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दिल्ली अग्निकांड से दहली राजधानी, प्रधानमंत्री ने जताया शोक

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दिल्ली अग्निकांड से दहली राजधानी, प्रधानमंत्री ने जताया शोक
देश की राजधानी दिल्ली में रविवार सुबह हुई विवेक विहार में आगजनी की घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त कियाहै. इस हादसे में 8 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने सभी पीड़ितों के परिवार को 2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा भी की है. साथ ही घायलों को 50 अनुग्रह राशि देने का ऐलान भी किया है.

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली की शाहदरा जिले में आग लगने की घटना में लोगों की जान जाना बेहद दुखद है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं. घायलों को शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. जिन लोगों की जान गई है, उनके परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे.

गृहमंत्री अमित शाह ने भी जताया शोक
इस घटना पर गृहमंत्री अमित शाह ने भी सांत्वना दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली के विवेक विहार में हुई आगजनी की घटना अत्यंत पीड़ादायक है. इस हादसे में जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं. ईश्वर शोक-संतप्त परिवारों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें. स्थानीय प्रशासन घायलों को सर्वोच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.

पूरा मामला क्या है
रविवार को सुबह दिल्ली के विवेक विहार में एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई. इससे 9 लोगों की मौत हो गई. आग लगने की सूचना सुबह तड़के मिली. पुलिस ने बताया कि विवेक विहार पुलिस स्टेशन में सुबह 3.48 बजे एक पीसीआर कॉल आई थी.

इधर, दिल्ली फायर सर्विसेज के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम का एक घंटे पहले ही अलर्ट मिल गया था. इसके बाद तुरंत कई टीमों को घटनास्थल पर रवाना कर दिया गया. सुबह 5 बजे एक कुल 14 फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया.

पुलिस ने क्या जानकारी दी?
पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि इमारत के आगे और पीछे, दोनों तरफ बने फ्लैटों के कारण दमकलकर्मियों के लिए वहां तक ​​पहुंचना मुश्किल हो गया था।

इस पूरे मामले में उप-आयुक्त (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि इमारत के आगे और पीछे दोनों तरफ बने प्लैटों के कारण दमकलकर्मियों के लिए पहुंचा मुश्किल हो गया था. आग की चपेट में आने वाला सबसे छोटा बच्चा डेढ़ साल का मासूम है. यह दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में चार अन्य लोगों के साथ मिला. आग बुझाने में करीबन 8 बज गए. इसके बाद ही सर्च ऑपरेशन शुरु किया गया.

होर्मुज संकट का मास्टरप्लान: ईरान को किनारे कर खाड़ी देशों ने खोजा समंदर का विकल्प

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होर्मुज संकट का मास्टरप्लान: ईरान को किनारे कर खाड़ी देशों ने खोजा समंदर का विकल्प
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति के केंद्र में है। Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव और कथित नाकेबंदी ने दुनिया को यह याद दिला दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का बड़ा हिस्सा आज भी कुछ सीमित जलमार्गों पर निर्भर है। यही कारण है कि सऊदी अरब, यूएई और तुर्की जैसे देश अब वैकल्पिक मार्गों के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री chokepoints में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में जब भी इस मार्ग पर संकट आता है, उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालिया घटनाओं के बाद उत्पन्न स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल एक मार्ग पर निर्भर रहना अब रणनीतिक दृष्टि से जोखिम भरा है।

इसी पृष्ठभूमि में खाड़ी और आसपास के देशों ने बहु-आयामी विकल्पों पर काम शुरू किया है। यूएई और ओमान के बंदरगाहों से सऊदी अरब के जरिए जॉर्डन तक माल पहुंचाने और वहां से Suez Canal अथवा भूमध्य सागर के अन्य बंदरगाहों तक ले जाने की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल हॉर्मुज बल्कि Red Sea पर निर्भरता को भी कम करेगा।

इसके साथ ही, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रेल नेटवर्क पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐतिहासिक Hejaz Railway को पुनर्जीवित करने की योजना केवल अतीत की विरासत को पुनर्स्थापित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह आधुनिक व्यापार और रणनीतिक संतुलन को साधने का माध्यम भी बन सकता है। जेद्दा से इस्तांबुल तक रेल संपर्क स्थापित होने से एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को एक नया आयाम मिलेगा।

ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की आहट है। बहु-देशीय तेल और गैस पाइपलाइनों, बिजली ग्रिड और जल प्रणालियों के निर्माण की योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्रीय सहयोग अब केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे के स्तर पर भी गहराता जा रहा है। हाल ही में जेद्दा में हुए जीसीसी शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क को विकसित करने पर सहमति इसी दिशा में एक ठोस कदम है।

विशेषज्ञ इसे एक “ढांचागत बदलाव” के रूप में देख रहे हैं। यह बदलाव केवल मार्गों का नहीं, बल्कि सोच का भी है—जहां अब एकल निर्भरता की जगह बहु-विकल्पीय और लचीली व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि किसी भी भू-राजनीतिक संकट का प्रभाव भी सीमित किया जा सकेगा।

हालांकि, इन योजनाओं के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय मतभेद, भारी निवेश की आवश्यकता और तकनीकी जटिलताएं इन परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी, वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकल्पों का निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

अंततः, हॉर्मुज संकट ने दुनिया को एक महत्वपूर्ण सबक दिया है—वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विविधता, लचीलापन और सहयोग अनिवार्य हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह क्षेत्र किस प्रकार नए मार्गों और नई रणनीतियों के माध्यम से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को पुनर्परिभाषित करता है।

अमेरिका के सामने ईरान की बड़ी शर्त: ‘खत्म करें युद्ध, हटाएँ पाबंदी और दें हर्जाना’

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अमेरिका के सामने ईरान की बड़ी शर्त: ‘खत्म करें युद्ध, हटाएँ पाबंदी और दें हर्जाना’
ईरान का अमेरिका को जवाब: युद्ध विराम के लिए भेजा 14 सूत्रीय शांति प्रस्तावडोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित 9 सूत्रीय फ्रेमवर्क पर ईरान की प्रतिक्रिया आई है। तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है।

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करे, नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, अपनी सेना वापस बुलाए और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए एक नई शासन व्यवस्था स्थापित करे। इस 14 सूत्रीय योजना में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, उसकी जब्त संपत्तियों को मुक्त करना और मुआवजे की मांग भी शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी का बयान
ईरान ने वाशिंगटन की दो महीने के युद्धविराम की योजना को खारिज कर दिया है और सभी मुद्दों को हल करने के लिए 30 दिन की समय सीमा का समर्थन किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि यह अब अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह वार्ता के माध्यम से समझौता करना चाहता है या खुले युद्ध की ओर लौटना चाहता है; तेहरान दोनों ही स्थितियों के लिए तैयार है।

ईरान की सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, गरीबाबादी ने तेहरान में राजनयिकों से कहा, “अब अमेरिका को कूटनीति का रास्ता चुनना है या टकराव का।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए दोनों ही रास्तों के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान की योजना पर अमेरिका की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के इस नवीनतम 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने नए अमेरिकी हमलों की संभावना का संकेत भी दिया। ट्रंप ने कहा, “ईरान के संबंध में हमारी स्थिति काफी मजबूत है। वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें शायद यह तय करने में कठिनाई हो रही है कि उनका नेतृत्व कौन कर रहा है। उन्होंने मुझे समझौते की एक अवधारणा (Concept) भेजी है, जिसकी मैं समीक्षा कर रहा हूँ।

“ट्रंप ने आगे कहा, “ईरान ने जो योजना भेजी है, मैं जल्द ही उसकी विस्तृत समीक्षा करूँगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी। मेरा मानना है कि पिछले 47 वर्षों में उन्होंने मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया शुभारंभ

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं।

पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शॉल- फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया।

हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है ‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया।

अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं।

सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए, जिससे आम नागरिक भी इनका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा तथा “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की परिकल्पना साकार होगी। मंत्री सिंह ने कहा कि “सस्टेनेबल फ्यूचर” केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे हमें आज से ही अपने कार्यों में लागू करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित वातावरण प्रदान किया जा सके।

लोक निर्माण विभाग ने बनाई अपनी नई छवि
प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग और आईबीसी मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट एस.आर. बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदृष्टि के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश में अब सभी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बन रही हैं। आईबीसी प्रेसिडेंट चिन्मय देवनाथ ने कहा कि आज इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल मीटिंग में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस, 3D प्रिंटिंग एवं प्री-फैब्रिकेशन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सेक्टर में आ रही चुनौतियों का हल निकालना है। ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर्यावरण के लिए लाभकारी है। इसमें ऊर्जा संरक्षण और जल संरक्षण पर खास जोर दिया जाता है।

इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस आईबीसी के संस्थापक अध्यक्ष ओपी गोयल ने कहा कि आईबीसी का भोपाल चैप्टर काफी सक्रियता के साथ काम कर रहा है। यहां इंजीनियरिंग सेक्टर में नए सॉफ्टवेयर और नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने गंभीरता के साथ कार्य करते हुए अपनी नई छवि बनाई है। हमारा लक्ष्य भारत को अधोसंरचना क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह, भवन विकास निगम के महाप्रबंधक सीबी चक्रवर्ती, आईबीसी के सचिव कर्नल आनंद मथलेकर सहित लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के प्रतिनिधि, सिटी प्लानर्स, नीति-निर्माता और वरिष्ठ अभियंता उपस्थित थे।

निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है।

मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है – जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।

जबलपुर बरगी डैम क्रूज हादसा: सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन

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जबलपुर बरगी डैम क्रूज हादसा: सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन
जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। गुरुवार को हुए इस हादसे के बाद अब तक 28 लोगों को बचा लिया गया है। 9 के शव बरामद किए जा चुके हैं तो वहीं अभी भी 4 लोग लापता हैं। लगातार रेस्क्यू व सर्च ऑपरेशन जारी है। इस हादसे पर जांच के आदेश देने के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने कुछ कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है।

बरगी डैम हादसे में लापरवाही के लिए दोषियों पर कार्रवाई
सीएम डॉ. यादव ने खुद जानकारी देते हुए बताया कि जबलपुर बरगी डैम में हुए दुखद हादसे में लापरवाही के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर इंचार्ज (FOA) बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई हैं।

इसके अलावा होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को ड्यूटी में लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा ​​को हेडक्वार्टर अटैच कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। सीएम ने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ितों के प्रति संवेदना जताते हुए, सरकार हर मुमकिन मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।

हादसे की जांच के लिए बनाई हाई-लेवल जांच कमेटी
मुख्यमंत्री ने बताया कि जबलपुर के बरगी जलाशय में हुए हादसे की जांच के लिए एक हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्रूज ऑपरेशन से जुड़े SOPs तैयार किए जाएंगे। इसके साथ डॉ. यादव ने घोषणा की है कि रेस्क्यू टीम के सभी बहादुर सदस्यों को सार्वजनिक सम्मानित किया जाएगा। एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और सेना के डाइवर्स ने कई कीमती जानें बचाई हैं।

इसके अलावा सीएम डॉ. यादव शुक्रवार को जबलपुर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इस हादसे में रिश्तेदारों ने अपनों को खो दिया है, और उस नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। राज्य सरकार इस असहनीय दुख में उनके साथ खड़ी है। मेरी संवेदनाएं दुखी परिवारों के साथ हैं। इस मुश्किल समय में, प्रभावित परिवारों को अकेला महसूस नहीं करना चाहिए।

जबलपुर बरगी डैम हादसे पर PM मोदी ने जताया गहरा दुख

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जबलपुर बरगी डैम हादसे पर PM मोदी ने जताया गहरा दुख
मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 की शाम को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है । प्रधानमंत्री मोदी ने पीड़ितों और घायलों के लिए मुआवजे का भी ऐलान किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में नाव पलटने से हुई जान-माल की हानि अत्यंत दुखद है। इस दुखद दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। PMNRF (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) की ओर से, जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है और जांच के भी निर्देश दिए हैं।

विशेष रूप से क्रूज पर लाइफ जैकेट की उपलब्धता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोपों की जांच की जाएगी। बता दें कि अब तक इस हादसे में 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें एक मां और बच्चे का शव एक ही लाइफ जैकेट में लिपटा मिला, यह द्श्य देखकर बचाव कार्य में जुटे लोगों की आंखें भी नम हो गई। अबतक राहत एवं बचाव कार्य (NDRF और SDRF की टीमों द्वारा) के जरिए 29 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अभी भी कई लोग लापता हैं। पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

ज्येष्ठ के महीने में करें ये चमत्कारी उपाय, भगवान विष्णु देंगे सुख समृद्धि का आशीर्वाद

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ज्येष्ठ के महीने में करें ये चमत्कारी उपाय, भगवान विष्णु देंगे सुख समृद्धि का आशीर्वाद
ज्येष्ठ के महीने को हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना गया है। यह महीना अपनी भीषण गर्मी की वजह से भी पहचाना जाता है। इसमें पड़ने वाला नौतपा बहुत गर्म होता है। इस दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ-साथ कुछ ऐसे पुण्य के कार्य किए जा सकते हैं जो जीवन में सुख समृद्धि लेकर आते हैं।

धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ का महीना बहुत ही खास माना गया है। इस समय सूर्य की तपिश चरम पर होती है और जीव, जंतु, प्रकृति इंसान सभी का इस महीने में विशेष महत्व बताया गया है। चलिए जान लेते हैं कि यह कब से शुरू हो रहा है और किन उपायों के जरिए जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।

कब से शुरू होगा ज्येष्ठ
ज्येष्ठ का महीना 2 मई 2026 दिन शनिवार से शुरू हो रहा है। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 1 तारीख की रात से हो जाएगी लेकिन उदया तिथि के मुताबिक इसे 2 मई से मनाया जाएगा। इस महीने का समापन 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ होगा।

जान लें शुभ योग और मुहूर्त
2 मई को रात 9:45 तक व्यतिपात योग बन रहा है और पूरे दिन तथा रात में विशाखा नक्षत्र रहेगा। 3 मई को सुबह 5:39 तक त्रिपुष्कर योग रहने वाला है। चंद्रमा इस दौरान तुला और सूर्य मेष राशि में रहेंगे जो शुभ माना जाता है।

कर लें ये उपाय
ज्येष्ठ के महीने में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। ऐसा कहते हैं कि इससे शत्रु पर विजय मिलती है और पापों का नाश होता है। कठिन पूजा पाठ नहीं कर सकते तो बहुत सरल उपाय कर सकते हैं। चलिए जान लेते हैं

इस महीने में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म माना गया है।

राहगीरों के लिए घर के बाहर ठंडे पानी का मटका रख सकते हैं।

पशु पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन में छांव वाली जगह पर पानी भर कर रखें।

प्यासे लोगों को पानी पिलाने से पुण्य की प्राप्ति तो होती ही है। भगवान विष्णु की कृपा भी मिलने लगती है। ऐसा करने वाले लोगों को जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और वो मोक्ष प्राप्त करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का TMC को बड़ा झटका, मतगणना प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार

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सुप्रीम कोर्ट का TMC को बड़ा झटका, मतगणना प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मतगणना केद्रों पर केंद्रीय और पीएसयू (PSU) कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया। टीएमसी ने चुनाव आयोग (EC) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मतगणना पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति की बात कही गई थी। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं हैं।

बता दें कि इस मामले में टीएमसी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी लेकिन हाईकोर्ट ने भी आपत्ति खारिज करते हुए कहा था कि मतगणना पर्यवेक्षक की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है इसमें कोई अवैधता नहीं है। इसके बाद टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन पार्टी को दोनों तरफ से खाली हाथ लौटना पड़े।

कोर्ट ने मामले में कोई भी आदेश जारी करने से किया मना
मुख्य चुनाव आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर को लागू करने का भरोसा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अलग से आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल चुनाव आयोग के वकील द्वारा दिए गए इस बयान को रिकॉर्ड पर ले रहा है कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा।

इस सर्कुलर को लेकर टीएमसी का दावा था कि वोट मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने साफ कहा कि फिर दिक्कत कहां आ रही है। जब टीएमसी भी चाहती है कि एक कर्मचारी राज्य की ओर से तो फिर चुनाव आयोग वैसा ही तो कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद TMC का बदला रुख
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद टीएमसी ने अपने रुख में बदलाव करते हुए अब चुनाव आयोग के सर्कुलर को सख्ती से लागू करने की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया कि जारी दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। इस मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस पामिदिघंतम नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ का गठन किया है, जो याचिका पर विस्तृत सुनवाई कर रही है।

कपिल सिब्बल ने रखी चार आपत्तियां
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की ओर से पैरवी वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने की। कोर्ट की सुनवाई करीब 20 से 25 मिनट तक चली। इस दौरान कपिल सिब्बल ने चार आपत्तियां पेश की। उन्होंने दलील दी कि जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs) द्वारा 13 अप्रैल को जारी नोटिस की जानकारी पार्टी को 29 अप्रैल को मिली, जिससे उन्हें समय रहते अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिल सका।

सिब्बल ने आगे अधिकारियों की इस आशंका पर भी सवाल उठाया कि मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी हो सकती है। उन्होंने कोर्ट में कहा, उन्हें एक आशंका है कि हर बूथ पर गड़बड़ी होगी। यह धारणा उन्हें कहां से मिली? यह चौंकाने वाला है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था में केंद्र सरकार के अधिकारी पहले से ही प्रत्येक मतगणना टेबल पर माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में मौजूद रहते हैं। ऐसे में एक और केंद्र सरकार के अधिकारी की तैनाती की आवश्यकता पर उन्होंने सवाल उठाया।

सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्वयं राज्य सरकार के अधिकारियों को भी मतगणना प्रक्रिया में शामिल करने का प्रावधान है, लेकिन व्यवहार में राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि को नियुक्त नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, सर्कुलर में साफ लिखा है कि राज्य सरकार का एक अधिकारी भी होना चाहिए, लेकिन उसे शामिल नहीं किया जा रहा।

फाल्टा में TMC नेताओं पर धमकी का आरोप

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फाल्टा में TMC नेताओं पर धमकी का आरोप
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दक्षिण 24 परगना जिले की दो विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर चुनावी धांधली की खबरों के बाद पुनर्मतदान का आदेश दिया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 2 मई को मतदान जारी है। इस दौरान फाल्टा इलाके में तनाव उस वक्त भड़क उठा, जब स्थानीय लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर चल रहे पुनर्मतदान के दौरान उन्हें धमकाने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

एक स्थानीय महिला ने कहा, ‘हमने TMC को वोट दिया था फिर भी हम पर हमला किया गया… TMC नेता इसराफिल चौकदार ने हमें धमकी दी है। हम चाहते हैं कि उनकी गिरफ्तारी हो। हमें महिलाओं की सुरक्षा चाहिए।’ वहीं एक अन्य एक स्थानीय महिला ने कहा, ‘TMC नेता इसराफिल चौकदार ने हमें धमकी दी है कि ये लोग अगर जीत गए तो वे यहां हमारे घर जला देंगे और रक्तपात करेंगे।’

महिलाओं ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के पंचायत प्रधान इसराफिल चोंकदार ने उन्हें भयभीत किया और धमकियां दीं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जान से मारने तक की चेतावनी दी गई है। इन आरोपों के बाद इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल फैल गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए हैं और प्रशासन से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।