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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

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मुख्यमंत्री निवास में होली के रंगों की बौछार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

शीतला माता का पर्व किस दिन, जानिए सटीक डेट

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शीतला माता का पर्व किस दिन, जानिए सटीक डेट
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शीतला अष्टमी मनाई जाती है, जिसे बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व होली से 8 दिन बाद मनाया जाता है। इस खास अवसर पर मां शीतला देवी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस दिन महिलाएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कब मनाई जाएगी शीतला अष्टमी।

शीतला अष्टमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Sheetla Ashtami 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को रात 01 बजकर 54 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी।
शीतला अष्टमी के दिन पूजा मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 27 मिनट तक।

शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi)
इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
चौकी पर मां शीतला देवी की प्रतिमा को विरजामन करें और उन्हें रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
दीपक जलाकर आरती करें।
व्रत कथा का पाठ करें।
बासी भोग अर्पित करें।
जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।

इन बातों का रखें ध्यान
इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में दान करें
किसी से वाद-विवाद न करें।
किसी के बारे में गलत न सोचें।
तामसिक भोजन का सेवन न करें।

विकास दर में तेजी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज का बड़ा योगदान

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विकास दर में तेजी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज का बड़ा योगदान
जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों ने तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। इस तिमाही भारत की जीडीपी 8.2 प्रतिशत बढ़ी। यह 2023-24 की चौथी तिमाही के बाद सबसे ज्यादा है, जब अर्थव्यवस्था में 8.4 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। इस वर्ष पहली तिमाही में ग्रोथ 7.8 प्रतिशत और 2024-25 की दूसरी तिमाही में 5.6 प्रतिशत थी। इस ग्रोथ का श्रेय मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing growth) और सर्विसेज (services sector) में तेज ग्रोथ को दिया जा सकता है।

आर्थिक आंकड़ों की गणना दो पैमाने पर की जाती है- स्थिर मूल्यों पर और मौजूदा मूल्यों पर। जीडीपी में 8.2 प्रतिशत वृद्धि स्थिर मूल्यों (2011-12) के आधार पर है। मौजूदा मूल्यों के आधार पर (नॉमिनल) इसमें 8.7 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। मौजूदा मूल्यों पर गणना में महंगाई के प्रभाव को भी शामिल किया जाता है। रियल और नॉमिनल के बीच का अंतर 2019-20 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे कम है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार, निजी खपत में वृद्धि तेज ग्रोथ का मुख्य कारण है। सप्लाई साइड से, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में काफी बढ़ोतरी देखी गई। लो-बेस इफेक्ट से भी मदद मिली, क्योंकि पिछले साल इसी तिमाही में इकोनॉमी औसत से कम, 5.6% की दर से बढ़ी थी।

 

खुदरा और थोक महंगाई पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में कम थी। खाने-पीने की चीजों की कम महंगाई ने अपनी मर्जी से (डिस्क्रेशनरी) खर्च को बढ़ावा दिया। गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) की दरों को तर्कसंगत बनाने और उनमें कमी करने से भी निजी खपत बढ़ रही है। इनकम टैक्स और ब्याज दरों में कटौती का भी लाभ मिल रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग ने दिखाई तेज रफ्तार

इस ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा योगदान है। मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडिशन (GVA) 9.1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पिछले साल समान तिमाही में इसमें सिर्फ 2.2 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। बिजली, गैस जैसी यूटिलिटी सर्विसेज में ग्रोथ 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत, ट्रेड, होटल, कम्युनिकेशन जैसी सर्विसेज में 6.1 प्रतिशत के मुकाबले 7.4 प्रतिशत, फाइनेंशियल सर्विसेज में 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.2 प्रतिशत और जन-प्रशासन, रक्षा तथा अन्य सेवाओं में 8.9 प्रतिशत की तुलना में 9.7 प्रतिशत रही है।

हालांकि कृषि और कंस्ट्रक्शन की विकास दर कम हुई है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन की 8.4 प्रतिशत की तुलना में 7.2 प्रतिशत रह गई। कृषि में पहली तिमाही में 3.7 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। खनन में ग्रोथ निगेटिव है। कुल मिलाकर पिछली तिमाही में जीवीए 8.1 प्रतिशत बढ़ा है।
सर्विसेज ने भी दिया इकोनॉमी को सहारा

GVA में सर्विसेज (टर्शियरी सेक्टर) का हिस्सा 60 प्रतिशत हो गया है, जो शायद पहली बार हुआ है। प्राइमरी सेक्टर की हिस्सेदारी सिर्फ 14.9 प्रतिशत रह गई है। बाकी 25.1 प्रतिशत हिस्सा सेकंडरी सेक्टर का है। प्राइमरी सेक्टर में कृषि और खनन आते हैं। सेकंडरी सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन के साथ बिजली-गैस जैसी यूटिलिटी सर्विसेज होती हैं। टर्शियरी सेक्टर में ट्रेड, होटल तथा बाकी सभी सेवाएं शामिल हैं।

टर्शियरी सेक्टर में तेज वृद्धि ने भी अर्थव्यवस्था को बूस्ट दिया है। इकोनॉमी में सबसे ज्यादा (60 प्रतिशत) हिस्सेदारी वाले टर्शियरी सेक्टर की ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत से बढ़कर 9.3 प्रतिशत हो गई। सेकंडरी सेक्टर की 6.3 प्रतिशत के मुकाबले 7.6 प्रतिशत और प्राइमरी सेक्टर की 2.8 प्रतिशत की तुलना में 2.9 प्रतिशत रही है।
कितना है जीडीपी का आकार

सितंबर तिमाही में जीडीपी का आकार पिछले साल के 44.94 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 48.63 लाख करोड़ रुपये रहा है। मौजूदा मूल्यों पर या नॉमिनल जीडीपी 78.40 लाख करोड़ से बढ़कर 85.25 लाख करोड़ रुपये रही है।

छमाही आधार पर देखें तो अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान जीडीपी का आकार (स्थिर मूल्यों पर) 96.52 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 89.35 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान नॉमिनल जीडीपी 157.48 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 171.30 लाख करोड़ रुपये हो गई।
GDP में निजी खर्च 62.5 प्रतिशत पहुंचा

अर्थव्यवस्था में मांग का बड़ा महत्व होता है। इसमें सबसे बड़ा कंपोनेंट निजी खपत (PFCE) का रहता है। इसमें 7.9 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इस साल पहली तिमाही में निजी खपत (private consumption) में 7 प्रतिशत और पिछले साल की दूसरी तिमाही में 6.4 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। सरकारी खर्च (GFCE) 2.7 प्रतिशत घटा है, जबकि पहली तिमाही में यह 7.4 प्रतिशत और पिछले साल दूसरी तिमाही में 4.3 प्रतिशत बढ़ा था। यह संभवतः राजकोषीय घाटा कम रखने की कोशिश का नतीजा है। पूंजी निवेश (GFCF) 7.3 प्रतिशत बढ़ा है। जीडीपी में निजी खर्च की हिस्सेदारी 62.5 प्रतिशत, सरकारी खर्च की 9.1 प्रतिशत और पूंजी निवेश की 30.5 प्रतिशत रही है।

क्रिसिल के जोशी के मुताबिक, तीसरी तिमाही में भी इनमें से कुछ वजहों का फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकारी निवेश शायद स्थिर रहे, लेकिन प्राइवेट निवेश में बढ़ोतरी के संकेत हैं। इसलिए हमने इस वर्ष भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया है।

हालांकि रियल GDP में बढ़ोतरी अच्छी है, लेकिन महंगाई में बड़ी गिरावट से होने वाली धीमी नॉमिनल ग्रोथ के बुरे असर हो सकते हैं। यह टैक्स टारगेट को हासिल करने में मुश्किल पैदा करता है। अप्रैल से अक्टूबर तक 4% की टैक्स कलेक्शन ग्रोथ अभी 11% के साल के टारगेट से कम है। इसके अलावा, धीमी नॉमिनल ग्रोथ आमतौर पर कम कॉर्पोरेट कमाई और सुस्त क्रेडिट ग्रोथ से जुड़ी होती है।
अगली बार नई सीरीज के अनुसार आएंगे आंकड़े

सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार स्थिर मूल्यों पर गणना के लिए आधार वर्ष 2011-12 को बदलकर 2022-23 करने की प्रक्रिया चल रही है। आधार वर्ष बदलने पर कुछ पुराने आंकड़ों में भी संशोधन संभव है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही से जीडीपी के आंकड़े नई सीरीज (222-23) के आधार पर जारी होंगे, जो 27 फरवरी 2026 को आएंगे। जोशी का कहना है कि इससे इकॉनमी को बेहतर तरीके से कैप्चर किया जा सकेगा लेकिन मौजूदा अनुमानों में फर्क पड़ सकता है।

न्यूजीलैंड ने रचा इतिहास, फिन एलन का धमाकेदार शतक

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न्यूजीलैंड ने रचा इतिहास, फिन एलन का धमाकेदार शतक
न्यूजीलैंड ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल जीत लिया है. फिन एलन ने ऐतिहासिक शतक लगाकर न्यूजीलैंड को रिकॉर्ड जीत दिलाई है. इस हार के साथ ही दक्षिण अफ्रीका का टी20 वर्ल्ड कप जीतने का सपना एक बार फिर टूट गया. 2026 टी20 वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका ने पहले खेलने के बाद 169 रन बनाए थे. जवाब में न्यूजीलैंड ने 12.5 ओवर में ही 173 रन बनाकर मैच जीत लिया. न्यूजीलैंड के लिए फिल एलन ने 33 गेंद में नाबाद 100 रनों की मैच विनिंग पारी खेली. उनके बल्ले से 10 चौके और 8 छक्के निकले. न्यूजीलैंड दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है.

कीवी टीम के लिए एलन के अलावा उनके साथ ओपनिंग पर उतरे टीम सीफर्ट ने भी शानदार पारी खेली. सीफर्ट ने 33 गेंदों में 7 चौके और 2 छक्कों की मदद से 58 रन स्कोर किए. दोनों ने पहले विकेट के लिए 55 गेंदों में 117 रनों की साझेदारी की. इसके बाद रचिन रवींद्र और फिन एलन ने दूसरे विकेट के लिए 22 गेंदों में 56* रनों की पार्टनरशिप करके टीम को 43 गेंद पहले ही जीत दिला दी.
टी20 वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक

बता दें कि फिन एलन ने टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक पूरा किया. इससे पहले टी20 विश्व कप में सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के क्रिस गेल के नाम पर दर्ज था. गेल ने 2016 के टी20 टूर्नामेंट में 47 गेंदों में शतक पूरा किया था.
बॉलिंग डिपार्टमेंट में दक्षिण अफ्रीका पूरी तरह से फ्लॉप

मुकाबले में पहले बैटिंग के लिए उतरी अफ्रीका ने 20 ओवर में 169/8 रन बनाए. टीम ने यह टोटल 77 रन पर 5 विकेट गिर जाने के बाद बनाया था. इस टोटल के बाद लगने लगा था कि प्रोटियाज टीम मुकाबले में टक्कर देगी, लेकिन न्यूजीलैंड ने ऐसा नहीं होने दिया.

रन चेज के लिए उतरी न्यूजीलैंड के सामने अफ्रीका के सभी गेंदबाज फ्लॉप नजर आए. कीवी टीम ने सिर्फ एक ही विकेट गंवाया. अफ्रीका के लिए मार्को यानसन सबसे महंगे साबित हुए, जिन्होंने 2.5 ओवर में 18.70 की इकॉनमी से 53 रन खर्चे. इसके अलावा कॉर्बिन बॉश ने 2 ओवर में 35 रन खर्चे. इसके अलावा केशव महाराज ने 3 ओवर में 33, लुंगी एंडिगी ने 2 ओवर में 22 और कगिसो रबाडा ने 3 ओवर में 28 रन खर्चे.

