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उज्जैन में ‘महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम’ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ विज्ञान की भी नगरी है। उज्जैन की माटी में विज्ञान, गणित, खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा है, जहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा पावन नगरी उज्जैन से होकर गुजरती थी। जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था तब उज्जैन के ज्योतिषी और विद्वान काल गणना कर नक्षत्रों की स्थिति बता रहे थे। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी तब यहां महर्षियों ने खगोलीय गणनाओं का वैश्विक मानक स्थापित कर लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण और तारा मंडल में लगी विज्ञान प्रदर्शनी का शुभारंभ एवं अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए 4 लेन उज्जैन बायपास और ‘सम्राट विक्रमादित्य – द हेरिटेज’ परियोजना का भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर विचारक एवं समाजसेवी सुरेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं, जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात ‘मास्टर ऑफ टाइम’ हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं, हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने ग्रीनविच भ्रमण के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाओं की सटीकता अद्भुत है। डोंगला को एस्ट्रोनोमिकल स्टडीज के लिए विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन मील का पत्थर सिद्ध होगा। भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था, जो अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है। आज समय और स्पेस दोनों को एक दूसरे से समेकित रूप से समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आज 15 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमें केंद्र सरकार का भी सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है। वास्तव में यह अपनी वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस नीति की भावना के अनुरूप युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 हमारे लिए उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। हमारा लक्ष्य है की सिंहस्थ 2028 में उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जाने। वर्ष 2028 के सिंहस्थ को व्यवस्थित रूप से संपन्न करना हमारा दायित्व है। इसी उद्देश्य से 700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बायपास रोड का भूमि-पूजन भी हुआ है। इस सौगात के लिए उज्जैनवासी बधाई के पात्र हैं। उज्जैन सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए सर्व-सुविधा संपन्न प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से सभी को वर्ष 2028 के भव्य और दिव्य सिंहस्थ के लिए आमंत्रित किया।

उज्जैन में विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का मिलता है अद्भुत समन्वय: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नई दृष्टि का जन्म होता है। भारत के जितने भी प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं—चाहे वह उज्जैन हो, काशी हो, कांची हो या पुरी धाम, सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी ‘जीती-जागती प्रयोगशालाएं’ हैं, जहाँ विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान आध्यात्मिकता के बिना अधूरा है और इसका सबसे सटीक उदाहरण स्वयं उज्जैन नगरी और महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ (NEP) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा पद्धति को केवल रटने की पुरानी परिपाटी से निकालकर सृजनशीलता, डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। आज का युग एआई (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का है, भारत के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर इस दौड़ में पीछे न रहें, इसके लिए स्कूली स्तर पर ही एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्पष्ट किया कि ज्ञान पर किसी भाषा का एकाधिकार नहीं हो सकता, इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझ सके।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है और यहीं से प्राचीन काल में दुनिया की काल गणना होती थी, इसलिए अब समय आ गया है कि हम ‘ग्रीनविच मीन टाइम’ (GMT) के स्थान पर ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ (MST) की तार्किक स्थापना करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई उपकरण भी यह स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र है, अतः हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना होगा और यह इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष, ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो दशकों में भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ पूरे विश्व की पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान भी प्रदान करेगा। उज्जैन में ‘विज्ञान केंद्र’ और ‘तारामंडल’ का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सके।

विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का किया विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में विकसित बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गयी।

सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में 725 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने उज्जैन में मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाई ‘सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज’ की विस्तार परियोजना का भूमि-पूजन किया। वर्तमान में इस हेरिटेज इकाई में 19 कक्ष, रूफटॉप सहित 3 रेस्टोरेंट, पंचकर्म केंद्र एवं पुस्तकालय संचालित हैं। धार्मिक पर्यटन में लगातार हो रही वृद्धि और आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए 22.52 करोड़ रुपये की लागत से इसका विस्तार किया जाएगा। इस विस्तार के तहत 14 नए कक्ष, एक सुव्यवस्थित डॉर्मिटरी, परिसर को जोड़ने वाले कनेक्टिंग पाथवे तथा आकर्षक गार्डन एवं लैंडस्केपिंग विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन) सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों एवं सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। साथ ही 4-लेन मार्ग बनने से आवागमन और यातायात प्रबंधन सुगम होगा। मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है, जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा।

नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण कर विज्ञान केंद्र के फोल्डर का विमोचन किया। इसमें गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन एवं स्टुडेंट एक्टिविटी हॉल, हेरिटेज थीम आधारित गैलरी और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा, आधुनिक ड्रोन तकनीक और उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर के रूप में स्थापित करने से संबंधित विषयों को आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक रूप में प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को विशेष रूप से दर्शाया गया। साथ ही आरती के लिए डिजाइन की गई रोबोटिक आर्म का प्रदर्शन भी देखा और सराहा। प्रदर्शनी में इसरो, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, आईआईटी इंदौर, आरआरकैट, नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी और सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ सहित विभिन्न संस्थानों ने अपने मॉडल और शोध कार्य प्रदर्शित किए। इंडियन नॉलेज सिस्टम के स्टॉल पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों का प्रदर्शन किया गया। इसमें मेडिकल, एग्री और एयर टैक्सी ड्रोन के साथ एएसएलवी, मंगलयान और चंद्रयान के मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।

समारोह में मुख्यमंत्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।

समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया। साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय वास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।

नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म, दतिया सीट रिक्त

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नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म, दतिया सीट रिक्त
मध्यप्रदेश से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. अब माना जा रहा है कि इस सीट पर उपचुनाव का ऐलान हो सकता है.

अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार रात विचार-विमर्श के बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट से भारती की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी.

भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व गृह मंत्री एवं BJP नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था. अधिसूचना में दिल्ली की एक अदालत द्वारा भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाए जाने का उल्लेख करते हुए दतिया सीट को रिक्त घोषित किया गया है.

एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
यह अधिसूचना विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने दो अप्रैल की रात जारी की, जिसे शुक्रवार सुबह मीडिया को उपलब्ध कराया गया. दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अवैध ब्याज भुगतान हासिल करने से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी.

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विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने भारती और पूर्व कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

दोनों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने के आरोपों में दोषी ठहराया गया है.

आर्थिक तंगी से चाहिए मुक्ति, तो वैशाख के पूरे महीने करें 5 महा मंत्रों का जप

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आर्थिक तंगी से चाहिए मुक्ति, तो वैशाख के पूरे महीने करें 5 महा मंत्रों का जप
वैशाख माह को माधव मास भी कहा जाता है। इन नाम से ही ज्ञात होता है कि यह माह विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा के समर्पित है। यह महीना भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ दान-पुण्य और तर्पण आदि के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आप इस माह में भगवान विष्णु के मंत्रों का जप कर उनकी असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

वैशाख माह का महत्व
“न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्”।

स्कंद पुराण (वैष्णव खण्ड) के इस श्लोक में वैशाख मास की महिमा बताई गई है। इस श्लोक का अर्थ है कि वैशाख के समान कोई महीना नहीं है, जिस तरह सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।

वैशाख माह हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना है, जो अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस माह में विष्णु जी की आराधना करने से साधक को अक्षय पुण्य, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही यह भी माना गया है कि इस माह में किए गए जप, तप, दान और स्नान का फल ‘अक्षय’ होता है, अर्थात जो कभी समाप्त नहीं होता।

भगवान विष्णु के मंत्र –
1. विष्णु मूल का मंत्र – ॐ नमोः नारायणाय॥

2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

3. विष्णु गायत्री मंत्र –
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

4. मङ्गलम् भगवान विष्णु मंत्र –
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

5. विष्णु शान्ताकारम् मंत्र –
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

जरूर करें ये काम
वैशाख में भगवान विष्णु के पूजन के साथ-साथ तीर्थ में स्नान, पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व है।
सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या फिर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
वैशाख महीने में भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं और उसमें एक तुलसी का पत्ता जरूर डालें।
इस महीने में दान करने का बहुत महत्व है, ऐसे में आप जल, अन्न, सत्तू, छाता, पंखा और मौसमी फलों का दान कर सकते हैं।
वैशाख माह में रोजाना सुबह-शाम तुलसी की पूजा कर दीपक जलाएं और जल अर्पित (रविवार और एकादशी को छोड़कर) करें।

जडेजा की जगह धोनी के ‘स्पेशल’ खिलाड़ी का CSK में डेब्यू

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जडेजा की जगह धोनी के ‘स्पेशल’ खिलाड़ी का CSK में डेब्यू
एमएस धोनी अब भी चेन्नई सुपर किंग्स की प्लेइंग इलेवन से बाहर हैं. मगर पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच में CSK ने 20 वर्षीय क्रिकेटर प्रशांत वीर को डेब्यू करने का मौका दिया है. प्रशांत वीर एक ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं, जिन्हें चेन्नई टीम में मैथ्यू शॉर्ट की जगह पर मौका मिला है. मगर प्रशांत हैं कौन, जिनपर मिनी ऑक्शन में चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.2 करोड़ रुपये (Prashant Veer IPL Price CSK) लुटा दिए थे.

कौन हैं प्रशांत वीर?
प्रशांत वीर का जन्म 20 नवंबर, 2005 को उत्तर प्रदेश के अमेठी में हुआ था. प्रशांत बाएं हाथ से ऑफ-स्पिन गेंदबाजी करते हैं और बढ़िया बैटिंग भी कर लेते हैं. उन्हें पहली पहचान यूपी टी20 लीग में मिली, जहां उन्होंने नोएडा सुपर किंग्स के लिए दमदार प्रदर्शन किया था. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी प्रशांत ने बढ़िया ऑलराउंड प्रदर्शन करके दिखाया था.

यूपी के लिए खेलते हुए इस 20 साल के युवा क्रिकेटर ने 7 मैचों में 9 विकेट चटकाए और 170 के तूफानी स्ट्राइक रेट से 112 रन भी बनाए थे. उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स का नया ‘रवींद्र जडेजा’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि वो बल्लेबाजी के साथ-साथ बढ़िया लेफ्ट-आर्म ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं.

प्रशांत वीर का करियर
20 वर्षीय प्रशांत वीर ने पिछले साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के लिए अपना डोमेस्टिक डेब्यू किया था. अब तक 9 टी20 मैचों में 9 विकेट लेने के साथ-साथ 112 रन भी बना चुके हैं. उन्होंने 8 लिस्ट-A मैचों का भी अनुभव प्राप्त कर लिया है जिनमें उनके नाम 10 विकेट और 133 रन हैं. उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में बढ़िया प्रदर्शन के दम पर आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था.

उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए फर्स्ट-क्लास डेब्यू भी कर लिया है, लेकिन रेड बॉल के आंकड़े ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं. 4 फर्स्ट-क्लास पारियों में उनके नाम 2 विकेट हैं और बल्लेबाजी में प्रभावी प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं.

दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप, अभी तक बड़े नुकसान की खबर नहीं

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दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप, अभी तक बड़े नुकसान की खबर नहीं
दिल्ली-NCR में शुक्रवार (3 अप्रैल) की रात भूकंप के तेज झटके महसूस हुए. जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में धरती हिल गई. फिलहाल किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदुकुश पर्वत था. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई

मिडिल ईस्ट में विनाशकारी मोड़: 39 साल पुराना तनाव अब महायुद्ध में तब्दील

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मिडिल ईस्ट में विनाशकारी मोड़: 39 साल पुराना तनाव अब महायुद्ध में तब्दील
अपने पायलटों की तलाश में ईरान के ऊपर सर्च ऑपरेशन चला रहे अमेरिका के एक लड़ाकू विमान को मार गिराने की खबर है. इसको लेकर ईरानी मीडिया ने बताया है कि अमेरिकी सेना मध्य ईरान में तलाशी और बचाव अभियान चलाने की कोशिश कर ही है. नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को जानकारी देते हुए इस खबर की पुष्टी भी की है. यह हमला एक प्रोजेक्टाइल से हुआ है. अमेरिकी सेना ने ईरान में अपने एक पायलट को बचा लिया है.

अमेरिका ने युद्धस्तर पर तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन को दिया अंजाम
इससे पहले खबर आई थी कि ईरान और अमेरिका में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं. अमेरिका ने लापता पायलटों की तलाश तेज कर दी थी. अमेरिकी एयरफोर्स ने ईरान के अंदर युद्धस्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया. इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं. अमेरिकी एयरक्राफ्ट सर्च ऑपरेशन के दौरान बेहद ही निचले स्तर पर उड़ान भरते हुए पायलट की तलाश में जुटे हुए हैं. इससे यह ऑपरेशन संवेदनशील और जोखिम भरा माना जा रहा था.

रिपोर्ट्स में सामने आया है कि घटनास्थल पर पायलट की इजेक्शन सीट जमीन पर ही मिली थी. कुछ देर पहले न्यूयॉर्ट टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से बताया था कि अमेरिकी आर्मी के जवान ईरान पहुंचकर सर्च अभियान और बचाव में लग गई है.

इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया. इसके अलावा एफ-15E को भी ईरान ने निशाना बनाया. ईरान की सरकारी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि एफ-35 विमान सेंट्रल ईरान में गिराया गया था. उसके पायलट के बचने की संभावना बेहद कम है,

हालांकि, अमेरिका ने अपने एक पायलट का रेस्क्यू सफलतापूर्वक कर लिया है. इसके अलावा अन्य रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका के पायलट को जिंदा पकड़ लिया, उसे बंधक बना लिया. हालांकि, इन दावों की किसी तरह से पुष्टी नहीं हो सकी थी.

अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और नागरिक सुविधाओं पर करेगा हमला, ट्रंप ने लिया संकल्प
इधर, ईरान के एक बड़े पुल को नष्ट करने के बाद ट्रंप ने नागरिक सुविधाओं और बिजली संयंत्रों पर हमले करने का संकल्प लिया है. ईरान ने इसे युद्ध अपराध बताते हुए पलटवार किया है. वहीं, कुवैत ने कहा है कि ईरान ने एक वॉटर प्लांट को निशाना बनाया है. साथ ही एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया. वहीं, अन्य खाड़ी देशों को हमलों का सामना करना पड़ रहा है. इधर, ईरान ने कुवैत के दावों को नकार दिया है. ईरान ने शुक्रवार को इजरायल पर भी मिसाइल हमले किए हैं. ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ईरान से जीत की घोषणा करने की अपील करते हुए इसको समाप्त करने को कहा है. अब तक इस युद्ध में कम से कम 2,076 लोग मारे गए हैं. इनमें 26,500 घायल हुए हैं.

पैसा नहीं भावना भारी: 4000 करोड़ की रामायण हारी, 1987 वाला जलवा आज भी जारी

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पैसा नहीं भावना भारी: 4000 करोड़ की रामायण हारी, 1987 वाला जलवा आज भी जारी
नई दिल्ली बॉलीवुड निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायणम’ का फर्स्ट लुक टीजर रिलीज होते ही चर्चा का विषय बन गया है। जहाँ एक ओर रणबीर कपूर के ‘राम’ अवतार को देखने के लिए फैंस उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट पर 39 साल पुराने रामानंद सागर के धारावाहिक को लेकर पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।

4000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली इस फिल्म की तुलना आज भी 1987 के उस टीवी शो से की जा रही है, जिसने भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल दिया था।

क्यों खास है पुरानी रामायण?
नमित मल्होत्रा द्वारा निर्मित इस फिल्म का बजट भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ा बताया जा रहा है। इसके बावजूद, दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया पर यह दावा कर रहा है कि तकनीक और पैसा कभी भी उस ‘अनुभूति’ की जगह नहीं ले सकते, जो रामानंद सागर की रामायण में थी।

सागर की ‘रामायण’
रणबीर की ‘रामायणम’ – आधुनिक वीएफएक्स (VFX), नितेश तिवारी का निर्देशन और 4000 करोड़ का मेगा बजट।

सागर की ‘रामायण’ – 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित, सीमित संसाधन, लेकिन कालजयी प्रस्तुति।

लोकप्रियता – लोकप्रियता के कारण मूल रूप से 52 एपिसोड वाले इस शो को बढ़ाकर 78 एपिसोड किया गया था।

जब कलाकार ही बन गए ‘भगवान’
सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि रामानंद सागर की रामायण की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘परफेक्ट कास्टिंग’ थी। दर्शकों के अनुसार, उन कलाकारों का अभिनय इतना जीवंत था कि लोगों ने उन्हें असल जीवन में भी भगवान का दर्जा दे दिया था।

वो चेहरे जिन्हें दुनिया कभी नहीं भूल पाई
कलाकार – किरदार

अरुण गोविल – श्री राम

दीपिका चिखलिया – माता सीता

सुनील लहरी – लक्ष्मण

दारा सिंह – हनुमान

अरविंद त्रिवेदी – रावण

सोशल मीडिया पर रिएक्शन
फिल्म ‘रामायणम’ का टीजर आने के बाद ‘ओल्ड इज गोल्ड’ का ट्रेंड शुरू हो गया है। यूजर्स का तर्क है कि आप कितनी भी रामायण बना लें, लेकिन जो ‘फील’ और ‘स्क्रीन प्रेजेंस’ दूरदर्शन वाली रामायण में थी, उसे दोबारा पैदा करना नामुमकिन है।

हालांकि, रणबीर कपूर के प्रशंसक नई फिल्म को लेकर काफी आशान्वित हैं। अब देखना यह होगा कि आधुनिक सिनेमा की तकनीक और रणबीर कपूर का अभिनय, रामानंद सागर द्वारा रचे गए उस ‘जादू’ की बराबरी कर पाता है या नहीं।

पोस्ट ऑफिस RD: ₹100 का छोटा निवेश, 5 साल बाद लाखों का बड़ा रिटर्न

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पोस्ट ऑफिस RD: ₹100 का छोटा निवेश, 5 साल बाद लाखों का बड़ा रिटर्न
आज के दौर में जब शेयर बाजार की उठापटक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के जोखिम लोगों को डराते हैं, तब भारत का सबसे पुराना और विश्वसनीय संस्थान ‘भारतीय डाकघर’ (India Post) एक सुरक्षित ढाल बनकर सामने खड़ा है। एक जमाना था जब डाकघर का मतलब केवल चिट्ठियों और मनीऑर्डर तक सीमित था, लेकिन आज का डाकघर एक ‘अत्याधुनिक मिनी बैंक’ में तब्दील हो चुका है। यहां फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से लेकर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं मध्यम वर्ग की पहली पसंद बनी हुई हैं।

मिडिल क्लास की पसंद
बचत की दुनिया में मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है- एकमुश्त मोटी रकम का अभाव। इसी समस्या का समाधान है पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम। इसे आप ‘किश्तों वाली बचत’ कह सकते हैं। यह योजना उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपनी मासिक आय में से एक छोटा हिस्सा बचाकर भविष्य के लिए बड़ा फंड खड़ा करना चाहते हैं।

योजना की खासियतें और निवेश की सीमा
डाकघर की RD स्कीम की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सुगमता है। आप मात्र 100 रुपये प्रति माह से अपना खाता खोल सकते हैं। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, यानी आप अपनी क्षमता के अनुसार 500, 1000 या 5000 रुपये कितनी भी राशि हर महीने जमा कर सकते हैं। बस शर्त इतनी है कि आपका पोस्ट ऑफिस में एक बचत खाता (Saving Account) होना अनिवार्य है।

ब्याज दर और कंपाउंडिंग का जादू
वर्तमान में पोस्ट ऑफिस RD पर 6.7% की वार्षिक ब्याज दर मिल रही है। यह ब्याज साधारण नहीं है; इसमें ‘कंपाउंडिंग’ (चक्रवृद्धि ब्याज) का जादू काम करता है। हर तीन महीने (त्रैमासिक) में आपके द्वारा जमा की गई राशि पर ब्याज की गणना की जाती है और उसे मूलधन में जोड़ दिया जाता है। इससे समय बीतने के साथ आपकी राशि रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने लगती है।

समझिए गणित: कैसे जुड़ेंगे लाखों रुपये?
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक अनुशासित निवेशक हैं और हर महीने अपनी सैलरी से 3,500 रुपये बचाकर इस स्कीम में डालते हैं।

समय सीमा: 5 साल (60 महीने)
कुल निवेश: 2,10,000 रुपये
मिलने वाला ब्याज: 39,776 रुपये
मैच्योरिटी पर कुल राशि: 2,49,776 रुपये

सुरक्षा और गारंटी
चूंकि यह योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित है, इसलिए इसमें आपके पैसे के डूबने का शून्य जोखिम है। बैंक भले ही उतार-चढ़ाव देख सकते हैं, लेकिन डाकघर की गारंटी अडिग रहती है।

यदि आप भी अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी या किसी बड़े लक्ष्य के लिए धीरे-धीरे पैसा जोड़ना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की RD एक शानदार विकल्प है। यह न केवल आपको बचत करना सिखाती है, बल्कि आपकी छोटी-छोटी बूंदों से भविष्य का समंदर तैयार करती है। आज ही अपने नजदीकी डाकघर जाएं और एक बेहतर कल की नींव रखें।

भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन भरा फॉर्म

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भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन भरा फॉर्म
देश में आज से जनगणना की पहली प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने खुद जनगणनी की पहली प्रक्रिया का फॉर्म ऑनलाइन भरा है। आज देश के तीन दिग्गजों ने अपने फॉर्म भरने के साथ इसकी शुरूआत की।

राष्ट्रपति ने जनगणना में भाग लेते हुए अपनी तस्वीर साझा की और लिखा कि राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए भारत सरकार की ‘स्व-गणना’ (self-enumeration) पहल में राष्ट्रपति ने भाग लिया। यह जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यम से आयोजित की जा रही है।

पीएम मोदी ने पोस्ट किया अपना फोटो
अपना फॉर्म खुद भरने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वह भारत के लोगों से अपील करते हैं कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।

आपके घर भी आएगी जनगणना टीम
गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि आज से आरंभ हो रही जनगणना की पहली प्रक्रिया ‘आवास गणना’ के तहत अपने दिल्ली स्थित आवास पर स्व-गणना (Self-Enumeration) का फॉर्म भरा। भारत की विकास यात्रा को गति देने और प्रत्येक देशवासी तक सरकार की योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने में इस प्रक्रिया की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। जल्द ही जनगणना की टीम आपके घर भी आएगी। आप भी इस राष्ट्रीय दायित्व में पूर्ण सहयोग करते हुए मांगी गई आवश्यक जानकारियां प्रदान करें।