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होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

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होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय
इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है. 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा. ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं.

होली का त्योहार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा. पहले दिन यानी सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलंडी पर रंग खेला जाएगा. हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है. खास बात यह भी है कि इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा.

होलिका दहन पर भद्रा का समय

2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा. वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा. भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है.

चंद्र ग्रहण के साए में होली

इस बार होली चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी. 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. जयपुर में चंद्र उदय शाम
6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा.
ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा.
चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा. इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा.

होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोषकाल)

फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. इस वर्ष फाल्गुनशुक्ल चतुर्दशी सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05:56 तक है जो कि अगले दिन मंगलवार, 03 मार्च 2026 को सायं 05:07 तक है.

प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा.

इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है.

यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ – मुहूर्तचिन्तामणि
होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

धर्मसिन्धु के प्रमाणानुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा.
निष्कर्ष :- यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए.
2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं. इसलिए प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं.

वेटलैंड संरक्षण पर NGT का कड़ा रुख: केरवा डैम के FTL क्षेत्र में अवैध भराव अस्वीकार्य

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वेटलैंड संरक्षण पर NGT का कड़ा रुख: केरवा डैम के FTL क्षेत्र में अवैध भराव अस्वीकार्य
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने कालीयसोत–केरवा डैम क्षेत्र में अवैध मिट्टी भराव और ठोस अपशिष्ट डंपिंग के गंभीर मामले में अहम आदेश पारित किया है। यह मामला अधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Moto) में लिया गया था, जिसकी पृष्ठभूमि समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टें थीं। हालांकि, अधिकरण ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में रशीद नूर खान मूल शिकायतकर्ता रहे, जिनके द्वारा इस गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन को लगातार प्रशासन और न्यायिक मंच के समक्ष उठाया गया। प्रकरण में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने प्रभावी रूप से पक्ष प्रस्तुत किया।

समाचार रिपोर्टों में यह आरोप सामने आया था कि भोपाल जिले के ग्राम महुआखेड़ा क्षेत्र में स्थित केरवा डैम, जो कालीयसोत प्रणाली का हिस्सा है, उसके फुल टैंक लेवल (FTL) और आसपास के क्षेत्र में 2000 से अधिक डंपरों के माध्यम से कोपरा, मुर्रम एवं काली मिट्टी डाली गई। इस भराव का उद्देश्य जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियाँ करना बताया गया। यह गतिविधियाँ वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रत्यक्ष उल्लंघन के रूप में सामने आईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने एक संयुक्त समिति का गठन किया, जिसमें जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि केरवा डैम के FTL की विधिवत चिन्हांकित सीमा के भीतर भी अवैध भराव मौजूद है। समिति ने पाया कि लगभग 10 फीट तक ऊँचाई में मिट्टी और कोपरा डाला गया है, जिससे जलाशय की भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। समिति ने यह भी दर्ज किया कि कुछ भराव निजी भूमि पर है, किंतु उसका प्रभाव सीधे FTL और जल निकाय पर पड़ रहा है।

अधिकरण के समक्ष यह तर्क भी रखा गया कि संबंधित भूमि निजी स्वामित्व की है और वह FTL क्षेत्र में नहीं आती। इस पर NGT ने स्पष्ट रूप से कहा कि भूमि का निजी होना पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को वैध नहीं बना सकता। यदि किसी गतिविधि से डैम, जलाशय, कैचमेंट क्षेत्र या FTL प्रभावित होता है, तो उस पर रोक लगाना और सुधारात्मक कार्रवाई करना राज्य का दायित्व है। अधिकरण ने माना कि संबंधित भूमि स्वामियों द्वारा 33 मीटर बफर जोन का उल्लंघन किया गया है और उन्हें मिट्टी व कोपरा हटाने के लिए जारी किए गए नोटिस विधिसम्मत हैं।

NGT ने यह भी स्पष्ट किया कि केरवा डैम एक वेटलैंड श्रेणी का जल निकाय है, जिसका संरक्षण अनिवार्य है। यह डैम भोपाल शहर के लिए वैकल्पिक पेयजल स्रोत होने के साथ-साथ हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई से भी जुड़ा है। अधिकरण ने कहा कि कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध भराव और वनस्पति क्षरण से डैम की आयु और जल भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो जनहित के विपरीत है।

