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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर फिर किया अटैक

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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर फिर किया अटैक
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बॉर्डर पर पांच जगहों पर झड़प की खबरें सामने आई है. पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार (24 फरवरी 2026) शाम 6:43 बजे (भारतीय समयानुसार) उरघा बॉर्डर पर स्थित अफगानिस्तान की पोस्ट को आर्टिलरी से निशाना बनाया. इसके बाद उराघा बॉर्डर, जका खेल, वरघा, शाहकोट और लंदी कोटल इलाको में झड़प शुरू हो हुई.

अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की भारत ने निंदा की
पाकिस्तान की सेना ने रविवार की सुबह अफगानिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में एयरस्ट्राइक किया. काबुल ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन में रिहायशी जगहों पर हमला हुआ. वहीं पाकिस्तान ने कहा कि हमले अफगानिस्तान के आतंकी समूहों पर किए गए थे, जिन्हें वह पाक के अंदर हाल ही में हुए कई सुसाइड हमलों के लिए जिम्मेदार मानता है. अफगानिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमले की भारत ने निंदा की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत रमजान के पवित्र महीने के दौरान अफगान धरती पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिकों की मौत हुई है. यह पाकिस्तान की ओर से अपनी आंतरिक विफलताओं का दोष भारत पर डालने का एक और प्रयास है. भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के प्रति अपने समर्थन को दोहराता है.’

पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर आरोप
पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह आतंकवादियों को हमलों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल करने से रोकने में नाकाम रहा है. इसके कारण पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच संबंध बिगड़ गए हैं. पिछले साल अक्टूबर में, दोनों पक्षों के बीच संक्षिप्त रूप से सशस्त्र संघर्ष हुआ था. पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इसमें 23 पाकिस्तानी सैनिक और 200 से अधिक अफगान तालिबान सैनिक मारे गए थे.

पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान ने आसिम मुनीर की सेना को कार्रवाई की चेतावनी दी. अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हमारे आम लोगों पर बमबारी की, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों लोग मारे गए और घायल हो गए.

टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह टूर्नामेंट को बीच में छोड़ घर लौटे

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टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह टूर्नामेंट को बीच में छोड़ घर लौटे
2026 टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल की राह मुश्किल हो गई है. इस बीच भारतीय टीम को एक बड़ा झटका भी लगा है. टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह टूर्नामेंट को बीच में छोड़ घर लौट गए हैं. मंगलवार को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में टीम इंडिया का प्रैक्टिस सेशन था, लेकिन इसमें रिंकू सिंह ने हिस्सा नहीं लिया. उनके अलावा बाकी खिलाड़ी अभ्यास करते नजर आए.

रिपोर्ट में बताया गया है कि रिंकू सिंह के पिता की तबियत खराब हो गई है. उनकी हालत गंभीर है. इसी कारण रिंकू सिंह को अचानक घर लौटना पड़ा है. 28 साल के रिंकू सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं. रिंकब वापस कब लौटेगें और कब टीम इंडिया से दोबारा जुड़ेंगे, इसे लेकर अभी कोई अपडेट सामने नहीं आया है.

26 फरवरी को भारत का जिम्बाब्वे से है मैच
2026 टी20 विश्व कप में भारत का अगला मैच जिम्बाब्वे से है. भले ही टीम इंडिया का मैच जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम से है, लेकिन भारत के लिए यह मुकाबला काफी अहम है, क्योंकि भारतीय टीम को यह मैच बड़े अंतर से जीतना है. वैसे, जिम्बाब्वे इस टूर्नामेंट में काफी शानदार खेली है. वो दो उलटफेर भी कर चुकी है. जिम्बाब्वे ने इस विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हराया है.

रिंकू सिंह की जगह अक्षर पटेल को मिल सकता है मौका
भारत और जिम्बाब्वे का मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाना है. यहां की पिच स्पिनर्स के लिए अनुकूल रहती है. ऐसे में अगर रिंकू सिंह उपलब्ध नहीं होते हैं तो फिर उनकी जगह अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सकता है. अक्षर के आने से बैटिंग कमजोर भी नहीं होगी और बॉलिंग में एक विकल्प और बढ़ जाएगा. अक्षर टूर्नामेंट में शुरुआती मैच खेले थे, लेकिन फिर उनकी जगह वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया था.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को बताया ‘संकल्प से सिद्धि’ का रोडमैप

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को बताया ‘संकल्प से सिद्धि’ का रोडमैप
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास, अंत्योदय और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को साकार करने वाला बजट है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का पहला बजट “ज्ञान” और दूसरा बजट “गति” की थीम पर आधारित था, जबकि इस वर्ष का बजट “संकल्प” की भावना को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस बजट में समावेशी विकास, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, निवेश संवर्धन, कुशल मानव संसाधन निर्माण, लाइवलीहुड, अंत्योदय तथा “पॉलिसी से परिणाम” तक की स्पष्ट रणनीति को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार मिशन मोड में कार्य करने के लिए पांच मुख्यमंत्री मिशन प्रारंभ कर रही है, जिनमें मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन, मुख्यमंत्री एआई मिशन, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन, मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन तथा मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन शामिल हैं। इन मिशनों के माध्यम से प्रदेश के विकास को नई दिशा, नई धार और नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूल शिक्षा के लिए कुल बजट का 13.5 प्रतिशत प्रावधान किया गया है, जो सर्वाधिक है। बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा हेतु भी बजट में प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 23 नवीन औद्योगिक पार्कों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना में 200 करोड़ रुपए तथा भूमि विकास बैंक के लिए भी 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए 13 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के अंतर की राशि का भुगतान एकमुश्त करने की व्यवस्था जारी रहेगी और इसके लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा क्षेत्र का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन क्षेत्रों में खाद्य, कृषि और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही बकरी पालन, सूअर पालन और मधुमक्खी पालन जैसे गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज निर्माण के लिए 2000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिससे बस्तर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी उन्मूलन में बस्तर फाइटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए बस्तर फाइटर्स में 1500 नई भर्तियों का प्रावधान किया गया है। पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा एवं दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज संचालन, जगदलपुर-अंबिकापुर हवाई सेवाओं का विस्तार, अंदरूनी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री बस सेवा तथा बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक्स के आयोजन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को तेज करने हेतु व्यापम की दक्षता बढ़ाने के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही युवाओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना प्रारंभ की जाएगी तथा लखपति दीदियों के भ्रमण कार्यक्रम के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस बजट को प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि यह बजट प्रदेश को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड के फर्जी चेक से 10 करोड़ की ठगी का प्रयास, आरोपी को 3-3 साल की सजा

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दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड के फर्जी चेक से 10 करोड़ की ठगी का प्रयास, आरोपी को 3-3 साल की सजा
भोपाल, 24 फरवरी 2026।संभागीय जनसंपर्क अधिकारी भोपाल मनोज त्रिपाठी के अनुसार माननीय न्यायालय अतुल सक्सेना, 23वें अपर सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा फर्जी चेक के माध्यम से राशि आहरण करने का प्रयास करने वाले आरोपी शौकीन्द्र कुमार पिता धर्मपाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है।

न्यायालय ने आरोपी को धारा 420 सहपठित धारा 511 भादवि के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 474 भादवि के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एसटीएफ भोपाल आकिल खान ने पैरवी की।

घटना का विवरण
प्रकरण के अनुसार पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल को कंपनी के अध्यक्ष भारत जी द्वारा लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी द्वारा पूर्व में जारी चेक क्रमांक 492400 राशि 3,000 रुपये, जो कर्मचारी अंकुर कुमार को दिया गया था, उसकी क्लोनिंग कर अज्ञात व्यक्ति द्वारा 10 करोड़ रुपये का फर्जी चेक तैयार किया गया।

यह फर्जी चेक 27 फरवरी 2020 को देव कंस्ट्रक्शन के नाम से केनरा बैंक, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में प्रस्तुत किया गया। क्लियरिंग शाखा द्वारा जांच में पाया गया कि उक्त क्रमांक का मूल चेक पहले ही आहरित हो चुका है। इसके बाद बैंक ने भुगतान पर रोक लगाते हुए संबंधित शाखा को सूचना दी।

सूचना के आधार पर पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल में अपराध क्रमांक 144/2020 धारा 420, 511 एवं 474 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की गई। संपूर्ण जांच उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों एवं तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी को दोषसिद्ध ठहराते हुए उपरोक्त सजा का निर्णय पारित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी से ग्वालियर के कृषि मंथन में कृषि वैज्ञानिकों को दिया संदेश

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी से ग्वालियर के कृषि मंथन में कृषि वैज्ञानिकों को दिया संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। इनके अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह वर्ष ‘खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक’ की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा। इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से कृषि विश्वविद्यालय परिसर, ग्वालियर में हो रहे ‘कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026’ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। हम जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाले हैं। हम कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि हम खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। ‘कृषि मंथन’ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और कृषि विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे।

वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुप्तप्राय प्रजातियों के 5 गिद्धों को हलाली डेम जल क्षेत्र में किया मुक्त

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुप्तप्राय प्रजातियों के 5 गिद्धों को हलाली डेम जल क्षेत्र में किया मुक्त
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्ध को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम है। मध्यप्रदेश में सभी प्रांतों से अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। पारस्थितिकी तंत्र में इन पक्षियों का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध पक्षी संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर बताया गया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देख-रेख में हुई है। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।

गिद्ध संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण के प्रयास
पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भू-दृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भू-दृश्य स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी।

भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत पदाधिकारी यशवंत मीणा, राकेश शर्मा के अलावा सु राजो मालवीय सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कमलेश बहादुर सिंह ने किया।

संत गाडगे बाबा ने दिया स्वच्छता ही सच्ची पूजा का संदेश : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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संत गाडगे बाबा ने दिया स्वच्छता ही सच्ची पूजा का संदेश : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्र संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती पर आयोजित निर्मल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम सभी ऐसे महान संत का स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन और कर्मों से समाज को स्वच्छता, सेवा और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे बाबा ने “स्वच्छता ही सच्ची पूजा” का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संत गाडगे बाबा की स्वच्छता की प्रेरणा से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान का स्मरण हो गया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की और आज स्वच्छता जनआंदोलन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह संत गाडगे बाबा के विचारों का ही प्रभाव है कि देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी माताओं-बहनों को सम्मान दिलाने का कार्य किया है। देशभर में शौचालयों के निर्माण से उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के उत्थान के लिए अनेक ऐतिहासिक योजनाएँ शुरू की गईं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना जैसी पहलें शामिल हैं। आज सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़े हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश आर्थिक रूप से निरंतर मजबूत हो रहा है और हम सभी विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण भी हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग का सम्मान बढ़े और सभी समुदाय विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त कर नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सफल और संस्कारित जीवन जीने की आधारशिला है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने संत गाडगे बाबा के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उनकी आरती एवं स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान बच्चों और समाज के उत्कृष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम को विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू तथा पद्म पंडित रामलाल बरेठ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संत गाडगे बाबा के वंशज भी मंच पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम में तुलसी कौशिक, घनश्याम चौधरी, श्रीमती रजनी रजक, विनय निर्मलकर सहित छत्तीसगढ़ रजक समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

विधानसभा के सदस्यों के लिए ब्रह्मा भोजन का आयोजन सुंदर और प्रेरणादायी परंपरा : मुख्यमंत्री साय

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विधानसभा के सदस्यों के लिए ब्रह्मा भोजन का आयोजन सुंदर और प्रेरणादायी परंपरा : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नया रायपुर स्थित शांति सरोवर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सम्मानित सदस्यों के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नेह मिलन एवं ब्रह्मा भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री साय ने ब्रह्माकुमारी बहनों के स्नेह, आत्मीयता और सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि बहनों के प्रेम और आदर से हम सब अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़े स्नेह के साथ विधानसभा के सदस्यों के लिए ब्रह्मा भोजन का आयोजन एक सुंदर और प्रेरणादायी परंपरा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक शांति के प्रसार की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शांति सरोवर और शांति शिखर जैसे आध्यात्मिक केंद्रों में सदैव सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। संस्था का 137 से अधिक देशों में विस्तार होना अत्यंत सुखद और प्रेरक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अनेक जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में जनजागृति लाने का कार्य कर रहा है। महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में संस्था की भूमिका उल्लेखनीय है। जनजातीय क्षेत्रों में भी संस्था द्वारा सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों से स्थानीय लोगों को व्यापक लाभ मिला है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ब्रह्माकुमारी बहनों के अतिथि बने और पवित्र ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कैबिनेट मंत्रीगण और सभी विधायकगणों ने भी ब्रह्मा भोजन का आनंद लिया।

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा के सभी सदस्यों को माउंट आबू आने का आग्रह किया, जिसे मुख्यमंत्री साय ने सहर्ष स्वीकार करते हुए वहां आने की सहमति दी। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक धरमलाल कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। ब्रह्माकुमारी परिवार की ओर से मृत्युंजय भाई, आत्म प्रकाश भाई, हेमलता दीदी, लता दीदी, आशा दीदी, सरिता दीदी एवं सविता दीदी सहित अन्य सदस्य कार्यक्रम में सहभागी रहे।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पेश की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट

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वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पेश की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ का बजट पेश करने के एक दिन पूर्व 23 फरवरी को छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट पेश किया। इसमें उन्होंने वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 11.57% बढ़ने का अनुमान जताया है। उन्होंने जीएसडीपी में 6.31 लाख करोड़ रुपए होने की संभावना जताई है।

उन्होंने बताया कि 2024-25 में 10.50% वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें कृषि में 11.76%, उद्योग में 9.91% और सेवा क्षेत्र में 10.08% की बढ़ोतरी हुई। सरकारी योजनाओं का सकारात्मक असर बताते हुए राज्य में प्रति व्यक्ति आय 2025- 26 में 1,79,244 रुपए होने का अनुमान जताया है, जो 2024-25 के 10.07 प्रतिशत से ज्यादा है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र में 12.53%, उद्योग क्षेत्र में 10.26%, सेवा क्षेत्र में 13.15% के साथ स्थिर भावों पर 8.11% वृद्धि का अनुमान जताया है।

भोजशाला मामले में पेश सर्वे रिपोर्ट पर दावे-आपत्तियों के लिए दो सप्ताह का समय

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भोजशाला मामले में पेश सर्वे रिपोर्ट पर दावे-आपत्तियों के लिए दो सप्ताह का समय
मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला मामले में सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। एएसआई के सर्वे रिपोर्ट को लेकर पर कोर्ट ने कहा कि इसकी प्रति सभी पक्षकारों को दी जाए और उस पर दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएं। कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अब अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के समक्ष हुई। कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह में अपनी आपत्तियां, सुझाव पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
एडवोकेट विनय जोशी के अनुसार हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया कि वे एएसआई की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि 2100 पेज की रिपोर्ट में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है। वे उत्साहजनक हैं। सर्वे में पुरानी मूर्तियां, श्लोक लिखे शिलालेख मिले हैं, जो साबित करते हैं कि वहां पहले भोजशाला थी, न कि कमाल मौला मस्जिद।