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नागपुर में भीषण आग से 400 से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख

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नागपुर में भीषण आग से 400 से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख
नागपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खैरी गांव स्थित एक बड़े कार गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरा परिसर धुएं और आग की लपटों से घिर गया। आसपास मौजूद लोगों ने जब आसमान में उठता काला धुआं देखा तो इलाके में दहशत फैल गई। कुछ ही मिनटों में वहां खड़ी सैकड़ों पुरानी गाड़ियां आग की चपेट में आ गईं और एक-एक कर जलने लगीं।

भीषण गर्मी के बीच हुई इस घटना ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 400 से ज्यादा पुरानी कारें, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य ज्वलनशील सामान जलकर राख हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकलने तक का मुश्किल से समय मिला। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

नागपुर के खैरी गांव में कैसे लगी इतनी बड़ी आग?
यह पूरा मामला नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के खैरी-कन्हान मार्ग स्थित एक बड़े वाहन गोदाम का बताया जा रहा है। यहां पुरानी और सेकेंड हैंड कारों का कारोबार किया जाता था। गोदाम में बड़ी संख्या में खराब वाहन, मरम्मत के लिए रखी गई कारें, पुराने टायर, बैटरी, प्लास्टिक पार्ट्स और अन्य सामान मौजूद था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार दोपहर अचानक गोदाम के एक हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि मामूली शॉर्ट सर्किट होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैल गई। तेज गर्मी और ज्वलनशील सामान की वजह से आग ने विकराल रूप ले लिया।

लोगों का कहना है कि आग इतनी तेजी से बढ़ी कि कर्मचारियों को कुछ समझ ही नहीं आया। कई गाड़ियों में धमाके जैसी आवाजें आने लगीं, जिससे आसपास रहने वाले लोग भी डर गए। आग की ऊंची लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अश्विन जोशी का निधन

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अश्विन जोशी का निधन
मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अश्विन जोशी का शुक्रवार को निधन हो गया है। वे 66 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से वे बीमार चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। आज, 8 मई 2026 सुबह को अचानक सीने में दर्द के चलते उन्हें इलाज के लिए शेल्बी हॉस्पिटल भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उनके निधन की खबर आते ही कांग्रेस, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई कांग्रेस नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

ऐसा रहा राजनैतिक सफर
अश्विन जोशी इंदौर की राजनीति के दिग्गज और कांग्रेस के कद्दावर नेता थे।
इंदौर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे । कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती की जाती थी ।
वे पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता महेश जोशी के भतीजे थे।
वे इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे हैं।
जोशी को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी भी माना जाता था।
जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी।
अश्विन जोशी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा था और भाजपा उम्मीदवार गोपीकृष्ण नेमा को 3 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर जीत हासिल की थी।
इसके बाद 2003 और 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।

कांग्रेस नेताओं ने जताया शोक
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री स्व महेश जोशी जी के भतीजे एवं इंदौर में कांग्रेस के पूर्व विधायक अश्विनी जोशी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। इंदौर और मध्य प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में उनका सदा विशेष स्थान रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे। ऊँ शांति

कौन होते हैं कुलदेवता? इनके बिना क्यों हर मांगलिक कार्य नहीं माना जाता है पूरा

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कौन होते हैं कुलदेवता? इनके बिना क्यों हर मांगलिक कार्य नहीं माना जाता है पूरा
सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार, प्रत्येक परिवार या वंश के एक संरक्षक देवता होते हैं, जिन्हें कुलदेवता या कुलदेवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुलदेवता उस वंश के सुरक्षा कवच की तरह होते हैं। किसी भी शुभ काम जैसे कि विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या यज्ञ में सबसे पहले कुलदेवता का आह्वान किया जाता है। अगर उन्हें याद न किया जाए, तो माना जाता है कि उस काम में बाधाएं आती हैं और परिवार की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है,

कौन होते हैं कुलदेवता?
कुल का मतलब है वंश और देवता का मतलब है आराध्य। यानी वह देवता जो आपके पूरे वंश के संरक्षक हैं। हिंदू धर्म में कुलदेवता या कुलदेवी का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सरल शब्दों में कहें तो, कुलदेवता वे देवी-देवता हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी से अपने वंश या परिवार की रक्षा करते आ रहे हैं। जैसे कि हमारा शारीरिक डीएनए पूर्वजों से मिलता है, वैसे ही कुलदेवता हमारे परिवार की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र होते हैं।

