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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा असम CM का शूटिंग वीडियो विवाद

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा असम CM का शूटिंग वीडियो विवाद
सुप्रीम कोर्ट में उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर एक जनहित याचिका दायर हुई है. उन पर नफरत भड़काने वाले गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के आरोप हैं. याचिकाकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और राज्यपालों के मुस्लिम-विरोधी बयानों का जिक्र किया है. इन्हें उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों की तरफ से संवैधानिक जिम्मेदारी के उल्लंघन का उदाहरण बताया है.

12 लोगों ने असम CM के खिलाफ दायर की याचिका
इस जनहित याचिका को पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और जॉन दयाल समेत 12 लोग शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं ने अदालत में इस गंभीर मुद्दे पर दखल देने की मांग की है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सरमा, वरिष्ठ मंत्री और राज्यपाल लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं.

ओवैसी ने हैदराबाद में FIR दर्ज कराई
हैदराबाद के सांसद और AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘दुर्भाग्य से नरसंहार वाले नफरती भाषण फैलाना आम बात बन गई है.’ ओवैसी ने मांग की है कि कानून के तहत असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने हैदराबाद पुलिस कमिश्नर से गुजारिश की है कि नफरती भाषण फैलाने वालों पर लगाम लगाई जाए.

बवाल के बाद बीजेपी ने वीडियो डिलीट किया
कांग्रेस ने 8 फरवरी 2026 को दावा किया कि असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो अल्पसंख्यकों की टार्गेटेड पॉइंट-ब्लैंक हत्या को बढ़ावा देने जैसा है. कांग्रेस का दावा है कि वीडियो डिलीट कर दिया गया है.

पहले भी मुसलमानों के खिलाफ दिए नफरती भाषण
असम के CM सरमा अक्सर मुसलमानों के खिलाफ बयान देते रहते हैं. उन्होंने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मियां मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि हिमंत बिस्व सरमा और बीजेपी सीधे तौर पर मियां समुदाय के खिलाफ है. उन्होंने लोगों से मियां समुदाय को परेशान करने की अपील की. सरमा का कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे.

आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु

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आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु
राज्यपाल डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

अब नया बस्तर – डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।

जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।

युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।

बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

एसबीआई ने रचा इतिहास, मुनाफा ₹21,000 करोड़ के पार

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एसबीआई ने रचा इतिहास, मुनाफा ₹21,000 करोड़ के पार
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक ने बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए अब तक का सबसे अधिक त्रैमासिक स्टैंडअलोन मुनाफा दर्ज किया है। ऊंचे प्रोविजनिंग बफर और ब्याज आय में वृद्धि के दम पर बैंक की बैलेंस शीट पहले से और मजबूत हुई है।

रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा और ब्याज आय में वृद्धि
एसबीआई ने दिसंबर तिमाही में ₹21,028 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जो बैंक के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है। वहीं, समेकित आधार पर बैंक का मुनाफा 13.06 प्रतिशत बढ़कर ₹21,317 करोड़ हो गया है।

बैंक की कमाई का मुख्य जरिया, यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई), सालाना आधार पर 9.04 प्रतिशत बढ़कर ₹45,190 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹41,446 करोड़ थी। यह वृद्धि 15.14 प्रतिशत की मजबूत लोन ग्रोथ के कारण संभव हो सकी है, हालांकि घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) में 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई और यह 3.12 प्रतिशत पर आ गया।

एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन प्रोविजनिंग बढ़ी
बैंक की एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर अच्छी खबर है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 31 दिसंबर, 2025 तक घटकर 1.57 प्रतिशत हो गया है, जो सितंबर तिमाही में 1.73 प्रतिशत था। हालांकि, बैंक ने सतर्कता बरतते हुए प्रोविजनिंग में भारी बढ़ोतरी की है। इस तिमाही में कुल प्रोविजन ₹4,507 करोड़ रहे, जो पिछले साल की इसी तिमाही में मात्र ₹911 करोड़ थे। वहीं, नए स्लिपेज (नए फंसे कर्ज) का आंकड़ा बढ़कर ₹4,458 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹3,823 करोड़ था।

अन्य आय और व्यय का गणित
बैंक की नॉन-इंटरेस्ट इनकम में 15.65 प्रतिशत की शानदार उछाल दर्ज की गई, जो बढ़कर ₹8,404 करोड़ हो गई। एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस मुनाफे में एसबीआई म्यूचुअल फंड से मिले ₹2,200 करोड़ के विशेष लाभांश का बड़ा योगदान है। इसके अलावा, फीस आय और राइट-ऑफ खातों से रिकवरी ने भी मुनाफे को सहारा दिया। हालांकि, बैंक का कुल खर्च भी बढ़ा है। यह आंकड़ा पिछले साल के ₹1,04,917 करोड़ से बढ़कर ₹1,08,052 करोड़ हो गया है।

नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में शामिल हुआ ये एक्टर, विक्रांत मेसी को किया रिप्लेस

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नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में शामिल हुआ ये एक्टर, विक्रांत मेसी को किया रिप्लेस
नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘रामायण’ इस साल की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। फिल्म को काफी बड़े स्तर पर बनाया जा रहा है और इसे अब तक की बॉलीवुड की सबसे महंगी फिल्म भी बताया जा रहा है। फिल्म के प्रमुख किरदार तो पहले से ही तय हैं, जिनमें रणबीर कपूर (राम), यश (रावण), साई पल्लवी (सीता), रवि दुबे (लक्ष्मण) और सनी देओल (हनुमान) के किरदार में नजर आएंगे। लेकिन इसके अलावा फिल्म की कास्ट को लेकर लगातार नए अपडेट सामने आ रहे हैं। अब फिल्म से जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आई है।

राघव जुयाल की हुई एंट्री
वैरायटी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राघव जुयाल अब नितेश तिवारी की मच अवेटेड फिल्म ‘रामायण’ का हिस्सा बनने जा रहे हैं। रणवीर कपूर, साई पल्लवी और यश इस फिल्म में प्रमुख भूमिकाएं निभाएंगे। वहीं राघव जुयाल इस फिल्म में मेघनाद का किरदार निभा सकते हैं। उनका किरदार ‘रामायण पार्ट टू’ में नजर आएगा, जो 2027 की दिवाली पर रिलीज होगी।

पहले विक्रांत को किया था अप्रोच
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले इस रोल के लिए विक्रांत मैसी को चुना गया था। लेकिन कुछ वजहों से वे इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद राघव को इस किरदार के लिए अप्रोच किया गया, जिसके लिए वे तुरंत मान गए। राघव अपनी चोट से ठीक हो जाने के बाद फिल्म की शूटिंग शुरु करेंगे।

‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में पसंद किया गया राघव का किरदार
राघव जुयाल को साल 2023 में आई फिल्म ‘किल’ में काफी पसंद किया गया था। इसके बाद वो पिछले साल आए आर्यन खान के डेब्यू शो ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में भी नजर आए थे। इसमें एक बार फिर राघव ने अपनी एक्टिंग से सभी को प्रभावित किया। अब राघव अपने एक्टिंग करियर को एक लेवल ऊपर ले जाने वाले हैं। अब वो साउथ की फिल्म में भी नजर आएंगे।

कब रिलीज होगी फिल्म?
फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर, यश के अलावा सनी देओल, रवि दुबे और साई पल्लवी जैसे एक्टर्स भी नजर आंएगे। फिल्म को पैन इंडिया स्तर पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म का म्यूजिक एआर रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हंस जिमर बना रहे हैं। फिल्म दो पार्ट में रिलीज होगी। पहला पार्ट इस दिवाली (2026) में सिनेमाघरों में रिलीज होगा। वहीं इस फिल्म का दूसरा भाग 2027 दिवाली पर रिलीज होगा।

मलेशिया के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी

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मलेशिया के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए। मलेशिया रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि भारत मलेशिया के साथ रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने तथा आर्थिक और नवोन्मेष के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, ”भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों में हाल के वर्षों में निरंतर प्रगति हुई है।” उन्होंने कहा, ”मैं प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ अपनी चर्चाओं और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर उत्साहित हूं।” उन्होंने कहा, ”हमारा लक्ष्य अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को गहरा करना, अपनी आर्थिक और नवाचार साझेदारी को बढ़ाना तथा नए क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करना है।”

क्यों खास है यह दौरा?
पीएम मोदी के इस दौरे का मकसद व्यापार, निवेश, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया की तीसरी यात्रा है। अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है।

पीएम मोदी इस दौरान मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया सीईओ मंच भी आयोजित होगा।

मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त ने क्या बताया?
मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त बी.एन. रेड्डी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए इस रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत के ‘महासागर’ विजन और व्यापक इंडो-पैसिफिक विजन के तहत दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में 2024 में शुरू की गई पहलों को लागू करने और सहयोग के नए आयाम जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत और मलेशिया के इतिहास में पहली बार दोनों देशों ने ‘सुरक्षा संवाद’ शुरू किया है। यह संवाद जो रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

