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पोस्ट ऑफिस RD: ₹100 का छोटा निवेश, 5 साल बाद लाखों का बड़ा रिटर्न

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पोस्ट ऑफिस RD: ₹100 का छोटा निवेश, 5 साल बाद लाखों का बड़ा रिटर्न
आज के दौर में जब शेयर बाजार की उठापटक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के जोखिम लोगों को डराते हैं, तब भारत का सबसे पुराना और विश्वसनीय संस्थान ‘भारतीय डाकघर’ (India Post) एक सुरक्षित ढाल बनकर सामने खड़ा है। एक जमाना था जब डाकघर का मतलब केवल चिट्ठियों और मनीऑर्डर तक सीमित था, लेकिन आज का डाकघर एक ‘अत्याधुनिक मिनी बैंक’ में तब्दील हो चुका है। यहां फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से लेकर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं मध्यम वर्ग की पहली पसंद बनी हुई हैं।

मिडिल क्लास की पसंद
बचत की दुनिया में मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है- एकमुश्त मोटी रकम का अभाव। इसी समस्या का समाधान है पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) स्कीम। इसे आप ‘किश्तों वाली बचत’ कह सकते हैं। यह योजना उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपनी मासिक आय में से एक छोटा हिस्सा बचाकर भविष्य के लिए बड़ा फंड खड़ा करना चाहते हैं।

योजना की खासियतें और निवेश की सीमा
डाकघर की RD स्कीम की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सुगमता है। आप मात्र 100 रुपये प्रति माह से अपना खाता खोल सकते हैं। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, यानी आप अपनी क्षमता के अनुसार 500, 1000 या 5000 रुपये कितनी भी राशि हर महीने जमा कर सकते हैं। बस शर्त इतनी है कि आपका पोस्ट ऑफिस में एक बचत खाता (Saving Account) होना अनिवार्य है।

ब्याज दर और कंपाउंडिंग का जादू
वर्तमान में पोस्ट ऑफिस RD पर 6.7% की वार्षिक ब्याज दर मिल रही है। यह ब्याज साधारण नहीं है; इसमें ‘कंपाउंडिंग’ (चक्रवृद्धि ब्याज) का जादू काम करता है। हर तीन महीने (त्रैमासिक) में आपके द्वारा जमा की गई राशि पर ब्याज की गणना की जाती है और उसे मूलधन में जोड़ दिया जाता है। इससे समय बीतने के साथ आपकी राशि रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने लगती है।

समझिए गणित: कैसे जुड़ेंगे लाखों रुपये?
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक अनुशासित निवेशक हैं और हर महीने अपनी सैलरी से 3,500 रुपये बचाकर इस स्कीम में डालते हैं।

समय सीमा: 5 साल (60 महीने)
कुल निवेश: 2,10,000 रुपये
मिलने वाला ब्याज: 39,776 रुपये
मैच्योरिटी पर कुल राशि: 2,49,776 रुपये

सुरक्षा और गारंटी
चूंकि यह योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित है, इसलिए इसमें आपके पैसे के डूबने का शून्य जोखिम है। बैंक भले ही उतार-चढ़ाव देख सकते हैं, लेकिन डाकघर की गारंटी अडिग रहती है।

यदि आप भी अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी या किसी बड़े लक्ष्य के लिए धीरे-धीरे पैसा जोड़ना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की RD एक शानदार विकल्प है। यह न केवल आपको बचत करना सिखाती है, बल्कि आपकी छोटी-छोटी बूंदों से भविष्य का समंदर तैयार करती है। आज ही अपने नजदीकी डाकघर जाएं और एक बेहतर कल की नींव रखें।

भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन भरा फॉर्म

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भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन भरा फॉर्म
देश में आज से जनगणना की पहली प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने खुद जनगणनी की पहली प्रक्रिया का फॉर्म ऑनलाइन भरा है। आज देश के तीन दिग्गजों ने अपने फॉर्म भरने के साथ इसकी शुरूआत की।

राष्ट्रपति ने जनगणना में भाग लेते हुए अपनी तस्वीर साझा की और लिखा कि राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए भारत सरकार की ‘स्व-गणना’ (self-enumeration) पहल में राष्ट्रपति ने भाग लिया। यह जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यम से आयोजित की जा रही है।

पीएम मोदी ने पोस्ट किया अपना फोटो
अपना फॉर्म खुद भरने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वह भारत के लोगों से अपील करते हैं कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।

आपके घर भी आएगी जनगणना टीम
गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि आज से आरंभ हो रही जनगणना की पहली प्रक्रिया ‘आवास गणना’ के तहत अपने दिल्ली स्थित आवास पर स्व-गणना (Self-Enumeration) का फॉर्म भरा। भारत की विकास यात्रा को गति देने और प्रत्येक देशवासी तक सरकार की योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने में इस प्रक्रिया की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। जल्द ही जनगणना की टीम आपके घर भी आएगी। आप भी इस राष्ट्रीय दायित्व में पूर्ण सहयोग करते हुए मांगी गई आवश्यक जानकारियां प्रदान करें।

एमपी बोर्ड परीक्षा 2025: छात्रों की जेब पर बोझ, ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ का साथ भी छूटा

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एमपी बोर्ड परीक्षा 2025: छात्रों की जेब पर बोझ, ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ का साथ भी छूटा
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नौवीं से 12वीं तक की नई प्रवेश नीति जारी कर दी है। इसके तहत 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म 15 मई से भरे जाएंगे। इस बार मंडल ने 10वीं व 12वीं के परीक्षा शुल्क, नामांकन सहित फीस और अन्य शुल्कों में 25 फीसद से लेकर 80 फीसद तक की बढ़ोतरी की है, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

शुल्क बढ़ा
नई व्यवस्था के अनुसार नियमित विद्यार्थियों को अब 1200 रुपये की जगह 1500 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा, जबकि स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए शुल्क 1600 रुपये निर्धारित किया गया है। नौवीं कक्षा में नामांकन शुल्क भी 350 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है।

इसके अलावा, 10 वर्ष पुरानी अंकसूची की प्रति प्राप्त करने का शुल्क 600 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं डीएलएड परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है। नियमित विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए सात हजार रुपये देने होंगे, जबकि दूसरे अवसर के लिए विषयों के अनुसार तीन हजार से सात हजार रुपये तक शुल्क तय किया गया है।

वहीं, स्कूलों की संबद्धता फीस में भी इजाफा किया गया है। 10वीं के लिए सरकारी स्कूलों को 20 हजार और निजी स्कूलों को 22 हजार रुपये देने होंगे, जबकि 12वीं के लिए यह राशि क्रमशः 27 हजार और 30 हजार रुपये होगी।

नई नीति में नियमों को भी सख्त किया गया है। यदि किसी छात्र को गलत तरीके से प्रवेश दिया जाता है, तो संबंधित संस्था के प्राचार्य पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। यह राशि छात्र से नहीं वसूली जाएगी।

साथ ही गंभीर मामलों में संस्था की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा, मंडल ने 10वीं कक्षा में वर्षों से लागू “बेस्ट ऑफ फाइव” प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब सभी विषयों के अंक अनिवार्य रूप से जोड़े जाएंगे। वहीं नौवीं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष तय की गई है।

ऑनलाइन प्रक्रिया और डमी प्रवेश पत्र अनिवार्य
प्रवेश नीति के अनुसार, कक्षा नौवीं का ऑनलाइन नामांकन 15 मई से 30 सितंबर तक किया जा सकेगा। वहीं 10वीं-12वीं के परीक्षा फार्म 15 मई से 15 सितंबर तक भरे जाएंगे। आवेदन पत्र में अपार आईडी नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

परीक्षा फार्म भरने के सात दिन बाद छात्रों को डमी प्रवेश पत्र जारी किया जाएगा। स्कूल प्राचार्यों को इसे डाउनलोड कर विद्यार्थियों और अभिभावकों से जानकारी का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।

समय सीमा में ही सुधारा
यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो उसे निर्धारित समय सीमा में ही सुधारा जा सकेगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्था द्वारा समय पर घोषणा-पत्र अपलोड नहीं किया गया, तो विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी नहीं किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन मान्य नहीं होगा।

राघव चड्ढा को झटका: AAP ने डिप्टी लीडर पद से हटाया

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राघव चड्ढा को झटका: AAP ने डिप्टी लीडर पद से हटाया
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है। अब उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित किया है कि चड्ढा को पार्टी की ओर से बोलने का अवसर न दिया जाए।