कुलदेवता के बिना क्यों अधूरा है मांगलिक काम?
शास्त्रों के अनुसार, कुलदेवता की पूजा के बिना किया गया कोई भी शुभ काम निष्फल यानी अधूरा माना जाता है। इसके पीछे 3 बड़ी वजह हैं –
सुरक्षा कवच का अभाव
कुलदेवता आपके घर और वंश के रक्षक की तरह होते हैं। किसी भी मांगलिक काम में जब बाहर से कई लोग आते हैं, तो कई तरह की नकारात्मक ऊर्जा भी आती हैं। कुलदेवता की पूजा करने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बन जाता है, जिससे शुभ काम बिना रुकावट के पूरे हो जाते हैं।

पितरों की नाराजगी
कुलदेवता का सीधा संबंध पूर्वजों से होता है। अगर कुलदेवता को याद नहीं किया जाता, तो पितृ भी उस पूजा को स्वीकार नहीं करते। ऐसी स्थिति में मांगलिक काम के दौरान घर में कलह, बीमारी या अचानक कोई बाधा आने की आशंका बढ़ जाती है।

अन्य देवताओं की पूजा का फल न मिलना
बड़े-बुजुर्गों के मुंह से आपने सुना भी होगा कि कुलदेवता रुष्ट तो सब रुष्ट। अगर आपके कुलदेवता आपसे खुश नहीं हैं, तो आप चाहे कितनी भी बड़ी पूजा या यज्ञ कर लें, अन्य देवी-देवता उसका फल नहीं देते हैं। वे आपके घर के द्वारपाल की तरह हैं। उनके माध्यम से ही आपकी प्रार्थना ईश्वर तक पहुंचती है।

मांगलिक कामों में कुलदेवता की जरूरी रस्में
निमंत्रण देना – विवाह का पहला कार्ड हमेशा कुलदेवता के चरणों में रखा जाता है।
पहला मुंडन – बच्चे के जन्म के बाद उसका पहला मुंडन कुलदेवता के मंदिर में ही किया जाता है, ताकि बच्चा उनके संरक्षण में रहे।
फेरों के बाद मत्था टेकना – विवाह के बाद दुल्हा-दुल्हन को सबसे पहले कुलदेवता का आशीर्वाद लेने जाते हैं, ताकि उनके नए जीवन की शुरुआत शुभ रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ट्रेन को झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को किया रवाना

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ट्रेन को झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को किया रवाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ साक्षी है कि सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से प्रभावी होती है। सोमनाथ की प्रत्येक ईट, भक्ति का ताप और भारत के पुनरुत्थान का गौरव कहती है। इतिहास में कई बार मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। सत्रह बार आक्रमण के बाद भी शाश्वत शिव यहीं विराजते हैं। मंदिर के इतिहास में वर्ष 2026 खास महत्व रखता है। एक हजार वर्ष पहले 1026 में पहली बार मंदिर पर आक्रमण हुआ था। इसी वर्ष जनवरी में आक्रमण के ठीक एक हजार वर्ष बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ में भव्य स्वाभिमान पर्व मनाया गया। बाबा सोमनाथ की दिव्यता और भव्यता आज भी अलौकिक और अद्वितीय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम जत्थे को रवाना कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत निकाली जा रही है।

मुख्यमंत्री को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप भेंट किया त्रिशूल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया और कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश की प्रमुख 21 नदियों के जल कलशों का भी पूजन-अर्चन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर ढोल-धमाकों और डमरू की थाप पर उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 21 नदियों का जल अर्पित करने के लिए यात्रियों को जल कलश तथा ध्वजा सौंपी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया। कार्यक्रम में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा के साथ श्री रविन्द्र यती, श्री राहुल कोठारी, अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।

भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ यात्रा रहेगी अविस्मरणीय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा आदि जिलों के तीर्थयात्रियों को लेकर यह ट्रेन, 8 मई को सोमनाथ पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन के सभी यात्रियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति “जियो और जीने दो” की संस्कृति है। भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ परस्पर स्नेह और प्रेम के वातावरण में की गई यात्रा सभी भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहेगी। हम अपने जीवन का उपयोग भाईचारे के साथ कल्याणकारी कार्यों में करें और सम्पूर्ण मानव जाति को परिवार की तरह देखते हुए जीवनयापन करें, यही भारतीय संस्कृति का मूल्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में जारी सांस्कृतिक जागरण का अभियान राष्ट्रीय एकता को निरन्तर सुदृढ़ कर रहा है। भगवान श्रीराम के अयोध्या धाम और भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा के साथ ही बंगाल के कालीघाट तक सनातन संस्कृति की ध्वजा चारों तरफ लहरा रही है। गंगोत्री से गंगा सागर तक यह भाव सर्वत्र व्याप्त है।

बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस

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बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने और बस्तर के विकास को गति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 और 20 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहेंगे। यह दौरा सुरक्षा और विकास दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जगदलपुर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की उच्चस्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

नक्सल उन्मूलन अभियान के बाद पहली बार बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इस स्तर की बैठक आयोजित की जा रही है। लंबे समय तक देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले बस्तर में अब सुरक्षा स्थिति में सुधार आया है। केंद्र सरकार इस सुधार को एक सकारात्मक संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगा फोकस
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित चर्चा होगी। नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार किया जाएगा। राज्यों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा। सीमावर्ती जिलों में खुफिया साझेदारी बढ़ाने की योजना बनेगी। सड़क, स्वास्थ्य और संचार जैसी आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया जाएगा।

इस बैठक में जिन राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अमित शाह का यह दौरा केवल सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

कई परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं गृह मंत्री
जानकारी मिली है कि गृह मंत्री बस्तर में चल रही कई प्रमुख विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं। इस दौरान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और लोकार्पण की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और विकास साथ-साथ की रणनीति पर काम कर रही है। बस्तर प्रवास के दौरान शाह स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में केंद्रीय गृह मंत्री और कई मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक मजबूत राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश होगी कि सरकार अब बस्तर को संघर्ष के नहीं, बल्कि विकास और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।

बैठक का संभावित एजेंडा
बैठक का संभावित एजेंडा भी तय किया गया है। इसमें 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का रोडमैप तैयार किया जा सकता है। सुरक्षा कैंपों और सड़क नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा होगी। आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा योजनाओं को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। ड्रोन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने की योजना है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस्तर में होने वाली यह उच्चस्तरीय बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास मॉडल के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।

बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग

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बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग
जबलपुर बरगी डैम में 30 अप्रैल को क्रूज हादसे (Bargi Dam Cruise Tragedy) में 13 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस घटना ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है। भोपाल के निवासी केके राठी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। जिसमें इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में इस घटना का कारण प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानव की अनदेखी को बताया गया है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में संचालित सभी वॉटर स्पोर्ट्स और क्रूज सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने की मांग की गई है।

पर्यटन विभाग पर लपवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
याचिककर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय रहित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन भी नहीं किया गया। खराब मौसम और येलो अलर्ट के बाद भी क्रूज संचालन जारी रखा गया। याचिका में यह दावा किया गया है कि हादसे से पहले यात्रियों को प्राप्त सुरक्षा जानकारी भी नहीं दी गई थी। न ही लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाया गया था। यदि सही तरीके से सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो इस घटना को टाला जा सकता था। पर्यटन विभाग की लापरवाही से गई लोगों की मौत हो गई। इसलिए हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच पूरी होने तक क्रूज और बोट सेवाओं पर रोक की मांग
याचिका में जांच पूरी होने तक मध्य प्रदेश में सभी क्रूज और वोट सेवाओं पर अस्थाई रूप से बंद करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा राज्य के सभी वॉटर स्पोर्ट्स केंद्रों और पर्यटन स्थलों का सेफ्टी ऑडिट करने की मांग भी कोर्ट के सामने रखी गई है। ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हो। पर्यटकों के लिए सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

जिला कोर्ट ने दिखाई सख्ती, नाव संचालक को फटकार
बुधवार को लोअर कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नाव संचालक को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने पाया की नाव संचालक ने अनुभव होते हुए यात्रियों की मदद नहीं की और खुद को बचाकर वहां से निकल गया। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कोर्ट ने BNS 2023 की धारा 106 और 110 के तहत चालक समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया था।