वहीं मलेशिया डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी भारत के साथ जुड़ने के लिए बेहद इच्छा रखता है है। रेड्डी ने बताया कि डिजिटल टेक्नोलॉजी पर हुए MoUके बाद ‘मलेशिया-भारत डिजिटल काउंसिल’ की स्थापना की गई है, जो इस क्षेत्र में क्रांति लाएगी।

फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा, झूला टूटने से आधा दर्जन लोग घायल

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फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा, झूला टूटने से आधा दर्जन लोग घायल
फरीदाबाद में चल रहे सूरजकुंड मेले में सुनामी झूला टूटने से कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है. घटना के बीच बचाव के लिए पहुँचे इंस्पेक्टर समेत आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं. इसमें घायल इंस्पेक्टर को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई है. पलवल में तैनात इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की बचाव के दौरान मौत हो गई है. डीसी आयुष सिंह ने कहा कि इस हादसे में कुल 13 लोग घायल हुए हैं जिनमें से एक की मौत हुई है. यह झूला शाम 6.15 के आस पास गिरा था.

मौके पर पहुंचे जिला उपायुक्त एमडी टूरिज्म और पुलिस के आला अधिकारी पहुंच गए हैं. हादसे के बाद इलाके की बेरिकैडिंग की गई है. बता दें कि इससे पहले फ़ूड कोर्ट में हवा से गेट के गिरने से भी हादसा हुआ था. जिसमें दो लोग घायल हुए थे.

शनिवार को हुए दो हादसे
सूरजकुंड मेले में शनिवार ( 7 फरवरी) को दो हादसों की खबर सामने आई है. इस कई लोग घायल हुए हैं. पहले हादसे में गेट के गिरने से हादसा हुआ, जबकि दूसरे हादसे में सुनामी झूला गिरने की खबर आ रही है. इन दो हादसों की वजह से मेला कमेटी और आयोजकों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. पहले हादसे में एक बच्चे को मामूली चोटें आई हैं. वहीं एक युवक को अस्पताल पहुंचाया गया. जिसके बाद अब उसकी छुट्टी कर दी गई है.

इस बीच मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे. झूले के गिरने से परिसर में अफरा-तफरी मच गई. चारों तरफ लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए नजर आए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे.

प्रशासन द्वारा किए जा रहे बचाव के प्रयास
हादसे के बाद प्रशासन की तरफ से कई टीमें बचाव अभियान में जुट गई हैं. झूले के नीचे दबे लोगों को तुरंत बचाने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही पुलिस द्वारा लोगों को मौके से दूर हटने के निर्देश दिए गए हैं.

पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि आयोजकों की भूमिका की जांच-पड़ताल की जा रही है. पुलिस द्वारा इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

ICC हुआ सख्त, तो पाकिस्तान की निकल गई सारी हेकड़ी

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ICC हुआ सख्त, तो पाकिस्तान की निकल गई सारी हेकड़ी
2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मैच होगा या नहीं, इसपर सवालिया निशान लगे हैं. हालांकि पाकिस्तान सरकार कह चुकी है कि उसकी राष्ट्रीय टीम 15 फरवरी को टीम इंडिया के साथ मैच नहीं खेलेगी. पाकिस्तान इसे असाधारण परिस्थिति से जुड़ा मामला बताया चुका है. इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है क्योंकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से बातचीत की मांग की है.

पाकिस्तान ने आइसीसी को पत्र लिखकर इसे असाधारण परिस्थितियों से जुड़ा मामला बताया और अपनी सरकार के ट्वीट को भी इसी से जोड़ा. मगर आईसीसी ने इसके जवाब में आईसीसी ने कहा है कि भारत के साथ मैच ना खेलने की स्थिति में पाकिस्तान को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही कानूनी कार्यवाई भी की जा सकती है. साथ ही आईसीसी ने इस विषय पर भी स्पष्टता मांगी है कि आखिर PCB किन असाधारण परिस्थितियों का हवाला दे रहा है.

क्रिकबज की एक रिपोर्ट अनुसार सूत्रों ने बताया कि आईसीसी ने पाकिस्तान के बॉयकॉट मामले में पूरी तरह निष्पक्षता बनाए रखने और नियमों का पालन करने की बात दोहराई. आईसीसी ने यह भी साफ किया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले टूर्नामेंट की अखंडता और नियमों को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी. आईसीसी ने यह भी समझाने का प्रयास किया कि असाधारण परिस्थितियों का दावा किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और ऐसा दावा करने के लिए सबूत आवश्यक होते हैं. वहीं किसी विशेष मैच से हटने के दुष्परिणाम भी सामने रखे.