जानकारी के अनुसार, इस फैसले का असर राघव चड्ढा के संसद में बोलने के समय पर भी पड़ेगा। बताया जा रहा है कि अब उन्हें मिलने वाले समय में कटौती की जा सकती है। पिछले कुछ समय से चड्ढा संसद में जनहित से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे, जिनमें महंगाई और आम लोगों से संबंधित विषय शामिल थे।

पार्टी लाइन से अलग रुख बना कारण?
जानकारों का कहना है कि राघव चड्ढा कई बार पार्टी से चर्चा किए बिना ही सदन में मुद्दे उठा रहे थे। वे किन विषयों पर बोलने वाले हैं, इसकी जानकारी भी पार्टी नेतृत्व को पहले से नहीं दी जाती थी। इसको लेकर पार्टी की ओर से उन्हें पहले चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस निर्णय का कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी की तय रणनीति से अलग रुख अपनाना इस फैसले के पीछे की वजह हो सकती है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा लंबे समय से चल रही थी कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन से अलग विचार रखते हैं। हाल ही में कुछ बड़े मामलों पर उनकी चुप्पी ने भी इन अटकलों को और बल दिया है।

बॉक्स ऑफिस पर बरकरार धुरंधर 2 का ‘खौफ’

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बॉक्स ऑफिस पर बरकरार धुरंधर 2 का ‘खौफ’
धुरंधर 2 रिलीज के पहले दिन से बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच रही है और 14वें दिन रणवीर सिंह ने अपनी इस फिल्म से वो कर दिखाया है जो बॉलीवुड के इतिहास में कोई और एक्टर नहीं कर पाया. आदित्य धर की यह फ़िल्म अब रुकने वाली नहीं है, और अभी बॉक्स ऑफिस पर और बड़े कमाल करने वाली है. फिलहाल दूसरे हफ़्ते में भी इसका शानदार सफ़र जारी है. जानते हैं इस फिल्म ने 14वें दिन कौन सा बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

धुरंधर 2 महज 14 दिनों में बनी 900 करोड़ी
बता दें कि रणवीर सिंह की हालिया रिलीज स्पाई-एक्शन थ्रिलर, ‘धुरंधर 2’ ने रिलीज के 14वें दिन फाइनली 900 करोड़ के क्लब में एंट्री कर ली इसी के साथ ये फिल्म इस बड़ी उपलब्धि को हासिल करने वाली पहली हिंदी फ़िल्म बन गई है. इस फिल्म ने 13वें दिन 27.75 करोड़ के कलेक्शन किया था. जिसके इसका घरेलू नेट कलेक्शन 899.92 करोड़ तक पहुंच गया था. 14वें दिन सुबह-सुबह ही फिल्म 900 करोड़ी बन गई. इसी के साथ इसने अपने पहले पार्ट के 895 करोड़ के लाइफ़टाइम टोटल को पीछे छोड़ दिया है.

भारत में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फ़िल्म बनी
900 करोड़ से ज्यादा की कमाई के साथ, धुरंधर 2 ने धुरंधर (894.49 करोड़) की लाइफ़टाइम कमाई को पीछे छोड़ते हुए, भारत में अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फ़िल्म का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. कुल मिलाकर, यह 900 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली तीसरी भारतीय फ़िल्म बन गई है और फ़िलहाल भारतीय बॉक्स ऑफ़िस पर तीसरी सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म भी बन गई है. आने वाले दिनों में, यह बाहुबली 2 (1031 करोड़) को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर आ जाएगी.

भारत में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली टॉप 10 फ़िल्में (नेट कोईमोई के आंकड़े के मुताबिक)
पुष्पा 2– 1265.97 करोड़
बाहुबली 2 – 1031 करोड़
धुरंधर 2– 906.13 करोड़ (14 दिन के दोपहर 3 बजे तक के आंकड़े)
धुरंधर– 894.49 करोड़
केजीफएफ 2 – 859.7 करोड़
आरआरआर – 772 करोड़
कल्कि 2898एडी – 653.21 करोड़
जवान– 640.42 करोड़
स्त्री 2 – 627.5 करोड़
कांतारा चैप्टर 1 – 622.41 करोड़

