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जंग और महंगाई के बीच नई आफत: दुनिया के 23 देशों में पहुंचा ‘सिकाडा’ कोरोना

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जंग और महंगाई के बीच नई आफत: दुनिया के 23 देशों में पहुंचा ‘सिकाडा’ कोरोना
भर में कोरोना वायरस का एक नया चेहरा सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ओमिक्रॉन के इस नए सब-वेरिएंट BA.3.2 को वैज्ञानिकों ने ‘सिकाडा’ (Cicada) नाम दिया है। यह वेरिएंट अब तक दुनिया के 23 देशों में अपनी दस्तक दे चुका है और इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसका “अदृश्य” व्यवहार और भारी म्यूटेशन है।

क्यों खास है ‘सिकाडा’ वेरिएंट?
इस नए स्ट्रेन को ‘सिकाडा’ नाम एक खास वजह से दिया गया है। सिकाडा एक ऐसा कीड़ा है जो सालों तक जमीन के नीचे चुपचाप रहता है और अचानक भारी संख्या में बाहर निकलकर शोर मचाता है। ठीक इसी तरह, BA.3.2 वेरिएंट भी लंबे समय तक वैज्ञानिकों की नजरों से बचकर अब अचानक तेजी से फैल रहा है।

बिहार में बनेगा भाजपा का मुख्यमंत्री, JDU से बनेंगे दो डिप्टी CM, 15 अप्रैल तक नई सरकार के गठन की संभावना

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बिहार में बनेगा भाजपा का मुख्यमंत्री, JDU से बनेंगे दो डिप्टी CM, 15 अप्रैल तक नई सरकार के गठन की संभावना
बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफे के बाद राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर NDA में मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, खरमास समाप्त होने के बाद 15 अप्रैल तक नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार आगामी 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। तब तक वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

ईरान-US जंग के बीच स्पेन का विद्रोह: अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपने दरवाजे किए बंद

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ईरान-US जंग के बीच स्पेन का विद्रोह: अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपने दरवाजे किए बंद
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्पेन ने एक फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर से आईना दिखा दिया है। स्पेन ने सोमवार को ईरान पर हमलों में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है।

स्पेन का यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह पहले से ही संयुक्त रूप से संचालित अमेरिकी सैन्य अड्डों के इस्तेमाल किए जाने से इनकार कर चुका है। हालिया फैसले को इसी के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

स्पेन की रक्षा मंत्री ने किया एलान
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोबल्स ने सोमवार को कहा कि हम ईरान के साथ युद्ध से संबंधित किसी भी कार्रवाई के लिए न तो सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं और न ही हवाई क्षेत्र के उपयोग की। यह कदम पहली बार स्पेनिश अखबार एल पेस में प्रकाशित हुआ था, जिसमें सैन्य सूत्रों का हवाला दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिबंध के कारण पश्चिम एशिया में लक्ष्यों की ओर यात्रा करने वाले सैन्य विमानों को नाटो सदस्य स्पेन से होकर गुजरने के बजाय वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ेगा। हालांकि, आपातकालीन स्थितियों में हवाई क्षेत्र बंद करने का यह नियम लागू नहीं होगा।

ईरान संघर्ष पर क्या है स्पेन की सरकार का रुख?
स्पेन के वित्त मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने कहा कि यह निर्णय संघर्ष के प्रति स्पेनिश सरकार के व्यापक रुख को दर्शाता है। उन्होंने रेडियो कैडेना सेर को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “यह फैसला स्पेन की सरकार द्वारा पहले से लिए गए उस निर्णय का हिस्सा है कि वह ऐसे युद्ध में भाग नहीं लेगी या योगदान नहीं देगी जो एकतरफा और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ शुरू किया गया था।”

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ईरान पर अमेरिकी और इस्राइली हमलों के सबसे मुखर आलोचकों में से रहे हैं, जिन्होंने इसे लापरवाह और अवैध बताया है। इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संभावित आर्थिक परिणामों की चेतावनी दी थी।

स्पेन से क्यों नाराज हुए ट्रंप?
वॉशिंगटन और मैड्रिड के बीच तनाव तब बढ़ गया, जब स्पेन के पीएम ने ईरान पर हमलों की आलोचना की। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के नेतृत्व वाली स्पेन की वामपंथी सरकार ने दक्षिणी स्पेन में ईरान के खिलाफ अभियान से संबंधित संचालन के लिए संयुक्त रूप से संचालित हवाई और नौसैनिक अड्डों का उपयोग करने से अमेरिकी विमानों को भी रोक दिया था।

बुल पर भारी पड़ी जंग: 1636 अंकों की गिरावट के साथ सेंसेक्स लहूलुहान, निफ्टी ने तोड़ा 22400 का स्तर

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बुल पर भारी पड़ी जंग: 1636 अंकों की गिरावट के साथ सेंसेक्स लहूलुहान, निफ्टी ने तोड़ा 22400 का स्तर
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों का मनोबल कमजोर बना रहा। इसके चलते सोमवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 2025-26 वित्तीय वर्ष के अंतिम कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के साथ बंद हुए। एशियाई बाजारों में कमजोर रुझान और विदेशी निधियों की निरंतर निकासी ने भी घरेलू शेयरों में मंदी के रुझान को और बढ़ा दिया। निवेशकों के पोर्टफोलियो में नौ लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज करते हुए, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, यह 1,809.09 अंक या 2.45 प्रतिशत गिरकर 71,774.13 पर पहुंच गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ।

रुपया डॉलर के मुकाबले 94.78 रुपये पर स्थिर हुआ
ईरान से जुड़े बढ़ते युद्ध तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल देखने को मिली, जिसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के बीच सोमवार को अंतर-दिवसीय कारोबार के दौरान रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। हालांकि बाद में इसमें हल्की रिकवरी आई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.78 (अस्थायी) पर स्थिर होता दिखा।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सबसे बड़े पिछड़ने वालों में शामिल थे। दूसरी ओर, टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड को लाभ हुआ। 2025-26 वित्तीय वर्ष में, बीएसई बेंचमार्क 5,467.37 अंक या 7 प्रतिशत गिर गया, और निफ्टी 1,187.95 अंक या 5 प्रतिशत गिर गया।

यूरोपीय बाजारों में दिखी मामूली तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक लगभग 3 प्रतिशत गिर गया। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी नीचे बंद हुआ, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक सकारात्मक दायरे में समाप्त हुआ। यूरोप के बाजारों में मामूली तेजी देखी गई।

शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 2.15 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.73 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में 1.67 प्रतिशत की गिरावट आई।

क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट जारी रही, बेंचमार्क सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक गिर गए, जो लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रेरित गहरी बिकवाली की भावना को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और भारत की विकास दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के प्रभाव को लेकर चिंताओं के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च में घरेलू शेयरों से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल लिए हैं, जो अब तक का सबसे खराब मासिक बहिर्वाह है।

ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 115.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 2.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 115.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,566.15 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,690.23 अंक या 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 486.85 अंक या 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर समाप्त हुआ।

बिना शांति के विकास मुमकिन नहीं, उग्रवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवा प्रगति के आधार – पीएम मोदी

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बिना शांति के विकास मुमकिन नहीं, उग्रवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवा प्रगति के आधार – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत संवाद’ नामक जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत नमो ऐप के माध्यम से असम के पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इस बातचीत में पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के विचार जाने और उन्हें चुनाव में जीत के लिए कड़ी मेहनत का गुरुमंत्र दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बीते एक दशक में असम में तेज विकास होने की बात भी कही।

‘सिर्फ कागजों पर समझौते करती थी कांग्रेस’
असम में भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य के विकास के लिए सबसे पहली शर्त शांति है। उन्होंने कहा कि राज्य लंबे समय तक अस्थिता से जूझा है, लेकिन पिछले दशक में चीजें बदल गई हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने पूर्वोत्तर में विभिन्न संगठनों के साथ 12 शांति समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों को यह याद दिलाना चाहिए कि कांग्रेस सरकार सिर्फ सुर्खियां बटोरने और लोगों को गुमराह करने के लिए कागजों पर ही समझौते करती थी।

असम ने अस्थिरता का लंबा दौर देखा है’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने वह दौर देखा है जब असम हिंसा की आग में जल रहा था। असम में लंबे समय तक अस्थिरता रही, लेकिन पिछले दशक में स्थितियां बदली हैं। आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से राज्य में नया आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान शांति समझौतों को नजरअंदाज किया गया और युवाओं को भटकने के लिए छोड़ दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस शासन में उग्रवादी और छात्र संगठनों के साथ कोई भी समझौता सफल नहीं हुआ। कांग्रेस ने बोडो समुदाय के साथ विश्वासघात किया।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा ने शांति स्थापित करने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए काम किया है तथा शांति समझौतों को जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू किया जा रहा है।

‘लोगों को कांग्रेस का कार्यकाल याद दिलाने की जरूरत’
प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्होंने पहली बार वोट करने जा रहे मतदाताओं को पूर्व की कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल को याद दिलाने की जरूरत है और एक छोटी सी गलती राज्य को पीछे धकेल सकती है। पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भाजपा-एनडीए की सरकार की जीत की हैट्रिक के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की।