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का कहना है कि किसी भी हालत में नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और वह मुद्दे को सुलझाने हेतु बातचीत के लिए तैयार है. इसके जवाब में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी बातचीत के लिए तैयार हो गया है. फिलहाल आईसीसी और पीसीबी के बीच समस्या का समाधान निकालने के लिए बातचीत जारी है.

सोम डिस्टलरी लायसेंस निलंबन आदेश पर उठे सवाल,कांग्रेस ने आदेश का कमजोर करने वाला बताया

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सोम डिस्टलरी लायसेंस निलंबन आदेश पर उठे सवाल,कांग्रेस ने आदेश का कमजोर करने वाला बताया
भोपाल। मध्य प्रदेश की शराब कंपनी सोम डिस्टलरी के लायसेंस निलंबन मामले में जिम्मेदार अफसरों की मंशा व आदेश अब सवालों के दायरे में है। कांग्रेस सांसद व अधिवक्ता विवेक तन्खा ने निलंबन आदेश में महाधिवक्ता की राय का जिक्र करने पर इसे केस को कमजोर करने वाला बताया है। वहीं कांग्रेस ने अदालत के आदेश पर दो साल बाद अमल पर सवाल खड़े करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

इंदौर जिले की देपालपुर अदालत के फैसले के दो साल बाद,यानी तीन दिन पहले सोम डिस्टलरी रायसेन की दो इकाईयों का लाइसेंस निलंबित हुआ। इस मामले में नया विवाद निलंबन आदेश की भाषा पर खड़ा हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल के आदेश पर सवाल खड़े किए। वरिष्ठ अधिवक्ता व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने आदेश में महाधिवक्ता व उनकी राय का जिक्र किए जाने पर सख्त ऐतराज जताया। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह केस को कमजोर करने वाली व गलत परंपरा है।

अब कैसे पैरवी करेंगे महाधिवक्ता?
कांग्रेस सांसद ने लिखा—महाधिवक्ता संवैधानिक पद है। वही न्यायालय में सरकार की ओर से पैरवी करते हैं। ऐसे में लाइसेंस निलंबन आदेश में उनकी राय का उल्लेख होने से वह कैसे इस केस की पैरवी कर पाएंगे। तन्खा ने लिखा कि आबकारी विभाग की यह गलत परंपरा आगे केस की पैरवी को प्रभावित कर सकती है।

जांच की मांग, फाइल दबाए रखने का आरोप
इधर,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के.मिश्रा ने सवाल उठाया कि अदालत के आदेश के बावजूद फाइल दो साल तक क्यों दबाई गई? उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि आदेश में महाधिवक्ता की राय का जिक्र कर कंपनी के बचाव के लिए कानूनी रास्ते छोड़ दिए गए।

आदेश में कार्रवाई का बताया कानून सम्मत
गत 4 फरवरी को जारी निलंबन आदेश को आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने कानून सम्मत बताया। इसमें कहा गया कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 31 के तहत लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई वैध है। उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। आरोपियों की दोषसिद्धि पर नहीं। इसी आधार पर यह कदम उठाया गया।

कोर्ट का दो साल पुराना आदेश बना आधार
दरअसल,आबकारी विभाग ने साल 2021 में सोम डिस्टलरी के कर्ताधर्ताओं को फर्जी परमिट पर शराब का अवैध परिवहन करते पकड़ा था। इस मामले में अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर ,जिला इंदौर ने शराब कंपनी से जुड़े संचालकों, प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। इस पर आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से स्थगन आदेश लिया। इसी का ​खुलासा आबकारी आयुक्त ने अपने हाल के आदेश में किया है।

सैकड़ों की तादाद में बनाए थे फर्जी परमिट
प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आए कि शराब कंपनी द्वारा शराब के अवैध परिवहन के लिए बड़ी संख्या में फर्जी परिवहन परमिट तैयार किए गए। इनके जरिए रायसेन से लेकर दमन,दीव तक शराब का अवैध परिवहन हुआ। परमिट जारी करने में आबकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई। इसके चलते आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितंबर 2025 को बर्खास्त किया गया। अन्य के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई जारी है, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

स्थानीय जरूरतों और जन आकांक्षा के अनुरूप स्वीकृत होंगे विकास कार्य: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्थानीय जरूरतों और जन आकांक्षा के अनुरूप स्वीकृत होंगे विकास कार्य: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की प्रथम बैठक जिला मुख्यालय दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख विकास कार्यों, प्राधिकरण मद से निर्माणाधीन कार्यों के अनुमोदन, प्रावधानित बजट तथा नवीन स्वीकृत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान हेतु संचालित योजनाओं की प्रगति का आकलन करना तथा भावी विकास रणनीतियों का निर्धारण करना था, ताकि विकास का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।

मुख्यमंत्री साय ने प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का समय पर एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर सतत निगरानी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले के अंतर्गत स्वीकृत सभी विकास कार्यों, सेवाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के हित को प्राथमिकता में रखते हुए सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को अविलंब पूर्ण किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024-25 तक स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों की जिलेवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रगति की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐसे विकास कार्य जो अब तक अप्रारंभ हैं अथवा प्रगतिरत हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए दो माह की समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रत्यक्ष संवाद कर कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय नेतृत्व से परामर्श लेकर अल्पकालिक योजनाओं का निर्माण, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा जन अपेक्षाओं के अनुरूप छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की त्वरित स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। प्राधिकरण के अंतर्गत राज्य के 35 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आधारभूत नागरिक सुविधाओं के विकास, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन, शैक्षणिक सुविधाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही शिक्षा एवं छात्रावासों के विकास पर प्रमुख रूप से जोर दिया गया है और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ललित चंद्राकर सहित अन्य विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव बसवराजू एस, शासन के विभिन्न विभागों के सचिव, आईजी, कमिश्नर, कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

सुखोई-30 और तेजस के बाद अब राफेल में इंटीग्रेट होंगी ‘Astra’

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सुखोई-30 और तेजस के बाद अब राफेल में इंटीग्रेट होंगी ‘Astra’
भारतीय एयरफोर्स अपने बेड़े में फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस से 114 नए राफेल खरीदने की तैयारी कर रही है. इसको लेकर रक्षा मंत्रालय गहन मंथन में जुटा हुआ है. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस डील पर मुहर लग सकती है. इस बीच बीच भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है.

फ्रांस से खरीदे गए अपने फाइटर जेट्स के बेड़े को भारत स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली Astra MK1 और Astra MK2 बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों (BVRAM) से लैस करने की तैयारी में है. इसको लेकर अगले दो सालों यानी 2028 तक टेस्टिंग शुरू हो जाएगी.

Su-30MKI और तेजस फाइटर जेट भी Astra से लैस
रक्षा संबंधी खबरों से जुड़ी वेबसाइट डिफेंस डॉट इन के मुताबिक, यह पहल रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए परिचालन लचीलेपन को बढ़ाने के भारतीय वायु सेना के रोडमैप में एक महत्वपूर्ण है. बता दें कि Astra MK1, जो पहले से ही सुखोई-30MKI और LCA तेजस जैसे फाइटर जेट्स में लैस है, वो 100 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता प्रदान करती है.

Astra MK2 से बढ़ेगी मारक क्षमता
इतना ही नहीं, आने वाले कुछ समय में राफेल और सुखोई-30 को Astra MK2 से भी अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इनकी मारक क्षमता 100 किमी से बढ़कर 160 किलोमीटर तक बढ़ जाएगी. इसके साथ ही ये मिसाइल यूरोपीय देशों की ओर से बनाई गई मेटियोर जैसी मिसाइलों की बराबरी करेगी. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फाइटर जेट और उसके निर्माता डसॉल्ट एविएशन और थेल्स इस कार्यक्रम के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करने पर सहमत हो गए हैं.

भारतीय मिसाइलों को राफेल के उन्नत RBE2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार और उसके कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ प्रभावी ढंग से कॉर्डिनेट करने में सक्षम बनाने वाले विशिष्ट सॉफ्टवेयर अपग्रेड विकसित करने के लिए उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण है. यह सहयोग सुनिश्चित करता है कि फाइटर जेट Astra मिसाइलों की मार्गदर्शन और टारगेट कर सकने वाली क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग कर सके. युद्ध जैसी स्थिति में जाने से पहले इसको कई चरणों से होकर गुजरना होगा.

चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन!
राफेल फाइटर जेट्स के अपग्रेड होने की खबर सुनते ही पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की भी टेंशन बढ़ने वाली है. दरअसल भारत जिस तरह से अपने फाइटर जेट्स को Astra जैसी मिसाइलों से लैस कर रहा है, ऐसी तकनीकी का इस्तेमाल यूरोपीय देश और अमेरिका भी करते हैं. इसलिए भारतीय स्वदेशी मिसाइलों को अपग्रेडेशन से राफेल और भी खतरनाक हो जाएगा.