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एनएचएआई के नए नियम 2026, 15 फरवरी से टोल टैक्स में बड़े बदलाव

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एनएचएआई के नए नियम 2026, 15 फरवरी से टोल टैक्स में बड़े बदलाव
भारत में यात्रा करने के दौरान सड़क सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सरकार कई नए कदम उठाती रहती है. अब सरकार ने नेशनल एक्सप्रेसवे (नेशनल हाईवे) पर टोल वसूली के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इससे न सिर्फ आम नागरिकों को बल्कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी राहत मिलने वाली है. यह बदलाव 15 फरवरी 2026 से लागू होगा और इसके तहत, जिन राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का काम पूरा नहीं हुआ है, उन पर केवल चालू हिस्से के हिसाब से टोल लिया जाएगा, न कि पूरे एक्सप्रेसवे के हिसाब से, साथ ही, यह टोल दर सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग के हिसाब से होगी, जो आमतौर पर कम होती है.

अब तक, जब कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह से तैयार नहीं होता था और कुछ हिस्सों पर काम चल रहा होता था, तो भी यात्रियों से पूरा टोल वसूला जाता था. यह व्यवस्था आमतौर पर यात्रियों को आर्थिक बोझ में डाल देती थी. लोग इसे लेकर कई बार नाराजगी भी जाहिर करते थे, क्योंकि कुछ हिस्सों पर निर्माण कार्य चलने के बावजूद उन्हें पूरा शुल्क चुकाना पड़ता था. अब सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए एक अहम बदलाव किया है, जिसके तहत, केवल उस हिस्से पर टोल लिया जाएगा, जो पूरी तरह से चालू और तैयार है.

पुरानी व्यवस्था में क्या था?
पहले की व्यवस्था में, जब एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा ही चालू होता था, तो वाहन चालकों से पूरा टोल लिया जाता था. दरअसल, एक्सप्रेसवे की टोल दरें आम राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा होती हैं. इसकी वजह यह है कि एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने से यात्री तेज और बिना रुकावट के सफर का अनुभव करते हैं. यहां ट्रैफिक बाधाएं कम होती हैं, और मार्ग बेहतर होते हैं, जिससे यात्रा में समय की बचत होती है, लेकिन जब एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा ही तैयार होता था, तब भी यात्रियों से पूरी टोल दर ली जाती थी. यह एक असमान व्यवस्था थी, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता था.

नए नियमों के तहत क्या होगा?
अब सरकार ने नए नियमों का ऐलान किया है, जिसके अनुसार, अगर कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह से तैयार नहीं है, तो उस पर केवल उस हिस्से के लिए टोल लिया जाएगा, जो चालू है. साथ ही, उस हिस्से पर टोल की दर सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग के हिसाब से होगी, जो कि एक्सप्रेसवे की दर से कम होती है. इसका मतलब है कि अब अगर कोई एक्सप्रेसवे आधे में ही तैयार है, तो यात्रियों को उतनी ही राशि का भुगतान करना होगा, जितनी सुविधा वह हासिल कर रहे हैं. यह कदम खासकर उन यात्रियों के लिए राहत का कारण बनेगा जो रोजाना या नियमित रूप से एक्सप्रेसवे का यूज करते हैं. इससे उनकी यात्रा लागत में कमी आएगी और टोल वसूली में पारदर्शिता आएगी.

कब से लागू होगा यह नियम?
यह बदलाव 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा. इसके बाद, जहां-जहां एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से चालू होंगे, वहां नए नियम लागू होंगे. सरकार का मानना है कि यह कदम यात्रा को अधिक किफायती और सुगम बनाने की दिशा में उठाया गया है. इससे न सिर्फ यात्री फायदे में होंगे, बल्कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी सुधार होगा.

PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन

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PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। यह परिसर PMO, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (NSCS) और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट को एक छत के नीचे लाता है। साथ ही कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी लोकार्पण हुआ, जहां फाइनेंस, डिफेंस, हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर जैसे कई बड़े मंत्रालय स्थित हैं। यह केंद्रीय विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो पुराने साउथ ब्लॉक से PMO को कर्तव्य पथ पर स्थानांतरित करता है।

‘आज हम इतिहास बनते देख रहे हैं’
उद्घाटन विजया एकादशी (विक्रम संवत 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष) के शुभ दिन पर हुआ, जिसे मोदी ने विकास यात्रा का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा, “आज हम इतिहास बनते देख रहे हैं। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक थे। इन इमारतों का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था। आजादी के बाद भी इनसे कई निर्णय लिए गए, लेकिन अब हम गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति पा रहे हैं।”

दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’
पीएम मोदी ने सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक देवता के समान है) का मंत्र अंकित देखकर जोर दिया कि अब शासन नागरिक-केंद्रित, आधुनिक, कुशल और सुलभ होगा। उन्होंने कहा, “हम सब विकसित भारत के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे शास्त्रों में विजया एकादशी का महत्व है—इस दिन लिया संकल्प विजय दिलाता है। ईश्वरीय आशीर्वाद से हम लक्ष्य प्राप्त करेंगे।”

रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर का हुआ निधन

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रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर का हुआ निधन
टेलीविजन पर पहली बार ‘रामायण’ बनाने वाले रामानंद सागर के बेटे आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का निधन हो गया है. आनंद सागर का निधन मुंबई में 13 फरवरी 2026 को हुआ है. इस खबर से बॉलीवुड और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. आनंद सागर का निधन 84 साल की उम्र में हुआ. उन्होंने पिता के बाद उनकी विरासत को उन्ही की तरह आगे बढ़ाया है.

मुंबई में हुआ अंतिम संस्कार
आनंद सागर का निधन मुंबई में हुआ, ऐसे में उनका अंतिम संस्कार भी मुंबई के परमहंस श्मशान घाट पर शाम 4:30 बजे किया गया. उनके निधन की खबर उनके ही परिवार के द्वारा शेयर की गई है. परिवार की तरफ से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया गया, जिसमें आनंद सागर के फोटो के साथ लिखा था, ‘अत्यंत दुख के साथ हम अपने प्रिय पिता आनंद रामानंद सागर चोपड़ा के निधन की सूचना दे कर रहे हैं.’ इसी के साथ इस पोस्ट में उनके अंतिम संस्कार के बारे में भी जानकारी दी गई.

‘रामायण’ में भी रहा योगदान
आनंद सागर ने पिता के बाद तो उनकी विरासत को संभाला ही, लेकिन इससे पहेल भी वो पिता के साथ लगातार काम में हाथ बटाते रहे थे. आनंद सागर ने 1987 में उनके पिता द्वारा बनाई गई रामायण में बतौर को-प्रोड्यूसर भागीदारी दी थी. पिता के निधन के बाद भी आनंद सागर ने पौराणिक और भक्तिपूर्ण प्रोजेक्ट्स के निर्माण, क्रिएटिव देखरेख और मैनेजमेंट में योगदान दिया था.

पिता की विरासत को यूं संभाला
5 भाई-बहनों में से एक आनंद सागर ही हैं जिन्होंने अपने पिता की विरासत को संभाले रखा. उन्होंने साल ‘रामायण’ के बाद ‘अलिफ लैला’, ‘जय जय बजरंगबली’, ‘जय शिवशंकर ‘ जैसे धार्मिर सीरियल्स को प्रोड्यूस किया. जिनसे उनके पिता की विरासत आगे बढ़ी. इसके अलावा उन्होंने ‘आंखें’, ‘अरमान’ जैसी फिल्में भी बनाई हैं. इसके अलावा आनंद सागर ने लॉकडाउन के समय परिवार के साथ मिलकर दोबारा से ‘रामायण’ का प्रसारण किया, जिससे एक बार फिर रिकॉर्डतोड़ दर्शकों ने इसे पसंद किया.