मिचेल मार्श ने रचा इतिहास, RCB के खिलाफ ठोका IPL का सबसे तेज शतक

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मिचेल मार्श ने रचा इतिहास, RCB के खिलाफ ठोका IPL का सबसे तेज शतक
मिचेल मार्श ने RCB के खिलाफ मैच में 49 गेंदों में शतक पूरा कर दिया है. यह आईपीएल के इतिहास में LSG के किसी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे तेज शतक है. बारिश से प्रभावित इस मैच में मार्श ने शतक पूरा करने तक अपनी पारी में 9 चौके और 8 छक्के लगाए. यह आईपीएल में व्यक्तिगत तौर पर भी मार्श का सबसे तेज शतक है. इससे पहले उनकी सबसे तेज सेंचुरी 56 गेंद में आई थी.

IPL में ठोका सबसे तेज शतक
मिचेल मार्श ने 49 गेंद में शतक पूरा किया. वो लखनऊ सुपर जायंट्स के ऐसे पहले बल्लेबाज भी बने हैं, जिन्होंने आईपीएल में 50 से कम गेंदों में शतक पूरा किया हो. मार्श ने इस सेंचुरी के दम पर रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है, क्योंकि वे ऐसे सबसे पहले बल्लेबाज हैं, जिन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में LSG के लिए 2 शतक लगाए हैं. उनसे पहले लखनऊ के लिए ऋषभ पंत, क्विंटन डिकॉक, केएल राहुल और मार्कस स्टोइनिस शतक लगा चुके हैं.

49 गेंद – मिचेल मार्श (बनाम RCB)
54 गेंद – ऋषभ पंत (बनाम RCB)
56 गेंद – केएल राहुल (बनाम MI)
56 गेंद – मार्कस स्टोइनिस (बनाम CSK)
56 गेंद – मिचेल मार्श (बनाम GT)
59 गेंद – क्विंटन डिकॉक (बनाम KKR)

अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं ममता बनर्जी, राज्यपाल ने बर्खास्त किया पश्चिम बंगाल कैबिनेट

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अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं ममता बनर्जी, राज्यपाल ने बर्खास्त किया पश्चिम बंगाल कैबिनेट
ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के बाद राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त कर दिया. बंगाल चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने ये फैसला लिया है. ये पूरा निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है.

पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त
संविधान के हिसाब से विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और मौजूदा विधानसभा 8 में 2021 से 7 में 2026 तक अस्तित्व में रही. चूंकि अब नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लिहाजा पुरानी विधानसभा को भंग कर दिया गया. इस आदेश के बाद अब ममता बनर्जी को इस्तीफा देने की जरूरत ही नहीं रही.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (6 मई 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ‘जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश’ है. साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया.

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से किया इनकार
ममता बनर्जी ने ये भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने बीजपी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई चुनाव आयोग से थी, जिसने बीजेपी के लिए काम किया. उन्होंने कहा था, ‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है. मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी. लगभग 100 सीट पर जनादेश को लूट लिया गया और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई.’

ममता ने विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने की बात कही
बंगाल में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी. उन्होंने कहा था, ‘इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की. सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है.’ उन्होंने कहा, ‘जब तक मैं कुर्सी पर थी, मैंने बहुत कुछ सहन किया. अब मैं एक आजाद पंछी हूं, एक आम इंसान हूं. मैं संघर्ष करने वाली हूं. मैं सड़कों पर रहूंगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूंगी.’

24 घंटे टीवी पर न्यूज देखने की आदत डलवाने वाले CNN फाउंडर टेड टर्नर का निधन

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24 घंटे टीवी पर न्यूज देखने की आदत डलवाने वाले CNN फाउंडर टेड टर्नर का निधन
टीवी पर 24 घंटे लगातार न्यूज देखने की जो आज पूरी दुनिया को आदत है, उसकी नींव रखने वाले दिग्गज अमेरिकी मीडिया मुगल और सीएनएन नेटवर्क के संस्थापक टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे वैश्विक मीडिया जगत में एक युग का अंत हो गया है। टर्नर सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे विजनरी शख्स थे, जिन्होंने टेलीविजन पत्रकारिता की पूरी तस्वीर और दिशा ही बदल कर रख दी। आइए समझते हैं उनका यह शानदार सफर कैसा रहा।

