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इमारत ढहने से मातम: सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला, मृतकों के परिवारों को ₹9 लाख और घायलों को ₹2.5 लाख की मदद

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इमारत ढहने से मातम: सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला, मृतकों के परिवारों को ₹9 लाख और घायलों को ₹2.5 लाख की मदद
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा कस्बे में शनिवार शाम एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया. यहां बस स्टैंड के पास स्थित चार मंजिला ‘अग्रवाल लॉज’ की इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस खौफनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर 3 हो गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है, साथ ही मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें पिछले 18 घंटे से अधिक समय से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं. क्रेन और भारी मशीनों की मदद से रविवार (5 अप्रैल) सुबह करीब 11 बजे मलबे से एक महिला का शव निकाला गया, जिसकी फिलहाल शिनाख्त नहीं हो पाई है. इससे पहले दो रिश्तेदारों के शव बरामद किए गए थे. मलबे से अब तक 5 लोगों को निकाला जा चुका है, जिनमें 3 की मौत हो चुकी है और अन्य घायलों का इलाज जारी है. अभी भी कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.

CM मोहन यादव ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर घटना पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की. प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये (मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान), 4 लाख रुपये (संबल योजना) और 1 लाख रुपये (रेडक्रॉस) की सहायता राशि दी जाएगी. घायलों को 2 लाख रुपये (मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान) और 50 हजार रुपये (रेडक्रॉस) की राशि दी जाएगी.

क्या रही इमारत गिरने की वजह?
लगभग 10 साल पुरानी अग्रवाल लॉज की इमारत शनिवार शाम 5:30 से 5:50 के बीच एक जोरदार धमाके की आवाज के साथ जमींदोज हो गई. स्थानीय लोगों के अनुसार, लॉज के ठीक बगल में 20×50 फीट के एक प्लॉट पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके लिए 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था. इस गड्ढे में पानी भर जाने के कारण लॉज की नींव कमजोर हो गई, जो हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है. अधिकारियों ने भी माना है कि पास में चल रहे अंडरग्राउंड निर्माण कार्य की वजह से यह हादसा हो सकता है.

मंत्री और प्रशासन मौके पर मुस्तैद, जांच के आदेश
मध्य प्रदेश के मंत्री दिलीप अहीरवार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरा प्रशासन मौके पर तैनात है. जिला कलेक्टर हर्षल पंचोली और पुलिस अधीक्षक (SP) मोती उर रहमान लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन ने घटना के सटीक कारणों और निर्माण या सुरक्षा मानकों में बरती गई किसी भी लापरवाही का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं.

HBSE ने लागू की ‘दो प्रयास’ नीति, छात्रों को मिलेगा सुधार का दूसरा मौका

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HBSE ने लागू की ‘दो प्रयास’ नीति, छात्रों को मिलेगा सुधार का दूसरा मौका
हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (HBSE) ने इस साल छात्रों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर दी है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब हरियाणा बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करेगा. इसका उद्देश्य छात्रों को अपने नंबर में सुधार करने का दूसरा अवसर देना है. यह नियम सभी सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी और गुरुकुल विद्यापीठ स्ट्रीम के छात्रों पर लागू होगा. बोर्ड के अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा के अनुसार, यह कदम छात्रों के शैक्षणिक तनाव को कम करने और उन्हें अपने प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर देने के लिए उठाया गया है.

हरियाणा में दो बार बोर्ड परीक्षाएं देने की आवेदन तारीख
जो छात्र फरवरी-मार्च 2026 सत्र में परीक्षा दे चुके हैं और अपने नंबर से खुश नहीं हैं, वे दूसरी बार परीक्षा देने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए बोर्ड ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए आवेदन 4 अप्रैल 2026 शुरू कर दिए गए हैं और आवेदन की लास्ट डेट 10 अप्रैल 2026 है. छात्र आवेदन करने के लिए अधकारिकि वेबसाइट bseh.org.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं . छात्र अपनी सुविधा के अनुसार, अधिकतम तीन विषयों में परीक्षा दे सकते हैं. हर विषय का आवेदन शुल्क 1000 है. यह अवसर उन छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो किसी एक या दो विषयों में पीछे रह गए हैं या अपने ग्रेड सुधारना चाहते हैं.