फिल्म ‘देवदास’ के अभिनेता विजय कृष्णा ने दुनिया को कहा अलविदा

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‘देवदास’ में शाहरुख खान के पिता बने एक्टर विजय कृष्णा का हुआ निधन
बॉलीवुड के गलियारों से एक दुखद खबर सामने आ रही है. सीनियर एक्टर विजय कृष्णा जिन्हें कई फिल्मों में हमने देखा है, उनका निधन हो गया है. विजय कृष्णा फिल्म ‘देवदास’ में शाहरुख खान के पिता ‘नारायण मुखर्जी’ के किरदार में नजर आए थे. विजय की उम्र 81 साल थी, उनके निधन की खबर एक्ट्रेस लिलिएट दुबे ने सोशल मीडिया पर दी है.

लिलिएट दुबे ने किया इमोशनल पोस्ट
एक्ट्रेस लिलिएट दुबे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए विजय कृष्णा की फोटोज शेयर की हैं. इनके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘दिल टूट गया है. हमारे प्यारे विजय कृष्णा, जो 25 सालों से ज्यादा समय तक हमारे थिएटर परिवार और ‘डांस लाइक अ मैन’ का हिस्सा रहे अब हमारे बीच नहीं रहे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी. एक प्रतिभाशाली एक्टर, सुंदर, आकर्षक, अपने खास ह्यूमर के लिए मशहूर, वो हम सभी के प्रिय थे और हमें बहुत प्यार करते थे. अनगिनत यादें मेरे दिल और दिमाग में उमड़ रही हैं और मुझे भावुक कर रही हैं. RIP मेरे जयराज, आपको कभी भुलाया नहीं जाएगा. ईश्वर करे कि आप स्वर्ग में भी वैसे ही खुश रहें जैसे आप हम सभी को यहां रखते थे. उनकी प्यारी पत्नी स्मिता, बेटियों नायरिका और फ्रेयान और पूरे परिवार के लिए प्यार और प्रार्थनाएं.’

विजय कृष्णा के बारे में
बता दें कि विजय कृष्णा एक बेहतरीन एक्टर थे. उन्हें संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ के कड़क पिता के रूप में पहचानते हैं. विजय ने इस फिल्म में शाहरुख खान के पिता नारायण मुखर्जी का किरदार निभाया था. जिसमें उन्होंने अपने अभिनय से वाकई में कड़क पिता की छवि बना ली थी. लेकिन असल जिंदगी में विजय ऐसे नहीं थे. एक एक्टर होने के अलावा विजय एक एनवायरमेंटलिस्ट और गोदरेज समूह के बिजनेस में पूर्व कार्यकारी निदेशक भी थे. वो इंडियन थिएटर का जाना-माना नाम थे और 25 सालों से ज्यादा समय तक उन्होंने अभिनय किया. साल 2004 में आई फिल्म ‘डांस लाइक ए मैन’ के लिए भी उन्हें खूब तारीफें मिली थीं.

शरद पवार की वजह से राज्यसभा की सातों सीटें होंगी निर्विरोध

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शरद पवार की वजह से राज्यसभा की सातों सीटें होंगी निर्विरोध
16 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने जा रहा है. महाराष्ट्र की सात सीटों सहित देश के 10 राज्यों की कुल 30 सीटों पर मतदान होगा. महाराष्ट्र में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए महायुति के छह और महाविकास आघाड़ी (MVA) के एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना है.पिछले कुछ दिनों से इस चुनाव के लिए राजनीतिक गणित साधने की कोशिशें तेज थीं.

इस बीच बीजेपी ने अपने चार उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. वहीं शरद पवार के भी चुनाव मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है. इसी वजह से अब राज्य की सातों सीटें निर्विरोध होने की चर्चा शुरू हो गई है. आइए समझते हैं जीत और वोटों का पूरा गणित.

बीजेपी ने घोषित किए उम्मीदवारों के नाम
बीजेपी ने चार उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. इनमें पूर्व मंत्री विनोद तावड़े, आरपीआई (आठवले गुट) के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले, हिंगोली के बीजेपी नेता रामराव वडकुते और नागपुर की बीजेपी नेता माया इवनाते शामिल हैं.एक-एक सीट अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को दी गई है.

शरद पवार का नाम लगभग तय
दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी का एक उम्मीदवार राज्यसभा जा सकता है. इस सीट के लिए शरद पवार का नाम लगभग तय माना जा रहा है. इससे पहले कांग्रेस ने यह सीट अपने लिए मांगी थी. कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री बालासाहेब थोरात और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नाम चर्चा में थे.

निर्विरोध चुनाव कैसे संभव?
अगर सातवीं सीट के लिए महाविकास आघाड़ी की ओर से शरद पवार का नाम घोषित होता है, तो बीजेपी इस चुनाव को निर्विरोध कराने के पक्ष में हो सकती है. लेकिन यदि ठाकरे गुट या कांग्रेस के किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया गया, तो बीजेपी भी सातवीं सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है.

किसी उम्मीदवार को जीत के लिए पहली वरीयता के 37 वोटों की जरूरत होती है. महायुति के पास कुल 232 विधायकों का समर्थन है. शिंदे गुट के पास 20 अतिरिक्त वोट हैं, जबकि अजित पवार के गुट के पास 3 अतिरिक्त वोट हैं. ऐसे में जरूरत पड़ने पर बीजेपी सातवीं सीट के लिए भी पूरा जोर लगा सकती है. हालांकि, अब अगर सातवीं सीट के लिए शरद पवार का नाम तय हो जाता है, तो सभी सातों सीटों का निर्विरोध चुना जाना संभव माना जा रहा है.

80 छात्रों समेत दुबई से लौटे 111 भारतीय

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80 छात्रों समेत दुबई से लौटे 111 भारतीय
पश्चिम एशिया की धरती पर जंग की आहट अब और तेज हो गई है। इस्राइल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई पांचवें दिन भी जारी है। बमबारी तेज है और ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। ऐसे में हालात बिगड़ते देख अमेरिकी गृह विभाग ने पश्चिम एशिया छोड़ना चाहने वाले अमेरिकियों के लिए तैयारी शुरू कर दी है।

राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति के बाद अब नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद की चर्चा

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राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति के बाद अब नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद की चर्चा
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जीत के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के सीएम बनाने की चर्चा थी। भाजपा नहीं बना सकी। उसने कहा कि नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव लड़ा, वही बनेंगे। नीतीश की चाहत नहीं थी, फिर भी बने। अनबन अंदर-अदर चली। नतीजा कि नीतीश कुमार निकल कर महागठबंधन के सीएम बन गए। वहां गए तो चर्चा निकली कि नीतीश तेजस्वी यादव को कुछ दिन में अपनी कुर्सी दे देंगे। यहां भी असहज हुए तो वापस भाजपा के साथ आ गए। उन्हें दिन-रात धोने वाले भाजपाई फिर नीतीश के पीछे हो गए। फिर राष्ट्रपति चुनाव आया तो नीतीश का नाम उछाला गया। उप राष्ट्रपति चुनाव आया तो नाम उछाला गया। लोकसभा चुनाव में शांति रही, क्योंकि इससे नीतीश भड़क सकते थे। विधानसभा चुनाव में भी उसी तरह का माहौल रहा। अब जैसे ही सबकुछ ठीक हुआ और राज्यसभा चुनाव आया तो उनके राज्यसभा सांसद बनने की बात उछाली गई।

ऐसी ही बातों से भड़कते हैं नीतीश; नुकसान में रहती है भाजपा
होलिका दहन की शाम से नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राज्यसभा भेजने की चर्चा उठाई गई। यह शुरुआत थी। जबकि, हकीकत यह है कि अब तक नीतीश की छवि परिवारवादी नहीं रही है। कहा गया कि नीतीश पार्टी की कमान निशांत को देंगे, इसलिए राज्यसभा भेजेंगे। और, अगर बिहार की राजनीति करानी होगी तो विधान परिषद् में उतारेंगे। वह चर्चा होली के दिन थम गई। नई बात निकली कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाएंगे। एक सांसद बनकर रिटायर होंगे, क्योंकि वह अपने बेटे को बिहार का उप मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार हो गए हैं और मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के खाते में छोड़ देंगे। लेकिन, सच यह है कि जब-जब इस तरह की बात अंदरूनी राजनीति में उठी है तो नीतीश कुमार की जगह भाजपा को ही नुकसान हुआ है। दबाव की राजनीति से तंग आकर दो बार नीतीश भाजपा का साथ छोड़ महागठबंधन में जा चुके हैं और उसी तरह दोनों ही बार दबाव से ही परेशान होकर भाजपा के साथ आ चुके हैं।

क्या हो अगर नीतीश कुमार संन्यास लेना चाहें तो
जब राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति के लिए उनका नाम उड़ाया गया था तो भी ‘अमर उजाला’ ने इसका खंडन किया था। वजह यह थी कि नीतीश केंद्र की राजनीति छोड़ बिहार के विकास के नाम पर यहां आए थे। बीमारी की चर्चाओं और अलग-अलग तरह की गतिविधियों में दिखने के बावजूद बिहार के विकास कार्यों को लेकर सक्रिय दिखते हैं। ऐसे में संन्यास के लिए वह राज्यसभा सांसद बनकर उसी सदन में बैठें, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों- ऐसा संभव नहीं दिखता है। फिर भी चूंकि बार-बार नीतीश कुमार से एग्जिट प्लान मांगने की चर्चा बार-बार उठती रही है, इसलिए ऐसी खबरें निकलती हैं और वही वायरल भी होती हैं।

चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि “बिहार में कभी होली पर मजाकिया खबरों के साथ अखबार पेज प्रकाशित करते थे। सोशल मीडिया और आधुनिक मीडिया के दौर में यह जिम्मेदारी अखबारों ने अपने कंधे से हटा दी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनकर उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा है। इसकी संभावना दिख नहीं रही है। नीतीश अचरज में डालने वाला काम करते रहे हैं, लेकिन जिस व्यक्ति ने दो बार नरेंद्र मोदी के खिलाफ बिगुल फूंका और फिर पीएम के सामने झुक कर दिखते हुए भी बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत स्थिति लेकर रहे हैं- उनके राज्यसभा सांसद बनकर संन्यास लेने की बात स्वीकार करना संभव नहीं दिखता है। आज से कल तक सब साफ हो जाएगा। अगर यह खबर सही निकली तो नीतीश को नजदीक से जानने वाले लोग हार जाएंगे और अगर ऐसा नहीं हुआ तो ऐसी खबर चलाने वाले हैप्पी होली कर खुद को माफ कर लेंगे।”

मुख्यमंत्री आवास पर होलियाना माहौल, फॉर्म भरा गया?
चर्चा को हवा देने में नीतीश कुमार के कुछ करीबियों का भी नाम आ रहा है। उसके बाद से सभी प्रमुख नेताओं का मोबाइल संपर्क से बाहर है। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए भी फॉर्म भी भरा है। चर्चा है कि नीतीश के एक करीबी मंत्री ने किसी को कह दिया कि निशांत और नीतीश ने राज्यसभा फॉर्म भरा है, इसमें से ही किसी पर फैसला होगा। वहीं, दूसरी तरफ होली के दिन मुख्यमंत्री आवास में होलियाना माहौल रहा। बैठकें उस तरह से नहीं हुईं, जैसी इतने बड़े फैसले को लेकर होती है। विधायकों को पटना नहीं बुलाया गया है।

चमोली के जंगलों में आग लगने का सिलसिला नहीं थम रहा

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चमोली के जंगलों में आग लगने का सिलसिला नहीं थम रहा
सोमवार से शुरू हुआ जंगलों में आग लगने का सिलसिला यहां थम नहीं रहा है। एक के बाद एक जंगलों में लग रही आग के कारण समूचा क्षेत्र धुएं के बादलों से पटा हुआ है। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन होने से परेशानी हो रही हैं।

बुधवार होली के दिन नारायणबगड़, जाख-कडा़कोट, बेड़गांव, मानूर,तलासेरा, टेंटुड़ा का जंगल दिनभर जलता रहा। वहीं उत्तरी कडा़कोट पट्टी के सुनभी,भटियाणा के जंगलों में भी आग लगने की खबरें आ रही हैं। और अब कई जगहों पर जंगल की आग आबादी की ओर बढ़ती चली जा रही है। जिसको लेकर लोग चिंतित हैं।

ब्लाॅक के कपीरी पट्टी के ग्राम पंचायत कंडारा और आसपास के जंगल में लगी आग से वन संपदा को अत्यधिक क्षति पहुंची है। पूर्व प्रधान कुसुम कंडारी और पदमेंद्र कंडारी ने बताया कि दो दिन से जंगल जल रहे हैं। अब क्षेत्र के जंगलों में लगी आग विकराल होती जा रही है। वहीं आदिबदरी के समीप के जंगल दूसरे दिन भी जलते रहे। वहीं बरतोली गांव के जंगल में भी आग लगी जिसे महिलाएं बुझाने में जुट गईं।

दूसरे दिन भी धधकते रहे
एक ओर वन विभाग वनाग्नि सुरक्षा के लिए अभियान संचालित कर रहा है लेकिन वनों की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं होने से इन अभियानों और बैठकों के दावों पर ही सवाल उठने लगे हैं। वनों में लगी आग से ग्रामीणों को मवेशियों के लिए चारापत्ती आदि लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों से वनाग्नि को नियंत्रित करने और ग्राम प्रहरियों तथा वन सरपंचों को सजग करने की मांग की। वहीं आदिबदरी में बदरीनाथ वन प्रभाग के रंडोली और भलसों के जंगल मंगलवार को दूसरे दिन भी धधकते रहे।

सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि विगत दो दिनों से जंगलों में लगी आग और धुएं से सांस के रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मगर वन विभाग की ओर से वनाग्नि को नियंत्रित करने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर वनाग्नि को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग को निर्देशित करने की मांग की है। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि विभागीय कर्मियों को त्वरित रूप से कंडारा के जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए भेजा जा रहा है।

श्रीलंका के पास ईरानी जहाज पर सबमरीन अटैक, 80 लोगों की मौत

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श्रीलंका के पास ईरानी जहाज पर सबमरीन अटैक, 80 लोगों की मौत
श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास बुधवार को ईरान की नौसेना का जहाज पनडुब्बी हमले के बाद डूब गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, हमले में 80 लोगों की मौत हो गई है, कई लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर है।

180 लोग थे सवार, बचाव अभियान जारी
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय बताया कि जहाज पर कुल 180 लोग सवार थे और संकट की सूचना मिलते ही श्रीलंका ने नौसेना के जहाज और वायुसेना के विमान बचाव मिशन पर भेजे।
श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अनिल जयसिंघे के अनुसार, 79 लोगों को अस्पताल लाया गया। एक की हालत बेहद गंभीर है। सात को आपात उपचार दिया जा रहा है। अन्य को मामूली चोटें आई हैं।
IRIS Dena एक मौज-क्लास फ्रिगेट था, जो विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में भाग लेकर ईरान लौट रहा था। उसी समय जहज पर हमला हुआ।

अमेरिका ने स्वीकारा हमला
US डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुश्मन पर इस तरह का पहला हमला है। इससे पहले दिन में श्रीलंकाई नौसेना ने हिंद महासागर में जहाज के डूबने की पुष्टि की थी।