एक छोटे से बिजनेस से ग्लोबल मीडिया एंपायर तक
Ted Turner Dead : टेड टर्नर की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने पिता के बिलबोर्ड एडवरटाइजिंग बिजनेस (विज्ञापन के बोर्ड लगाने का काम) से की थी। लेकिन टर्नर की सोच बहुत आगे की थी। 1970 के दशक में उन्होंने अटलांटा में एक छोटे से टीवी स्टेशन को खरीदा, जो उस वक्त लगातार घाटे में चल रहा था। उन्होंने सैटेलाइट तकनीक का सही इस्तेमाल समझा और इस छोटे से स्टेशन को पूरे अमेरिका में प्रसारित करना शुरू कर दिया, जिसे बाद में ‘TBS’ (टर्नर ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम) के नाम से जाना गया।

1980: जब CNN ने रची मीडिया क्रांति
उस दौर में टीवी पर न्यूज केवल सुबह और शाम के एक निश्चित समय पर ही आती थी। लेकिन टेड टर्नर का मानना था कि खबरें कभी रुकती नहीं हैं, इसलिए न्यूज चैनल भी नहीं रुकना चाहिए। इसी सोच के साथ 1 जून 1980 को उन्होंने ‘केबल न्यूज नेटवर्क’ यानि सीएनएन की शुरुआत की। यह दुनिया का पहला 24 घंटे चलने वाला न्यूज़ चैनल था। शुरुआत में कई लोगों ने इस आइडिया का मजाक उड़ाया, लेकिन 1991 के ‘खाड़ी युद्ध’ के लाइव कवरेज ने सीएनएन को दुनिया का सबसे भरोसेमंद और ताकतवर न्यूज नेटवर्क बना दिया।

परोपकार और पर्यावरण के लिए ऐतिहासिक काम
टेड टर्नर केवल पैसा कमाने वाले उद्योगपति नहीं थे। वे एक बहुत बड़े परोपकारी व्यक्ति भी थे। सन 1997 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए 1 अरब डॉलर दान करने का ऐतिहासिक ऐलान कर के पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने अपना जीवन और अकूत संपत्ति लगाई। वे अमेरिका के सबसे बड़े जमींदारों में से एक थे और उन्होंने अपनी जमीनों को वन्यजीवों के संरक्षण, खासकर ‘बाइसन’ के बचाव के लिए सुरक्षित किया।

बिहार में दौड़ेगी ई-बसें और AI से सुधरेगा गवर्नेंस

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बिहार में दौड़ेगी ई-बसें और AI से सुधरेगा गवर्नेंस
बिहार कैबिनेट ने विकास, प्रौद्योगिकी और सुशासन को नई दिशा देते हुए 20 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में तकनीकी, स्वास्थ्य, परिवहन और चुनाव सुधार से जुड़े 20 बड़े फैसले लिए गए। बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तार से जानकारी दी। सरकार का जोर आधुनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जन-सुविधाओं पर है। इन फैसलों से बिहार को डिजिटल और स्मार्ट राज्य बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए गए हैं।

बिहार एआई मिशन का गठन
कैबिनेट ने ‘बिहार एआई मिशन’ को मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
एआई का उपयोग प्रशासन, कृषि, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन में किया जाएगा, जिससे डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

मां सीता के नाम पर सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज
सीतामढ़ी में बन रहे मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर ‘मां सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल’ कर दिया गया है। सीतामढ़ी को मां सीता की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए इस नामकरण से स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिला है।

400 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत 400 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का फैसला लिया गया। पटना में 150 बसें और मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा तथा पूर्णिया में 50-50 बसें चलाई जाएंगी।
इस पर 517.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना 12 वर्षों तक चलेगी। इससे शहरी परिवहन बेहतर होगा, प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

नगर निकाय चुनाव में ई-वोटिंग
2026 के नगरपालिका चुनावों में ई-वोटिंग सुविधा शुरू की जाएगी। यह सुविधा खासकर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिए होगी।
इस पर लगभग 31.45 लाख रुपये खर्च होंगे। एक केंद्रीय तकनीकी संस्था को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे मतदान प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी।

कैबिनेट के इन फैसलों से बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि ये प्रस्ताव राज्य को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएंगे।