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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को किया संबोधित

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों को सह अस्तित्व की दृष्टि से बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। कृषि के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ जीने का अवसर मिलता है। देश में कृषि की परंपरा लाखों साल पुरानी है। भीम बैठिका में पुरातन काल से कृषि की परंपरा के शैलचित्र देखने को मिलते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों सालों से कृषि के साथ जीने का मार्ग दिखाया है। भारतीय संस्कृति में खेती के प्रति आदर का भाव है। देश की धरती अन्न के रूप में सोना उगल रही है। देश में कभी अनाज का संकट आया था, लेकिन आज हमारे कृषि वैज्ञानिक नई-नई किस्में विकसित कर अनाज उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए संकल्पित भाव के साथ आगे बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय किसान, जय जवान में जय विज्ञान जोड़ा गया था, वर्तमान दौर में हम, इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ रहे हैं। प्रदेश में किसानों को हम केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर मार्केट लिकेंजेस से भी सशक्त बना रहे हैं। कृषि मंथन कार्यशाला किसानों के अनुभव, विज्ञान के नवाचार, सरकार की नीतियों और बाजार की संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा गौमाता का पूजन कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनजातीय समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों से स्वागत किया।

इन विकास कार्यों की दी सौगातें
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्‍न कार्यों का लोकार्पण कर विकास की सौगाते दी। इनमें प्रमुख रूप से 13 करोड़ रूपये की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 1.11 करोड़ रूपये लागत के बोहानी गन्‍ना अनुसंधान केन्‍द्र के प्रशासनिक भवन, 1 करोड़ रूपये लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्‍द्र के साथ ही जबलपुर में 1.26 करोड़ रूपये से बने स्‍वचालित तरल जैव उर्वरक उत्‍पादन केन्‍द्र का लोकार्पण किया। साथ ही किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रूपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्‍द्र शामिल है।

कृषि स्‍टार्ट-अप्‍स के साथ ही विभिन्‍न योजना के हितग्राहियों को हितलाभ का किया वितरण
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में भारत सरकार द्वारा वित्‍त पोषित 10 स्‍टार्ट-अप्‍स को 10 करोड़ रूपये से अधिक के स्‍वीकृति आदेश का वितरण किया। साथ ही कृषक अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने को लेकर पीपीव्‍ही, एफआर ऑथॉरिटी नई दिल्‍ली द्वारा प्रदत्‍त प्रमाण पत्र विश्‍वविद्यालय को प्रदान किया। उन्‍होंने कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के साथ ही विभिन्‍न विभागों के द्वारा संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में हमें और आगे बढ़ना है। प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारे मेहनतकश किसानों ने प्रदेश को दलहन उत्पादन में शीर्ष स्थान दिलवाया, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। अब हम तिलहन और अन्न सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश के किसान तीसरी फसल भी ले रहे हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए परंपरागत बीजों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे। इससे हमारी कृषि उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। राज्य सरकार पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक यंत्र सभी को साथ जोड़कर किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ा है। मध्यप्रदेश, देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य है। बाबा महाकाल के प्रसाद में रागी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार दूध उत्पादन से किसान की आय बढ़ा रही है। खेती और पशुपालन एक सिक्के के दो पहलु हैं। अभी प्रदेश में 9 प्रतिशत दूध का उत्पादन होता है, इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में दूध की खपत भी बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। शासकीय स्कूलों में पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन की अलग-अलग योजना पर कार्य कर रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक नई किस्मों के विकास में पोषकता पर विशेष जोर दे रहे हैं। प्रदेश में गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड बना है। मध्यप्रदेश ने गेहूँ उत्पादन में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है। इसे 2700 रूपए तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पित है। प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ मिला है। अब सरसों की फसल पर भी भावांतर का लाभ किसानों को दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान की कल्पना की थी। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। माँ नर्मदा प्रदेश के किसानों के लिए जीवन रेखा है, जो मध्यप्रदेश के साथ गुजरात और राजस्थान को भी जल देती है। माँ नर्मदा खेती से लेकर उद्योग की जरूरतों और हर कंठ की प्यास बुझाती है। मध्यप्रदेश, देश में कृषि क्षेत्र में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला राज्य बना है। इसमें माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद शामिल है।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप, एफपीओ एवं किसान बंधु शामिल हुए हैं। यह मंच कृषि के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश अनेक कृषि फसलों में देश में नंबर-1 है। कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार की हैं। विश्वविद्यालय ने बालाघाट के चिन्नौर चावल और रीवा के सुंदरजा आम के लिए जीआई टैग प्राप्त किए हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के साथ किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना और खेत से कारखानों तक उत्पादों की पहुंच सुगम बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विकास दर को गति देने के लिए क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर गतिविधियों को सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिये।