माघ मेला विवाद पर CM योगी का बड़ा बयान

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माघ मेला विवाद पर CM योगी का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर चुप्पी तोड़ी है. सीएम योगी ने विधानसभा में इस मामले में खुलकर बयान दिया है. माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि सभी को मर्यादा का पालन करना चाहिए.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई घटना पर खुलकर बयान दिया है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर व्यक्ति, हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर जहां-तहां वातावरण खराब नहीं करत सकता है. उन मार्यदाओं का पालन सभी को करना होगा.

योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर साधा निशाना
योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि, “अगर वो (अविमुक्तेश्वरानंद) शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने (विपक्ष ने) वाराणसी में क्यों लाठी चार्ज किया था, क्यों एफआईआर दर्ज कराई थी. आप नैतिकता की बात करते हैं.” सीएम योगी ने यह भी कहा कि, “माघ में साढ़े 4 करोड़ श्रद्धालु जहां हो, जहां से श्रद्धालु बाहर निकलते हैं, वहां से आप अंदर जाने की कोशिश कर भगदड़ को जन्म देता है, श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है.”

क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा हुआ है. यहां मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम नोज (स्नान स्थल) तक जाने से रोका और उन्हें पैदल जाने को कहा, जिस पर यह विवाद शुरू हुआ था. आरोप यह भी था कि पुलिस ने शंकराचार्य के समर्थकों के साथ मारपीट की. हालांकि, यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि इस मामले को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने यूपी सरकार और बीजेपी को निशाने पर लिया था. अब इस विवाद पर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आया है.

टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाक मैच के लिए श्रीलंका रवाना हुई टीम इंडिया

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टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाक मैच के लिए श्रीलंका रवाना हुई टीम इंडिया
टी20 वर्ल्ड कप 2026 का 27वां लीग मैच भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी, रविवार को श्रीलंका के कोलंबो स्थित आर प्रेमदास स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैच के लिए सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम इंडिया श्रीलंका के लिए रवाना हो चुकी है. बता दें कि टीम इंडिया ने शुरुआती दो लीग मैच भारत में खेले थे.

टीम इंडिया के श्रीलंका रवाना होने का वीडियो सामने आया, जिसमें एक जगह पर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव गुस्से में नजर आए. तो आइए जानते हैं कि सूर्या को एयरपोर्ट पर गुस्सा क्यों आया. इसके अलावा भारत-पाकिस्तान मैच की टाइमिंग पर भी बात करेंगे.
क्यों गुस्साए सूर्यकुमार यादव?

तो वीडियो में देखा जा सकता है कि एक फैन सूर्या का हाथ छू लेता है, जिसके बाद भारतीय कप्तान बड़े गुस्से में उस शख्स को घूरते हुए आगे बढ़ जाते हैं. सूर्या के चेहरे पर गुस्सा साफतौर पर नजर आ रहा था.

किस टाइम होगा भारत-पाकिस्तान का मैच?
बात करें मुकाबले की, तो श्रीलंका में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले की भारतीय समय के अनुसार, शाम 7 बजे से शुरुआत होगी. इससे पहले भी टीम इंडिया के दोनों मुकाबले शाम 7 बजे से ही खेले गए हैं.

2-2 जीत के बाद आमने-सामने भारत-पाकिस्तान
अब तक भारत और पाकिस्तान की टीमें अपने-अपने 2-2 लीग मैच खेल चुकी हैं. दोनों ही टीमों ने जीत हासिल की है. टीम इंडिया ने यूएसए और नामीबिया को हराया, जबकि पाकिस्तान ने अपने दो मैचों में नीदरलैंड्स और यूएसए को शिकस्त दी.

अब दोनों टीमें अपने-अपने तीसरे मैच में एक दूसरे के आमने-सामने होंगी. इस मैच में जीत हासिल करने वाली टीम अपना विजय रथ जारी रखते हुए टूर्नामेंट में जीत की हैट्रिक लगाएगी.

