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बंगाल की शुभेंदु सरकार में दिखी BJP की सोशल इंजीनियरिंग, ब्राह्मण से लेकर मतुआ-राजवंशी के तक

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बंगाल की शुभेंदु सरकार में दिखी BJP की सोशल इंजीनियरिंग, ब्राह्मण से लेकर मतुआ-राजवंशी के तक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहली बार बीजेपी ने सत्ता हासिल कर इतिहास रच दिया है. ममता बनर्जी के लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले गढ़ को ध्वस्त करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत बीजेपी के कई बड़े नेता मौजूद रहे. शुभेंदु अधिकारी के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रामाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू ने मंत्री पद की शपथ ली. बीजेपी ने इस नई टीम के जरिए साफ संकेत दिया है कि अब बंगाल में पार्टी सिर्फ ध्रुवीकरण नहीं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग और क्षेत्रीय संतुलन के दम पर लंबी राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में है.

भद्रलोक और माहिश्य समीकरण पर बीजेपी का दांव
बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाकर बंगाल के भद्रलोक वर्ग और माहिश्य समुदाय दोनों को साधने की कोशिश की है. शुभेंदु एक प्रभावशाली ब्राह्मण परिवार से आते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक ताकत पूर्वी मेदिनीपुर के माहिश्य समाज में मानी जाती है. बीजेपी ने उनके जरिए सवर्ण, बौद्धिक और पारंपरिक नेतृत्व वर्ग को संदेश दिया है कि सत्ता अनुभवी और जमीनी नेता के हाथों में है.

मतुआ वोट बैंक को साधने की रणनीति
दक्षिण बंगाल में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मतुआ समुदाय को साधने के लिए बीजेपी ने अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाया है. उत्तर और दक्षिण 24 परगना तथा नदिया जिलों में मतुआ समाज का बड़ा प्रभाव है. बीजेपी ने CAA के बाद अब सत्ता में हिस्सेदारी देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि मतुआ समुदाय सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि सत्ता का भागीदार भी है.

राजवंशी चेहरों से उत्तर बंगाल को साधने की कोशिश
उत्तर बंगाल लंबे समय से उपेक्षा का आरोप लगाता रहा है. बीजेपी ने निशीथ प्रामाणिक को मंत्री बनाकर राजवंशी समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है. इसके जरिए पार्टी ने कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और दिनाजपुर जैसे इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है.

जंगलमहल और आदिवासी वोटरों को साधने का प्रयास
पुरुलिया, बांकुरा और झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों में बीजेपी को आदिवासी समाज का मजबूत समर्थन मिला था. खुदीराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल कर बीजेपी ने जंगलमहल के आदिवासी वोटरों को बड़ा संदेश दिया है. पार्टी इसे आदिवासी सम्मान और विकास से जोड़कर पेश कर रही है.

महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी
ममता बनर्जी का सबसे मजबूत आधार महिला वोट बैंक माना जाता रहा है. बीजेपी ने अग्निमित्रा पॉल को मंत्री बनाकर शहरी, शिक्षित और कामकाजी महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. अग्निमित्रा पॉल को आधुनिक और सशक्त बंगाली महिला चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है.

दिलीप घोष के जरिए ओबीसी कार्ड
बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष को मंत्रिमंडल में शामिल करना पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा माना जा रहा है. सद्गोप समुदाय से आने वाले दिलीप घोष के जरिए बीजेपी ने पिछड़े वर्गों को बड़ा संदेश दिया है. उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और आरएसएस पृष्ठभूमि को बीजेपी बंगाल में अपनी स्थायी ताकत बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है.

क्षेत्रीय संतुलन पर खास फोकस
नई कैबिनेट में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक बेल्ट और तटीय इलाकों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. बीजेपी ने यह दिखाने की कोशिश की है कि नई सरकार सिर्फ कोलकाता केंद्रित नहीं होगी, बल्कि पूरे बंगाल के क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर चलेगी.

