.45%)

रीवा – 98,083 – 77,428 (78.94%)

ग्वालियर – 91,521 – 64,914 (70.93%)

लंबित मामलों की स्थिति

कितने वर्ष से – सिविल – आपराधिक

एक वर्ष पुराने – 1,86,661 – 4,65,857

एक से तीन वर्ष पुराने – 1,39,920 – 5,37,142

तीन से पांच वर्ष – 49,588 – 3,67,074

पांच से दस वर्ष – 38,117 – 2,84,209

दस वर्ष से ज्यादा – 8,619 – 19,637

2000 से पहले – 194 – 56

सबसे पुराना मामला – 1954 – 1982

ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र के पास हवाई हमला

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ईरान के बुशहर परमाणु केंद्र के पास हवाई हमला
ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बताया कि देश के बुशहर परमाणु केंद्र के पास एक हवाई हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले में परमाणु केंद्र के पास की एक इमारत भी क्षतिग्रस्त हो गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

ईरान की परमाणु एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह हमला किसने किया या इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? बुशहर परमाणु केंद्र ईरान की ऊर्जा उत्पादन क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फैसिलिटी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक प्रमुख केंद्र है और इसके आसपास किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

परमाणु केंद्र पर चौथी बार हुआ हमला
जारी किए गए बयान के अनुसार यह चौथी बार है, जब बुशहर परमाणु केंद्र पर युद्ध के दौरान हमला हुआ है। यह तथ्य इस सुविधा की संवेदनशीलता और क्षेत्र में चल रहे संघर्षों के संभावित प्रभाव को रेखांकित करता है। इस हमले से पश्चिम एशिया क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।

फारस की खाड़ी के पास स्थित है बुशहर परमाणु संयंत्र
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, इस हमले से संयंत्र के मुख्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और उत्पादन अप्रभावित बताया जा रहा है। हालांकि, संयंत्र के मुख्य परिचालन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। दक्षिणी ईरान में फारस की खाड़ी पर बुशहर परमाणु संयंत्र स्थित है और यह देश का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है।

अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की धमकियां
युद्ध छिड़ने के बाद से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बुनियादी ढांचे, जिसमें पुल और बिजली संयंत्र शामिल हैं, पर संभावित हमलों की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान में जो कुछ बचा है, उसे नष्ट करना शुरू भी नहीं किया है। उन्होंने ईरान को पाषाण युग में वापस भेजने की धमकी भी दी थी।

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के सभी आरोपों का दिया जवाब

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राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के सभी आरोपों का दिया जवाब
पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने खुद पर लगाए आरोपों पर सफाई दी है। फेसबुक पर लाइव होकर चड्ढा ने कहा कि मेरे खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है। एक जैसी भाषा और एक जैसे आरोप। पहले मुझे लगा कि इसका जवाब नहीं देना चाहिए लेकिन फिर लगा कि एक झूठ को साै बार बोला जाए तो वो सच लगने लगता है।

तीन बड़े आरोपों पर दी सफाई
पहला आरोप: आम आदमी पार्टी की तरफ से मुझ पर तीन बड़े आरोप लगाए गए हैं। पहला आरोप है कि जब विपक्ष सदन से वाॅकआउट करता है तो राघव चड्ढा वहीं बैठे रहते हैं। ये सरासर झूठ है। एक दिन ऐसा बताया जाए जब विपक्ष ने वाॅकआउट किया हो और मैंने उनका साथ न दिया हो। संसद में हर जगह सीसीटीवी कैमरा है, आप उसकी फुटेज निकालकर दिखा दीजिए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

दूसरा आरोप: राघव ने कहा कि दूसरा आरोप मुझ पर लगाया गया कि मैंने चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाने वाली याचिका पर साइन नहीं किए। ये भी सफेद झूठ है। मुझे आप के किसी नेता ने इस याचिका पर साइन करने के लिए नहीं कहा। साथ ही राज्यसभा में पार्टी के दस सांसद हैं, जिनमें से छह या सात सांसदों ने खुद ही इस याचिका पर साइन नहीं किया। अब इसमें मेरी क्या गलती है। सारा दोष मुझ पर ही क्यों। इस याचिका के लिए रास में केवल 50 साइन चाहिए थे यानी 105 विपक्षी सांसदों में से 50 से ये याचिका पूरी हो जाती।