अपने आदेश में NGT ने विभिन्न विभागों को स्पष्ट और बाध्यकारी निर्देश जारी किए। जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया गया कि वह केरवा डैम के FTL क्षेत्र की महीने में कम से कम दो बार नियमित निगरानी के लिए एक विशेष पेट्रोलिंग टीम गठित करे और किसी भी अवैध डंपिंग या अतिक्रमण की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे। जिला कलेक्टर, वन विभाग और पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले कैचमेंट क्षेत्रों से अवैध अतिक्रमण हटाएँ और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वृक्षारोपण एवं मृदा संरक्षण के कार्य करें।

इसके अतिरिक्त, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को निर्देशित किया गया कि वह केरवा डैम के आसपास Zone of Influence की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया दो माह की अवधि के भीतर पूर्ण करे, ताकि भविष्य में अनियंत्रित विकास गतिविधियों को रोका जा सके। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह क्षेत्र की निरंतर निगरानी करे और किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन की स्थिति में त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

अधिकरण ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है। राज्य किसी भी परिस्थिति में वित्तीय या प्रशासनिक कठिनाइयों का बहाना बनाकर पर्यावरण संरक्षण के दायित्व से नहीं बच सकता।

इन सभी टिप्पणियों और निर्देशों के साथ राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मूल आवेदन का निस्तारण कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि केरवा डैम और उसके कैचमेंट क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निरंतर बनी रहेंगी। यह आदेश प्रदेश के अन्य जलाशयों और वेटलैंड क्षेत्रों में हो रही अवैध प्लॉटिंग और मिट्टी भराव गतिविधियों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल गांधी की राजनीति या सुनियोजित भ्रम?

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राहुल गांधी की राजनीति या सुनियोजित भ्रम?

यह संयोग नही एक पेटर्न है

राष्ट्र की बात

शीतल रॉय ✍🏻

जब देश की सीमाओं पर गोलियाँ चलती हैं, तब राजधानी में शोर कर रहे शब्दों को भी जिम्मेदार होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि आज सेनाध्यक्ष की एक पुस्तक को लेकर ऐसा राजनीतिक तमाशा खड़ा किया जा रहा है, मानो यह कोई चुनावी घोषणा हो,और इस तमाशे के केंद्र में हैं राहुल गांधी।

सत्ताधारियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि सेनाध्यक्ष की पुस्तक कोई राजनीतिक बयान नहीं होती। वह रणनीति, अनुभव, चेतावनी और इतिहास का दस्तावेज होती है। उसे पढ़ा जाता है, समझा जाता है, पुस्तक पर विमर्श होता है लेकिन उसे सार्वजनिक कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता…

तो सवाल सीधा है…

राहुल गांधी का उद्देश्य क्या है?

क्या वे यह साबित करना चाहते हैं कि भारत का सेनाध्यक्ष कमजोर है वह बिना सरकार के ऑर्डर के कोई निर्णय नही ले सकता…या भारत का प्रधानमंत्री गैर-जिम्मेदार है?

या फिर राहुल गाँधी यह संकेत देना चाहते हैं कि देश की सेना सत्ता के इशारे पर सोचती और लिखती है?

या फिर जब राहुल गांधी को राजनीतिक मुद्दों पर जमीन नहीं मिलती, तब वह राष्ट्र की सुरक्षा को ही बहस का हथियार बना लेते है ? इतिहास गवाह है

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेतृत्व ने सेना और सुरक्षा जैसे विषयों को राजनीति में घसीटा हो। कभी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल, कभी एयर स्ट्राइक पर संदेह, और अब एक पुस्तक को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा पर सार्वजनिक शोर। यह संयोग नहीं, यह एक पैटर्न है।

राहुल गांधी यह भली-भांति जानते हैं कि सेना भारत की सबसे भरोसेमंद संस्था है । जनता सेना पर सवाल पसंद नहीं करती और शायद इसी भरोसे को संशय में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि पुस्तक में कोई संवेदनशील बिंदु है, तो उसके विमर्श के लिए संवैधानिक और गोपनीय प्रक्रियाएँ होती हैं, सार्वजनिक मंच नही।

लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस, बयानबाज़ी और सोशल मीडिया उछाल यह तरीका नहीं,यह एक राजनीतिक स्टंट है।

यहां यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कोई राजनीतिक मंच नहीं होती।

यह न विपक्ष का हथियार है,और न ही सत्ता का ढाल।

सेनाध्यक्ष कोई सरकार का एजेंट नहीं होता, वह राष्ट्र का रक्षक होता है। उसकी कलम भी उतनी ही अनुशासित होती है जितनी उसकी कमान। उसकी नीयत पर सवाल उठाना, वास्तव में सेना की निष्ठा पर हमला है।

देश यह पूछने का हक़ रखता है की…

क्या एक पुस्तक पर पूरे देश के सामने तमाशा किया जा सकता है, जब बात देश की सुरक्षा की हो?

क्या राजनीति इतनी गिर सकती है कि सेना को भी विवाद में घसीटा जाए?

आज जरूरत है स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींचने की।

विपक्ष सरकार की आलोचना करें पूरा अधिकार है।

नीतियों पर हमला करें लोकतंत्र है।

लेकिन सेना को राजनीतिक अखाड़ा बनाना राष्ट्रद्रोही मानसिकता नहीं तो क्या है?

राहुल गांधी को यह समझना होगा कि भले ही सेना की ढाल लेकर राजनीति युद्ध आज जीत सकते हैं,

लेकिन यदि सेना की साख पर आंच आई तो सत्ता नही देश हारेगा।

और यह हार किसी दल की नहीं,भारत की होगी।

‘बॉर्डर 2’ का 14वें दिन भी कहर जारी

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‘बॉर्डर 2’ का 14वें दिन भी कहर जारी
सनी देओल की देशभक्ति से भरी ब्लॉकबस्टर, बॉर्डर 2 अब दूसरे हफ़्ता भी पूरा कर चुकी है. अनुराग सिंह के डायरेक्शन में बनी और सनी देओल के साथ वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ स्टारर ये फिल्म भारत में नेट कलेक्शन में धीरे-धीरे ऐतिहासिक 300 करोड़ के आंकड़े की ओर बढ़ रही है. दिलचस्प बात ये है कि वीक डेज में कलेक्शन में आम गिरावट और नई फ़िल्मों के रिलीज होने के बावजूद, इसने ज़बरदस्त टिकाऊपन दिखाया है, खासकर मास सेंटर्स और उत्तरी सर्किट में.

‘बॉर्डर 2’ फिल्म की 14वें दिन की ऑक्यूपेंसी
‘बॉर्डर 2’ की दूसरे गुरुवार, 5 फरवरी 2026 की मॉर्निंग ऑक्यूपेंसी 5.03 फीसदी दर्ज की जा रही है. ये बुधवार की तुलना में मामूली ही कम ऑक्यूपेंसी है.

मेकर्स के आंकड़ों के मुताबिक ‘बॉर्डर 2’ की 12 दिनों की कमाई
वहीं मेकर्स द्वारा जारी किए गए फिल्म की कमाई के आंकड़े के मुताबिक इसने रिलीज के 13दिनों में 319 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. आंकड़ों के मुताबिक
रिलीज के पहले हफ्ते में ‘बॉर्डर 2’ की कमाई 244.97 करोड़ रही.
इसके बाद 8वें दिन इसने 12.53 करोड़, 9वें दिन 20.17 करोड़, 10वें दिन 24.22 करोड़, 11वें दिन 6.52 करोड़ और 12वें दिन 6.69 करोड़ की कमाई की है.
वहीं 13वें दिन मेकर्स के मुताबिक फिल्म का कलेक्शन 4.88 करोड़ रुपये है.
इसी के साथ फिल्म का भारत में 13 दिनों का नेट कलेक्शन अब 319.98 करोड़ रुपये हो गया है.