बोर्ड परीक्षा का शेड्यूल
हरियाणा बोर्ड ने 25 फरवरी से 1 अप्रैल 2026 तक 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित की थीं. इसके बाद अब कॉपी मूल्यांकन का कार्य तेजी से चल रहा है. 12वीं की कॉपियों का मूल्यांकन 3 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 और 10वीं की कॉपियों का मूल्यांकन 2 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक का है. मूल्यांकन के लिए अलग-अलग जिलों में केंद्र बनाए गए हैं. 10वीं के लिए 22 जिलों में 75 केंद्र, 6,969 शिक्षक और 12वीं के लिए 52 केंद्र, 5,009 शिक्षक शामिल हैं. बोर्ड ने मूल्यांकन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया है.

HBSE 10वीं और 12वीं रिजल्ट कब आएगा
हरियाणा बोर्ड के अनुसार, 10वीं और 12वीं का रिजल्ट मई के दूसरे हफ्ते तक जारी किया जा सकता है. कॉपी मूल्यांकन पूरा होने के बाद छात्रों के नंबर सीधे बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे. छात्र अपना रिजल्ट देख सकते हैं और डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं.

रिजल्ट कैसे चेक करें
1. छात्र आसानी से अपने रिजल्ट को चेक कर सकते हैं. इसके लिए bseh.org.in पर जाएं.

2. इसके बाद होम पेज पर Haryana Board 10th/12th Result 2026 लिंक पर क्लिक करें.

3. अब अपना Roll Number और Date of Birth दर्ज करें.

4. वहीं अब आपकी मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई देगी.

5.इसे डाउनलोड करके अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर सेव कर लें.

ईरान के हमले से अमेरिका को भारी नुकसान, 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया फाइटर जेट

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ईरान के हमले से अमेरिका को भारी नुकसान, 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया फाइटर जेट
ईरान की तरफ से जंग के दौरान 2 अमेरिकी फाइटर जेट गिराए जाने के बाद एक बार फिर 2003 के इराक युद्ध की याद आने लगी है. उस समय भी अमेरिका ने इराक में सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे बाद में एक बड़ी गलती माना गया था. इस बार भी हालात कुछ उसी तरह के दिख रहे हैं, इसलिए दोनों की तुलना की जा रही है. ईरान ने शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को अमेरिका के दो लड़ाकू विमान गिराए. यह पिछले 23 साल में पहली बार है जब किसी युद्ध के दौरान अमेरिकी फाइटर जेट को गिराया गया है. इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान A-10 थंडरबोल्ट II विमान गिराया गया था. यह जानकारी अमेरिका के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल ने दी.

इतने साल बाद हुआ यह हमला दिखाता है कि ईरान अब भी मजबूत है और जवाब देने की क्षमता रखता है. यह उस दावे के उलट है जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि ईरान की ताकत पूरी तरह खत्म कर दी गई है. ट्रंप ने कई बार कहा था कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है, लेकिन ताजा घटनाओं से अलग तस्वीर सामने आ रही है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने एक F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को गिराया. उसमें मौजूद एक क्रू मेंबर को बचा लिया गया, लेकिन दूसरे की तलाश अभी भी जारी है.

ईरानी मीडिया ने क्या किया दावा
ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि एक अमेरिकी A-10 हमला करने वाला विमान भी गिरा, लेकिन उसका पायलट पैराशूट से कूदकर कुवैत में सुरक्षित उतर गया. पिछले 23 सालों में अमेरिका ज्यादातर ऐसे दुश्मनों से लड़ता रहा है जिनके पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम नहीं थी, इसलिए उसके विमान गिरने की घटनाएं बहुत कम हुईं. हालांकि, ईरान के पास एक संगठित और मजबूत सेना है, जो ऐसे हमले कर सकती है. हालांकि, रिटायर्ड जनरल कैंटवेल ने यह भी कहा कि अमेरिका की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इतने बड़े युद्ध के बावजूद ज्यादा विमान नहीं गिरे. उन्होंने इसे हैरान करने वाला बताया और कहा कि अमेरिकी विमान रोज खतरे में उड़ान भरते हैं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस जंग में अब तक 13,000 से ज्यादा मिशन उड़ाए जा चुके हैं और 12,300 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया है. फिर भी ईरान लगातार जवाब दे रहा है और इजरायल व खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के आसपास हमले कर रहा है. इससे पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास ज्यादा ताकत है, लेकिन सिर्फ हवाई बढ़त होना और पूरी तरह नियंत्रण होना अलग बात है. उनका कहना है कि अगर किसी देश की एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर भी हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह खत्म हो गया है. यही कारण है कि ईरान अब भी लड़ रहा है और जवाब दे रहा है, जिससे यह जंग और लंबी और खतरनाक हो सकती है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव डोंगला में खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव डोंगला में खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में हुए शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” के दूसरे दिन उज्जैन जिले की वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला में ‘’भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वर्तमान और भविष्य” विषय पर आयोजित सत्र में सहभागिता की। सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव, देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत जानकारियों को अत्यंत रोचक बताते हुए भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 जैसी सफलताओं पर देश के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