करियर में सफलता और तरक्की के लिए ‘विकट संकष्टी चतुर्थी’ है खास

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नौकरी में बार-बार आ रही है बाधा? तो विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन ऐसे करें विघ्नहर्ता को प्रसन्न
जीवन में जब भी कोई काम अचानक अटकने लगे या कठिन मेहनत के बाद भी मनचाहा फल न मिले, तो हम अक्सर इसे अपनी फूटी किस्मत का दोष मान लेते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये केवल किस्मत नहीं बल्कि हमारे ग्रहों की चाल में आने वाली रुकावटें भी हो सकती हैं।

5 अप्रैल 2026, रविवार को पड़ने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी (Vikat Sankashti Chaturthi 2026 Date) का पावन दिन इन्हीं बाधाओं को दूर करने और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद पाने का सबसे बड़ा अवसर है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे गणपति की विशेष कृपा से कुंडली के बाधक योग शांत हो सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह दिन आत्म-चिंतन और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री।

विघ्नहर्ता और ग्रहों का गहरा संबंध
ज्योतिष में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और रिद्धि-सिद्धि का स्वामी माना गया है। विशेष रूप से बुध ग्रह पर इनका बहुत गहरा प्रभाव होता है। यदि आपकी कुंडली में बुध कमजोर स्थिति में है, तो इससे निर्णय लेने में भारी परेशानी, व्यापार में हानि और वाणी में दोष जैसी गंभीर समस्याएं आ सकती हैं।

संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन पर गणेश जी की सच्ची आराधना करने से बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे हमारे विचारों और कार्यों में स्पष्टता आती है। इसके अलावा, केतु के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने के लिए भी गणेश जी की पूजा सबसे अचूक और सरल उपाय मानी जाती है। जब हम सहजता से गणपति का ध्यान करते हैं, तो ग्रहों के कारण आने वाली मानसिक दुविधाएं दूर होती हैं और हमें अपने व्यवसाय के बेहतर संचालन की नई प्रेरणा मिलती है।

बाधक योगों से मुक्ति की राह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार हमारी कुंडली में कुछ ऐसे बाधक योग बन जाते हैं, जो अचानक हमारे बनते हुए कामों में बड़ी अड़चनें पैदा करने लगते हैं। असल में शनि देव भी ऐसे कठिन समय में हमें अनुशासन, संयम और असीम धैर्य का पाठ पढ़ाते हैं। उनकी दी गई यह सीख हमारी अपनी ही कमियों को पहचानने और उन्हें समय पर सुधारने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत होती है।

संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत और विधि-विधान से किया गया पूजन इन चुनौतीपूर्ण समय के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में बहुत मददगार साबित होता है। जब हम पूरी श्रद्धा के साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश का ध्यान करते हैं, तो मन की सारी पुरानी उलझनें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। इससे राहु जैसे छाया ग्रहों के कारण पैदा होने वाली बाधाएं और भ्रम भी शांत हो जाते हैं।

तनाव दूर करने का सरल मार्ग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को हमारे ‘मन’ का स्वामी माना गया है। हमारी भावनाओं का उतार-चढ़ाव और मानसिक स्थिति काफी हद तक चंद्रमा की स्थिति पर ही निर्भर करती है। संकष्टी चतुर्थी की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना केवल एक पुरानी धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मन को शांत और एकाग्र करने का एक बहुत ही तार्किक तरीका भी है।

जब हम व्रत के अनुशासन के साथ चंद्रमा की शीतलता का ध्यान करते हैं, तो मन की चंचलता दूर होती है। यह मानसिक शांति हमें राहु जैसे ग्रहों के कारण पैदा होने वाले भ्रम और डर से लड़ने की अद्भुत शक्ति देती है। जब हमारा मन पूरी तरह शांत होता है, तब हम अपने व्यवसाय और जीवन के अन्य क्षेत्रों में सही निर्णय ले पाते हैं, जिससे हमारी बड़ी इच्छाएं पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छोला क्षेत्र में खेड़ापति हनुमान जन्मोत्सव पर की पूजा-अर्चना

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छोला क्षेत्र में खेड़ापति हनुमान जन्मोत्सव पर की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के छोला क्षेत्र में जन आस्था के केंद्र प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचकर हनुमान जन्मोत्सव में हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का खेल और सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अंगवस्त्रम से स्वागत किया और गदा भेंट की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं को भी हनुमान जयंती की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मंदिर परिसर में भंडारे और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम भी हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं हनुमान प्राकट्योत्सव की मंगलकामनाएं

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं हनुमान प्राकट्योत्सव की मंगलकामनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को हनुमान प्राकट्योत्सव की मंगलकामनाएं और बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की है कि हनुमान जी की कृपा सब पर बनी रहे, उनके आशीर्वाद से सबको सद्बुद्धि-यश और कीर्ति प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रार्थना की है कि पवन पुत्र बजरंगबली सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें। सभी के जीवन में सुख-समृद्धि, संपन्नता का आलोक प्रकाशित हो।

पूर्व CM के बेटे अमित जोगी को हाई कोर्ट ने ठहराया हत्या का दोषी

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को NCP नेता की हत्या के मामले में दोषी ठहराया
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को NCP नेता रामावतार जग्गी की हत्या मामले में दोषी करार दे दिया। 2003 में हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए तीन हफ्तों के अंदर कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में कार्यवाही फिर से शुरू की थी।

2003 में हुई थी NCP नेता की हत्या
CBI के वकील वैभव ए गोवर्धन ने PTI को बताया कि, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सरेंडर करने का निर्देश जारी किया है। मालूम हो कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून, 2003 को हुई थी। जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे।

ट्रायल कोर्ट ने किया था सभी आरोपों से बरी
इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया था। CBI ने अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। वहीं 31 मई, 2007 को रायपुर की ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाया था। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था।

हाई कोर्ट ने देरी के आधार पर खारिज की थी याचिका
CBI ने बाद में इस बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट ने 2011 में देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी। छत्तीसगढ़ सरकार और रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गईं।

इसके बाद पिछले साल नवंबर में, SC ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से CBI की उस याचिका पर नए सिरे से विचार करने को कहा था, जिसमें अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई थी।

बंगाल चुनाव: छत्तीसगढ़ के रणनीतिकारों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, 56 सीटों पर घेराबंदी शुरू

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बंगाल के 56 विधानसभा क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के नेताओं ने डाला डेरा
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के शंखनाद के साथ ही छत्तीसगढ़ भाजपा के धुरंधरों ने बंगाल में मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाने के लिए छत्तीसगढ़ भाजपा के रणनीतिकारों और जमीनी कार्यकर्ताओं की पूरी फौज तैनात की गई है।

इस चुनावी रण में सबसे अहम बनकर उभरे हैं प्रदेश भाजपा महामंत्री (संगठन) पवन साय, जिन्हें बंगाल की 56 विधानसभा सीटों के बूथ प्रबंधन की कमान सौंपी गई है।

पवन साय बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेंगे
पवन साय के कंधों पर जिम्मेदारी है कि वह बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ के छह निगम-मंडल अध्यक्ष फरवरी से ही बंगाल के अलग-अलग जिलों में डेरा डाले हुए हैं। अब इस खेमेबंदी को मजबूती देने के लिए प्रदेश के कद्दावर विधायकों और पूर्व मंत्रियों को भी रणक्षेत्र में उतारा गया है।

मूणत-शर्मा के साथ युवा विधायकों की टोली सक्रिय
पूर्व मंत्री राजेश मूणत और शिवरतन शर्मा पहले से ही बंगाल की गलियों में कमल खिलाने के लिए सक्रिय हैं। अब उनके साथ महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, दुर्ग ग्रामीण के ललित चंद्राकर, पूर्व विधायक रजनीश सिंह और मोतीराम चंद्रवंशी जैसे नेता बंगाल पहुंच चुके हैं।

मुख्य काम मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाना
इन नेताओं का मुख्य काम मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाना और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूक करना है। बंगाल की चुनावी पिच अपनी राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम है, जिसे लेकर निर्वाचन आयोग बेहद सख्त है।

पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता सतर्कता बरत रहे
छत्तीसगढ़ से गए भाजपा पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता भी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं और पल-पल की जानकारी साझा कर रहे हैं। चर्चा है कि यदि बंगाल के नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं, तो मिशन बंगाल में पसीना बहाने वाले छत्तीसगढ़ी नेताओं का कद दिल्ली के दरबार में बढ़ जाएगा।