तीसरा आरोप: चड्ढा ने कहा कि तीसरा आरोप जो मुझ पर लगाया गया वो ये था कि राघव चड्ढा डर गए हैं और इसलिए वो बेकार मुद्दे उठाते हैं। मैं बता दूं कि मैं संसद में चीखने चिल्लाने, गाली देने या माइक तोड़ने नहीं गया। मैं वहां जनता के मुद्दे उठाने गया हूं। मैंने काैन से मुद्दा नहीं उठाया। जीएसटी से लेकर पानी तक, पंजाब के पानी से लेकर दिल्ली की हवा की बात की। बेरोजगारी से लेकर महंगाई तक के मुद्दे उठाए। मेरा ट्रैक रिकाॅर्ड उठाकर देख लीजिए। मैं संसद में इंपेक्ट क्रिएट करने गया हूं। जो लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि हर झूठ को बेनकाब किया जाएगा। हर सवाल का जवाब दिया जाएगा। मैं घायल हूं इसलिए घातक हूं।

पीएम मोदी ने केरल में भरी सियासी हुंकार

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पीएम मोदी ने केरल में भरी सियासी हुंकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केरल में भाजपा की चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे केरलम को ईश्वर ने अपार संसाधन और संभावनाएंं दी हैं। यहां समंदर में ब्लू इकोनॉमी के असीम अवसर हैं। यहां उद्योगों के लिए संभावनाएं हैं। पर्यटन के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं, लेकिन केरल बाकी राज्यों से लगातार पीछे होता जा रहा है।’

पीएम मोदी ने आगे कहा कि राज्य में इस बार माहौल बदल चुका है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि 9 अप्रैल को मतदान के बाद 4 मई को एनडीए सरकार बनने जा रही है। उन्होंने महिलाओं के समर्थन को अपनी ताकत बताते हुए कहा कि राज्यभर में एनडीए के पक्ष में माहौल दिख रहा है। उन्होंने उम्मीदवार अनुप को समर्पित और मेहनती बताते हुए जनता से समर्थन की अपील की। रैली के दौरान उन्होंने सबरीमाला और भगवान अयप्पा का भी उल्लेख किया गया और इसे सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़ा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने यह भी बोले कि केरल के लोगों को कांग्रेस और लेफ्ट से सावधान रहने की जरूरत है।

चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के लिए वोट की अपील
केरल में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इस चुनाव में केरल को फायदा होगा, भले ही उन्हें खुद व्यक्तिगत रूप से कुछ नुकसान उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि एनडीए उम्मीदवार अनूप पिछले पांच वर्षों से उनके साथ पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। वह शांत, ईमानदार और दिन-रात काम करने वाले कार्यकर्ता हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल को ऐसे युवा नेता की जरूरत है और आज वह अनूप को जनता के हवाले कर रहे हैं ताकि वह लोगों की सेवा कर सकें।

मेरा बूथ सबसे मजबूत- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान के तहत केरल के भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। इस दौरान 5000 शक्ति केंद्रों से 1.25 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुड़े। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं का एक ही संदेश था कि केरल की जनता अब एलडीएफ सरकार को हटाने का मन बना चुकी है।

बुनियादी सुविधाओं पर क्या बोले पीएम मोदी?
कहा कि रैली में आने के दौरान पूरे रास्ते लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। वाम दल जहां मानव श्रृंखला की बात करते हैं, वहीं केरल की जनता ने एनडीए के समर्थन में मानव दीवार खड़ी कर दी है। प्रधानमंत्री ने एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन सरकारों ने इस क्षेत्र की लंबे समय तक अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि यहां की सड़कें खराब हालत में हैं, वर्षों से नए पुल नहीं बने हैं और मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी चिंताजनक है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की जीवन गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ा है।

केरल के फंड पर क्या बोले प्रधानमंत्री?
उन्होंने कहा कि जब एलडीएफ और यूडीएफ केंद्र में सत्ता में थे, तब केरल को कम फंड मिलता था। लेकिन मोदी सरकार में राज्य को पांच गुना ज्यादा फंड दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में, जहां बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय रहता है, वहां एनडीए की सरकारें बनी हैं और विकास कार्य हुए हैं। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी सरकार लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि केरल में एनडीए सरकार बनेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और मछुआरों समेत स्थानीय समुदायों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

US के ‘सैन्य गुरूर’ पर ईरान की चोट, धूल में मिले F-15 और A-10 फाइटर जेट्स

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US के ‘सैन्य गुरूर’ पर ईरान की चोट, धूल में मिले F-15 और A-10 फाइटर जेट्स
ईरान के साथ करीब पांच सप्ताह से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। एक ही दिन में ईरान द्वारा दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिराए जाने की घटना ने पश्चिम एशिया में संकट को और गहरा दिया है।

