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टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी

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टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लिए तृणमूल कांग्रेस ने 291 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 3 सीट पर अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम दार्जिलिंग में चुनाव लड़ेगी.

सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव लडे़ंगी. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी की ओर से ‘अच्छा खेल’ खेल रहा है, उन्हें सीधे बीजेपी के लिए प्रचार करना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी 2026 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों में 226 से अधिक सीटें जीतेगी.

नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी
सीएम ममता बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई थीं. इसके बाद वह भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंची थी. इस बार उन्होंने नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. टीएमसी ने नंदीग्राम से आज ही पार्टी में शामिल हुए पवित्रा कार्केई को टिकट दिया है. पवित्रा विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनावों में शुभेंदु अधिकारी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्हें 2021 में टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.

किस पार्टी के लिए टीएमसी ने छोड़ी 3 सीटें
टीएमसी ने मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर सीट से मुस्तफिजुर रहमान को मैदान में उतारा है. इस सीट से हिमायूं कबीर विधायक थे जिन्होंने बाबरी विवाद खड़ा किया था. टीएमसी ने कालिम्पोंग, कर्सियोंग दार्जिलिंग सीट अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम के लिए छोड़ दी है.

तृणमूल कांग्रेस ने चंद्रिमा भट्टाचार्य को दम दम उत्तर सीट से, मदन मित्रा को कमरहाटी सीट से, फिरहाद हकीम को कोलकाता पोर्ट सीट से, कुणाल घोष को बेलेघाटा सीट से, डॉ. शशि पांजा को श्यामपुकुर सीट से, ज्योतिप्रियो मल्लिक को हाबरा सीट से चुनावी मैदान में उतरा है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी के 291 उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं.

ईरान युद्ध पर अमेरिका में ‘बगावत’, US काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट ने दिया इस्तीफा

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ईरान युद्ध पर अमेरिका में ‘बगावत’, US काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट ने दिया इस्तीफा
ईरान के साथ जारी जंग को लेकर अमेरिका के भीतरखाने विरोध के सुर उभरते दिख रहे हैं. यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख जो केंट ने मंगलवार (17 मार्च) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह ईरान के साथ जारी युद्ध को बताया. उन्होंने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं. इससे पहले 16 मार्च को व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार समीरा मुंशी भी इसी के चलते इस्तीफा दे चुकी हैं.

‘युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता’
जो केंट ने कहा, उन्होंने काफी सोच विचार के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध किसी भी तरह से अमेरिकी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है. साथ ही जंग छिड़ने के पीछे इजरायल के दबाव को भी बड़ा कारण बताया. केंट ने कहा, वह किसी भी कीमत पर युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप को लिखा पत्र
यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा. उन्होंने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को लेकर निराशा जताई. उन्होंने कहा, मैं ईरान के साथ जारी युद्ध का समर्थन बिल्कुल भी नहीं कर सकता हूं. ईरान हमारे देश के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं है. केंट ने यह भी कहा कि युद्ध की शुरुआत इजरायल और उसके शक्तिशाली अमेरिकी समर्थकों के दबाव के चलते हुई है. उन्होंने ईरान के साथ जारी जंग को अमेरिकी लोगों के हितों के खिलाफ बताया.

कट्टर समर्थक में थी गिनती
बता दें कि एक समय जो केंट की गिनती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थकों में की जाती थी. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वह ट्रंप और उनकी विदेश नीतियों की खुलकर प्रशंसा करते थे.

समीरा मुंशी भी दे चुकीं इस्तीफा
बता दें इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धार्मिक स्वतंत्रता समिति में सेवा देने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला समीरा मुंशी भी अपने पद से इस्तीफा दे चुकी हैं. उन्होंने भी ईरान के साथ जारी युद्ध को इसकी वजह बताया था. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त और व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं. उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को अवैध बताते हुए तर्क दिया कि यह स्पष्ट संवैधानिक या संसदीय प्राधिकरण के बिना शुरू किया गया.

उन्होंने दावा किया कि आस्थावान लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी जा रही है और उनके जीवन को खतरे में डाला जा रहा है, क्योंकि वे फिलिस्तीन के बारे में अपनी गहरी आस्था रखते हैं और यह सब एक ज़ायोनी राजनीतिक एजेंडा के लिए किया जा रहा है.

‘धुरंधर 2’ 200 करोड़ की ओपनिंग के बावजूद नहीं तोड़ पाएगी ये तीन रिकॉर्ड

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‘धुरंधर 2’ 200 करोड़ की ओपनिंग के बावजूद नहीं तोड़ पाएगी ये तीन रिकॉर्ड
रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है. फिल्म 19 मार्च को रिलीज होगी. इस स्पाई थ्रिलर को लेकर फैंस बहुत एक्साइटेड हैं. फिल्म के पहले दिन 200 करोड़ कमाने की खबरें हैं. हालांकि, अगर फिल्म ने 200 करोड़ की ओपनिंग की तो भी धुरंधर 2 तीन फिल्मों को पछाड़ नहीं पाएगी.

इन फिल्मों से पीछे रह जाएगी धुरंधर 2

धुरंधर 2 पुष्पा 2, बाहुबली 2 और आरआरआर से पीछे रह जाएगी. इन फिल्मों को पछाड़ने के लिए धुरंधर 2 को 200 करोड़ से ज्यादा की कमाई करनी होगी. अगर फिल्म 200 करोड़ (पेड प्रिव्यूज का कलेक्शन मिलाकर) की ओपनिंग करती है तो ये फिल्म चौथी हाईएस्ट ग्रॉसिंग ओपनर होगी. धुरंधर 2 को पेड़ प्रिव्यू बहुत मदद करेंगे. फिल्म के पेड़ प्रिव्यूज से ही 40 करोड़ की कमाई की खबरें हैं.

हाईएस्ट ओपनिंग डे वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस
इस लिस्ट में पहले नंबर पर पुष्पा 2 है. पुष्पा 2 ने 274 करोड़ का कलेक्शन किया था. वहीं दूसरे नंबर पर आरआरआर है. इस फिल्म ने 223 करोड़ की कमाई की थी. बाहुबली 2 ने 214 करोड़ की कमाई की थी.

धुरंधर 2 के बारे में जानें सबकुछ
फिल्म को आदित्य धर ने बनाया है. फिल्म 275 करोड़ के बजट में बनी है. इस फिल्म में रणवीर सिंह लीड रोल में हैं. वो फिल्म में हमजा और जसकीरत सिंह रंगी के रोल में नजर आएंगे. इस फिल्म में संजय दत्त भी अहम रोल निभाएंगे. संजय दत्त चौधरी असलम के किरादर में दिखेंगे. इसके अलावा फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल, आर माधवन जैसे स्टार्स भी दिखेंगे.

धुरंधर ने किया था 1300 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
ये फिल्म दिसंबर 2025 में आई धुरंधर का सीक्वल है. धुरंधर ब्लॉकबस्टर हिट हुई थी. फिल्म ने 1300 करोड़ रुपये की कमाई की थी. इस फिल्म में सबसे ज्यादा चर्चा अक्षय खन्ना की हुई थी. अक्षय खन्ना फिल्म में रहमान डकैत के रोल में थे. उनकी एक्टिंग, उनका स्टाइल जबरदस्त हिट हुआ था. वहीं फिल्म का गाना शरारत भी छा गया था.

शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतारा उन्हीं का ‘चेला’

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शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतारा उन्हीं का ‘चेला’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी चुनावी मैदान में होंगे. बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव से ही ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देने की रणनीति अपनाई है, जिसमें पार्टी सफल भी रही है. टीएमसी ने भी बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ इस बार वहीं रणनीति बनाई है. नंदीग्राम सीट से टीएमसी ने बीजेपी के पूर्व नेता और शुभेंदु अधिकारी के करीबी पबित्र कर को टिकट देकर सियासी हलचल तेज कर दी है.

शुभेंदु अधिकारी के सामने शागिर्द की चुनौती
नंदीग्राम विधानसभा में पबित्र कर ने पिछले विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया था, जिसका नतीजा ये हुआ कि वहां से सीएम ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा. पबित्र कर ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को टीएमसी का दामन थाम लिया. टीएमसी ने कहा कि पबित्र कर ने बीजेपी की जनविरोधी नीतियों से नाराज होकर यह फैसला लिया है. पवित्र कर का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है. वह पहले भी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रह चुके हैं.

शुभेंदु अधिकारी की जीत में निभाई थी अहम जिम्मेदारी
पबित्र कर साल 2018 में बोयाल क्षेत्र के दो गांवों के प्रधान (मुखिया) थे और इलाके में एक मजबूत जनाधार रखते थे. हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के साथ बीजेपी का रुख कर लिया था. उन्हें पिछले विधानसभा में इस क्षेत्र में बीजेपी को बढ़त दिलाने में अहम माना जाता है. साल 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर करीब 1,900 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. इसके बाद 2023 में पबित्र कर की पत्नी ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर बोयाल क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों की प्रमुख का पद संभाला.

पबित्र कर का नंदीग्राम में मजबूत जनाधार
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां दो ब्लॉक हैं, जिनमें से नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है. पवित्र कर इसी ब्लॉक के निवासी हैं और इलाके में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. तृणमूल में रहते हुए भी पवित्र कर की क्षेत्र में अच्छी पकड़ और लोकप्रियता रही है. ऐसे में नंदीग्राम से उन्हें टिकट देना स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. इस सीट पर एक बार फिर बीजेपी और टीमएसी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है.

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम

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कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं।

प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रधानमंत्री से लिया मार्गदर्शन

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प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रधानमंत्री से लिया मार्गदर्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत कर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही राज्य में किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों तथा प्रदेश की प्रगति से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष में 17 विभिन्न विभागों के माध्यम से किसानों के लिए समेकित रूप से कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। प्रदेश में गरीब, युवा, किसान और महिला वर्ग की बेहतरी के लिए राज्य सरकार पूरी लगन से कार्य कर रही है। इन चारों श्रेणी के समग्र विकास के लिए अलग-अलग मिशन बनाकर उन पर प्रभावी अमल किया जा रहा है। राज्य सरकार इनकी बेहतरी के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया।

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में चिकित्सक संगठन एवं मेडिकल छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की और प्रदेश को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट मिलने पर उनका आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार लगातार प्राथमिकता के साथ बेहतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेशवासियों को सहज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, जिसमें लगभग 100 से 150 सीटें थीं। आज प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 14 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 1400 सीटें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, नर्सिंग सहित अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थान भी स्थापित हुए हैं, जिनका लाभ प्रदेश के विद्यार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में मेडिको सिटी की स्थापना की जा रही है, जहां बड़े-बड़े सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट प्रदान किए जाने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर तुलसी कौशिक, डॉ. देवेंद्र कश्यप सहित जूडो और मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज में हुई दुर्घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

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ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज में हुई दुर्घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा केयर आईसीयू में आग लगने की दुर्घटना में हुई जनहानि पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता उनके साथ खड़ी है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

मुख्यमंत्री साय ने महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय को सहने की शक्ति प्रदान करें।

चैत्र नवरात्रि सूर्यास्त के बाद कलश स्थापना क्यों नहीं करनी चाहिए

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चैत्र नवरात्रि सूर्यास्त के बाद कलश स्थापना क्यों नहीं करनी चाहिए
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर कलश स्थापना का विशेष महत्व है, लेकिन अक्सर विद्वान प्रदोषकाल (सूर्यास्त के बाद का समय) में कलश स्थापना करने से मना करते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है और इसकी शुरुआत ‘उदय तिथि’ और सूर्य की उपस्थिति में करना सबसे शुभ माना जाता है। कलश को ब्रह्मांड और देवताओं का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी स्थापना के लिए दिन का प्रकाश और शुभ मुहूर्त का होना अनिवार्य है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों शाम के समय कलश स्थापना करना वर्जित माना गया है।

शास्त्रों में दिन के मुहूर्त का महत्व
हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कोई भी मंगल कार्य या नई शुरुआत ‘अभिजीत मुहूर्त’ या सुबह के समय करना श्रेष्ठ होता है। प्रदोषकाल को मुख्य रूप से भगवान शिव की आराधना और दीपदान के लिए जाना जाता है, लेकिन कलश स्थापना जैसे ‘आवाहन’ के कार्यों के लिए इसे उपयुक्त नहीं माना गया।

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि प्रतिपदा तिथि सूर्यास्त के बाद भी रहती है, तब भी कलश स्थापना अगले दिन के सूर्योदय के बाद ही की जानी चाहिए। यह नियम आपके जीवन में ऊर्जा के सही संचालन और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

क्यों वर्जित है शाम का समय?
प्रदोषकाल का समय दिन और रात का संधि काल होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय तामसिक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं, जबकि कलश स्थापना पूरी तरह से सात्विक और दैवीय कार्य है। शाम के समय स्थापना करने से पूजा का पूर्ण फल मिलने में आशंका रहती है।

कलश स्थापना का उद्देश्य घर में सुख-समृद्धि की बड़ी इच्छाएं पूरी करना होता है, जिसके लिए सूर्य की सकारात्मक किरणों का होना शुभ माना जाता है। पूजा के समय मन की सहजता और एकाग्रता सुबह के शांत वातावरण में जितनी बेहतर होती है, उतनी शाम के शोर-शराबे में नहीं हो पाती।

शुभ संकल्प और मानसिक शांति
सुबह के समय जब आप कलश स्थापित करते हैं और आरती करते हैं, तो पूरे दिन घर में भक्ति का माहौल बना रहता है। इससे न केवल घर के क्लेश कम होते हैं, बल्कि समृद्धि के द्वार भी खुलते हैं। कलश स्थापना के बाद ग्रैटिट्यूड मेडिटेशन करना और मां का आभार व्यक्त करना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा है।

भगवान का धन्यवाद करें कि उन्होंने आपको इस पूजा का अवसर दिया। सही मुहूर्त में किया गया कार्य आपके जीवन के रखरखाव को बेहतर बनाता है और मां दुर्गा की कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है।

बीरभूम में पत्थर की खदान में भूस्खलन, तीन श्रमिकों की मौत

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बीरभूम में पत्थर की खदान में भूस्खलन, तीन श्रमिकों की मौत
बीरभूम में एक पत्थर की खदान में भूस्खलन से तीन श्रमिकों की मौत हो गई है। कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना सोमवार को बीरभूम के मुरारई थाना इलाके के गोपालपुर में हुई।

इससे पहले, पिछले साल सितंबर में बीरभूम के नलहाटी स्थित एक खदान में इसी तरह की दुर्घटना हुई थी, जिसमें पांच श्रमिकों की मौत हो गई थी।

बीरभूम की पत्थर खदान में भूस्खलन
इस दिन खदान में जब यह दुर्घटना घटी, उस समय 12-14 मजदूर काम कर रहे थे। उनमें से लगभग सभी मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों के प्रयासों से कई लोगों को बचाया गया। पुलिस मौके पर पहुंची। घायलों को अस्पताल ले जाया गया।

आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। इस दुर्घटना ने राजनीतिक विवाद को भी जन्म दिया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दुर्घटना में प्रभावित खदान के मालिक बीरभूम जिला परिषद के अधीक्षक सिराजुल इस्लाम हैं।

टीएमसी नेता की गिरफ्तारी की मांग
भाजपा ने खदान के मालिक की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा के पूर्व संगठनात्मक जिला अध्यक्ष ध्रुव साहा ने कहा कि खदान अवैध है। चुनावी आचार संहिता लागू हो चुकी है। हम पुलिस से मांग करते हैं कि आरोपित टीएमसी नेता को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।