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तुलसी चालीसा का पाठ: वैशाख अमावस्या पर श्रीहरि की कृपा पाने का अचूक उपाय

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वैशाख अमावस्या पर करें तुलसी चालीसा का पाठ
वैशाख महीने की अमावस्या तिथि का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए समर्पित है। लेकिन इस पावन तिथि पर तुलसी पूजन और तुलसी चालीसा का पाठ करने का भी बड़ा महत्व है।

तुलसी पूजा से न केवल घर की दरिद्रता दूर होती है, बल्कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है। शास्त्रों में तुलसी को हरिप्रिया कहा गया है। वहीं, वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya 2026) के दिन तुलसी चालीसा का पाठ परम फलदायी माना गया है।

तुलसी चालीसा पाठ के 3 चमत्कारी लाभ
इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ कर उसकी मंजरी भगवान विष्णु को अर्पित करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और परिवार पर लगा पितृ दोष समाप्त होता है।
अगर आपके घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते हैं, तो अमावस्या की शाम तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर चालीसा का पाठ करें।
इस पावन तिथि पर तुलसी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचारों का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

कैसे करें वैशाख अमावस्या पर तुलसी पूजन?
सुबह स्नान के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल दें, फिर तुलसी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करें।
साफ आसन पर बैठकर शांत मन से ‘तुलसी चालीसा’ का पाठ करें। पाठ के दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
पाठ पूरा होने के बाद तुलसी के पौधे की तीन बार परिक्रमा करें और अपनी मनोकामना दोहराएं।
शाम के समय तुलसी की जड़ के पास एक मुखी घी का दीपक जलाएं।
अंत में आरती करें।

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख राजेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। ।

गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके।

कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है – छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर में वीर सपूत चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा का किया अनावरण

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर में वीर सपूत चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा का किया अनावरण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा प्रवास के दौरान अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर माँ भारती के वीर सपूत, अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन हर भारतीय के लिए राष्ट्रभक्ति, साहस और अदम्य वीरता की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा का अमूल्य संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज़ाद जी के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए ही हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि नई पीढ़ी महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।

इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव से क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर खेल संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेटर क्रांति गौड़ को आगे भी इसी तरह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कु. गौड़ ने क्रिकेट बाल भेंट की।

भोपाल, रीवा और सागर समेत कई जिलों के कलेक्टर बदले, 26 IAS अधिकारियों के तबादले

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भोपाल, रीवा और सागर समेत कई जिलों के कलेक्टर बदले, 26 IAS अधिकारियों के तबादले
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कमान बदलते हुए 26 IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना सूची जारी की है। इस सूची में राजधानी भोपाल समेत धार, रीवा, सागर, सिवनी और बैतूल जैसे महत्वपूर्ण जिलों के कलेक्टरों को बदला गया है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया। साथ ही आयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भी होंगे।

भोपाल के नए कलेक्टर बने प्रियंक मिश्रा
प्रशासनिक फेरबदल में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राजधानी भोपाल में हुआ है। 2013 बैच के अधिकारी प्रियंक मिश्रा, जो अब तक धार कलेक्टर थे, उन्हें अब कलेक्टर भोपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, भोपाल के वर्तमान कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है, साथ ही उनके पास नगर तथा ग्राम निवेश के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

14 अप्रैल को समाप्त होगा मलमास, इसके बाद होगी मांगलिक कार्यों की शुरुआत

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14 अप्रैल को समाप्त होगा मलमास, इसके बाद होगी मांगलिक कार्यों की शुरुआत
पंचांग की गणना के अनुसार 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही एक माह से चल रहे मलमास का समापन हो जाएगा। मलमास समाप्त होते ही शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। इस बार 20 अप्रैल को आखातीज से विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत आदि शुभ मांगलिक कार्यों के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शुरू होंगे।

ज्योतिषाचार्य ने बताया नवग्रह के राजा सूर्य 14 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 52 मिनट पर मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि में सूर्य अपने उच्च अंश पर अवस्थित होते हैं। मेष राशि के स्वामी मंगल है, यह सूर्य की मित्र राशि मानी जाती है। इस राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। एक माह विभिन्न व्रत त्यौहार भी मनाए जाते हैं।

विवाह के मुहूर्त
अप्रैल : 20, 21, 26
मई: 5, 6, 7, 8, 14
जून : 19, 20, 22, 23, 26, 27, 28, 29
जुलाई : 1, 6, 7
गृह प्रवेश
अप्रैल : 20, 24, 29
जून : 24, 27
जुलाई : 1, 8, 11
यज्ञोपवित

अप्रैल : 20
मई : 3,6,7
जून : 17, 19, 24
चौल कर्म (मुंडन संस्कार)

अप्रैल : 20, 21, 23, 24
मई : 4, 9, 10, 14
जून : 17
मेष के सूर्य में यह त्यौहार खास
पंचांग की गणना के अनुसार 14 अप्रैल से 14 मई तक सूर्य मेष राशि में परिभ्रमण करेंगे। इस एक माह में यह पर्व त्यौहार खास रहेंगे।

अप्रैल माह

15 को प्रदोष,17 वैशाखी अमावस्या, 19 को परशुराम जयंती, 20 को अक्षय तृतीया, 21 को शंकराचार्य जयंती, 22 को रामानुजन आचार्य जयंती, 23 को गंगा उत्पत्ति गंगा सप्तमी, 24 को बगलामुखी जयंती, 25 को सीता नवमी जानकी जयंती, 27 को मोहिनी एकादशी, 29 को प्रदोष व्रत, 30 को नरसिंह जयंती।

मई माह

1 में को वैशाखी पूर्णिमा, 3 को नारद जयंती, 5 को अंगारक संकष्टी चतुर्थी, 13 को अपरा एकादशी का व्रत रहेगा।

इंग्लैंड के खिलाफ पहली जीत दिलाने वाले खिलाड़ी गोपीनाथ का 96 साल की उम्र में निधन

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इंग्लैंड के खिलाफ पहली जीत दिलाने वाले खिलाड़ी गोपीनाथ का 96 साल की उम्र में निधन
भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ पहली जीत दिलाने वाले खिलाड़ी गोपीनाथ का 96 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह भारत की पहली टेस्ट जीत के आखिरी जीवित सदस्य थे। गोपीनाथ ने चेन्नई में अंतिम सांस ली।

बड़े शॉट्स के लिए जाने जाते थे गोपीनाथ
1 मार्च 1930 को चेन्नई (तब मद्रास) में जन्मे गोपीनाथ को कोयंबटूर राव गोपीनाथ के नाम से भी जाना जाता था। उनका पूरा नाम चिंगलपुत दोराइकन्नु गोपीनाथ था। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के मीडियम पेस गेंदबाज थे। भारतीय क्रिकेट में उन्हें बड़े शॉट खेलने के लिए जाना जाता था।

गोपीनाथ ने अपना टेस्ट डेब्यू 1951-52 की सीरीज में इंग्लैंड के खिलाफ किया था। उन्होंने 14 दिसंबर को मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में अपना पहला मुकाबला खेला। हालांकि, उनका अंतरराष्ट्रीय करियर ज्यादा लंबा नहीं चला और करीब 9 साल बाद उनका करियर समाप्त हो गया। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स में 28-30 जनवरी के बीच खेला।

गोपीनाथ के लिए इंटरनेशनल करियर का सबसे यादगार लम्हा उनका डेब्यू मैच और डेब्यू सीरीज रही। डेब्यू मैच में उन्होंने आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 50 रनों की शानदार पारी खेली, जो उनके टेस्ट करियर का सबसे बड़ा स्कोर भी रहा। अगली पारी में उन्होंने 42 रन बनाए और टीम इंडिया ने मैच ड्रॉ करवा लिया। इसी सीरीज का पांचवां मैच चेन्नई में खेला गया, जहां भारतीय टीम ने एक पारी और 8 रन से जीत दर्ज की, जो टीम इंडिया की पहली टेस्ट जीत थी। इस मुकाबले में गोपीनाथ ने 35 रन बनाए।

शानदार रहा फर्स्ट क्लास करियर
अपने टेस्ट करियर में गोपीनाथ ने 8 मैचों की 12 पारियों में 242 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 1 शतक लगाया और उनका औसत 22 रहा। गेंदबाजी में भी उन्होंने 1 विकेट हासिल किया। हालांकि, उनका अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार था। उन्होंने 4000 से ज्यादा रन बनाए और उनका औसत 40 से ऊपर रहा। उनका सर्वोच्च स्कोर 234 रन रहा। इस दौरान उन्होंने 9 शतक और 30 अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में भी उन्होंने योगदान दिया और फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 83 मैचों में 14 विकेट अपने नाम किए।

जहाजों को दी बारूदी सुरंगों से बचने की चेतावनी,ईरान ने जारी किया हॉर्मुज स्ट्रेट का नया नक्शा

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जहाजों को दी बारूदी सुरंगों से बचने की चेतावनी,ईरान ने जारी किया हॉर्मुज स्ट्रेट का नया नक्शा
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए युद्धविराम के बाद भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल ने ईरान के तेल रिफाइनरी पर हमला करने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने की खबर सामने आई। इसी बीच ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) होर्मुज को लेकर नया नक्शा जारी किया है। अब यह नक्शा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें बताया गया है कि जहाज को वहां से कैसे निकालना है। समुंद्र में बारूदी सुरंगों से बचने के लिए इस नए नक्शा की मदद लेनी पड़ेगी।

‘हॉर्मुज में ‘खतरे का क्षेत्र’ चिह्नित’
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक खदानों से बचने के लिए जहाजों के लिए वैकल्पिक शिपिंग मार्गों को दर्शाने वाला एक नक्शा जारी किया है। मानचित्र पर वृत्त को खतरे का क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। आईआरजीसी नौसेना का कहना है कि नौसैनिक खदानों से बचने के लिए जहाजों को उनके साथ समन्वय करना होगा। जो टैंकर पहले होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित ओमान के करीब से गुजरते थे, उन्हें अब ईरानी तट के करीब अधिक उत्तरी मार्ग अपनाने के लिए कहा जा रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए युद्धविराम के बाद भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल ने ईरान के तेल रिफाइनरी पर हमला करने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने की खबर सामने आई। इसी बीच ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) होर्मुज को लेकर नया नक्शा जारी किया है। अब यह नक्शा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें बताया गया है कि जहाज को वहां से कैसे निकालना है। समुंद्र में बारूदी सुरंगों से बचने के लिए इस नए नक्शा की मदद लेनी पड़ेगी।

‘हॉर्मुज में ‘खतरे का क्षेत्र’ चिह्नित’
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक खदानों से बचने के लिए जहाजों के लिए वैकल्पिक शिपिंग मार्गों को दर्शाने वाला एक नक्शा जारी किया है। मानचित्र पर वृत्त को खतरे का क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। आईआरजीसी नौसेना का कहना है कि नौसैनिक खदानों से बचने के लिए जहाजों को उनके साथ समन्वय करना होगा। जो टैंकर पहले होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित ओमान के करीब से गुजरते थे, उन्हें अब ईरानी तट के करीब अधिक उत्तरी मार्ग अपनाने के लिए कहा जा रहा है।

राज्य के स्वामित्व वाली संस्था के प्रमुख ने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का निर्माण, इंजीनियरिंग, वित्तपोषण या निर्माण किसी भी राज्य द्वारा नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन द्वारा शासित एक प्राकृतिक मार्ग है, जो पारगमन को एक अधिकार के रूप में गारंटी देता है। यह कोई विशेषाधिकार नहीं है जिसे प्रदान किया जा सके, रोका जा सके या हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बिना शर्त और बिना किसी प्रतिबंध के खुला होना चाहिए। ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता इसी पर निर्भर करती है। इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का किसी भी रूप में शस्त्रीकरण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

ईरान युद्ध से रूस के मुख्य तेल राजस्व में दोगुनी वृद्धि
रॉयटर्स समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले से उत्पन्न तेल और गैस संकट के कारण रूस को अपने सबसे बड़े एकल तेल कर से होने वाले राजस्व में दोगुनी वृद्धि देखने को मिलेगी। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया – जो वैश्विक तेल और एलएनजी प्रवाह के लगभग पांचवें हिस्से का मार्ग है- जिससे ब्रेंट वायदा की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर पहुंच गईं।

700 अरब रुबल होने का अनुमान
रॉयटर्स द्वारा प्रारंभिक उत्पादन आंकड़ों और तेल की कीमतों के आधार पर किए गए अनुमानों के अनुसार, रूस में तेल उत्पादन पर लगने वाला खनिज निष्कर्षण कर अप्रैल में बढ़कर लगभग 700 अरब रूबल (9 अरब डॉलर) हो जाएगा, जो मार्च में 327 अरब रूबल था। यह गणना ईरान के खिलाफ युद्ध से रूस को हुए अप्रत्याशित लाभ के पहले ठोस सबूतों में से एक है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। तेल व्यापारियों का कहना है कि इस युद्ध ने हाल के इतिहास में सबसे गंभीर ऊर्जा संकट को जन्म दिया है।

असम और केरल में भी बंपर वोटिंग, पुडुचेरी में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड

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असम और केरल में भी बंपर वोटिंग, पुडुचेरी में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड
असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनावों में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच, ज्यादातर शांतिपूर्ण माहौल में ज़ोरदार वोटिंग हुई। कानून-व्यवस्था से जुड़ी सिर्फ़ इक्का-दुक्का घटनाएं ही सामने आईं। शाम 7 बजे तक मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सबसे ज़्यादा 89.08 प्रतिशत वोटिंग हुई, उसके बाद असम में 85.04 प्रतिशत और केरल में 77.38 प्रतिशत वोटिंग हुई। हालाँकि, चुनाव आयोग की तरफ़ से अभी अंतिम आँकड़े जारी नहीं किए गए हैं। कर्नाटक के बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण, नागालैंड के कोरिडांग और त्रिपुरा के धर्मनगर में भी उपचुनाव हुए।

असम, केरल, पुडुचेरी में वोटिंग में भारी भीड़
ये आंकड़े 2021 के चुनावी आँकड़ों को पहले ही पार कर चुके हैं। 2021 में पुडुचेरी में 83.42 प्रतिशत, असम में 82.42 प्रतिशत और केरल में लगभग 76 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि 2016 के मुकाबले 2021 में वोटिंग में थोड़ी गिरावट आई थी। गुरुवार को सुबह के समय ठीक-ठाक वोटिंग के बाद, दिन भर वोटिंग की रफ़्तार लगातार बढ़ती रही। राज्यों भर में कई बूथों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिनमें दिव्यांग लोग भी अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए शामिल हुए।

रोबोट ने वोटरों का किया स्वागत
अन्य जगहों के अलावा, केरल के एर्नाकुलम के कलामसेरी में HMT स्कूल पोलिंग स्टेशन पर एक नया शादीशुदा जोड़ा वोट डालने आया। इस बीच, एक अनोखा नज़ारा वायरल हो रहा है, जिसमें पुडुचेरी के राजभवन विधानसभा क्षेत्र में VOC सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में एक रोबोट को वोटरों का स्वागत करते हुए देखा गया। यह सफेद रोबोट एक गलियारे में चलता हुआ दिखाई देता है, जिसके हाथ में फूलों की पंखुड़ियों से भरी एक ट्रे है। यह लोगों का अभिवादन करता है और उन्हें अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

4 मई को जारी होगा परिणाम
गुरुवार के चुनाव में इस चरण में केरल की 140 सीटों, असम की 126 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों पर वोटिंग हुई। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को और पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे। वोटों की गिनती 4 मई को होनी है। चुनाव अधिकारियों और राज्य सरकारों ने शहरी और दूरदराज के बूथों पर व्यवस्थित मतदान सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए जिनमें अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां शामिल थीं और आदर्श मतदान केंद्र बनाए।

मुख्य जोर बूथ कैप्चरिंग (मतदान केंद्र पर कब्ज़ा), डराने-धमकाने और मतदान केंद्रों के पास अवैध प्रचार को रोकने पर था। दिन भर में केवल कुछ इक्का-दुक्का गड़बड़ियों की ही खबरें आईं। ज्यादातर रिपोर्टों में अवैध सामग्री की नियमित ज़ब्ती, EVM में खराबी या कतारों में व्यवधान की शिकायतों का ज़िक्र था, जिन पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की; शाम तक कानून-व्यवस्था में किसी बड़ी गड़बड़ी की कोई खबर नहीं आई।

चुनाव अधिकारियों ने आदर्श आचार संहिता के कड़ाई से पालन और शिकायतों के त्वरित निवारण तंत्र पर ज़ोर दिया, जबकि विशेष टीमों ने असम के संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों और केरल के शहरी इलाकों पर नज़र रखी।

असम में ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में भारी मतदान हुआ, कई बूथों पर लंबी कतारें लगी थीं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में ज़बरदस्त उत्साह देखने को मिला।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को किया संबोधित

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों को सह अस्तित्व की दृष्टि से बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। कृषि के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ जीने का अवसर मिलता है। देश में कृषि की परंपरा लाखों साल पुरानी है। भीम बैठिका में पुरातन काल से कृषि की परंपरा के शैलचित्र देखने को मिलते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों सालों से कृषि के साथ जीने का मार्ग दिखाया है। भारतीय संस्कृति में खेती के प्रति आदर का भाव है। देश की धरती अन्न के रूप में सोना उगल रही है। देश में कभी अनाज का संकट आया था, लेकिन आज हमारे कृषि वैज्ञानिक नई-नई किस्में विकसित कर अनाज उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए संकल्पित भाव के साथ आगे बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय किसान, जय जवान में जय विज्ञान जोड़ा गया था, वर्तमान दौर में हम, इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ रहे हैं। प्रदेश में किसानों को हम केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर मार्केट लिकेंजेस से भी सशक्त बना रहे हैं। कृषि मंथन कार्यशाला किसानों के अनुभव, विज्ञान के नवाचार, सरकार की नीतियों और बाजार की संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा गौमाता का पूजन कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनजातीय समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों से स्वागत किया।

इन विकास कार्यों की दी सौगातें
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्‍न कार्यों का लोकार्पण कर विकास की सौगाते दी। इनमें प्रमुख रूप से 13 करोड़ रूपये की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 1.11 करोड़ रूपये लागत के बोहानी गन्‍ना अनुसंधान केन्‍द्र के प्रशासनिक भवन, 1 करोड़ रूपये लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्‍द्र के साथ ही जबलपुर में 1.26 करोड़ रूपये से बने स्‍वचालित तरल जैव उर्वरक उत्‍पादन केन्‍द्र का लोकार्पण किया। साथ ही किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रूपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्‍द्र शामिल है।

कृषि स्‍टार्ट-अप्‍स के साथ ही विभिन्‍न योजना के हितग्राहियों को हितलाभ का किया वितरण
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में भारत सरकार द्वारा वित्‍त पोषित 10 स्‍टार्ट-अप्‍स को 10 करोड़ रूपये से अधिक के स्‍वीकृति आदेश का वितरण किया। साथ ही कृषक अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने को लेकर पीपीव्‍ही, एफआर ऑथॉरिटी नई दिल्‍ली द्वारा प्रदत्‍त प्रमाण पत्र विश्‍वविद्यालय को प्रदान किया। उन्‍होंने कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के साथ ही विभिन्‍न विभागों के द्वारा संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में हमें और आगे बढ़ना है। प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारे मेहनतकश किसानों ने प्रदेश को दलहन उत्पादन में शीर्ष स्थान दिलवाया, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। अब हम तिलहन और अन्न सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश के किसान तीसरी फसल भी ले रहे हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए परंपरागत बीजों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे। इससे हमारी कृषि उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। राज्य सरकार पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक यंत्र सभी को साथ जोड़कर किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ा है। मध्यप्रदेश, देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य है। बाबा महाकाल के प्रसाद में रागी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार दूध उत्पादन से किसान की आय बढ़ा रही है। खेती और पशुपालन एक सिक्के के दो पहलु हैं। अभी प्रदेश में 9 प्रतिशत दूध का उत्पादन होता है, इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में दूध की खपत भी बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। शासकीय स्कूलों में पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन की अलग-अलग योजना पर कार्य कर रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक नई किस्मों के विकास में पोषकता पर विशेष जोर दे रहे हैं। प्रदेश में गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड बना है। मध्यप्रदेश ने गेहूँ उत्पादन में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है। इसे 2700 रूपए तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पित है। प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ मिला है। अब सरसों की फसल पर भी भावांतर का लाभ किसानों को दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान की कल्पना की थी। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। माँ नर्मदा प्रदेश के किसानों के लिए जीवन रेखा है, जो मध्यप्रदेश के साथ गुजरात और राजस्थान को भी जल देती है। माँ नर्मदा खेती से लेकर उद्योग की जरूरतों और हर कंठ की प्यास बुझाती है। मध्यप्रदेश, देश में कृषि क्षेत्र में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला राज्य बना है। इसमें माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद शामिल है।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप, एफपीओ एवं किसान बंधु शामिल हुए हैं। यह मंच कृषि के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश अनेक कृषि फसलों में देश में नंबर-1 है। कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार की हैं। विश्वविद्यालय ने बालाघाट के चिन्नौर चावल और रीवा के सुंदरजा आम के लिए जीआई टैग प्राप्त किए हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के साथ किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना और खेत से कारखानों तक उत्पादों की पहुंच सुगम बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विकास दर को गति देने के लिए क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर गतिविधियों को सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिये।

संवाद में कृषि और कृषि संबद्ध क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अनुसंधान और नवाचारों पर सारगर्भित चर्चा की, जिसमें कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल वैरायटी, प्राकृतिक खेती, खरपतवार नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कृषि में उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने पशुधन और पशुचारे के प्रबंधन के माध्यम से किसानों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर भी अपने विचार साझा किए।

इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक सर्व अजय विश्नोई, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष वरकड़े, जनप्रतिनिधि, सचिव कृषि निशांत वरवड़े, कमिश्नर धनंजय सिंह एवं कलेक्टर राघवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित रहे।