इन घटनाओं के बाद एक लापता अमेरिकी पायलट की खोज तेज कर दी गई है, जो दुश्मन क्षेत्र में छिपा हुआ बताया जा रहा है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के उलट है कि यूएस का ईरान के आसमान पर कब्जा हो गया है।

ईरान की धरती पर F-15E विमान गिराया गया
ईरानी सेना ने एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू जेट को गोलाबारी में मार गिराया। दो पायलट वाले इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि दोनों देशों के अधिकारियों ने की है। घटना के बाद एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। दूसरे पायलट की तलाश की जा रही है।

कुवैत के ऊपर A-10 विमान दुर्घटनाग्रस्त
इसी दिन एक अलग घटना में एक अमेरिकी A-10 वारथोग अटैक एयरक्राफ्ट कुवैत के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, विमान के पायलट ने सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया और उसे बाद में बचा लिया गया। एक के बाद एक हुई इन दो घटनाओं ने संघर्ष की शुरुआत के बाद अमेरिकी वायु सेना को लगे सबसे बड़े झटकों में से एक को बना दिया है।

बचाव मिशन पर भी हमला
F-15E लड़ाकू विमान के लापता पायलट का पता लगाने के प्रयास बेहद खतरनाक साबित हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खोज और बचाव मिशन के लिए ईरानी क्षेत्र में घुसे दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी गोलाबारी हुई। हालांकि वे ईरानी हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। इस मिशन में एक पायलट को रेस्क्यू कर लिया गया था। आशंका जताई गई है कि ये दो हेलीकॉप्टर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

लापता पायलट पर ईरान ने रखा इनाम
ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने देश के दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता अमेरिकी पायलट की तलाश के लिए एक अभियान शुरू किया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने वाले शख्स को इनाम दिया जाएगा। वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि युद्ध अब शासन परिवर्तन से हटकर अमेरिकी पायलटों की तलाश में बदल गया है।

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सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान राम और लक्ष्मण, भगवान कृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।

विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया।

भेंट की गई वैदिक घड़ी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है।

समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित ‘विक्रम संवत’ की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही “जय महाकाल” और “सम्राट विक्रमादित्य” के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।

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सोशल मीडिया बनी है युवाओं की सबसे बड़ी ताकत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में शुक्रवार को सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है।

सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।

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उज्जैन में ‘महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम’ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ विज्ञान की भी नगरी है। उज्जैन की माटी में विज्ञान, गणित, खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा है, जहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा पावन नगरी उज्जैन से होकर गुजरती थी। जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था तब उज्जैन के ज्योतिषी और विद्वान काल गणना कर नक्षत्रों की स्थिति बता रहे थे। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी तब यहां महर्षियों ने खगोलीय गणनाओं का वैश्विक मानक स्थापित कर लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण और तारा मंडल में लगी विज्ञान प्रदर्शनी का शुभारंभ एवं अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए 4 लेन उज्जैन बायपास और ‘सम्राट विक्रमादित्य – द हेरिटेज’ परियोजना का भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर विचारक एवं समाजसेवी सुरेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं, जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात ‘मास्टर ऑफ टाइम’ हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं, हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने ग्रीनविच भ्रमण के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाओं की सटीकता अद्भुत है। डोंगला को एस्ट्रोनोमिकल स्टडीज के लिए विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन मील का पत्थर सिद्ध होगा। भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था, जो अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है। आज समय और स्पेस दोनों को एक दूसरे से समेकित रूप से समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आज 15 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमें केंद्र सरकार का भी सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है। वास्तव में यह अपनी वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस नीति की भावना के अनुरूप युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 हमारे लिए उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। हमारा लक्ष्य है की सिंहस्थ 2028 में उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जाने। वर्ष 2028 के सिंहस्थ को व्यवस्थित रूप से संपन्न करना हमारा दायित्व है। इसी उद्देश्य से 700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बायपास रोड का भूमि-पूजन भी हुआ है। इस सौगात के लिए उज्जैनवासी बधाई के पात्र हैं। उज्जैन सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए सर्व-सुविधा संपन्न प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से सभी को वर्ष 2028 के भव्य और दिव्य सिंहस्थ के लिए आमंत्रित किया।

उज्जैन में विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का मिलता है अद्भुत समन्वय: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नई दृष्टि का जन्म होता है। भारत के जितने भी प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं—चाहे वह उज्जैन हो, काशी हो, कांची हो या पुरी धाम, सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी ‘जीती-जागती प्रयोगशालाएं’ हैं, जहाँ विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान आध्यात्मिकता के बिना अधूरा है और इसका सबसे सटीक उदाहरण स्वयं उज्जैन नगरी और महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ (NEP) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा पद्धति को केवल रटने की पुरानी परिपाटी से निकालकर सृजनशीलता, डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। आज का युग एआई (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का है, भारत के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर इस दौड़ में पीछे न रहें, इसके लिए स्कूली स्तर पर ही एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्पष्ट किया कि ज्ञान पर किसी भाषा का एकाधिकार नहीं हो सकता, इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझ सके।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है और यहीं से प्राचीन काल में दुनिया की काल गणना होती थी, इसलिए अब समय आ गया है कि हम ‘ग्रीनविच मीन टाइम’ (GMT) के स्थान पर ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ (MST) की तार्किक स्थापना करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई उपकरण भी यह स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र है, अतः हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना होगा और यह इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष, ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो दशकों में भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ पूरे विश्व की पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान भी प्रदान करेगा। उज्जैन में ‘विज्ञान केंद्र’ और ‘तारामंडल’ का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सके।

विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का किया विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में विकसित बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गयी।

सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में 725 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने उज्जैन में मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाई ‘सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज’ की विस्तार परियोजना का भूमि-पूजन किया। वर्तमान में इस हेरिटेज इकाई में 19 कक्ष, रूफटॉप सहित 3 रेस्टोरेंट, पंचकर्म केंद्र एवं पुस्तकालय संचालित हैं। धार्मिक पर्यटन में लगातार हो रही वृद्धि और आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए 22.52 करोड़ रुपये की लागत से इसका विस्तार किया जाएगा। इस विस्तार के तहत 14 नए कक्ष, एक सुव्यवस्थित डॉर्मिटरी, परिसर को जोड़ने वाले कनेक्टिंग पाथवे तथा आकर्षक गार्डन एवं लैंडस्केपिंग विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन) सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों एवं सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। साथ ही 4-लेन मार्ग बनने से आवागमन और यातायात प्रबंधन सुगम होगा। मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है, जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा।

नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण कर विज्ञान केंद्र के फोल्डर का विमोचन किया। इसमें गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन एवं स्टुडेंट एक्टिविटी हॉल, हेरिटेज थीम आधारित गैलरी और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा, आधुनिक ड्रोन तकनीक और उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर के रूप में स्थापित करने से संबंधित विषयों को आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक रूप में प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को विशेष रूप से दर्शाया गया। साथ ही आरती के लिए डिजाइन की गई रोबोटिक आर्म का प्रदर्शन भी देखा और सराहा। प्रदर्शनी में इसरो, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, आईआईटी इंदौर, आरआरकैट, नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी और सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ सहित विभिन्न संस्थानों ने अपने मॉडल और शोध कार्य प्रदर्शित किए। इंडियन नॉलेज सिस्टम के स्टॉल पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों का प्रदर्शन किया गया। इसमें मेडिकल, एग्री और एयर टैक्सी ड्रोन के साथ एएसएलवी, मंगलयान और चंद्रयान के मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।

समारोह में मुख्यमंत्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।

समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया। साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय वास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।

नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म, दतिया सीट रिक्त

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नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म, दतिया सीट रिक्त
मध्यप्रदेश से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. अब माना जा रहा है कि इस सीट पर उपचुनाव का ऐलान हो सकता है.

अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार रात विचार-विमर्श के बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट से भारती की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी.

भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व गृह मंत्री एवं BJP नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था. अधिसूचना में दिल्ली की एक अदालत द्वारा भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाए जाने का उल्लेख करते हुए दतिया सीट को रिक्त घोषित किया गया है.

एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
यह अधिसूचना विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने दो अप्रैल की रात जारी की, जिसे शुक्रवार सुबह मीडिया को उपलब्ध कराया गया. दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अवैध ब्याज भुगतान हासिल करने से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी.

MP में घटेगी कांग्रेस विधायकों की संख्या? कोर्ट के फैसले के बाद दतिया MLA पर लटकी तलवार

विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने भारती और पूर्व कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

दोनों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने के आरोपों में दोषी ठहराया गया है.