‘कास्ट प्लस हिंदुत्व’ मॉडल पर आगे बढ़ रही बीजेपी
विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी ने बंगाल में वही सोशल इंजीनियरिंग मॉडल अपनाया है, जिसने उसे उत्तर प्रदेश और बिहार में सफलता दिलाई थी. ब्राह्मण नेतृत्व, मतुआ समुदाय को सुरक्षा, राजवंशियों को सम्मान और आदिवासियों को प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने बंगाल की राजनीति में नया सामाजिक समीकरण तैयार करने की कोशिश की है.

तमिलनाडु की सत्ता पर TVK का कब्जा, विजय कल लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

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तमिलनाडु की सत्ता पर TVK का कब्जा, विजय कल लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
तमिलनाडु में सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, TVK चीफ विजय ने शुक्रवार शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया। ऐसे में TVK चीफ विजय कल सुबह (8 मई) 11 बजे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं।

किन दलों ने दिया TVK को समर्थन?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में TVK ने अन्य दलों से सहयोग मांगा और इस आंकड़े तक पहुंच गई।

कांग्रेस के 5 विधायकों ने TVK को समर्थन दिया है। इसके अलावा CPI के 2 और CPI(M) के 2 विधायकों ने भी समर्थन दिया है। वहीं, VCK ने भी अपने 2 विधायकों का समर्थन TVK को दे दिया है।

एक आधिकारिक पत्र में, CPI (M) ने राज्य में सरकार बनाने के उद्देश्य से टीवीके को अपना समर्थन दिया, जबकि सीपीआई ने तमिलनाडु के लोगों के लिए स्थिर, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन के पक्ष में विजय के नेतृत्व वाली पार्टी को सशर्त समर्थन प्रदान किया।

त्रिची से इस्तीफा दे सकते हैं विजय
आपको बता दें अभिनेता ने नेता बने TVK प्रमुख विजय ने दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और दोनों में जीत हासिल की। ऐसे में ​​उम्मीद जताई जा रही है कि वे त्रिची से इस्तीफा देकर चेन्नई के पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने रहेंगे। विधानसभा चुनाव में विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक से इस्तीफा देने के बाद विधानसभा में टीवीके की प्रभावी संख्या 117 हो जाएगी।

विजय ने 6 और 7 मई को भी किया था दावा पेश
विजय ने 8 मई से पहले 6 और 7 मई को भी राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उस वक्त राज्यपाल ने कहा कि 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाए बिना वे सरकार बनाने का न्योता नहीं दे सकते हैं। उधर, विजय द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद चेन्नई स्थिति ऑफिस में जश्न का माहौल है। यहां ऑफिस के बाहर TVK कार्यकर्ताओं ने पटाखे जलाकर खुशी जाहिर की।

बंगाल में BJP का बड़ा दांव, अमित शाह ने किया शुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान

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बंगाल में BJP का बड़ा दांव, अमित शाह ने किया शुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी शुक्रवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगा दी। बीजेपी विधायक दल की बैठक और केंद्रीय नेतृत्व के साथ मंथन के बाद शुवेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंचे, जहां वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक अहम बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में शुवेंदु को विधायक दल का नेता चुना गया। अमित शाह के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी इस बैठक में शामिल हुए।

शनिवार सुबह 11 बजे लेंगे सीएम पद की शपथ
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं पश्चिम बंगाल BJP विधायक दल के नेता के रूप में चुने गए सुवेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा करता हूं। अमित शाह ने कहा कि जिन्हें पश्चिम बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। शुवेंदु अधिकारी शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह के लिए कोलकाता पहुंचीं दीया कुमारी
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण समारोह के लिए आए हैं, और मैं सभी को अपनी हार्दिक बधाई देती हूं। हमारे कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों और हमारे शीर्ष पार्टी पदाधिकारियों के दूरदर्शी नेतृत्व की बदौलत, हमारी सरकार भारी बहुमत के साथ बन रही है। यह अत्यंत गर्व का विषय है। मेरा मानना ​​है कि गुंडागर्दी, दमन और तुष्टीकरण की राजनीति का वह दौर, जिसने इतने वर्षों तक बंगाल को जकड़ रखा था, अब आखिरकार समाप्त हो गया है। जहां कहीं भी भाजपा सत्ता में होती है, हम रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। बंगाल वर्षों से पिछड़ा हुआ था; अब यहाँ एक सच्चा बदलाव आ गया है।

भारतीय टीम ने रचा इतिहास, पहली बार AFC U17 वूमेंस एशियन कप के नॉकआउट के लिए किया क्वालीफाई

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भारतीय टीम ने रचा इतिहास, पहली बार AFC U17 वूमेंस एशियन कप के नॉकआउट के लिए किया क्वालीफाई
भारत ने शुक्रवार को सूजौ ताइहू फुटबॉल स्पोर्ट्स सेंटर में एएफसी अंडर 17 महिला एशियन कप चीन 2026 के ग्रुप बी में लेबनान को 4-0 से हराकर क्वार्टर-फाइनल में जगह पक्की कर ली है। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम जापान और ऑस्ट्रेलिया के बाद ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही। भारत और लेबनान दोनों टीमों को अपनी उम्मीदें जिंदा रखने के लिए जीत की दरकार थी।

दूसरे मिनट में हासिल की बढ़त
मैच के पांचवें मिनट में ही लेबनान ने लगभग पहला गोल कर ही दिया था, जब कप्तान जिया फ्रांगीह ने यारा गीतानी के लिए बॉक्स में एक अच्छा लॉब भेजा, लेकिन भारत की गोलकीपर मुन्नी ने तेजी से अपनी लाइन से हटकर बॉल छीन ली। एएफसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने दो मिनट बाद मैच में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। टीम की तरफ से प्रीतिका बर्मन ने शानदार गोल दागा। उन्होंने जोया बू असफ को पीछे छोड़ा, फिर बॉक्स के अंदर यास्मिना नासर को चकमा देकर लेबनान की गोलकीपर मैरी जो चेबली के ऊपर से बॉल को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया।

भारत 9वें मिनट में अपनी बढ़त दोगुनी करने के करीब पहुंच गया था, लेकिन अनुष्का कुमारी के प्रयास को नासर ने नाकाम कर दिया। 14वें मिनट में गीतानी के पास स्कोर बराबर करने का मौका था, लेकिन उनकी कर्लिंग कोशिश को भारत के कप्तान एलिजाबेद लाकड़ा ने नाकाम कर दिया, जबकि दूसरी तरफ चेबली ने प्रीतिका को करीब से दो बार गोल करने से रोका। हालांकि, भारत ने बॉल पर दबदबा बनाए रखा और 36वें मिनट में अपना दूसरा गोल किया। अल्वा सेनजाम ने जबरदस्त दौड़ लगाते हुए फ्रांगीह को पीछे छोड़ा, फिर थंबालखोंग मणिपुर की खिलाड़ी ने शांति से चेबली को पीछे छोड़कर भारत को ब्रेक तक आरामदायक बढ़त दिला दी।

नागपुर में भीषण आग से 400 से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख

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नागपुर में भीषण आग से 400 से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख
नागपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खैरी गांव स्थित एक बड़े कार गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरा परिसर धुएं और आग की लपटों से घिर गया। आसपास मौजूद लोगों ने जब आसमान में उठता काला धुआं देखा तो इलाके में दहशत फैल गई। कुछ ही मिनटों में वहां खड़ी सैकड़ों पुरानी गाड़ियां आग की चपेट में आ गईं और एक-एक कर जलने लगीं।

भीषण गर्मी के बीच हुई इस घटना ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 400 से ज्यादा पुरानी कारें, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य ज्वलनशील सामान जलकर राख हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकलने तक का मुश्किल से समय मिला। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

नागपुर के खैरी गांव में कैसे लगी इतनी बड़ी आग?
यह पूरा मामला नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के खैरी-कन्हान मार्ग स्थित एक बड़े वाहन गोदाम का बताया जा रहा है। यहां पुरानी और सेकेंड हैंड कारों का कारोबार किया जाता था। गोदाम में बड़ी संख्या में खराब वाहन, मरम्मत के लिए रखी गई कारें, पुराने टायर, बैटरी, प्लास्टिक पार्ट्स और अन्य सामान मौजूद था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार दोपहर अचानक गोदाम के एक हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि मामूली शॉर्ट सर्किट होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैल गई। तेज गर्मी और ज्वलनशील सामान की वजह से आग ने विकराल रूप ले लिया।

लोगों का कहना है कि आग इतनी तेजी से बढ़ी कि कर्मचारियों को कुछ समझ ही नहीं आया। कई गाड़ियों में धमाके जैसी आवाजें आने लगीं, जिससे आसपास रहने वाले लोग भी डर गए। आग की ऊंची लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अश्विन जोशी का निधन

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अश्विन जोशी का निधन
मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अश्विन जोशी का शुक्रवार को निधन हो गया है। वे 66 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से वे बीमार चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। आज, 8 मई 2026 सुबह को अचानक सीने में दर्द के चलते उन्हें इलाज के लिए शेल्बी हॉस्पिटल भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उनके निधन की खबर आते ही कांग्रेस, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई कांग्रेस नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

ऐसा रहा राजनैतिक सफर
अश्विन जोशी इंदौर की राजनीति के दिग्गज और कांग्रेस के कद्दावर नेता थे।
इंदौर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे । कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती की जाती थी ।
वे पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता महेश जोशी के भतीजे थे।
वे इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे हैं।
जोशी को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी भी माना जाता था।
जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी।
अश्विन जोशी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा था और भाजपा उम्मीदवार गोपीकृष्ण नेमा को 3 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर जीत हासिल की थी।
इसके बाद 2003 और 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।

कांग्रेस नेताओं ने जताया शोक
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री स्व महेश जोशी जी के भतीजे एवं इंदौर में कांग्रेस के पूर्व विधायक अश्विनी जोशी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। इंदौर और मध्य प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में उनका सदा विशेष स्थान रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे। ऊँ शांति

कौन होते हैं कुलदेवता? इनके बिना क्यों हर मांगलिक कार्य नहीं माना जाता है पूरा

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कौन होते हैं कुलदेवता? इनके बिना क्यों हर मांगलिक कार्य नहीं माना जाता है पूरा
सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार, प्रत्येक परिवार या वंश के एक संरक्षक देवता होते हैं, जिन्हें कुलदेवता या कुलदेवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुलदेवता उस वंश के सुरक्षा कवच की तरह होते हैं। किसी भी शुभ काम जैसे कि विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या यज्ञ में सबसे पहले कुलदेवता का आह्वान किया जाता है। अगर उन्हें याद न किया जाए, तो माना जाता है कि उस काम में बाधाएं आती हैं और परिवार की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है,

कौन होते हैं कुलदेवता?
कुल का मतलब है वंश और देवता का मतलब है आराध्य। यानी वह देवता जो आपके पूरे वंश के संरक्षक हैं। हिंदू धर्म में कुलदेवता या कुलदेवी का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सरल शब्दों में कहें तो, कुलदेवता वे देवी-देवता हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी से अपने वंश या परिवार की रक्षा करते आ रहे हैं। जैसे कि हमारा शारीरिक डीएनए पूर्वजों से मिलता है, वैसे ही कुलदेवता हमारे परिवार की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र होते हैं।

कुलदेवता के बिना क्यों अधूरा है मांगलिक काम?
शास्त्रों के अनुसार, कुलदेवता की पूजा के बिना किया गया कोई भी शुभ काम निष्फल यानी अधूरा माना जाता है। इसके पीछे 3 बड़ी वजह हैं –
सुरक्षा कवच का अभाव
कुलदेवता आपके घर और वंश के रक्षक की तरह होते हैं। किसी भी मांगलिक काम में जब बाहर से कई लोग आते हैं, तो कई तरह की नकारात्मक ऊर्जा भी आती हैं। कुलदेवता की पूजा करने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बन जाता है, जिससे शुभ काम बिना रुकावट के पूरे हो जाते हैं।

पितरों की नाराजगी
कुलदेवता का सीधा संबंध पूर्वजों से होता है। अगर कुलदेवता को याद नहीं किया जाता, तो पितृ भी उस पूजा को स्वीकार नहीं करते। ऐसी स्थिति में मांगलिक काम के दौरान घर में कलह, बीमारी या अचानक कोई बाधा आने की आशंका बढ़ जाती है।

अन्य देवताओं की पूजा का फल न मिलना
बड़े-बुजुर्गों के मुंह से आपने सुना भी होगा कि कुलदेवता रुष्ट तो सब रुष्ट। अगर आपके कुलदेवता आपसे खुश नहीं हैं, तो आप चाहे कितनी भी बड़ी पूजा या यज्ञ कर लें, अन्य देवी-देवता उसका फल नहीं देते हैं। वे आपके घर के द्वारपाल की तरह हैं। उनके माध्यम से ही आपकी प्रार्थना ईश्वर तक पहुंचती है।

मांगलिक कामों में कुलदेवता की जरूरी रस्में
निमंत्रण देना – विवाह का पहला कार्ड हमेशा कुलदेवता के चरणों में रखा जाता है।
पहला मुंडन – बच्चे के जन्म के बाद उसका पहला मुंडन कुलदेवता के मंदिर में ही किया जाता है, ताकि बच्चा उनके संरक्षण में रहे।
फेरों के बाद मत्था टेकना – विवाह के बाद दुल्हा-दुल्हन को सबसे पहले कुलदेवता का आशीर्वाद लेने जाते हैं, ताकि उनके नए जीवन की शुरुआत शुभ रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ट्रेन को झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को किया रवाना

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ट्रेन को झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को किया रवाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ साक्षी है कि सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से प्रभावी होती है। सोमनाथ की प्रत्येक ईट, भक्ति का ताप और भारत के पुनरुत्थान का गौरव कहती है। इतिहास में कई बार मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। सत्रह बार आक्रमण के बाद भी शाश्वत शिव यहीं विराजते हैं। मंदिर के इतिहास में वर्ष 2026 खास महत्व रखता है। एक हजार वर्ष पहले 1026 में पहली बार मंदिर पर आक्रमण हुआ था। इसी वर्ष जनवरी में आक्रमण के ठीक एक हजार वर्ष बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ में भव्य स्वाभिमान पर्व मनाया गया। बाबा सोमनाथ की दिव्यता और भव्यता आज भी अलौकिक और अद्वितीय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम जत्थे को रवाना कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत निकाली जा रही है।

मुख्यमंत्री को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप भेंट किया त्रिशूल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया और कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश की प्रमुख 21 नदियों के जल कलशों का भी पूजन-अर्चन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर ढोल-धमाकों और डमरू की थाप पर उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 21 नदियों का जल अर्पित करने के लिए यात्रियों को जल कलश तथा ध्वजा सौंपी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया। कार्यक्रम में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा के साथ श्री रविन्द्र यती, श्री राहुल कोठारी, अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।

भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ यात्रा रहेगी अविस्मरणीय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा आदि जिलों के तीर्थयात्रियों को लेकर यह ट्रेन, 8 मई को सोमनाथ पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन के सभी यात्रियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति “जियो और जीने दो” की संस्कृति है। भगवान के जप, सत्संग, कीर्तन के साथ परस्पर स्नेह और प्रेम के वातावरण में की गई यात्रा सभी भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहेगी। हम अपने जीवन का उपयोग भाईचारे के साथ कल्याणकारी कार्यों में करें और सम्पूर्ण मानव जाति को परिवार की तरह देखते हुए जीवनयापन करें, यही भारतीय संस्कृति का मूल्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में जारी सांस्कृतिक जागरण का अभियान राष्ट्रीय एकता को निरन्तर सुदृढ़ कर रहा है। भगवान श्रीराम के अयोध्या धाम और भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा के साथ ही बंगाल के कालीघाट तक सनातन संस्कृति की ध्वजा चारों तरफ लहरा रही है। गंगोत्री से गंगा सागर तक यह भाव सर्वत्र व्याप्त है।

बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस

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बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने और बस्तर के विकास को गति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 और 20 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहेंगे। यह दौरा सुरक्षा और विकास दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जगदलपुर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की उच्चस्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

नक्सल उन्मूलन अभियान के बाद पहली बार बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इस स्तर की बैठक आयोजित की जा रही है। लंबे समय तक देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले बस्तर में अब सुरक्षा स्थिति में सुधार आया है। केंद्र सरकार इस सुधार को एक सकारात्मक संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगा फोकस
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित चर्चा होगी। नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार किया जाएगा। राज्यों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा। सीमावर्ती जिलों में खुफिया साझेदारी बढ़ाने की योजना बनेगी। सड़क, स्वास्थ्य और संचार जैसी आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया जाएगा।

इस बैठक में जिन राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अमित शाह का यह दौरा केवल सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

कई परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं गृह मंत्री
जानकारी मिली है कि गृह मंत्री बस्तर में चल रही कई प्रमुख विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं। इस दौरान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और लोकार्पण की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और विकास साथ-साथ की रणनीति पर काम कर रही है। बस्तर प्रवास के दौरान शाह स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में केंद्रीय गृह मंत्री और कई मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक मजबूत राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश होगी कि सरकार अब बस्तर को संघर्ष के नहीं, बल्कि विकास और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।

बैठक का संभावित एजेंडा
बैठक का संभावित एजेंडा भी तय किया गया है। इसमें 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का रोडमैप तैयार किया जा सकता है। सुरक्षा कैंपों और सड़क नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा होगी। आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा योजनाओं को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। ड्रोन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने की योजना है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस्तर में होने वाली यह उच्चस्तरीय बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास मॉडल के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।

बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग

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बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग
जबलपुर बरगी डैम में 30 अप्रैल को क्रूज हादसे (Bargi Dam Cruise Tragedy) में 13 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस घटना ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है। भोपाल के निवासी केके राठी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। जिसमें इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में इस घटना का कारण प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानव की अनदेखी को बताया गया है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में संचालित सभी वॉटर स्पोर्ट्स और क्रूज सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने की मांग की गई है।

पर्यटन विभाग पर लपवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
याचिककर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय रहित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन भी नहीं किया गया। खराब मौसम और येलो अलर्ट के बाद भी क्रूज संचालन जारी रखा गया। याचिका में यह दावा किया गया है कि हादसे से पहले यात्रियों को प्राप्त सुरक्षा जानकारी भी नहीं दी गई थी। न ही लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाया गया था। यदि सही तरीके से सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो इस घटना को टाला जा सकता था। पर्यटन विभाग की लापरवाही से गई लोगों की मौत हो गई। इसलिए हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच पूरी होने तक क्रूज और बोट सेवाओं पर रोक की मांग
याचिका में जांच पूरी होने तक मध्य प्रदेश में सभी क्रूज और वोट सेवाओं पर अस्थाई रूप से बंद करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा राज्य के सभी वॉटर स्पोर्ट्स केंद्रों और पर्यटन स्थलों का सेफ्टी ऑडिट करने की मांग भी कोर्ट के सामने रखी गई है। ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हो। पर्यटकों के लिए सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

जिला कोर्ट ने दिखाई सख्ती, नाव संचालक को फटकार
बुधवार को लोअर कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नाव संचालक को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने पाया की नाव संचालक ने अनुभव होते हुए यात्रियों की मदद नहीं की और खुद को बचाकर वहां से निकल गया। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कोर्ट ने BNS 2023 की धारा 106 और 110 के तहत चालक समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया था।