भारत बनाम पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप हेड टू हेड
गौरतलब है कि टी20 वर्ल्ड कप में अब तक भारत और पाकिस्तान के बीच 8 मुकाबले खेले जा चुके हैं. इन मैचों में टीम इंडिया ने बढ़त हासिल करते हुए 7 में जीत दर्ज की है, जबकि पाकिस्तान को सिर्फ 1 मैच में जीत मिली है.

चीन-पाकिस्तान की पनडुब्बियों की होगी हंटिंग

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चीन-पाकिस्तान की पनडुब्बियों की होगी हंटिंग
ट्रेड डील के तुरंत बाद भारत ने अमेरिका से 06 एंटी-सबमरीन P-8I टोही विमान खरीदने की घोषणा कर दी है. रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को भारतीय नौसेना के लिए इन लॉन्ग रेंज मेरीटाइम रिकोनिसेंस एंड सर्विलांस एयरक्राफ्ट को खरीदने की मंजूरी दी.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली रक्षा (अधिग्रहण) खरीद परिषद यानी DAC की हुई अहम बैठक में इन P-8I विमानों को खरीदने (एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी या एओएन) की मंजूरी दी गई. हंटर के नाम से मशहूर इन विमानों को अमेरिका की बोइंग कंपनी बनाती है.

हिंद महासागर में P-8I विमानों का इस्तेमाल कर रही नौसेना
भारतीय नौसेना पिछले एक दशक से इन P-8I विमानों का इस्तेमाल, हिंद महासागर में कर रही है. चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बियों पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ हिंद महासागर के विशाल समुद्री-क्षेत्र की निगरानी में ये P-8I विमान अहम भूमिका निभाते हैं. वर्ष 2009 में भारत ने अमेरिका से सीधे करार कर 08 एयरक्राफ्ट को खरीदा था. इसके बाद वर्ष 2019 में चार (04) अतिरिक्त विमानों को खरीदा गया था.

कहां-कहां तैनात हैं P-8I एयरक्राफ्ट?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, P-8I विमान के अधिग्रहण से नौसेना की लम्बी दूरी की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. भारतीय नौसेना ने इन P-8I विमानों को तमिलनाडु के रजाली और गोवा के आईएनएस हंस नेवल बेस पर तैनात कर रखा है. यहां से पूरे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की निगहबानी की जाती है.

बैंक स्टाफ अब नहीं कर पाएंगे मिस-सेलिंग, RBI का ‘मास्टरस्ट्रोक’

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बैंक स्टाफ अब नहीं कर पाएंगे मिस-सेलिंग, RBI का ‘मास्टरस्ट्रोक’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंकों की ओर से होने वाली गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर सख्ती करने के लिए नया मसौदा नियम जारी किया है. बुधवार को जारी यह ड्राफ्ट “आरबीआई (कॉमर्शियल बैंक्स–रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) अमेंडमेंट डायरेक्शन 2026” एक जुलाई 2026 से लागू होगा. इस मसौदे के तहत यदि किसी बैंक द्वारा गलत तरीके से कोई उत्पाद या सेवा बेची जाना साबित होता है, तो बैंक को ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी और हुए नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ेगी.

क्या है नया नियम?
नए नियमों के मुताबिक, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा का विज्ञापन, मार्केटिंग या बिक्री करते समय पारदर्शिता और जिम्मेदारी बरतेंगे. ग्राहकों से संपर्क करने से पहले उनकी स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा और संपर्क केवल कार्यालय समय के दौरान ही किया जा सकेगा. आरबीआई ने यह भी कहा है कि बैंकों की आंतरिक नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिए जो कर्मचारियों या डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स (DSA) को किसी भी तरह से गलत बिक्री के लिए प्रोत्साहित करें. यानी प्रोत्साहन (इंसेंटिव) ढांचा ऐसा नहीं होना चाहिए जो केवल बिक्री बढ़ाने पर केंद्रित हो, भले ही वह ग्राहक के हित में न हो.

केंद्रीय बैंक ने विशेष रूप से तीसरे पक्ष (थर्ड-पार्टी) के उत्पादों और सेवाओं की बिक्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. मसौदे में कहा गया है कि ऐसे उत्पादों की मार्केटिंग या बिक्री में लगे कर्मचारियों को संबंधित तीसरे पक्ष से सीधे या परोक्ष रूप से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलना चाहिए. इसके अलावा, किसी बैंक को अपने उत्पाद के साथ किसी तीसरे पक्ष के उत्पाद को जबरन जोड़ने (टाई-इन सेल) की अनुमति नहीं होगी. ग्राहक को अलग-अलग कंपनियों के विकल्पों में से स्वतंत्र रूप से चयन करने का अधिकार दिया जाएगा

क्यों आरबीआई ने जारी किया मसौदा?
आरबीआई ने यह भी प्रस्तावित किया है कि बैंकों के डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप्स में किसी भी तरह के ‘डार्क पैटर्न’ का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. डार्क पैटर्न वे डिजाइन या तकनीकें होती हैं जो ग्राहकों को भ्रमित कर अनजाने में किसी उत्पाद या सेवा के लिए सहमति देने पर मजबूर कर सकती हैं. मसौदे में ऐसे करीब एक दर्जन उदाहरणों का उल्लेख किया गया है, जिनसे बचने के निर्देश दिए गए हैं.

दरअसल, हाल के वर्षों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा बीमा, निवेश योजनाएं या अन्य उत्पाद गलत तरीके से बेचने की शिकायतें बढ़ी थीं. इसी को देखते हुए आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गलत बिक्री पर लगाम लगाने के लिए नए नियम लाने की घोषणा की थी. उसी के तहत यह मसौदा जारी किया गया है. आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से चार मार्च तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं.

ईशान-हार्दिक के तूफान के बाद नामीबिया का जबरदस्त कमबैक

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ईशान-हार्दिक के तूफान के बाद नामीबिया का जबरदस्त कमबैक
भारत ने नामीबिया के खिलाफ 209 रन बना दिए हैं. यह 2026 टी20 वर्ल्ड कप में अभी तक टीम इंडिया का सबसे बड़ा स्कोर है. मगर डेथ ओवरों में नामीबियाई गेंदबाज पूरी तरह भारतीय बल्लेबाजों पर हावी हो गए. आखिरी 4 ओवर में टीम इंडिया सिर्फ 25 ही रन जोड़ पाई. भारतीय पारी में ईशान किशन और हार्दिक पाण्ड्या ने दमदार अर्धशतकीय पारी खेली.

ईशान किशन और हार्दिक पाण्ड्या की अर्धशतकीय पारियों के बाद नामीबिया ने गेंदबाजी में जबरदस्त कमबैक किया और अंतिम 11 गेंद में भारत के 5 विकेट चटका डाले. विशेष रूप से नामीबिया के कप्तान जेरहार्ड इरासमस ने 4 विकेट लेते हुए भारतीय बैटिंग लाइन-अप को तहस नहस करने का काम किया.

ईशान-हार्दिक का तूफान
संजू सैमसन 8 गेंद में 22 रन बनाकर आउट हो गए थे, लेकिन ईशान किशन ने तबाही मचाते हुए 20 गेंद में अर्धशतक पूरा किया और इस मैच में उन्होंने 61 रनों की पारी खेली. टीम इंडिया पावरप्ले में ही 86 रन बना चुकी थी और 7 ओवर समाप्त होने से पहले ही 100 रनों का आंकड़ा पार कर चुकी थी.

उनके अलावा हार्दिक पाण्ड्या ने भारतीय पारी को संभाला और 28 गेंदों में 52 रनों की तेज और सधी हुई पारी खेली. कप्तान सूर्यकुमार यादव केवल 12 रन और तिलक वर्मा 25 रन ही बना पाए.

11 गेंद में 5 विकेट
जब तक हार्दिक पाण्ड्या क्रीज पर डटे रहे, तब तक लग रहा था कि टीम इंडिया आसानी से 235-240 रन बना सकती है. मगर अंतिम 11 गेंदों में भारत के 5 विकेट गिर गए. हालांकि ये पहली बार है जब टीम इंडिया ने इस वर्ल्ड कप में 200 रनों से ज्यादा स्कोर बनाया है. टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में यह कुल चौथी बार है जब टीम इंडिया ने 200 या उससे ज्यादा स्कोर बनाया है. इससे पहले वो इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान के खिलाफ ऐसा कर चुकी है.

त्रयोदशी-चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि

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त्रयोदशी-चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि
रविवार, 15 फरवरी को शिव पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है. इस पर्व पर भगवान शिव की पूजा खासतौर पर रात में करने की परंपरा है. महाशिवरात्रि को महारात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि इस तिथि पर रात में की जाने वाली पूजा अक्षय पुण्य देने वाली मानी जाती है.

श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि शिवपुराण में लिखा है कि, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. उस समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद चल रहा था. दोनों देवताओं खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. इस विवाद को शांत कराने के लिए भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए और इन दोनों देवताओं को अपनी महिमा बताई थी. हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है.

फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि इस बार दो शुभ योगों में 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि के दिन शिवजी के भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है.

14 फरवरी को शाम 4.02 बजे त्रयोदशी शुरू होगी और 15 फरवरी को शाम 5.05 बजे तक त्रियोदशी है. 15 फरवरी को शाम 5.06 बजे चतुर्दशी शुरू होगी, जोकि 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक है. इस कारण इस बार 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन सुबह 7.08 से शाम 7.48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. इस दिन विधि विधान के साथ शिव लिंग की पूजा करनी चाहिए. शुभ संयोग और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना करने से उनके भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी.

सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है. जिसका अर्थ है सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला. यह विशेष वार (दिन) और निश्चित नक्षत्रों के संयोग से बनता है, ऐसी मान्यता है कि कार्य (जैसे व्यापार, वाहन खरीदना, खरीदारी) निश्चित रूप से सफल होता है. यह योग बाधाओं को दूर करता है और मनोवांछित फल देता है.

मार्कण्डेय पुराण में शिवरात्रि को महारात्रि कहा गया
मार्कण्डेय पुराण के श्री दुर्गा सप्तशती में तीन प्रकार की दारुण रात्रियों का उल्लेख है. इन तीन रात्रियों को कालरात्रि, महारात्रि और मोहरात्रि कहा गया है. होली का पर्व कालरात्रि के रूप में मनाया जाता है. जबकि दीपावली और शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि का पर्व माना गया है. हालांकि कुछ विद्वान दीपावली को कालरात्रि का पर्व भी मानते हैं. शिवरात्रि को विशेष रूप से महारात्रि का कहा गया है, क्योंकि यह रात्रि साधना और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदू धर्म में अधिकतर त्योहार सूर्योदय के बाद मनाने की परंपरा है, लेकिन कुछ पर्व हैं, जिन्हें रात में मनाना चाहिए. इनमें होली, दीपावली, शरद पूर्णिमा, जन्माष्टमी, शिवरात्रि और नवरात्रि प्रमुख हैं. इन पर्वों में रात्रि का महत्व है, क्योंकि यह समय साधना, ध्यान और ईश्वर से जुड़ने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.

महाशिवरात्रि तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को शाम 05:04 मिनट से शुरू होगी. यह चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को शाम 5:34 मिनट तक रहेगी. ऐसे में महाशिवरात्रि रविवार 15 फरवरी को मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बना रहेगा. व्यतीपात योग बनेगा, जो पूरे दिन रहने वाला है. कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे.

चार प्रहर की पूजा
महाशिवरात्रि के पर्व काल में धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चार प्रहर की साधना का विशेष महत्व है. प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की उपासना के अलग-अलग प्रकार का वर्णन मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यथा श्रद्धा, यथा प्रहर, यथा स्थिति और यथा उपचार के अनुसार साधना करनी चाहिए. चार प्रहर की साधना से धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है. जिनके जीवन में संतान संबंधी बाधा हो रही हो, उन्हें भी यह साधना अवश्य करनी चाहिए.

चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर पूजा का समय: सायं 06:15 बजे से रात्रि 09:28 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 09:29 बजे से मध्यरात्रि 12:41 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा का समय: मध्यरात्रि 12:42 बजे से 16 फरवरी प्रातः03:54 बजे तक
चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: 16 फरवरी, प्रातः03:55 बजे से प्रातः 07:07 बजे तक

पूजा में करें महामृत्युंजय मंत्र का जप
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा करते समय में अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जप करना चाहिए. इस मंत्र के जप से अनजाना भय और चिंता दूर होती है. महामृत्युंजय मंत्र की वजह से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

महामृत्युंजय मंत्र- ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।

इन चीजों से करें भगवान शिव का अभिषेक
महाशिवरात्रि पर्व के दिन भगवान शिव की उपासना के समय शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से श्रद्धालु के कार्य जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक दही से करने से भी आर्थिक क्षेत्र में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है. वहीं गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. भगवान शिव का अभिषेक करते समय 108 बार ‘ॐ पार्वतीपतये नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन में अकाल संकट नहीं आता है.

महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करा कराएं. केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं. पूरी रात्रि का दीपक जलाएं. चंदन का तिलक लगाएं. बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें.

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा
शिवपुराण के मुताबिक एक बार ब्रह्मा-विष्णु के बीच विवाद हो गया. झगड़े की वजह ये थी कि दोनों ही देवता खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. जब दोनों देवता दिव्यास्त्रों से युद्ध शुरू करने वाले थे, ठीक उसी समय भगवान शिव लिंग रूप में इनके सामने प्रकट हो गए. शिव जी ने कहा कि आप दोनों में से जो भी इस लिंग का छोर (अंत) खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा. ये बात सुनकर एक छोर की ओर ब्रह्मा जी और दूसरे छोर की ओर विष्णु जी चल दिए. बहुत समय तक ब्रह्मा-विष्णु अपने-अपने छोर की ओर आगे बढ़ते रहे, लेकिन उन्हें लिंग का अंत नहीं मिला. उस समय ब्रह्मा जी खुद को श्रेष्ठ घोषित करने के लिए एक योजना बनाई.

ब्रह्मा ने एक केतकी का पौधा लिया और उससे झूठ बोलने के लिए कहा कि वह शिव-विष्णु के सामने बोले कि ब्रह्मा जी ने लिंग का अंत खोज लिया है. ब्रह्मा केतकी के पौधे को लेकर शिव जी के पास पहुंचे, विष्णु जी भी वहां आ गए और उन्होंने कहा कि मैं इस लिंग का अंत नहीं खोज सका. ब्रह्मा ने कहा कि मैंने इस लिंग का अंत खोज लिया है, ये बात आप केतकी के पौधे से भी पूछ सकते हैं. केतकी ने भी भगवान के सामने झूठ बोल दिया. ब्रह्मा जी का झूठ सुनते ही शिव जी क्रोधित हो गए. उन्होंने कहा कि आपने झूठ कहा है, इसलिए आज से आपकी कहीं भी पूजा नहीं होगी और केतकी ने आपके झूठ में साथ दिया, इसलिए इसके फूल मेरी पूजा में वर्जित रहेंगे। इसके बाद विष्णु जी सर्वश्रेष्ठ घोषित हो गए. ये घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की ही मानी जाती है, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है.

मुख्यमंत्री ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए किया प्रोजेक्ट संवर्धन का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए किया प्रोजेक्ट संवर्धन का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। उन्हीं के मार्गदर्शन में बने महाकाल लोक में उज्जैन को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का केन्द्र बनाया है। मोक्षदायिनी शिप्रा मैया की कृपा से उज्जैन अब सिंहस्थ-2028 के लिए तैयार हो रहा है। भगवान महाकाल के आशीर्वाद से सिंहस्थ की तैयारियों के लिए 1133.67 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित की जा रही हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना का भूमि-पूजन हो रहा है। इस परियोजना से सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं और नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही शहर के हर घर में लंबे समय तक जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। सिंहस्थ के लिए उज्जैन के प्रबंधन से पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के ग्राम हरियाखेड़ी में जल आवर्धन परियोजना के भूमि-पूजन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लगभग 47.23 करोड़ लागत के 11 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनको नमन करते हुए कहा कि उनके दिखाए अंत्योदय के मार्ग पर चलते हुए ही हमारी सरकार गरीब से गरीब के कल्याण में लगी हुई है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ही उज्जैन जिले में प्रोजेक्ट संवर्धन आरंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उनके सम्मान और सफाई कर्मचारियों को किट वितरण जैसी गतिविधियां प्रतीक स्वरूप आयोजित की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में आयुर्वेद का धनवंतरी इंस्टीट्यूट खोला जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के माध्यम से आयुर्वेद की पढ़ाई और चिकित्सा के लिए एक बड़ी सौगात बहुत जल्द मिलने वाली है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है। सरकार ने उज्जैन, ओरछा सहित प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थानों पर शराबबंदी कर एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं और बहनों को रोजगार दिलवाने के लिए रोजगार आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उज्जैन के पास रेडीमेड गारमेंट की यूनिट शुरू होने पर बहनों को काम करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी उज्जैन ने बाबा महाकाल के कार्यक्रमों का प्रसारण किया। यह प्रसन्नता का विषय है कि आकाशवाणी के माध्यम से उज्जैन के युवा अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। आकाशवाणी के माध्यम से सिंहस्थ से जुड़े समाचार भी जन-जन तक पहुंचेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ: 2028 में पूरी दुनिया के श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। राज्य सरकार इसके लिए सभी तैयारियों को समय रहते हुए पूरा कर रही है। उज्जैन बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी बुनियादी सुविधाओं के लिए विकास कार्य हो रहे हैं। क्षिप्रा के घाटों पर सिंहस्थ में आए 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे। रामघाट के पास एक छोटा और एक बड़ा पुल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले महीने मार्च में उज्जैन में भव्य गीता भवन का लोकार्पण होगा। शीघ्र ही उज्जैन-इंदौर फोर लेन रोड का भूमि-पूजन भी किया जाएगा। उज्जैन भी मेट्रोपोलिटन सिटी का हिस्सा होगा। यह सभी कार्य शहर के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में बताया गया कि हरियाखेड़ी परियोजना को 24 माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। हरियाखेडी एवं गंभीर पर 2 नए इंटेक वेल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत नए जल शोधन संयंत्रों का निर्माण और 17 नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे। योजना अंतर्गत 708 किमी पाइपलाइन का नया वितरण नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा पुरानी एसीपी पाइपलाइन भी बदली जाएगी। परियोजना से 49,087 नए घरेलू जल सेवा कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना के अंतर्गत सि‍लारखेड़ी, गंभीर, उंडासा एवं साहिबखेड़ी को मुख्य जल स्रोत के रूप में उपयोग किया जाएगा जिससे सिंहस्थ के दौरान और उसके बाद भी निर्बाध जल आपूर्ति बनी रहे। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन शहर की प्रभावी जनसंख्या लगभग 9.65 लाख तथा मेला क्षेत्र की अस्थायी जनसंख्या लगभग 21.83 लाख अनुमानित है। दिव्य राजसी स्नान के दिनों में एक ही दिन में लगभग 2 करोड़ 28 लाख श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। उज्जैन के निकट बसे लगभग 20 ग्रामों को भी योजना में शामिल किया गया है।
विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन सहित संपूर्ण प्रदेश के विकास के लिए कृत संकल्पित हैं। सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत महाकाल की नगरी में सड़क, सीवर, स्वच्छ पेयजल सहित सभी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। प्रदेश में गरीबों को पक्के मकान मिल रहे हैं। युवाओं को रोजगार और लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री पारस जैन, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।