संवाद में कृषि और कृषि संबद्ध क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अनुसंधान और नवाचारों पर सारगर्भित चर्चा की, जिसमें कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल वैरायटी, प्राकृतिक खेती, खरपतवार नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कृषि में उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने पशुधन और पशुचारे के प्रबंधन के माध्यम से किसानों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर भी अपने विचार साझा किए।

इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक सर्व अजय विश्नोई, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष वरकड़े, जनप्रतिनिधि, सचिव कृषि निशांत वरवड़े, कमिश्नर धनंजय सिंह एवं कलेक्टर राघवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जगद्गुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज से की भेंट

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जगद्गुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज से की भेंट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को जबलपुर तुलसी पीठाधीश्वर, पद्म विभूषण, जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज से साकेत वाटिका में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी रामभद्राचार्य का शॉल फल भेंटकर अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व प्रसिद्ध रामकथा वाचक स्वामीजी से आत्मीयता से भेंटकर प्रदेश के कल्याण और विकास के लिए शुभाशीष प्राप्त किया। स्वामीजी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का माला पहनाकर स्वागत किया और आशीर्वाद दिया। स्वामीजी के अनुयायियों ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह के रूप में राम दरबार की प्रतिकृति भेंट की। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण सहित समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन भी उपस्थित थे।

जबलपुर के आयुर्वेद कॉलेज मैदान ग्वारीघाट में स्वामी रामभद्राचार्य जी रामकथा कर रहे है। विगत 5 अप्रैल से चल रही इस राम कथा का समापन 13 अप्रैल को होगा।

विराट होता सूर्यवंशी का वैभव

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विराट होता सूर्यवंशी का वैभव
गुवाहाटी में मंगलवार रात राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए मुकाबले में एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा गेंदबाज था तो दूसरी तरफ 15 वर्षीय बल्लेबाज। इस मैच को जसप्रीत बुमराह बनाम वैभव सूर्यवंशी के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सभी के मन में यह सवाल था कि कैसे एक बच्चा दुनिया के सबसे घातक गेंदबाज का सामना करेगा, लेकिन वैभव ने बुमराह की गेंदों पर दो अविश्वसनीय छक्के लगाकर बता दिया कि ये बल्लेबाज बेहद खास है।

बल्‍लेबाजों का सपना होता
बुमराह को छक्के लगाना हर बल्लेबाज का सपना होता है और पाकिस्तानी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ने तो एशिया कप में बुमराह को तीन छक्के जड़ने के बाद ‘डाक्यूमेंट्री’ तक बना डाली थी। विराट कोहली जैसा दिग्गज बल्लेबाज अपने आईपीएल करियर में बुमराह के विरुद्ध केवल तीन छक्के लगा पाया है, जबकि वैभव सूर्यवंशी पहली बार बुमराह का सामना करते हुए दो छक्के जड़ चुके हैं।

अब सूर्यवंशी सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुके हैं। एक ऐसा नाम, जिससे हर गेंदबाज को सतर्क रहना होगा। 30 अप्रैल 2025 की शाम जयपुर में ट्रेंट बोल्ट से पूछा गया था क्या अब उन्हें और बुमराह जैसे गेंदबाजों को एक 14 साल के बल्लेबाज को आउट करने की रणनीति बनानी पड़ रही है तो बोल्ट ने हंसते हुए कहा था कि वह इतने बड़े मंच पर किसी युवा खिलाड़ी को लेकर ‘चिंतित’ नहीं होंगे। उस समय यह बात मजाक जैसी लगी थी, लेकिन एक साल से भी कम समय में हालात पूरी तरह बदल गए।

बुमराह का सामना किया
बारिश से प्रभावित मुकाबले में जब खेल शुरू हुआ तो मुंबई के पास दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों का आक्रमण था, लेकिन सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाते हुए सभी योजनाओं को ध्वस्त कर दिया। दीपक चाहर के पहले ओवर में यशस्वी जायसवाल ने 22 रन बटोरकर लय बनाई, जिसके बाद सूर्यवंशी ने बुमराह का सामना किया। पहली ही गेंद पर लॉगऑन के ऊपर छक्का जड़कर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए।

तीन गेंद बाद उन्होंने बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर एक और छक्का लगाकर यह साबित कर दिया कि यह कोई संयोग नहीं था। बोल्ट भी सूर्यवंशी के ‘प्रकोप’ से अछूते नहीं रहे। उनकी एक चूक को सूर्यवंशी ने छक्के में तब्दील कर दिया। उस समय ऐसा लगा मानो अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं रह गया हो। सूर्यवंशी के सामने हर गेंदबाज सामान्य नजर आ रहा था।

11-11 ओवर का हुआ मैच
बारिश के कारण मुकाबला 11-11 ओवर का था, जिससे राजस्थान पर तेजी से रन बनाने का दबाव था। हालांकि, सूर्यवंशी के लिए यह कोई दबाव नहीं, बल्कि अवसर था। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट्स खेलते हुए गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। मुंबई के गेंदबाजों ने उनकी ताकत को देखते हुए स्टंप लाइन से दूर गेंदबाजी करने की कोशिश की, ताकि उन्हें आफ साइड पर खेलने पर मजबूर किया जा सके, लेकिन सूर्यवंशी ने इन रणनीतियों को भी बेअसर कर दिया। अंतत: वह शार्दुल ठाकुर की गेंद पर आउट हुए, जब तिलक वर्मा ने कैच लपका।

यशस्‍वी को मिली प्रेरणा
आउट होने से पहले उन्होंने महज चार गेंदों में 17 रन कूटे। दूसरी ओर यशस्वी ने भी शानदार पारी खेलते हुए 32 गेंदों पर नाबाद 77 रन बनाए, लेकिन सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने उनकी चमक को भी कुछ हद तक फीका कर दिया। मैच के बाद जायसवाल ने भी स्वीकार किया कि सूर्यवंशी का प्रदर्शन उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है।

मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या और कोच महेला जयवर्धने ने हार के बाद कहा कि सिर्फ पांच छक्कों का अंतर मैच का फैसला कर गया। हालांकि वास्तविकता में यह अंतर कहीं ज्यादा बड़ा था, क्योंकि शुरुआती पांच ओवरों में ही राजस्थान ने मुकाबले की दिशा तय कर दी थी। राजस्थान की यह जीत पूरी तरह से एकतरफा रही, जिसमें जायसवाल की परिपक्वता और सूर्यवंशी की निडरता का बेहतरीन संगम देखने को मिला।

चार जिले के सहायक आयुक्त को शो-कॉज नोटिस

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चार जिले के सहायक आयुक्त को शो-कॉज नोटिस
आदिम जाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आज मंत्रालय में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विभागीय योजनाओं, आय-व्यय तथा आगामी कार्ययोजनाओं सहित विभिन्न विकास कार्यों की गहन समीक्षा की गई।

प्रमुख सचिव ने विभागीय योजनाओं में बेहतर कार्य करने वाले जिलों की सराहना की, वहीं विभिन्न मदों के बजट आबंटन को सदुपयोग न करने वाले चार जिले बलौदाबाजार, बेमेतरा, जशपुर और बिलासपुर के सहायक आयुक्तों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आगामी शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए आश्रम छात्रावासों की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बोरा ने निर्देशित किया कि अगले दो महीनों में छात्रावासों के मरम्मत, रंग-रोगन, शौचालय, पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कर लिया जाए। साथ ही छात्रावासों में अग्निशमन यंत्र और सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए गए।

उन्होंने “प्रोजेक्ट संकल्प” के तहत विद्यार्थियों के सांस्कृतिक, मानसिक एवं नैतिक विकास को और मजबूत करने के लिए ध्यान और योग को भी शामिल करने की बात कही। इसके अलावा, सेप्टिक टैंकों की सफाई मैनुअल तरीके से न कराकर, नगरीय निकायों के माध्यम से सक्शन मशीनों से कराने के निर्देश दिए।

बैठक में छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर संतोष जताया गया। बताया गया कि नई व्यवस्था के तहत पिछले सत्र में 3.3 लाख विद्यार्थियों को माह दिसम्बर तक छात्रावृत्ति की 72 प्रतिशत राशि और 99 प्रतिशत राशि 31 मार्च तक, सुगमतापूर्वक समय पर सीधे विद्यार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई। इस व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए जल्द ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।

वन अधिकार अधिनियम की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का 15 दिनों के भीतर ग्राम सभाओं के माध्यम से निराकरण सुनिश्चित किया जाए। निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि नए आश्रम, छात्रावास भवन बनाने का प्रस्ताव भेजने से पहले स्थल निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र में पूर्व प्रस्तावित छात्रावासों का निर्माण अब प्राथमिकता से किया जाए।

बैठक में एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालयों में एक भी सीट खाली न रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही जवाहर उत्कर्ष योजना के तहत उत्कृष्ट विद्यालयों के चयन पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, पीएम जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष, देवगुड़ी एवं अखरा विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता के साथ शीघ्र कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में संयुक्त सचिव बी.के. राजपूत, अनुपम त्रिवेदी, वित्तीय सलाहकार नीरज मिश्रा, अपर संचालक संजय गौड़, जितेंद्र गुप्ता, आर.एस. भोई सहित विभागीय अधिकारी एवं सभी जिलों के सहायक आयुक्त उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं से किया वर्चुअल संवाद

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं से किया वर्चुअल संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 9 अप्रैल से गेहूँ खरीदी आरंभ हो रही है। उन्होंने सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को दिए गए हैं। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की व्यवस्था की जा रही है। गेहूँ उपार्जन जैसी महत्वपूर्ण और व्यापक गतिविधि में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाएं भी सहयोग करें। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर फैसले लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार किसान और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल संवाद के दौरान व्यक्त किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है। गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना बड़ी चुनौती थी, हम इसे 2700 रूपये प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे। किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाना हमारी प्रतिबद्धता है। हम जनता की सेवा करना चाहते हैं, इसी उद्देश्य से उपार्जन केंद्रों पर गेहूँ खरीदी की बेहतर व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किये जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के द्वारा भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हित से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराया जाए।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई का निधन

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई का निधन
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को निधन हो गया। उनके परिवार ने जानकारी देते हुए बताया कि 94 वर्ष की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। मोहसिना किदवई का निधन नोएडा के मेट्रो अस्पताल में बुधवार की सुबह हुआ। उनके दामाद रजीउर रहमान किदवई ने बताया कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं।

उन्होंने बताया कि निजामुद्दीन के कब्रिस्तान में शाम करीब पांच बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। किदवई पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने राजीव गांधी की सरकार में महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला था। वे समय-समय पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य रह चुकी हैं।

भारतीय राजनीति की बड़ी क्षति
किदवई अतीत में कांग्रेस की कार्यकारी समिति और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके निधन से भारतीय राजनीति के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया। वे उन गिने-चुने नेताओं में थीं, जिन्होंने दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई।

मोहसिना किदवई का जन्म 1932 में उत्तर प्रदेश के एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन की ओर रुख किया और जल्द ही राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वे शुरू से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी रहीं और पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजनीतिक जगत में शोक की लहर
उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा और विविधतापूर्ण रहा। वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा की सदस्य रहीं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने शहरी विकास, पर्यटन और आवास जैसे मंत्रालयों में मंत्री के रूप में काम किया और अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम नीतिगत फैसलों में योगदान दिया।

उनके निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया। मोहसिना किदवई का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा, जिन्होंने समर्पण और सेवा के माध्यम से राजनीति को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।

20वें दिन धुरंधर 2 के सैलाब में डूबा बॉक्स ऑफिस

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20वें दिन धुरंधर 2 के सैलाब में डूबा बॉक्स ऑफिस
आदित्य धर निर्देशित धुरंधर 2 (Dhurandhar 2) ने बॉक्स ऑफिस पर तीन सप्ताह पूरे कर लिए हैं। लगातार अपनी धुंआधार कमाई के साथ फिल्म ने एक यूनीक क्लब में एंट्री ले ली है। इसी के साथ धुरंधर द रिवेंज वर्ल्डवाइड कमाई के मामले में साल 2026 की टॉप 10 फिल्मों में शामिल हो गई है।

रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ रही है। रिलीज के 20वें दिन भी इस फिल्म के लिए दर्शकों का जोश बना हुआ है। 19 मार्च को रिलीज हुई इस मेगा ब्लॉकबस्टर ने न सिर्फ बॉलीवुड का सूखा खत्म किया बल्कि ‘बाहुबली 2’जैसी शानदार फिल्मों को ध्वस्त किया।

कितना रहा 20वें दिन का कलेक्शन?
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 102.55 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। इसी के साथ इसके पहले हफ्ते का कलेक्श 674.17 करोड़ रुपये रहा। दूसरे हफ्ते धुरंधर 2 ने 15 दिन में 263.65 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। वहीं 20वें दिन धुरंधर 2 ने 10.10 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक फिल्म का कुल कलेक्शन 1033.37 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

दुनियाभर में छाई धुरंधर 2
वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन के मामले में भी फिल्म की शानदार कमाई जारी है। दुनियाभर में धुरंधर 2 ने 1641.21 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है। दुनिया भर में कलेक्शन के मामले में धुरंधर 2 ने बाहुबली 2 का रिकॉर्ड पहले ही तोड़ दिया है। अब इसका अगला निशाना दंगल 2 है।

अभी ये आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि आने वाले दो हफ्तों में कोई बड़ी रिलीज नहीं है। अक्षय कुमार की भूत बंगला 17 अप्रैल को रिलीज होगी इस हिसाब से धुरंधर 2 के पास किला फतह करने के लिए भरपूर समय है।

सीजफायर का असर और भारत की रफ्तार: वर्ल्ड बैंक ने जताया भरोसा, बढ़ाई ग्रोथ रेट

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सीजफायर का असर और भारत की रफ्तार: वर्ल्ड बैंक ने जताया भरोसा, बढ़ाई ग्रोथ रेट
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होते ही भारत के लिए गुड न्‍यूज आई है। विश्‍व बैंक ने बुधवार को भारत के ग्रोथ के अनुमानों को बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऐसा किया गया है। उसने पिछले अक्‍टूबर को भारत के विकास अनुमान को 6.3% रखा था। अब इसे बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। इसका कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में शानदार प्रदर्शन बताया गया है।

हालांकि, विश्‍व बैंक ने यह भी कहा कि मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष से पैदा हुई मुश्किलों के कारण पिछले वर्षों की तुलना में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है।

व‍िश्‍व बैंक का ताजा अपडेट और क्‍या कहता है?
विश्व बैंक के ताजा ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट’ के अनुसार,
वित्त वर्ष 2025-26 में अर्थव्यवस्था के 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.1% थी।
भारत की ग्रोथ मजबूत घरेलू मांग और निर्यात से सहारा मिलेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान थोड़ा ज्‍यादा यानी 6.9% लगाया है।

GST कटौती का फायदा द‍िखना शुरू होगा
रिपोर्ट में बताया गया है कि गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स (जीएसटी) में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं। साथ ही इसके चलते परिवारों की खर्च करने की क्षमता भी सीमित होने का डर है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में मजबूत मांग, खाने-पीने की चीजों की कीमतों का सामान्य होना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई को ऊपर ले जा सकती हैं।’

ये द‍िख रही हैं मुश्‍क‍िलें
बढ़ती अनिश्चितता और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण निवेश में भी धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी की संभावना है। भले ही भारत के निर्यात को अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बाजारों तक बेहतर पहुंच से फायदा मिल सकता है। लेकिन, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में विकास की धीमी रफ्तार इन फायदों को कम कर सकती है।

ईरान की सीधी चेतावनी: दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी बंद न हुई तो तेल अवीव पर गिराएंगे बम

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ईरान की सीधी चेतावनी: दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी बंद न हुई तो तेल अवीव पर गिराएंगे बम
अमेरिका के साथ संघर्ष विराम के बीच ईरान ने इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अगर दक्षिण लेबनान पर इजरायली हमले जारी रहते हैं, तो वह तेल अवीव पर हमला कर सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब यह चर्चा की जा रही है कि क्या अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम में लेबनान शामिल है या नहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा, “कुछ ही घंटों के भीतर, अगर दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी नहीं रुकी, तो हमारी हवाई और मिसाइल यूनिट तेल अवीव पर बमबारी करेगी।”