पार्टी कार्यकर्ताओं से जीत के लिए मेहनत करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सभी लोग असम में भाजपा-एनडीए सरकार की ‘हैट्रिक’ सुनिश्चित करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, ‘मैं असम भाजपा के कार्यकर्ताओं का स्वागत करता हूं। मैं भी आप की तरह एक कार्यकर्ता हूं। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाती है, मैं उसे निभाता हूं। आज बूथ स्तर पर आपसे संवाद का अवसर मिला है। मुझे पता है कि आप सभी ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं।’ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से राज्य में प्रसारित हो रहे एआई-जनित वीडियो से लोगों को सतर्क करने को भी कहा। 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार 2016 से राज्य में सत्ता में है।

‘स्थिर रिश्ता’ है तो आप हैं शादीशुदा! सरकार ने नियमों में किया ऐतिहासिक बदलाव

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‘स्थिर रिश्ता’ है तो आप हैं शादीशुदा! सरकार ने नियमों में किया ऐतिहासिक बदलाव
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए 33 महत्वपूर्ण सवाल जारी किए हैं, जिससे लोगों को प्रक्रिया समझने में आसानी हो सके। इसके साथ ही एक FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस बार जनगणना में एक अहम बदलाव देखने को मिला है।

व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय, आरटीआई से भी नहीं मिलेगा जवाब
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम में एक महत्वपूर्ण प्रावधान, धारा पंद्रह, शामिल है। यह प्रावधान बताता है कि व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह गोपनीय माना जाता है। इसे आरटीआई अधिनियम के तहत साझा नहीं किया जा सकता है। इसे अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे किसी अन्य संगठन के साथ साझा भी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका इस पूरे कार्य में केंद्रीय है। उनकी पूरी प्रशासनिक प्रणाली जमीनी स्तर पर क्षेत्र कार्य करने में लगी हुई है।

लिव-इन कपल्स को शादीशुदा माना जाएगा
सरकार की तरफ से जारी हुए FAQ के अनुसार, अगर कोई लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा जोड़ा अपने संबंध को स्थिर मानता है, तो उसे शादीशुदा जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह स्पष्टीकरण जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर दिए गए एक सवाल के जवाब में सामने आया है।

क्या-क्या पूछे जाएंगे सवाल
पहले चरण में घर और परिवार से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसमें शामिल हैं:-
मकान का नंबर और संरचना
फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री
घर की स्थिति और उपयोग
परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या
शादीशुदा जोड़ों की संख्या
परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग
खाने की आदतें और इस्तेमाल होने वाले अनाज
वाहन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता

दो चरणों में होगी जनगणना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें पहली बार जाति गणना भी शामिल होगी। आजादी के बाद यह देश की 16वीं जनगणना होगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।

जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब इसे दो चरणों में कराया जाएगा…
पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण, आवास गणना
दूसरा चरण: फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना
पहली बार पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया
कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब हाथ से चलने वाले उपकरण, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। करीब 32 लाख फील्ड कार्यकर्ताओं (गणनाकार और पर्यवेक्षक) मोबाइल डिवाइस के माध्यम से करोड़ों घरों से जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक आंकड़े एकत्र करेंगे। यह डाटा सीएमएमए प्रणाली के जरिए तुरंत ट्रांसमिट, संकलित और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे त्रुटियों में कमी आएगी और समय की बचत होगी।

रियल-टाइम निगरानी संभव
सर्कुलर के अनुसार, सीएमएमएस के जरिए उपयोगकर्ता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) का गठन, सुपरवाइजरी सर्किल का निर्धारण, गणनाकर्मियों की नियुक्ति, पहचान पत्र जारी करने और फील्ड ऑपरेशन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसमें कहा गया है कि सीएमएमएस जनगणना क्षेत्र के संचालन की नियुक्तियों, प्रशिक्षण और लगभग वास्तविक समय की निगरानी को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमिका-आधारित पहुंच नियंत्रण को भी सक्षम बनाता है।

30 लाख कर्मियों की होगी तैनाती
जनगणना 2027 में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी लगाए जाएंगे। इनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और कई तकनीकी कर्मचारी शामिल होंगे। यह जनगणना अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल ऑपरेशन होगा। इस दौरान लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिन का रोजगार भी पैदा होगा। फील्ड में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को उनके नियमित काम के अलावा यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और इसके लिए मानदेय भी तय किया गया है।

घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे
जनगणना करने वाले गणनाकार (एन्यूमरेटर), जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं, अपने टैबलेट या मोबाइल ऐप में घर-घर जाकर सभी जानकारी दर्ज करेंगे। हर घर का लोकेशन, सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, विकलांगता, प्रवासन और अन्य जरूरी विवरण रिकॉर्ड किए जाएंगे। ऐप में डाले जाने वाले डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी फीचर जोड़े गए हैं, ताकि कोई डेटा लीक या गड़बड़ी न हो।

लोग खुद भी भर सकेंगे फॉर्म
सरकार इस बार लोगों को स्वयं-गणना यानी सेल्फ इन्यूमरेशन का विकल्प भी देगी। लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद भी भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया तेज होगी और सिस्टम का भार कम होगा। जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट नहीं है, उनके लिए फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा दर्ज करेंगे।

तीसरी आंख का कमाल: जानिए कैसे UltraEdge और Ball Tracking की मदद से अंपायर पलक झपकते लेते हैं सही फैसला

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तीसरी आंख का कमाल: जानिए कैसे UltraEdge और Ball Tracking की मदद से अंपायर पलक झपकते लेते हैं सही फैसला
आईपीएल 2026 का आगाज हो चुका है और फैंस एक बार फिर चौकों-छक्कों की बरसात देखने को तैयार हैं. लेकिन अब क्रिकेट सिर्फ खिलाड़ियों का खेल नहीं रह गया है मैदान पर हर बड़े फैसले के पीछे एडवांस टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका होती है. खासकर LBW, एज और बोल्ड जैसे फैसलों में तकनीक सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है.

Hawk-Eye
मैच के दौरान सबसे अहम तकनीक Hawk-Eye मानी जाती है. स्टेडियम में लगे कई हाई-स्पीड कैमरे गेंद की हर हरकत को कैप्चर करते हैं. इसके जरिए गेंद की 3D ट्रैजेक्टरी तैयार की जाती है जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि गेंद स्टंप्स पर लगती या नहीं. LBW के मामलों में यह तकनीक थर्ड अंपायर को बेहद स्पष्ट विजुअल्स देती है जिससे सही फैसला लेना आसान हो जाता है.

UltraEdge और Snickometer
जब मामला बेहद करीबी होता है यानी गेंद बल्ले या पैड को हल्के से छूती है तब UltraEdge और Snickometer काम आते हैं. इनमें ऑडियो सेंसर और हाई-स्पीड कैमरे का इस्तेमाल होता है जो सबसे हल्की आवाज या टच को भी पकड़ लेते हैं. स्क्रीन पर ग्राफ के रूप में स्पाइक दिखाई देता है जिससे अंपायर को साफ संकेत मिल जाता है कि एज लगा है या नहीं. यह तकनीक खासतौर पर LBW रिव्यू और कैच आउट के फैसलों में बहुत मददगार होती है.

Smart Stumps
अब स्टंप्स भी स्मार्ट हो चुके हैं. इनमें LED लाइट्स और माइक्रोचिप सेंसर लगे होते हैं जो गेंद लगते ही तुरंत सिग्नल भेज देते हैं. इससे बोल्ड या रनआउट जैसे फैसले तुरंत और बिना किसी गलती के लिए जा सकते हैं. साथ ही यह सिग्नल ब्रॉडकास्ट टीम और थर्ड अंपायर तक रियल टाइम में पहुंचता है.

Hot Spot
Hot Spot एक खास तकनीक है जो इंफ्रारेड कैमरों की मदद से यह दिखाती है कि गेंद बल्ले या पैड से टकराई है या नहीं. जब गेंद टकराती है तो हल्की गर्मी पैदा होती है जिसे यह तकनीक कैप्चर कर लेती है. इससे एज या संपर्क की पुष्टि करना आसान हो जाता है खासकर जब मामला बेहद नजदीकी हो.

टेक्नोलॉजी से बढ़ी भरोसेमंद क्रिकेट
Hawk-Eye, UltraEdge, स्मार्ट स्टंप्स और Hot Spot जैसी तकनीकों ने क्रिकेट को पहले से ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बना दिया है. अब फैंस निश्चिंत होकर मैच का आनंद ले सकते हैं क्योंकि हर बड़ा फैसला डेटा और टेक्नोलॉजी के आधार पर लिया जाता है.

ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा

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ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां इजरायली हमले में IRGC के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टी हुई है. हाल ही में इजरायल ने इस बात का दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के लिए जिम्मेदार तंगसिरी की मौत हो गई है. इजरायली हमले के बाद गंभीर चोटों से वह उबर नहीं पाए. IRIB ने उनकी मौत की पुष्टी की है. इससे पहले इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि कमांडर को इजरायली सेना के लक्षित ऑपरेशन में मार गिराया गया था.

अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. खाड़ी युद्ध में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को चुनौती देने में उनकी भूमिका अहम रही थी. लीरेजा तंगसिरी 26 मार्च को हुए बंदर अब्बास में इजरायली हमले के दौरान गंभीर चोट के चलते घायल हो गए थे.

ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक हमले में मारे जा चुके हैं

इससे पहले इस युद्ध में कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य हस्तियों की जान जा चुकी है. सबसे पहले इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में उनके परिसर पर हवाई हमला किया गया था. वह 86 साल के थे. 1989 से ईरान शीर्ष नेतृ्त्व संभाल रहे थे.

इनके अलावा अली लारीजानी जो सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे. उनकी मौत 17 मार्च को हमले के दौरान हो गई थी. वह 67 साल के थे. ईरानी मीडिया के अनुसार उनके साथ उनके बेटे और उनके एक डिप्टी भी मारे गए थे.

इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे. 18 मार्च को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई थी. अगस्त 2021 में उन्होंने नागरिक खुफिया तंत्र का नेतृत्व संभाला था. इनके अलावा आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर की 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मौत हो गई थी. इसके अलावा वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह 28 फरवरी को तेहरान के हमले में मारे गए.

ईरान सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी 28 फरवरी के हमले में मारे गए. बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी 17 मार्च को हुए हमले में मारे गए. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना खुफिया प्रमुख बेहनम रजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में हमले के दौरान मारे गए.

पहली बार ₹95 के पार पहुंचा डॉलर, ईरान-अमेरिका जंग ने बिगाड़ा खेल

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पहली बार ₹95 के पार पहुंचा डॉलर, ईरान-अमेरिका जंग ने बिगाड़ा खेल
रुपए ने सोमवार को कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त गंवा दी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के माहौल के कारण घरेलू मुद्रा दबाव में है.

रुपए ने हालांकि बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन बाद में इसने शुरुआती लाभ गंवा दिया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और फिर 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद स्तर से 128 पैसे की बढ़त दर्शाता है.

ईरान युद्ध की वजह से हिल गया वैश्विक बाजार
यह बढ़त हालांकि बरकरार नहीं रह सकी और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दिन के कारोबार में 95.22 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया. ईरान में जारी युद्ध और मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल रहा है. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था.

आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपए के कमजोर होने का मतलब है कि अब विदेश से आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी. यानी अब कच्चे तेल के लिए भारत को अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.

रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में आएगा उछाल!
इतना ही नहीं मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स, जिनके पार्ट्स विदेश से आते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही जो छात्र विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. माल ढुलाई भी महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल आ सकता है.

ट्रंप के खिलाफ सड़को पर उतरी अमेरिका की जनता, नो किंग्स’ प्रदर्शन शुरू

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ट्रंप के खिलाफ सड़को पर उतरी अमेरिका की जनता, नो किंग्स’ प्रदर्शन शुरू

कई शहरों में एक साथ जनता सड़कों पर उतरी

अमेरिका-अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ हाल ही में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। “No Kings” नाम से आयोजित इन प्रदर्शनों में अमेरिका के कई प्रमुख शहरों सहित सैकड़ों स्थानों पर लोगों ने भाग लिया, जिसे हाल के वर्षों के महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में गिना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी, शिकागो समेत कई शहरों में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर यह संख्या लाखों तक बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने बैनर, पोस्टर और नारों के माध्यम से सरकार की नीतियों के प्रति असहमति जताई। कई जगहों पर “Put down the crown, clown” जैसे नारे भी देखने को मिले, जो नेतृत्व शैली पर व्यंग्य के रूप में सामने आए।

इन प्रदर्शनों के पीछे प्रमुख कारणों में प्रशासन की विदेश नीति, खासकर ईरान से जुड़े फैसले, सख्त आव्रजन नीतियां, महंगाई, और सामाजिक क्षेत्र में बजट कटौती जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। नागरिक संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी आवाज उठाने का माध्यम है।

वहीं, व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार देते हुए उनकी आलोचना की है। सरकार का पक्ष है कि उसकी नीतियां राष्ट्रीय हित में हैं, जबकि विरोध करने वाले समूह इन्हें आम जनता के खिलाफ बता रहे हैं।

अमेरिका में उभरता यह विरोध दर्शाता है कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज कितनी प्रभावशाली हो सकती है। हालांकि, इन प्रदर्शनों का दीर्घकालिक राजनीतिक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा।