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‘स्थिर रिश्ता’ है तो आप हैं शादीशुदा! सरकार ने नियमों में किया ऐतिहासिक बदलाव

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‘स्थिर रिश्ता’ है तो आप हैं शादीशुदा! सरकार ने नियमों में किया ऐतिहासिक बदलाव
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए 33 महत्वपूर्ण सवाल जारी किए हैं, जिससे लोगों को प्रक्रिया समझने में आसानी हो सके। इसके साथ ही एक FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस बार जनगणना में एक अहम बदलाव देखने को मिला है।

व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय, आरटीआई से भी नहीं मिलेगा जवाब
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम में एक महत्वपूर्ण प्रावधान, धारा पंद्रह, शामिल है। यह प्रावधान बताता है कि व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह गोपनीय माना जाता है। इसे आरटीआई अधिनियम के तहत साझा नहीं किया जा सकता है। इसे अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे किसी अन्य संगठन के साथ साझा भी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका इस पूरे कार्य में केंद्रीय है। उनकी पूरी प्रशासनिक प्रणाली जमीनी स्तर पर क्षेत्र कार्य करने में लगी हुई है।

लिव-इन कपल्स को शादीशुदा माना जाएगा
सरकार की तरफ से जारी हुए FAQ के अनुसार, अगर कोई लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा जोड़ा अपने संबंध को स्थिर मानता है, तो उसे शादीशुदा जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह स्पष्टीकरण जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर दिए गए एक सवाल के जवाब में सामने आया है।

क्या-क्या पूछे जाएंगे सवाल
पहले चरण में घर और परिवार से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसमें शामिल हैं:-
मकान का नंबर और संरचना
फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री
घर की स्थिति और उपयोग
परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या
शादीशुदा जोड़ों की संख्या
परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग
खाने की आदतें और इस्तेमाल होने वाले अनाज
वाहन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता

दो चरणों में होगी जनगणना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें पहली बार जाति गणना भी शामिल होगी। आजादी के बाद यह देश की 16वीं जनगणना होगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।

जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब इसे दो चरणों में कराया जाएगा…
पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण, आवास गणना
दूसरा चरण: फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना
पहली बार पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया
कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब हाथ से चलने वाले उपकरण, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। करीब 32 लाख फील्ड कार्यकर्ताओं (गणनाकार और पर्यवेक्षक) मोबाइल डिवाइस के माध्यम से करोड़ों घरों से जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक आंकड़े एकत्र करेंगे। यह डाटा सीएमएमए प्रणाली के जरिए तुरंत ट्रांसमिट, संकलित और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे त्रुटियों में कमी आएगी और समय की बचत होगी।

रियल-टाइम निगरानी संभव
सर्कुलर के अनुसार, सीएमएमएस के जरिए उपयोगकर्ता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) का गठन, सुपरवाइजरी सर्किल का निर्धारण, गणनाकर्मियों की नियुक्ति, पहचान पत्र जारी करने और फील्ड ऑपरेशन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसमें कहा गया है कि सीएमएमएस जनगणना क्षेत्र के संचालन की नियुक्तियों, प्रशिक्षण और लगभग वास्तविक समय की निगरानी को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमिका-आधारित पहुंच नियंत्रण को भी सक्षम बनाता है।

30 लाख कर्मियों की होगी तैनाती
जनगणना 2027 में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी लगाए जाएंगे। इनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और कई तकनीकी कर्मचारी शामिल होंगे। यह जनगणना अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल ऑपरेशन होगा। इस दौरान लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिन का रोजगार भी पैदा होगा। फील्ड में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को उनके नियमित काम के अलावा यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और इसके लिए मानदेय भी तय किया गया है।

घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे
जनगणना करने वाले गणनाकार (एन्यूमरेटर), जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं, अपने टैबलेट या मोबाइल ऐप में घर-घर जाकर सभी जानकारी दर्ज करेंगे। हर घर का लोकेशन, सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, विकलांगता, प्रवासन और अन्य जरूरी विवरण रिकॉर्ड किए जाएंगे। ऐप में डाले जाने वाले डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी फीचर जोड़े गए हैं, ताकि कोई डेटा लीक या गड़बड़ी न हो।

लोग खुद भी भर सकेंगे फॉर्म
सरकार इस बार लोगों को स्वयं-गणना यानी सेल्फ इन्यूमरेशन का विकल्प भी देगी। लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद भी भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया तेज होगी और सिस्टम का भार कम होगा। जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट नहीं है, उनके लिए फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा दर्ज करेंगे।

तीसरी आंख का कमाल: जानिए कैसे UltraEdge और Ball Tracking की मदद से अंपायर पलक झपकते लेते हैं सही फैसला

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तीसरी आंख का कमाल: जानिए कैसे UltraEdge और Ball Tracking की मदद से अंपायर पलक झपकते लेते हैं सही फैसला
आईपीएल 2026 का आगाज हो चुका है और फैंस एक बार फिर चौकों-छक्कों की बरसात देखने को तैयार हैं. लेकिन अब क्रिकेट सिर्फ खिलाड़ियों का खेल नहीं रह गया है मैदान पर हर बड़े फैसले के पीछे एडवांस टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका होती है. खासकर LBW, एज और बोल्ड जैसे फैसलों में तकनीक सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है.

Hawk-Eye
मैच के दौरान सबसे अहम तकनीक Hawk-Eye मानी जाती है. स्टेडियम में लगे कई हाई-स्पीड कैमरे गेंद की हर हरकत को कैप्चर करते हैं. इसके जरिए गेंद की 3D ट्रैजेक्टरी तैयार की जाती है जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि गेंद स्टंप्स पर लगती या नहीं. LBW के मामलों में यह तकनीक थर्ड अंपायर को बेहद स्पष्ट विजुअल्स देती है जिससे सही फैसला लेना आसान हो जाता है.

UltraEdge और Snickometer
जब मामला बेहद करीबी होता है यानी गेंद बल्ले या पैड को हल्के से छूती है तब UltraEdge और Snickometer काम आते हैं. इनमें ऑडियो सेंसर और हाई-स्पीड कैमरे का इस्तेमाल होता है जो सबसे हल्की आवाज या टच को भी पकड़ लेते हैं. स्क्रीन पर ग्राफ के रूप में स्पाइक दिखाई देता है जिससे अंपायर को साफ संकेत मिल जाता है कि एज लगा है या नहीं. यह तकनीक खासतौर पर LBW रिव्यू और कैच आउट के फैसलों में बहुत मददगार होती है.

Smart Stumps
अब स्टंप्स भी स्मार्ट हो चुके हैं. इनमें LED लाइट्स और माइक्रोचिप सेंसर लगे होते हैं जो गेंद लगते ही तुरंत सिग्नल भेज देते हैं. इससे बोल्ड या रनआउट जैसे फैसले तुरंत और बिना किसी गलती के लिए जा सकते हैं. साथ ही यह सिग्नल ब्रॉडकास्ट टीम और थर्ड अंपायर तक रियल टाइम में पहुंचता है.

Hot Spot
Hot Spot एक खास तकनीक है जो इंफ्रारेड कैमरों की मदद से यह दिखाती है कि गेंद बल्ले या पैड से टकराई है या नहीं. जब गेंद टकराती है तो हल्की गर्मी पैदा होती है जिसे यह तकनीक कैप्चर कर लेती है. इससे एज या संपर्क की पुष्टि करना आसान हो जाता है खासकर जब मामला बेहद नजदीकी हो.

टेक्नोलॉजी से बढ़ी भरोसेमंद क्रिकेट
Hawk-Eye, UltraEdge, स्मार्ट स्टंप्स और Hot Spot जैसी तकनीकों ने क्रिकेट को पहले से ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बना दिया है. अब फैंस निश्चिंत होकर मैच का आनंद ले सकते हैं क्योंकि हर बड़ा फैसला डेटा और टेक्नोलॉजी के आधार पर लिया जाता है.

ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा

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ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां इजरायली हमले में IRGC के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टी हुई है. हाल ही में इजरायल ने इस बात का दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के लिए जिम्मेदार तंगसिरी की मौत हो गई है. इजरायली हमले के बाद गंभीर चोटों से वह उबर नहीं पाए. IRIB ने उनकी मौत की पुष्टी की है. इससे पहले इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि कमांडर को इजरायली सेना के लक्षित ऑपरेशन में मार गिराया गया था.

अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. खाड़ी युद्ध में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को चुनौती देने में उनकी भूमिका अहम रही थी. लीरेजा तंगसिरी 26 मार्च को हुए बंदर अब्बास में इजरायली हमले के दौरान गंभीर चोट के चलते घायल हो गए थे.

ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक हमले में मारे जा चुके हैं

इससे पहले इस युद्ध में कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य हस्तियों की जान जा चुकी है. सबसे पहले इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में उनके परिसर पर हवाई हमला किया गया था. वह 86 साल के थे. 1989 से ईरान शीर्ष नेतृ्त्व संभाल रहे थे.

इनके अलावा अली लारीजानी जो सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे. उनकी मौत 17 मार्च को हमले के दौरान हो गई थी. वह 67 साल के थे. ईरानी मीडिया के अनुसार उनके साथ उनके बेटे और उनके एक डिप्टी भी मारे गए थे.

इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे. 18 मार्च को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई थी. अगस्त 2021 में उन्होंने नागरिक खुफिया तंत्र का नेतृत्व संभाला था. इनके अलावा आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर की 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मौत हो गई थी. इसके अलावा वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह 28 फरवरी को तेहरान के हमले में मारे गए.

ईरान सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी 28 फरवरी के हमले में मारे गए. बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी 17 मार्च को हुए हमले में मारे गए. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना खुफिया प्रमुख बेहनम रजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में हमले के दौरान मारे गए.

पहली बार ₹95 के पार पहुंचा डॉलर, ईरान-अमेरिका जंग ने बिगाड़ा खेल

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पहली बार ₹95 के पार पहुंचा डॉलर, ईरान-अमेरिका जंग ने बिगाड़ा खेल
रुपए ने सोमवार को कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त गंवा दी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के माहौल के कारण घरेलू मुद्रा दबाव में है.

रुपए ने हालांकि बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन बाद में इसने शुरुआती लाभ गंवा दिया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और फिर 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद स्तर से 128 पैसे की बढ़त दर्शाता है.

ईरान युद्ध की वजह से हिल गया वैश्विक बाजार
यह बढ़त हालांकि बरकरार नहीं रह सकी और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दिन के कारोबार में 95.22 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया. ईरान में जारी युद्ध और मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल रहा है. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था.

आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपए के कमजोर होने का मतलब है कि अब विदेश से आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी. यानी अब कच्चे तेल के लिए भारत को अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.

रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में आएगा उछाल!
इतना ही नहीं मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स, जिनके पार्ट्स विदेश से आते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही जो छात्र विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. माल ढुलाई भी महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल आ सकता है.

ट्रंप के खिलाफ सड़को पर उतरी अमेरिका की जनता, नो किंग्स’ प्रदर्शन शुरू

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ट्रंप के खिलाफ सड़को पर उतरी अमेरिका की जनता, नो किंग्स’ प्रदर्शन शुरू

कई शहरों में एक साथ जनता सड़कों पर उतरी

अमेरिका-अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ हाल ही में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। “No Kings” नाम से आयोजित इन प्रदर्शनों में अमेरिका के कई प्रमुख शहरों सहित सैकड़ों स्थानों पर लोगों ने भाग लिया, जिसे हाल के वर्षों के महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में गिना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी, शिकागो समेत कई शहरों में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर यह संख्या लाखों तक बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने बैनर, पोस्टर और नारों के माध्यम से सरकार की नीतियों के प्रति असहमति जताई। कई जगहों पर “Put down the crown, clown” जैसे नारे भी देखने को मिले, जो नेतृत्व शैली पर व्यंग्य के रूप में सामने आए।

इन प्रदर्शनों के पीछे प्रमुख कारणों में प्रशासन की विदेश नीति, खासकर ईरान से जुड़े फैसले, सख्त आव्रजन नीतियां, महंगाई, और सामाजिक क्षेत्र में बजट कटौती जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। नागरिक संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी आवाज उठाने का माध्यम है।

वहीं, व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार देते हुए उनकी आलोचना की है। सरकार का पक्ष है कि उसकी नीतियां राष्ट्रीय हित में हैं, जबकि विरोध करने वाले समूह इन्हें आम जनता के खिलाफ बता रहे हैं।

अमेरिका में उभरता यह विरोध दर्शाता है कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज कितनी प्रभावशाली हो सकती है। हालांकि, इन प्रदर्शनों का दीर्घकालिक राजनीतिक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया इन्दौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का लोकार्पण

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया इन्दौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का लोकार्पण

इंदौर में हवाई सुविधाओं का हो रहा विस्तार, मिली अत्याधुनिक टर्मिनल की सौगात

इंदौर की हवाई सुविधा को अमेरिकी काउंसिल ने क्वॉलिटी सर्टिफिकेट से सम्मानित किया

इंदौर -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन हमें लोककल्याण का मार्ग दिखाता है। लोकमाता के पद चिन्हों पर चलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम जनसेवा के नए कदम बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता ने ही देश के विमानन क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है। प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज समाज के हर तबके के लिए हवाई यात्रा संभव हुई है। अब हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई जहाज की यात्रा करने में समर्थ्य हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में हवाई सेवाओं का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है वह अकल्पनीय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में लोकमाता अहिल्याबाई इन्टरनेशनल एयरपोर्ट में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का लोकार्पण कर इन्दौरवासियों सहित पूरे मालवांचल को अत्याधुनिक टर्मिनल की सौगात दी। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधाओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे हवाई यात्रा और भी अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगी। यह नया टर्मिनल इन्दौर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती के साथ प्रतिस्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एयर एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत भी की गई है, इससे गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को त्वरित उपचार के लिए हायर सेंटर पहुंचाया जा रहा हैं। इंदौर शहर की बेहतरीन हवाई सुविधाओं को अमेरिका क्वॉलिटी काउंसिल ने क्वॉलिटी सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कांउसिल की ओर से दिया गया क्वालिटी सार्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन इन्दौर एयरपोर्ट के पदाधिकारियों को सौंपकर बधाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू वर्चुअली जुड़े़।

नये टर्मिनल में मिलेंगी यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस नए टर्मिनल में यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इंदौर पुनर्संरचना परियोजना के तहत करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से हुए विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों से एवं पुरानी टर्मिनल इमारत के नवीनीकरण के बाद अब यह नया टर्मिनल प्रति घंटे लगभग 400 यात्रियों को संभालने में सक्षम हो गया है। इसमें 14 चेक-इन काउंटर्स बनाए गए हैं और लगभग 300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था भी यहां की गई है। करीब 6000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बने इस टर्मिनल की वार्षिक यात्री क्षमता 15 लाख (1.5 MMPA) है। यहां पर 18 उड़ानों का संचालन, 150 चारपहिया वाहनों की पार्किंग एवं वीआईपी रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्दौर में यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए हवाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस नए टर्मिनल में एक बहुत बड़ा वेटिंग एरिया विकसित किया गया है, जिससे पीक आवर्स में भी बेहतर तरीके से भीड़ प्रबंधन किया जा सकेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां “उड़ान यात्री कैफे” की शुरुआत भी की जा रही है। इसमें यात्रियों को 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में नाश्ता मिलेगा।

प्रदेश में हर 150 किमी पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट विकसित करने का है सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 8 एयरपोर्ट, 20 हवाई पट्टियां और 220 हेलीपैड्स मौजूद हैं। बीते दो साल में ही प्रदेश में रीवा, सतना और दतिया में नए एयरपोर्ट का सफल संचालन हमने शुरु किया है। उज्जैन और शिवपुरी में भी नया एयरपोर्ट बनाने की तैयारी कर ली है। इससे प्रदेश में कुल 10 एयरपोर्ट्स हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट, हर 75 किलोमीटर पर एक एयरस्ट्रिप और हर 45 किलोमीटर पर एक हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध हो। इस दिशा में हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आवागमन के तीनों क्षेत्रों में हो रहे अभूतपूर्व विस्तार कार्य मध्यप्रदेश को दिन-ब-दिन विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जा रहे हैं। रेल और विमानन सेवाओं में बढ़ते कदमों के साथ ही रोड कनेक्टिविटी के लिए केन्द्र से मिले विशाल पैकेज तथा एक्सप्रेस-वेज़ के निर्माण से हमारा मध्यप्रदेश अब देश का लॉजिस्टिक हब बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पहुँचे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के घर

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पहुँचे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के घर

सज्जन सिंह वर्मा की स्वर्गीय धर्मपत्नी को दी श्रद्धांजलि, शोकाकुल परिवार से की भेंट
इंदौर – मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के निवास पर पहुंचकर उनकी धर्मपत्नी स्व. सुभद्रा वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने वर्मा एवं शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने इस दुख की घड़ी में परिवार को संबल प्रदान करने की कामना भी की।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, राकेश शुक्ला सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों और स्टार्टअप से किया संवाद

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मुख्यमंत्री ने विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों और स्टार्टअप से किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। आज मध्यप्रदेश का युवा अपनी सोच को आकार देकर नए-नए इनोवेशन कर आईटी तकनीकी के माध्यम से स्टार्टअप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश स्टार्टअप एवं इनोवेशन को अपनाते हुए उद्यमिता विकास का हब बन जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आज दुनिया तेजी से बदल रही है। वर्तमान समय में इंसान को उसके ज्ञान से ही मापा जाता है। उन्होंने कहा कि युवा नवीन तकनीकी को अपनाएं और स्टार्टअप करें एवं दूसरों को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में प्रदेश की पहली नॉलेज और एआई सिटी बन रही है। उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। नवाचार और विज्ञान के माध्यम से अनेक कार्य हो रहे हैं। लोग कभी जमीन और प्रापर्टी को अपना सब कुछ समझते थे। अब तो ज्ञान ही सबसे बड़ा खजाना है। ज्ञान होने से मनुष्य अपने आप धनवान हो जाता है। नॉलेज के बलबूते पर उन्नति के मार्ग पर तेजी से जा सकते हैं। सत्यवादी मार्ग पर बढ़ने का यही समय है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में भोपाल के अलावा इंदौर और उज्जैन क्षेत्र मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित होने वाले हैं। हमारे सभी संसाधन भविष्य की दृष्टि से विकसित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश को इनोवेशन हब बनाकर प्रदेश की भूमिका को सशक्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बन रहा है। मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट के माध्यम से इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर भारत की स्टार्टअप क्रान्ति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के युवा एआई पर आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप, हेल्थटेक, स्किलटेक, ग्रीन इनोवेशन और डिजिटल सॉल्यूशन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्टार्टअप हब बन रहे हैं।

लांचपैड सेंटर का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लॉन्चपेड इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान युवाओं द्वारा अपनी सोच को नवीन तकनीकी से आकर देकर निर्मित की गई अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष इस सेंटर का भूमि-पूजन किया था और आज उसके लोकार्पण अवसर पर युवाओं की आधुनिक सोच एवं आइडियाज को देखकर अति प्रसन्नता हो रही है।

स्टार्टअप वाले युवाओं से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने आइडिया से स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा उद्यमियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने युवा उद्यमियों से जाना की वे किस क्षेत्र में कार्य कर रहे है। युवाओं के कार्यों के बारे में जानकर उनका हौंसला बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी कार्य को करने की अगर हमारी मंशा सही है तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलती है।

भारतीय औद्योगिक प्रबंध संस्थान इंदौर के निदेशक सुभाष एस जोशी ने बताया कि “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से की चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से चर्चा भी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी उद्यमियों से कहा कि अपनी कंपनियों में युवाओं को काम करने का मौका दें एवं उन्हें अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। हमारे देश में युवाओं के पास एक नई एवं आधुनिक सोच है हमारा देश चौथी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर कर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट,विधायक गोलू शुक्ला, मती मालिनी गौड़, राजेश मेंदोला, मनोज पटेल, अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पवन सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लाँचपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल है। इस केंद्र की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है।

“लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल
इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लगभग 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक केंद्र में 5 हजार वर्ग फुट का को-वर्किंग एवं इन्क्यूबेशन स्पेस और 5 हजार वर्ग फुट की उन्नत प्रयोगशाला अवसंरचना विकसित की गई है। केंद्र में स्थापित इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग लैब के माध्यम से उत्पादों की प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और सत्यापन की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह केंद्र विचार से लेकर व्यावसायीकरण तक संपूर्ण नवाचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान करेगा। साथ ही एआई,एमएल,इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थकेयर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, एमएसएमई और नवाचारकर्ताओं को आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा।

लगभग 10 करोड़ रुपये के अवसंरचना निवेश और 20 करोड़ रुपये के स्टार्टअप समर्थन प्रावधान के साथ यह केंद्र आगामी 7 वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को विकसित करने और 200 से 300 रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य लेकर कार्य करेगा।

यह केंद्र डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करने, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश की क्षमताओं को मजबूत करने और उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा।

भजन सम्राट Gulshan Kumar पर बनेगी बायोपिक, बेटे भूषण ने दे दिया बड़ा हिंट

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भजन सम्राट Gulshan Kumar पर बनेगी बायोपिक, बेटे भूषण ने दे दिया बड़ा हिंट
भजन सम्राट गुलशन कुमार को भला कौन नहीं जानता। 90 के दशक अपने भजनों से फैंस के दिलों को सुकून पहुंचाने वाले सिंगर के तौर पर गुलशन हर किसी का दिल जीता था। इसके अलावा बतौर निर्माता अपनी प्रोडक्शन कंपनी टी-सीरीज के बैनर तले उन्होंने कई मूवीज और म्यूजिक वीडियोज को भी बनाया था।

लंबे समय से गुलशन कुमार की बायोपिक को लेकर सिनेमा जगत में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म है। इस बीच अब उनके बेटे और टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार ने इस मामले पर लेटेस्ट अपडेट दिया है।

पिता की बायोपिक पर बोले भूषण
जब कहानी से संतुष्टि मिले, तभी उस पर फिल्म बननी चाहिए। यह मानना है निर्माता भूषण कुमार का, यही कारण भी है कि उनके पिता व टी सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की बायोपिक को बनने में समय लग रहा है।

उनकी (गुलशन कुमार) बायोपिक मुझे बनानी है, लेकिन फिल्म के लेखन को बेहतरीन करने का प्रयास कर रहा हूं। इसका लेखन पूरा होने पर, जब मेरी मां कहानी सुनकर संतुष्ट हो जाएंगी, फिर वह बायोपिक बनाना शुरू करेंगे।

उनकी बायोपिक मैं अपनी कंपनी के फायदे के लिए नहीं बना रहा हूं, बल्कि इसलिए बना रहा हूं, क्योंकि अपने पापा के लिए मेरी श्रद्धा है। उनकी कहानी दुनिया को भले ही पता है, लेकिन फिर भी जिस तरह से उन्होंने इतनी बड़ी कंपनी को खड़ा किया है, उसके पीछे की कहानी को बताना है।

मालूम हो कि 29 साल पहले गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी। मुंबई के अंधेरी पश्चिम में जुहू इलाके में एक मंदिर के बाहर तीन हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर 12 अगस्त 1997 को उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। जिसकी वजह से सिनेमा जगत का एक चमकता हुआ सितारा हमेशा के लिए ओझल हो गया।

आशिकी 3 पर आया अपडेट
आगे अपनी फिल्म आशिकी 3 को लेकर भूषण ने कहा- उस फिल्म का शीर्षक यह नहीं है। फिलहाल, फिल्म अनटाइटल्ड है। उसकी शूटिंग नगर में चल रही है। भूषण कुमार ने यह भी बताया कि फिल्मी गानों से दूरी बना चुके गायक अरिजीत सिंह का गाना भी इसमें होगा। उनके इस फैसले को लेकर भूषण ने आगे कहा कि ऐसे महान गायक का ब्रेक लेना सही नहीं होता है।

हनुमान जयंती की रात इस विशेष विधि से करें पूजन, दूर होंगे सभी कष्ट

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हनुमान जयंती की रात इस विशेष विधि से करें पूजन, दूर होंगे सभी कष्ट
हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का दिन संकटों से मुक्ति पाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। बजरंगबली को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के जीवन से सभी तरह की बाधा, भय और दरिद्रता को हर लेते हैं। अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं या भारी कर्ज से दबे हैं, तो हनुमान जयंती की रात कुछ गुप्त उपाय करें, जो बेहद असरदार हैं।

हनुमान जयंती के गुप्त उपाय
पीपल के 11 पत्तों का अचूक टोटका
हनुमान जयंती की रात को पीपल के 11 साफ पत्ते लें। इन पत्तों पर कुमकुम या अष्टगंध से ‘ राम’ लिखें। अब इन पत्तों की एक माला बनाएं और चुपचाप हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें पहना दें। इस उपाय को करने से अटके हुए धन की प्राप्ति होगी और कर्ज समाप्त होगा।

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए इस रात ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ का पाठ करना रामबाण उपाय माना गया है। अगर हो पाए, तो हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर इसका 11 बार पाठ करें। यह पाठ मंगल दोष को शांत करता है और व्यक्ति को कर्ज से बाहर निकालता है।

सिंदूर और चोला चढ़ाना
हनुमान जी को सिंदूर बेहद प्रिय है। कर्ज से परेशान व्यक्ति को इस रात हनुमान जी को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर चढ़ाना चाहिए। चोला चढ़ाते समय अपनी समस्या मन ही मन बजरंगबली के सामने बोलें। ऐसी मान्यता है कि इससे मंगल ग्रह मजबूत होता है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।

नारियल का गुप्त उपाय
एक जटा वाला नारियल लें और उस पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। इस नारियल को अपने सिर से सात बार वारकर हनुमान जी के चरणों में अर्पित कर दें। इसके बाद ‘ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा’ मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलेगी।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पूजा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें।
उपाय करते समय किसी से इसकी चर्चा न करें।
हनुमान जयंती के दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।