हिजबुल्लाह ने संघर्ष विराम का ऐलान किया
ईरान-अमेरिका में संघर्ष विराम के ऐलान के तुरंत बात हिजबुल्लाह ने बुधवार तड़के इजरायल और लेबनान में मौजूद इजरायली सैनिकों पर गोलीबारी रोक दी है। हिजबुल्लाह का कहना है कि उसने यह कदम अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के हिस्से के तौर पर उठाया है। हालांकि, इजरायल ने इस संघर्ष विराम में लेबनान के शामिल होने से इनकार किया है। इजरायल ने कहा है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उसकी कार्रवाइयां जारी रहेंगी, जिसमें इस समूह के सैन्य अड्डों पर हमला शामिल है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 2 मार्च को फिर से लड़ाई शुरू हुई थी।

हिजबुल्लाह को बचा रहा ईरान
ईरान-अमेरिका संघर्षविराम में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा करने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि दो हफ्ते के इस संघर्ष विराम में लेबनान भी शामिल होगा। पहले भी ऐसी रिपोर्ट्स आई थी कि ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी संभावित संघर्ष विराम में लेबनान को शामिल करने की इच्छा जताई थी। हिजबुल्लाह को ईरान का प्रॉक्सी मिलिशिया कहा जाता है, तो दूसरे छोर से इजरायल के खिलाफ सैन्य अभियान का नेतृत्व करता है।

हिजबुल्लाह कौन है?
हिजबुल्लाह लेबनान का एक शक्तिशाली शिया मुस्लिम राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसे कई देशों ने आतंकवादी समूह घोषित किया हुआ है।
हिजबुल्लाह का गठन 1980 के दशक में इजरायल के खिलाफ किया गया था। इसे ईरान का समर्थन प्राप्त है, जो इसकी नीतियों को तय करता है।
हिजबुल्लाह का शाब्दिक अर्थ “ईश्वर की पार्टी” है, जो विचारधारा के रूप में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति निष्ठा रखता है।
हिजबुल्लाह के पास रॉकेट, मिसाइल और दूसरे छोटे हथियारों का विशाल जखीरा है। हिजबुल्लाह को लेबनानी सेना से भी अधिक मजबूत माना जाता है।

संघर्ष विराम को लेकर असमंजस क्यों?
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि उसने संघर्षविराम को स्वीकार कर लिया है और वह शुक्रवार से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करेगा। हालांकि, न तो ईरान और न ही अमेरिका ने यह बताया कि संघर्षविराम कब से लागू होगा। इस बीच बुधवार सुबह इजराइल, ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के एक अधिकारी के अनुसार, इजरायल भी संघर्षविराम के लिए सहमत हो गया है।

सौभाग्य और अटूट पुण्य पाने का महामुहूर्त है अक्षय तृतीया

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सौभाग्य और अटूट पुण्य पाने का महामुहूर्त है अक्षय तृतीया
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जा रही है। ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो। माना जाता है कि इस दिन किए गए जप-तप, दान और शुभ कार्यों का फल जीवनभर बना रहता है।

कर सकते हैं ये शुभ कार्य
अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने या मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में इस दिन पर बिना किसी मुहूर्त के शादी, सगाई, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ व मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इसी के साथ यह तिथि किसी नए काम की शुरुआत करने के लिए भी बहुत ही शुभ मानी जाती है।

अक्षय पुण्य के लिए क्या करें दान?
हिंद धर्म में माना गया है कि अक्षय तृतीया पर दान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। ऐसे में आप इस दिन पर अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंदों को अनाज जैसे गेहूं, जौ, चावल, जल से भरे पात्र, वस्त्र और धन का दान कर सकते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन सफेद रंग की चीजों दूध, दही, शक्कर, शंख, सफेद कपड़े और खीर आदि का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जातक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आप घी, गुड़, चना और सत्तू का दान भी कर सकते हैं, जो अत्यंत फलदायी माना गया है।

खरीदें ये चीजें
अक्षय तृतीया को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन दान के साथ-साथ कुछ चीजों की खरीदारी को भी शुभ माना गया है –
अक्षय तृतीया के दिन सोना या फिर चांदी खरीदने से धन-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन घर लाया गया सोना कभी कम नहीं होता।
अक्षय तृतीया का दिन नया वाहन या घर खरीदने के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है।
यदि आप कीमती धातु नहीं खरीद सकते, तो इस दिन पर नमक खरीदकर घर लाना भी बहुत शुभ माना गया है।
मिलेगी पितरों की कृपा
अक्षय तृतीया पर पितरों के निमित्त किया गया कार्य परिवार में शांति लाता है। ऐसे में इस दिन पर पितरों की पसंद का भोजन और जल का दान करना चाहिए। इसके साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखते हैं, जससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।