सत्र में प्रो. अनिल भारद्वाज, निदेशक, फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL), अंतरिक्ष विभाग, अहमदाबाद ने चंद्रयान-3 मिशन की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि “विक्रम लैंडर” की सफल सॉफ्ट लैंडिंग भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही। इसके साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुँचने वाला विश्व का पहला देश बना। इस मिशन की सफलता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने बताया कि “प्रज्ञान रोवर” ने चंद्रमा की सतह पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन किए और इस लैंडिंग स्थल को “शिव शक्ति पॉइंट” नाम दिया गया। साथ ही उन्होंने चंद्रयान-4 (लूनर सैंपल रिटर्न मिशन), चंद्रयान-5 (LUPEX – भारत-जापान संयुक्त मिशन), वीनस ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर मिशन और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं की भी जानकारी दी।

सत्र में डॉ. तरुण पंत, निदेशक, स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, तिरुवनंतपुरम ने आयनोस्फियर एवं ऊपरी वायुमंडल की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अंतरिक्ष की गतिविधियाँ पृथ्वी के वातावरण और जलवायु को प्रभावित करती हैं और इनका अध्ययन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान पर हुआ मंथन
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” के दूसरे दिन आयोजित ‘’खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी में प्रगति’’ एवं ‘’विकसित भारत के लिए स्पेस इकोनॉमी : राष्ट्र की सेवा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी’’ सत्रों में खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्पेस इकोनॉमी और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक आयाम, विज्ञान-अध्यात्म के समन्वय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।

अंतरिक्ष तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत आधार
नीति आयोग के सदस्य (विज्ञान) डॉ. वी.के. सारस्वत ने “भारत की रक्षा के लिए अंतरिक्ष आधारित रणनीतियाँ” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरिक्ष तकनीक आज विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने अपने जीवन के प्रारंभिक प्रेरणा स्रोत का उल्लेख करते हुए बताया कि बाल्यकाल में एक सैटेलाइट प्रक्षेपण की खबर ने उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा दी। वैज्ञानिक डॉ. सारस्वत ने कहा कि आधुनिक समय में रक्षा तकनीक तेजी से बदल रही है और पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियाँ विकसित हो रही हैं। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र और स्टार्ट-अप्स की बढ़ती भूमिका को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

विकसित भारत के लिए स्पेस इकोनॉमी की बढ़ती भूमिका
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्पेस इकोनॉमी, निजी क्षेत्र की भागीदारी और युवाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते अवसरों पर चर्चा की। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक न केवल वैज्ञानिक प्रगति बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय समय की आवश्यकता
राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (आरआरकैट) के पूर्व निदेशक डॉ. शंकर नाखे ने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके समन्वय से मानव समाज का संतुलित विकास संभव है। उन्होंने कहा कि उज्जैन नगरी महाकालेश्वर मंदिर और कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण प्राचीन काल से ही काल गणना और खगोलीय अध्ययन का केंद्र रही है, जो इस सम्मेलन की प्रासंगिकता को और अधिक सार्थक बनाता है। डॉ. नाखे ने रेडियोएक्टिव वेस्ट मैनेजमेंट और लेजर तकनीक जैसे विषयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान का उपयोग चिकित्सा, ऊर्जा और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित अनेक क्षेत्रों में हो रहा है। उन्होंने LIGO जैसी वैज्ञानिक परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए आधुनिक विज्ञान की सटीकता और संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वित दृष्टिकोण से ही एक जागरूक, संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव डोंगला में खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी ने जीता वाराणसी के लोगों का दिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार सुबह वाराणसी के राम भंडार में स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया। उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्हें अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों को यकीन ही नहीं हुआ। लोग उनसे मिलकर उत्साहित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सादगी देख प्रभावित हुए और मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव का काफिला जब एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित राम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी ,जलेबी और लस्सी का स्वाद चखा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान की शैली होती है , जो वहां की पहचान होती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

आम जनता के बीच सहज मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे बातचीत भी की। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।

गरीब बच्चों के एडमिशन में देरी पर नाराज हुए चीफ जस्टिस, सरकार से मांगा जवाब

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गरीब बच्चों के एडमिशन में देरी पर नाराज हुए चीफ जस्टिस, सरकार से मांगा जवाब
शनिवार को अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबर को चीफ जस्टिस ने स्वतः संज्ञान में लिया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

प्रवेश प्रक्रिया में कोताही पर कोर्ट की नाराजगी
हालांकि आज न्यायालय का कार्य दिवस नहीं है, लेकिन मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई।

प्रदेश में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने के बावजूद आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया बेहद धीमी है। 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन हुआ है, जिससे 16,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं और कई जिलों में 10% से भी कम आवेदनों का सत्यापन हुआ है।

सत्यापन की धीमी गति और समयसीमा का उल्लंघन
यह भी ध्यान में रखते हुए कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने पंजीकरण और नोडल सत्यापन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, जो अभी भी अधूरी है। नोडल अधिकारी और प्रिंसिपल स्तर पर सत्यापन की धीमी गति के कारण समय सीमा समाप्त हो गई है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिकांश जिलों में लंबित आवेदनों का नोडल सत्यापन समय पर पूरा नहीं हुआ है।

प्राप्त आवेदनों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच असमानता है। लॉटरी के माध्यम से स्कूल आवंटन 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित है, लेकिन अपूर्ण सत्यापन के कारण इसमें देरी की संभावना जताई गई है, जिससे अभिभावकों को असुविधा होगी क्योंकि उन्हें बार-बार आना पड़ सकता है।

दो याचिकाओं पर अब एक साथ होगी सुनवाई
आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेते हुए अवकाश के दिन हाई कोर्ट में सुनवाई की। बता दें कि भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही लापरवाही के संबंध में अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है।

इस याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। अब 8 अप्रैल को इसी दिन स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका की भी सुनवाई होगी।

अधिवक्ताओं की दलीलें और अगली तारीख
डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करने की व्यवस्था दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सीवी भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर, राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने पैरवी की। डिवीजन बेंच ने अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना और अगली सुनवाई के लिए आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है – मुख्यमंत्री साय

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अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शहीद जवानों, बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।

शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।

हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी – मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है – जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।

किराएदारों और छात्रों के लिए खुशखबरी! बस ID दिखाओ, 5kg गैस पाओ

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किराएदारों और छात्रों के लिए खुशखबरी! बस ID दिखाओ, 5kg गैस पाओ
अमेरिका-इजरायल और ईरान में बीच जारी जंग से दुनिया भर में एलपीजी गैस और तेल की कमी का संकट छाया हुआ है। भारत में भी LPG सिलेंडर सप्लाई चरमरा गई है। कई राज्यों से एलपीजी संकट की खबर सामने आ रही है। हालंकि केंद्र सरकार ने इन खबरों को अफवाह करार देते हुए कहा है कि देश में एलपीजी गैस और तेल की कोई कमी नहीं है। बीच सरकार ने शनिवार को 5 किलो एलपीजी सिलेंडर को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने कहा है कि 5 किलो LPG सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटरों के पास उपलब्ध हैं और इन्हें पते के सबूत की जरूरत के बिना, बस एक वैध ID दिखाकर खरीदा जा सकता है।
बिना एड्रेस प्रूफ मिलेगा गैस सिलेंडर

सरकार ने कहा कि वह ईंधन और ऊर्जा की सप्लाई की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। भले ही पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि 5 Kg FTL सिलेंडर आस-पास के LPG डिस्ट्रीब्यूटरों के पास उपलब्ध हैं और इन्हें कोई भी वैध ID सबूत दिखाकर खरीदा जा सकता है। पते के सबूत की कोई ज़रूरत नहीं है।

प्रवासी मजदूरों की मौज
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच को बेहतर बनाना है, खासकर प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के लिए जिनके पास स्थानीय पते के दस्तावेज नहीं हो सकते हैं। 23 मार्च से अब तक, ऐसे लगभग 5.7 लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जिनमें से हाल ही में एक ही दिन में 71,000 से ज़्यादा यूनिट बेची गईं।

पेट्रोल-डीजल या LPG की कोई कमी नहीं
मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है और नागरिकों से घबराकर खरीदारी न करने का आग्रह किया। मंत्रालय ने कहा कि सभी खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और पूरे देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, भले ही अफवाहों के कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ की खबरें आई हों।
घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया

सप्लाई में स्थिरता बनाए रखने के लिए, सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया है, यह सुनिश्चित किया है कि रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चलें, और घरों, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं के लिए ईंधन की सप्लाई को प्राथमिकता दी है। साथ ही, मांग से जुड़े कई उपाय भी शुरू किए गए हैं, जिनमें LPG बुकिंग चक्र को बढ़ाना और PNG, केरोसिन और बिजली से खाना पकाने जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना शामिल है।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई
मंत्रालय ने बताया कि राज्यों को सलाह दी गई है कि वे घरेलू और कमर्शियल, दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए नए PNG कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करें। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए निगरानी भी बढ़ा दी है। हाल ही में 3,700 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे गए और दोषी LPG डिस्ट्रीब्यूटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिसमें उनके लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।

दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोहित शर्मा के रचा इतिहास, तोड़ा एमएस धोनी का यह बड़ा रिकॉर्ड

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दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोहित शर्मा के रचा इतिहास, तोड़ा एमएस धोनी का यह बड़ा रिकॉर्ड
आईपीएल 2026 के 8वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस की भिड़ंत शनिवार को अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स से हो रही है। मुंबई के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 26 गेंदों में 35 रन बनाए। रोहित ने अपनी इस पारी के दौरान एमएस धोनी का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट
रोहित शर्मा आईपीएल में एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में अब तीसरे नंबर पर आ गए हैं। इसके साथ ही वह आईपीएल में एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए हैं। दिल्ली के खिलाफ 35 रनों की अपनी पारी में रोहित ने एक छक्का लगाया। रोहित दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 51 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने इस मामले में एमएस धोनी को पीछे छोड़ दिया है। धोनी ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ 50 छक्के लगाए हैं। वहीं, इस लिस्ट में पहले नंबर पर क्रिस गेल का नाम है। गेल ने पंजाब किंग्स के खिलाफ 61 छक्के लगाए हैं।

मैच का हाल
टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रयान रिकेल्टन बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और 11 गेंदों का सामना करने के बाद महज 9 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे तिलक वर्मा को मुकेश कुमार ने बिना खाता खोले पवेलियन भेजा। हालांकि, इसके बाद हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे सूर्यकुमार यादव ने तीसरे विकेट के लिए रोहित शर्मा के साथ मिलकर 53 रन जोड़े। रोहित 26 गेंदों में 5 चौके और एक छक्के की मदद से 35 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, सूर्यकुमार ने 36 गेंदों में 141 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 51 रन बनाए।

जवाब में दिल्ली कैपिटल्स ने 18.1 ओवर में चार विकेट खोकर इसे हासिल कर लिया। रिजवी ने एक बार फिर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 51 गेंद पर सात चौके और सार छक्के की मदद से 90 रन बनाए। वे अपने आईपीएल करियर के पहले शतक से चूक गए।

राज कपूर की विरासत पर मंडराया खतरा, पाकिस्तान के पेशावर में हवेली को बारिश और भूकंप से पहुंचा नुकसान

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राज कपूर की विरासत पर मंडराया खतरा, पाकिस्तान के पेशावर में हवेली को बारिश और भूकंप से पहुंचा नुकसान
भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों में गिने जाने वाले राज कपूर से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर एक बार फिर चर्चा में है। पेशावर स्थित उनकी पुश्तैनी हवेली का एक हिस्सा हाल ही में भारी बारिश और भूकंप के झटकों के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि इतिहास और सिनेमा प्रेमियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।

राज कपूर की हवेली को पहुंचा नुकसान
करीब एक सदी पुरानी यह हवेली कभी कपूर परिवार की पारिवारिक पहचान का केंद्र रही है। बताया जाता है कि लगातार हुई बारिश से पहले ही इसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी और उसके बाद आए भूकंप ने इसकी स्थिति को और नाजुक बना दिया। हवेली की दीवार का एक हिस्सा गिरने से यह आशंका और गहरी हो गई है कि यदि जल्द संरक्षण कार्य शुरू नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक इमारत गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

हवेली को मिला विरासत का दर्जा
इस हवेली को पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय विरासत का दर्जा दिया था। इसके बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा सके। अब स्थानीय विरासत विशेषज्ञों और सांस्कृतिक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि इस धरोहर को पूरी तरह नष्ट होने से बचाया जा सके।

पृथ्वीराज कपूर के परिवार से जुड़ी यह हवेली न सिर्फ कपूर खानदान के इतिहास का हिस्सा रही है बल्कि भारतीय सिनेमा की शुरुआती पीढ़ी की यादों से भी गहराई से जुड़ी हुई है। यही वह स्थान है जहां राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था। इस कारण यह भवन भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।