भारत से मैच नहीं खेला तो पाकिस्तान हो सकता है कंगाल

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भारत से मैच नहीं खेला तो पाकिस्तान हो सकता है कंगाल
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है. भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मुकाबले से हटने का फैसला अब सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर सीधे पैसों और कानूनी पचड़ों पर पड़ सकता है. ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने पाकिस्तान को साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर वह भारत से मैच नहीं खेलता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

भारत से मैच न खेलना पड़ सकता है भारी
भारत-पाकिस्तान का मैच किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण होता है. इसी मुकाबले के भरोसे ब्रॉडकास्टर्स अरबों रुपये का निवेश करते हैं. बताया जा रहा है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान भारत और पाकिस्तान के मैचों से ब्रॉडकास्टर्स को 8300 करोड़ रुपये कमाई की उम्मीद है. ऐसे में अगर पाकिस्तान पीछे हटता है तो यह सीधे तौर पर ब्रॉडकास्टिंग करार का तोड़ने के बराबर माना जाएगा.

ब्रॉडकास्टर्स कर सकते हैं कानूनी कार्रवाई
सूत्रों की मानें तो आधिकारिक ब्रॉडकास्टर JioStar इस फैसले से नाराज है और वह कानूनी रास्ता अपना सकता है. केवल एक भारत-पाक मैच न होने से ही सैकड़ों करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. ब्रॉडकास्ट डील इसी शर्त पर हुई थी कि दोनों टीमें आमने-सामने खेलेंगी. अगर पाकिस्तान ने मैच नहीं खेला, तो केस सिर्फ PCB पर ही नहीं बल्कि ICC पर भी आ सकता है.

ICC रोक सकता है पाकिस्तान का फंड
ICC के पास इस नुकसान की भरपाई के लिए सख्त कारवाई कर सकता है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान को मिलने वाला सालाना ICC फंड रोका जा सकता है. यह रकम करीब 35 मिलियन डॉलर बताई जा रही है, जो पीसीबी की कुल कमाई का बड़ा हिस्सा है. अगर यह पैसा रुका, तो पाकिस्तान क्रिकेट की आर्थिक हालत और खराब हो सकती है.

सरकार के रुख से बढ़ी मुश्किल
पाकिस्तान सरकार भी इस फैसले पर अड़ी हुई नजर आ रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही साफ कर चुके हैं कि टीम भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी. हालांकि क्रिकेट जानकार मानते हैं कि यह फैसला खेल से ज्यादा राजनीति से जुड़ा हुआ है, जिसका खामियाजा खिलाड़ियों और बोर्ड को भुगतना पड़ सकता है.

पीसीबी की बचाव की कोशिश
अब पीसीबी ‘फोर्स मेज्योर’ जैसे नियमों का सहारा लेने की सोच रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दलील ज्यादा मजबूत नहीं है. पाकिस्तान पहले से ही न्यूट्रल वेन्यू पर खेल रहा है, ऐसे में सुरक्षा या मजबूरी का तर्क कमजोर पड़ता है. माना जा रहा है कि आईसीसी और बाकी बोर्ड इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में नहीं हैं.

रायपुर इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता शुरू, संपादकों व पूर्व पदाधिकारियों संग मैदान में

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रायपुर इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता शुरू, संपादकों व पूर्व पदाधिकारियों संग मैदान में
रायपुर स्थित सुभाष स्टेडियम में आयोजित स्व. कुलदीप निगम स्मृति इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता के अंतर्गत रायपुर प्रेस क्लब खेल मड़ई कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष खेल प्रेमी संजय श्रीवास्तव जी ने सहभागिता की उन्होंने कहा कि खेल, पत्रकारिता और आपसी सौहार्द का यह संगम खेल भावना, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है आयोजन से जुड़े सभी पत्रकार साथियों एवं खिलाड़ियों को सफल प्रतियोगिता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

14 फरवरी, प्रकृति और प्रेम का बाज़ारीकरण

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14 फरवरी, प्रकृति और प्रेम का बाज़ारीकरण
राष्ट्र की बात
शीतल रॉय ✍🏻

यूं तो फरवरी आते ही प्रकृति करवट लेती है। ऋतुएँ संकेत देने लगती हैं कि सृजन का समय निकट है। धरती के गर्भ में नई ऊर्जा जागती है, वृक्षों की नसों में रस दौड़ता है और जीव-जगत अपने स्वाभाविक आकर्षण की ओर बढ़ता है। क्योकि यह परिवर्तन दैविक है, शाश्वत है—और किसी कैलेंडर का मोहताज नहीं।
लेकिन विडंबना यह है कि जिस समय प्रकृति प्रेम को मौन और मर्यादा में रचती है, उसी समय को आधुनिक समाज ने प्रेम को 14 फ़रवरी की एक तिथि में क़ैद कर दिया है। वैलेन्टाइन डे—जो कभी भावना था—आज बाज़ार की सबसे सफल रणनीति बन चुका है। लाल गुलाब, कृत्रिम मुस्कान और क्षणिक आकर्षण को प्रेम का पर्याय बना दिया गया है।
प्रकृति का प्रेम संयम सिखाता है, जबकि बाज़ार का प्रेम उपभोग।

आज की युवा पीढ़ी, जो ऊर्जा और संभावनाओं से भरी है, इस द्वंद्व की सबसे बड़ी शिकार बनती जा रही है। हार्मोनल बदलाव, मौसम की नरमी और भावनात्मक अस्थिरता इन सबका लाभ उठाकर एक कृत्रिम प्रेम संस्कृति गढ़ी जा रही है, जहाँ संबंध गहराई से नहीं, प्रदर्शन से मापे जाते हैं।
दैविक प्रकृति तो प्रेम को साधना मानती है। हमारे शास्त्रों में प्रेम तो तप, त्याग और उत्तरदायित्व से जुड़ा है। शिव-शक्ति, राधा-कृष्ण या सीता-राम—कहीं भी प्रेम उपभोग नहीं, समर्पण है। वहीं आधुनिक वैलेन्टाइन संस्कृति प्रेम को क्षणिक उत्तेजना में बदल देती है, जहाँ न स्थायित्व है, न मर्यादा।
यही कारण है कि फरवरी आते-आते रिश्ते पनपते कम, टूटते अधिक हैं। जो संबंध आत्मिक नहीं होते, वे इस मौसम की सच्चाई सह नहीं पाते। प्रकृति आईना दिखाती है और बाज़ार उस आईने पर रंगीन पर्दा डाल देता है।

यह लेख आज की युवा पीढ़ी को काल्पनिक लग सकता है लेकिन एक पत्रकार- लेखक होने के नाते मेरा दायित्व है कि प्रेम के इस बाज़ारी चेहरे पर प्रश्न खड़े करू। क्या युवा पीढ़ी को केवल उपभोक्ता बनाना ही विकास है? क्या भावनाओं को भी सेल और ऑफ़र में तौला जाएगा?
संपादकीय दृष्टि से यह समय आत्ममंथन का है। युवाओं को यह समझना होगा कि प्रेम प्रकृति से सीखने की प्रक्रिया है, न कि विज्ञापनों से। प्रेम समय मांगता है, धैर्य मांगता है और उत्तरदायित्व मांगता है।

फरवरी हमें यह संदेश देती है कि जो दैविक है, वह शोर नहीं करता। वह चुपचाप जीवन रचता है।
और जो कृत्रिम है, वह एक दिन के उत्सव में खत्म हो जाता है। वक्त है बदलाव का अब युवा पीढ़ी को तय करना है की किताबों के पन्नो में दबकर सूखने वाले उन्हें गुलाब चाहिए या मन के आंगन में खिलने वालीं गुलाब की जड़ें।

क्या ट्रेड डील के बाद एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं लगा सकता अमेरिका

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क्या ट्रेड डील के बाद एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं लगा सकता अमेरिका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत से आने वाले कई उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इसे भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि ऊंचे टैरिफ के चलते भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो रहे थे. ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत ने कुछ अहम शर्तों पर सहमति जताई है, जिनमें टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर घटाना और अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीद शामिल है, लेकिन साथ ही कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं. क्या यह राहत स्थायी है या अस्थायी? क्या डील के बाद भी अमेरिका एक्स्ट्रा टैरिफ लगा सकता है? और भारत ने बदले में क्या-क्या वादे किए हैं?

भारत की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर टैरिफ घटाने की खबर का स्वागत किया और इसे भारत के लिए अच्छी खबर बताया. उन्होंने कहा कि इससे “मेड इन इंडिया” उत्पादों को फायदा होगा. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि किन शर्तों को स्वीकार किया गया है और किन मुद्दों पर बातचीत जारी है. यानी अमेरिकी दावों और भारतीय पुष्टि के बीच अभी भी कुछ बातें अधूरी हैं.

टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर का मतलब क्या है?
टैरिफ बैरियर यानी आयात पर लगाया जाने वाला सीधा टैक्स, जिससे विदेशी सामान महंगा हो जाता है. वहीं नॉन-टैरिफ बैरियर नियमों, लाइसेंस, मानकों, कोटा और कागजी प्रक्रियाओं के जरिए व्यापार को सीमित करते हैं. ये दिखने में टैक्स नहीं होते, लेकिन व्यापार पर इनका असर उतना ही गहरा होता है. ट्रंप का कहना है कि भारत इन दोनों तरह की रुकावटों को लगभग शून्य करने पर राजी हुआ है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

क्या ट्रेड डील के बाद अमेरिका एक्स्ट्रा टैरिफ लगा सकता है?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के मुताबिक, अगर कोई ट्रेड डील औपचारिक रूप से लागू हो जाती है, तो एक तरफा टैरिफ बढ़ाना आसान नहीं होता है. फिर भी अमेरिका जैसे देश के पास कुछ कानूनी विकल्प होते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा, घरेलू उद्योगों को नुकसान या अनुचित व्यापार व्यवहार का हवाला देकर वह विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है. ऐसे मामलों में अक्सर विवाद विश्व व्यापार संगठन यानी WTO तक पहुंचता है.

डील कितनी पक्की और कितनी लचीली?
रिपोर्ट्स बताती हैं कि अभी यह डील इन-प्रिंसिपल समझ के स्तर पर ज्यादा दिखती है. यानी दोनों देश टैरिफ घटाने और व्यापार बढ़ाने पर सहमत हैं, लेकिन किन उत्पादों पर, कितने समय के लिए और किन शर्तों के साथ- यह सब पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. जब तक लिखित समझौता सार्वजनिक नहीं होता, तब तक इसमें बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है.

भारत के लिए फायदे और चुनौतियां
अगर टैरिफ वाकई घटते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है. दूसरी ओर, अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात बढ़ने से घरेलू उद्योगों पर दबाव भी आ सकता है. ऐसे में भारत के लिए संतुलन बनाना जरूरी होगा, ताकि व्यापार बढ़े लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर न पड़े.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये 3 उपाय, मिलेगी सफलता

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये 3 उपाय, मिलेगी सफलता
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है जो अपने भक्तों की सभी बाधाएं दूर कर देते हैं. हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इन चतुर्थियों में फाल्गुन मास की चतुर्थी का विशेष महत्व है. इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन गणेश का द्विजप्रिय स्वरूप पूजा से मन की शांति, उत्तम स्वास्थ और धन की प्राप्ति होती है.

2026 की तिथि और शुभ संयोग
साल 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी, गुरुवार को है. गुरुवार स्वयं भगवान विष्णु का दिन है और चतुर्थी गणेश जी की, यही कारण है कि यह संयोजन बेहद शुभ फलदायी माना जाता है.

द्विजप्रिय संकष्टी क्यों है खास
द्विजप्रिय का अर्थ है वे जो द्विज अर्थात दो बार जन्म लेने वालों को प्रिय होते हैं. गणेश जी का यह रूप चार भुजाओं वाला और शुभ्र वर्ण का है. यह दिवस उन लोगों के लिए वरदान जैसा है जिन्हें शिक्षा, करियर या कर्ज जैसी परेशानियों का सामना करना पड रहा है. परंपरा के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही इस व्रत को पूर्ण माना जाता है.

करें ये प्रभावशाली उपाय
ऋणहर्ता दूर्वा अर्पण
कर्ज से मुक्ति पाने के लिए यह विधि बेहद प्रभावी मानी जाती है. 21 दूर्वा की गांठें लेकर उन्हें कलावा से बुनकर माला बनाएं. इस माला पर हल्दी का तिलक लगाएं और गणेश के हृदय स्थल पर अर्पित करें. अर्पण करते समय 108 बार ‘ओम ऋणहर्ताय नम:’ का जाप करें. इस उपाय से अटके धन की वापसी और पुराने कर्ज से छुटकारा मिलता है.
गुड और गाय के घी का भोग

गरीबी दूर करने के लिए यह उपाय शुभ फलदायी कहा गया है. एक छोटी मिट्टी की कुल्हड में गुड की डली और शुद्ध गाय का घी भरें. इसे गणेश जी के समक्ष स्थापित करें. पूजा के बाद कुछ प्रसाद गाय को खिलाएं और बाकी अपने परिवार में बाटें. गुड मंगल का प्रतीक है और घी लक्ष्मी माता को प्रिय माना जाता है. यह सकारात्मक ऊर्जा बढाने में सहायक है.

शमी पत्र और अक्षत का प्रयोग
करियर में सफलता के लिए यह उपाय उपयोगी है. संकष्टी चतुर्थी की शाम को पांच शमी पत्र गणेश जी को चढाएं. प्रत्येक पत्ते के साथ साबुत अक्षत रखें. पूजा के उपरांत इन अक्षत के दानों को अपने पर्स या तिजोरी में सुरक्षित रख लें. शमी पत्र शनि से संबंधित दोषों को शांत करते हैं और करियर में बाधाएं कम होती हैं.

दृश्यम 3 के बाद नहीं आएगा चौथा पार्ट – मोहनलाल

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दृश्यम 3 के बाद नहीं आएगा चौथा पार्ट – मोहनलाल
मोहनलाल की पॉपुलर फिल्म दृश्यम का तीसरा पार्ट जल्दी ही सिनेमाघरों में आने वाला है. इस साल अप्रैल 2026 में रिलीज होने वाली इस फिल्म ने पहले दो पार्ट्स की तरह ही लोगों की दिलों में जगह बनाने की तैयारी कर ली है. बॉक्स ऑफिस पर पहले दोनों पार्ट्स ने कमाल की कमाई की है और अब तीसरे पार्ट को लेकर फैंस में काफी उत्सुकता है. डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने साफ कर दिया कि इसी पार्ट के साथ इस फ्रेंचाइजी का सफर खत्म होगा.

अब और पार्ट नहीं आएगा
सिली मौंक मलयालम से बातचीत में जीतू जोसेफ ने कहा है, ‘इस फ्रेंचाइजी का अब कोई और पार्ट नहीं आएगा. मैंने कभी सपने में भी इसकी योजना नहीं बनाई थी. लोग मुझसे इसे खत्म करने के लिए कह रहे हैं इसलिए मैं इसे अब खत्म कर रहा हूं.’

तीसरा पार्ट अप्रैल के पहले हफ्ते में सिनेमाघरों में
जीतू ने बताया, ‘मचअवेटेड तीसरा पार्ट अप्रैल के पहले हफ्ते में रिलीज होगा.’ उन्होंने फैंस से रिक्वेस्ट की कि वे अपनी उम्मीदों का बोझ लेकर फिल्म देखने न जाएं. उन्होंने कहा, ‘फिल्म का मजा बिना किसी प्रेशर के ही लें तभी असली अनुभव मिलेगा.’

फिल्म ने हमेशा दी है बड़ी उम्मीदें
जीतू ने आगे कहा, ‘दृश्यम फ्रेंचाइजी ने सालों से लोगों के दिलों में जगह बनाई है. लोग हर बार नई उम्मीद लेकर आते हैं. इसलिए इस फिल्म को देखें जरूर लेकिन बिना किसी भारी उम्मीद के. जल्द ही इसकी आधिकारिक रिलीज डेट भी घोषित होगी.’

मलयालम और हिंदी रिलीज
खास बात ये है कि मलयालम दृश्यम 3 और इसका हिंदी रीमेक दोनों इस साल रिलीज होंगे. दोनों के बीच लगभग 6 महीने का गैप रहेगा. मोहनलाल की फिल्म अप्रैल में आएगी जबकि अजय देवगन की हिंदी फिल्म अक्टूबर में रिलीज होगी. कहानी वहीं से शुरू होगी जहां दूसरे पार्ट में खत्म हुई थी. फैंस हिंदी और मलयालम दोनों फिल्मों के लिए पहले से ही एक्साइटेड हैं और उम्मीद है कि ये दोनों पार्ट्स बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाएंगे.