Home Blog Page 20

बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस

0

बस्तर में नक्सलवाद पर महामंथन, 19 मई को अमित शाह चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, कई मुद्दों पर होगा फोकस
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने और बस्तर के विकास को गति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 और 20 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहेंगे। यह दौरा सुरक्षा और विकास दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जगदलपुर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की उच्चस्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

नक्सल उन्मूलन अभियान के बाद पहली बार बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इस स्तर की बैठक आयोजित की जा रही है। लंबे समय तक देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले बस्तर में अब सुरक्षा स्थिति में सुधार आया है। केंद्र सरकार इस सुधार को एक सकारात्मक संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगा फोकस
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित चर्चा होगी। नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार किया जाएगा। राज्यों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा। सीमावर्ती जिलों में खुफिया साझेदारी बढ़ाने की योजना बनेगी। सड़क, स्वास्थ्य और संचार जैसी आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया जाएगा।

इस बैठक में जिन राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अमित शाह का यह दौरा केवल सुरक्षा समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

कई परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं गृह मंत्री
जानकारी मिली है कि गृह मंत्री बस्तर में चल रही कई प्रमुख विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं। इस दौरान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और लोकार्पण की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और विकास साथ-साथ की रणनीति पर काम कर रही है। बस्तर प्रवास के दौरान शाह स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में केंद्रीय गृह मंत्री और कई मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक मजबूत राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश होगी कि सरकार अब बस्तर को संघर्ष के नहीं, बल्कि विकास और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना चाहती है।

बैठक का संभावित एजेंडा
बैठक का संभावित एजेंडा भी तय किया गया है। इसमें 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का रोडमैप तैयार किया जा सकता है। सुरक्षा कैंपों और सड़क नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा होगी। आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा योजनाओं को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। ड्रोन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने की योजना है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस्तर में होने वाली यह उच्चस्तरीय बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास मॉडल के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।

बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग

0

बरगी डैम क्रूज हादसे का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर, जांच होने तक MP में बोट सेवाएं रोकने की मांग
जबलपुर बरगी डैम में 30 अप्रैल को क्रूज हादसे (Bargi Dam Cruise Tragedy) में 13 पर्यटकों की जान चली गई थी। इस घटना ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला हाई कोर्ट पहुंच चुका है। भोपाल के निवासी केके राठी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। जिसमें इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में इस घटना का कारण प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानव की अनदेखी को बताया गया है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में संचालित सभी वॉटर स्पोर्ट्स और क्रूज सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने की मांग की गई है।

पर्यटन विभाग पर लपवाही का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
याचिककर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय रहित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन भी नहीं किया गया। खराब मौसम और येलो अलर्ट के बाद भी क्रूज संचालन जारी रखा गया। याचिका में यह दावा किया गया है कि हादसे से पहले यात्रियों को प्राप्त सुरक्षा जानकारी भी नहीं दी गई थी। न ही लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाया गया था। यदि सही तरीके से सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो इस घटना को टाला जा सकता था। पर्यटन विभाग की लापरवाही से गई लोगों की मौत हो गई। इसलिए हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच पूरी होने तक क्रूज और बोट सेवाओं पर रोक की मांग
याचिका में जांच पूरी होने तक मध्य प्रदेश में सभी क्रूज और वोट सेवाओं पर अस्थाई रूप से बंद करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा राज्य के सभी वॉटर स्पोर्ट्स केंद्रों और पर्यटन स्थलों का सेफ्टी ऑडिट करने की मांग भी कोर्ट के सामने रखी गई है। ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हो। पर्यटकों के लिए सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

जिला कोर्ट ने दिखाई सख्ती, नाव संचालक को फटकार
बुधवार को लोअर कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए नाव संचालक को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने पाया की नाव संचालक ने अनुभव होते हुए यात्रियों की मदद नहीं की और खुद को बचाकर वहां से निकल गया। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कोर्ट ने BNS 2023 की धारा 106 और 110 के तहत चालक समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया था।

मिचेल मार्श ने रचा इतिहास, RCB के खिलाफ ठोका IPL का सबसे तेज शतक

0

मिचेल मार्श ने रचा इतिहास, RCB के खिलाफ ठोका IPL का सबसे तेज शतक
मिचेल मार्श ने RCB के खिलाफ मैच में 49 गेंदों में शतक पूरा कर दिया है. यह आईपीएल के इतिहास में LSG के किसी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे तेज शतक है. बारिश से प्रभावित इस मैच में मार्श ने शतक पूरा करने तक अपनी पारी में 9 चौके और 8 छक्के लगाए. यह आईपीएल में व्यक्तिगत तौर पर भी मार्श का सबसे तेज शतक है. इससे पहले उनकी सबसे तेज सेंचुरी 56 गेंद में आई थी.

IPL में ठोका सबसे तेज शतक
मिचेल मार्श ने 49 गेंद में शतक पूरा किया. वो लखनऊ सुपर जायंट्स के ऐसे पहले बल्लेबाज भी बने हैं, जिन्होंने आईपीएल में 50 से कम गेंदों में शतक पूरा किया हो. मार्श ने इस सेंचुरी के दम पर रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है, क्योंकि वे ऐसे सबसे पहले बल्लेबाज हैं, जिन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में LSG के लिए 2 शतक लगाए हैं. उनसे पहले लखनऊ के लिए ऋषभ पंत, क्विंटन डिकॉक, केएल राहुल और मार्कस स्टोइनिस शतक लगा चुके हैं.

49 गेंद – मिचेल मार्श (बनाम RCB)
54 गेंद – ऋषभ पंत (बनाम RCB)
56 गेंद – केएल राहुल (बनाम MI)
56 गेंद – मार्कस स्टोइनिस (बनाम CSK)
56 गेंद – मिचेल मार्श (बनाम GT)
59 गेंद – क्विंटन डिकॉक (बनाम KKR)

अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं ममता बनर्जी, राज्यपाल ने बर्खास्त किया पश्चिम बंगाल कैबिनेट

0

अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं ममता बनर्जी, राज्यपाल ने बर्खास्त किया पश्चिम बंगाल कैबिनेट
ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के बाद राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त कर दिया. बंगाल चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने ये फैसला लिया है. ये पूरा निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है.

पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त
संविधान के हिसाब से विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और मौजूदा विधानसभा 8 में 2021 से 7 में 2026 तक अस्तित्व में रही. चूंकि अब नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लिहाजा पुरानी विधानसभा को भंग कर दिया गया. इस आदेश के बाद अब ममता बनर्जी को इस्तीफा देने की जरूरत ही नहीं रही.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (6 मई 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ‘जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश’ है. साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया.

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से किया इनकार
ममता बनर्जी ने ये भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने बीजपी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई चुनाव आयोग से थी, जिसने बीजेपी के लिए काम किया. उन्होंने कहा था, ‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है. मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी. लगभग 100 सीट पर जनादेश को लूट लिया गया और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई.’

ममता ने विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने की बात कही
बंगाल में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी. उन्होंने कहा था, ‘इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की. सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है.’ उन्होंने कहा, ‘जब तक मैं कुर्सी पर थी, मैंने बहुत कुछ सहन किया. अब मैं एक आजाद पंछी हूं, एक आम इंसान हूं. मैं संघर्ष करने वाली हूं. मैं सड़कों पर रहूंगी और सभी अत्याचारों के खिलाफ लड़ूंगी.’

24 घंटे टीवी पर न्यूज देखने की आदत डलवाने वाले CNN फाउंडर टेड टर्नर का निधन

0

24 घंटे टीवी पर न्यूज देखने की आदत डलवाने वाले CNN फाउंडर टेड टर्नर का निधन
टीवी पर 24 घंटे लगातार न्यूज देखने की जो आज पूरी दुनिया को आदत है, उसकी नींव रखने वाले दिग्गज अमेरिकी मीडिया मुगल और सीएनएन नेटवर्क के संस्थापक टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे वैश्विक मीडिया जगत में एक युग का अंत हो गया है। टर्नर सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे विजनरी शख्स थे, जिन्होंने टेलीविजन पत्रकारिता की पूरी तस्वीर और दिशा ही बदल कर रख दी। आइए समझते हैं उनका यह शानदार सफर कैसा रहा।

एक छोटे से बिजनेस से ग्लोबल मीडिया एंपायर तक
Ted Turner Dead : टेड टर्नर की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने पिता के बिलबोर्ड एडवरटाइजिंग बिजनेस (विज्ञापन के बोर्ड लगाने का काम) से की थी। लेकिन टर्नर की सोच बहुत आगे की थी। 1970 के दशक में उन्होंने अटलांटा में एक छोटे से टीवी स्टेशन को खरीदा, जो उस वक्त लगातार घाटे में चल रहा था। उन्होंने सैटेलाइट तकनीक का सही इस्तेमाल समझा और इस छोटे से स्टेशन को पूरे अमेरिका में प्रसारित करना शुरू कर दिया, जिसे बाद में ‘TBS’ (टर्नर ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम) के नाम से जाना गया।

1980: जब CNN ने रची मीडिया क्रांति
उस दौर में टीवी पर न्यूज केवल सुबह और शाम के एक निश्चित समय पर ही आती थी। लेकिन टेड टर्नर का मानना था कि खबरें कभी रुकती नहीं हैं, इसलिए न्यूज चैनल भी नहीं रुकना चाहिए। इसी सोच के साथ 1 जून 1980 को उन्होंने ‘केबल न्यूज नेटवर्क’ यानि सीएनएन की शुरुआत की। यह दुनिया का पहला 24 घंटे चलने वाला न्यूज़ चैनल था। शुरुआत में कई लोगों ने इस आइडिया का मजाक उड़ाया, लेकिन 1991 के ‘खाड़ी युद्ध’ के लाइव कवरेज ने सीएनएन को दुनिया का सबसे भरोसेमंद और ताकतवर न्यूज नेटवर्क बना दिया।

परोपकार और पर्यावरण के लिए ऐतिहासिक काम
टेड टर्नर केवल पैसा कमाने वाले उद्योगपति नहीं थे। वे एक बहुत बड़े परोपकारी व्यक्ति भी थे। सन 1997 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए 1 अरब डॉलर दान करने का ऐतिहासिक ऐलान कर के पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने अपना जीवन और अकूत संपत्ति लगाई। वे अमेरिका के सबसे बड़े जमींदारों में से एक थे और उन्होंने अपनी जमीनों को वन्यजीवों के संरक्षण, खासकर ‘बाइसन’ के बचाव के लिए सुरक्षित किया।

बिहार में दौड़ेगी ई-बसें और AI से सुधरेगा गवर्नेंस

0

बिहार में दौड़ेगी ई-बसें और AI से सुधरेगा गवर्नेंस
बिहार कैबिनेट ने विकास, प्रौद्योगिकी और सुशासन को नई दिशा देते हुए 20 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में तकनीकी, स्वास्थ्य, परिवहन और चुनाव सुधार से जुड़े 20 बड़े फैसले लिए गए। बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तार से जानकारी दी। सरकार का जोर आधुनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जन-सुविधाओं पर है। इन फैसलों से बिहार को डिजिटल और स्मार्ट राज्य बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए गए हैं।

बिहार एआई मिशन का गठन
कैबिनेट ने ‘बिहार एआई मिशन’ को मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
एआई का उपयोग प्रशासन, कृषि, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन में किया जाएगा, जिससे डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

मां सीता के नाम पर सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज
सीतामढ़ी में बन रहे मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर ‘मां सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल’ कर दिया गया है। सीतामढ़ी को मां सीता की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए इस नामकरण से स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिला है।

400 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत 400 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का फैसला लिया गया। पटना में 150 बसें और मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा तथा पूर्णिया में 50-50 बसें चलाई जाएंगी।
इस पर 517.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना 12 वर्षों तक चलेगी। इससे शहरी परिवहन बेहतर होगा, प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

नगर निकाय चुनाव में ई-वोटिंग
2026 के नगरपालिका चुनावों में ई-वोटिंग सुविधा शुरू की जाएगी। यह सुविधा खासकर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिए होगी।
इस पर लगभग 31.45 लाख रुपये खर्च होंगे। एक केंद्रीय तकनीकी संस्था को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे मतदान प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी।

कैबिनेट के इन फैसलों से बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि ये प्रस्ताव राज्य को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएंगे।

एमएस धोनी के संन्यास पर बड़ा खुलासा, फेयरवेल मैच की चर्चा हुई शुरू

0

एमएस धोनी के संन्यास पर बड़ा खुलासा, फेयरवेल मैच की चर्चा हुई शुरू
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के जारी मुकाबलों के मध्य, चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान एवं दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल इस विषय पर उनके साथी खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है, जिसमें धोनी के संभावित फेयरवेल मैच की तिथियों और परिस्थितियों पर प्रकाश डाला गया है। इस सीजन में आधे से अधिक लीग मैच खेले जा चुके हैं, परंतु चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने अब तक एक भी मैच में भाग नहीं लिया है, जिससे उनके प्रशंसकों में उनकी वापसी को लेकर उत्सुकता और संन्यास की अटकलें दोनों ही तीव्र हो गई हैं।

दरअसल रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से इस विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि, इस सीजन में धोनी का मैदान पर उतरना अत्यंत मुश्किल प्रतीत होता है। उनके अनुसार, धोनी केवल एक विशेष ‘फेयरवेल’ मैच के लिए ही मैदान में वापसी कर सकते हैं। यह बयान उन लाखों प्रशंसकों के लिए चिंता का विषय बन गया है जो बेसब्री से अपने चहेते ‘माही’ की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। अश्विन के इस कथन ने संन्यास की अटकलों को और अधिक बल प्रदान किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टीम के भीतर भी इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और धोनी की वापसी का संयोजन टीम की वर्तमान स्थिति पर निर्भर करेगा।

कब खेलेंगे धोनी आखिरी मैच?
रविचंद्रन अश्विन ने धोनी के फेयरवेल मैच के संबंध में एक विशिष्ट शर्त का भी उल्लेख किया है। दरअसल उनका मानना है कि यदि चेन्नई सुपर किंग्स आगामी दो या तीन मैचों में हार का सामना करती है और प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो जाती है, तभी धोनी को मैदान पर अपने अंतिम मैच के लिए अवसर प्राप्त हो सकता है। अश्विन के इस विश्लेषण का तात्पर्य यह है कि यदि टीम के लिए प्लेऑफ की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं, तो फ्रेंचाइजी धोनी को उनके प्रशंसकों के सामने एक यादगार विदाई देने का निर्णय ले सकती है। हालांकि, चेन्नई सुपर किंग्स के प्रबंधन और स्वयं धोनी द्वारा इस पर क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है, यह अभी देखना शेष है, क्योंकि यह स्थिति टीम के प्रदर्शन और उनकी व्यक्तिगत फिटनेस पर भी निर्भर करेगी।

धोनी क्यों नहीं खेल रहे मैच?
धोनी की अनुपस्थिति का प्रमुख कारण उनकी काफ इंजरी बताई जा रही है। चेन्नई सुपर किंग्स द्वारा सीजन के आरंभिक दिवस, दिनांक 28 मार्च को जारी एक आधिकारिक अपडेट के अनुसार, धोनी को इस इंजरी के कारण लगभग दो सप्ताह तक मैदान से बाहर रहने का अनुमान था। परंतु, एक माह से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी उनकी वापसी नहीं हुई है, जिससे उनकी फिटनेस और मैदान पर वापसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस इंजरी के कारण वे इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के आधे से अधिक लीग मैचों में हिस्सा नहीं ले पाए हैं, जिसने टीम के संयोजन पर भी प्रभाव डाला है और फैंस को उनकी वापसी के लिए और अधिक इंतजार करना पड़ रहा है।

जानिए चेन्नई का अगला मैच कब है?
फैंस अब भी यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि धोनी इस सीजन में अपना पहला मैच कब खेलेंगे और फ्रेंचाइजी उनकी स्थिति पर क्या फैसला लेती है। चेन्नई सुपर किंग्स ने इस सीजन में अब तक दस लीग मुकाबले खेले हैं और उनका अगला महत्वपूर्ण मैच दिनांक 10 मई, रविवार को लखनऊ सुपर जायंट्स के विरुद्ध एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में निर्धारित किया गया है। यह मुकाबला टीम के लिए प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, और इसी मैच के परिणाम पर धोनी के संभावित फेयरवेल मैच की परिस्थितियां भी निर्भर कर सकती हैं। क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या धोनी मैदान पर वापसी करेंगे और यदि हां, तो किस निर्णायक क्षण में, क्योंकि उनकी वापसी से टीम के प्रदर्शन और प्रशंसकों के उत्साह पर गहरा प्रभाव पड़ना निश्चित है।

केदारनाथ से कल्पेश्वर तक: महादेव के 5 रहस्यमयी मंदिर, जहां दर्शन मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप

0

केदारनाथ से कल्पेश्वर तक: महादेव के 5 रहस्यमयी मंदिर, जहां दर्शन मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप
हिंदू धर्म में पंच केदार की तीर्थयात्रा को अधिक पवित्र माना जाता है। इस यात्रा को शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए के लिए एक आध्यात्मिक मार्ग माना जाता है। यह पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित हैं। इन पंच केदार की उत्पत्ति महाभारत काल की एक कथा से जुड़ी है।

पौराणिक कथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए हिमालय पहुंचे, लेकिन उनसे शिव जी नाराज थे, जिसकी वजह से पांडवों को महादेव दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए महादेव बैल का रूप धारण कर जमीन में लुप्त हो गए।

जब बैल रूपी शिव जमीन में समाए, तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 जगहों पर पांडवों के द्वारा महादेव की पूजा-अर्चना की गई, जिन्हें पंच केदार के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कौन-से हैं पंच केदार और इनके महत्व के बारे में।

केदारनाथ
केदारनाथ मंदिर पंच केदार में सबसे प्रमुख है। यहां पर बैल रूपी अवतार का पीठ का हिस्सा प्रकट हुआ था। केदारनाथ को आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और दर्शन करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

तुंगनाथ
ऐसा माना जाता है कि तुंगनाथ में भगवान शिव का हाथ प्रकट हुआ था। भगवान शिव यह मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। पांडवों ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया था। यहां शिव जी के दर्शन करने से मन को शांति मिलती है।

रुद्रनाथ
रुद्रनाथ में भगवान शिव का मुख प्रकट हुआ था। यहां पर महादेव की पूजा-अर्चना नीलकंठ के रूप में होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्रनाथ मंदिर में साधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ महादेव की कृपा बरसती है।

मध्यमहेश्वर
यहां पर भगवान शिव की नाभि प्रकट हुई थी। पांडवों ने शिव जी की आराधना की थी। इसे मोक्ष और शांति का केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त मध्यमहेश्वर मंदिर में शिव जी की पूजा-अर्चना करते हैं उसे सभी पापों से छुटकारा मिलता है और महादेव की कृपा बरसती है।

कल्पेश्वर
जहां पर कल्पेश्वर मंदिर है। उसी जगह पर भगवान शिव की जटाएं प्रकट हुई थी। यह एकमात्र ऐसा केदार है, जिसके कपाट साल भर भक्तों के लिए खुले रहते हैं।

बंगाल में खूनी खेल, शुभेंदु अधिकारी के PA की सरेआम गोली मारकर हत्या, मध्यग्राम में मची सनसनी

0

बंगाल में खूनी खेल, शुभेंदु अधिकारी के PA की सरेआम गोली मारकर हत्या, मध्यग्राम में मची सनसनी
पश्चिम बंगाल में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. बुधवार देर शाम भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, यह घटना नार्थ 24 परगना जिले के मध्यमग्राम के डोहरिया मोड़ पर हुई. उस समय चंद्रनाथ रथ अपनी गाड़ी में मौजूद थे और अपने घर के पास ही थे.

बताया जा रहा है कि बाइक पर आए हमलावरों ने पहले उनकी गाड़ी रुकवाई और फिर एक के बाद एक तीन राउंड गोलियां चलाईं. गोली सीधे उनके सीने में मारी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. वहीं घटना के समय चंद्रनाथ रथ के साथ एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था, जिसे घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया है.

5 साल से थे शुभेंदु अधिकारी के करीबी
बताया जा रहा है कि मृतक चंद्रनाथ रथ पिछले 5 वर्षों से शुभेंदु अधिकारी के साथ जुड़े हुए थे और उनके बेहद करीबी माने जाते थे. हाल ही में हुए चुनावों में भी वह प्रचार अभियान से जुड़े अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे.

राजनीतिक एंगल से भी जांच
चंद्रनाथ रथ की हत्या को राजनीतिक एंगल से भी जोड़कर देखा जा रहा है. उनके करीबी संबंध और चुनावी सक्रियता को देखते हुए इस घटना ने सियासी हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है.

पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है. इलाके में नाकेबंदी कर दी गई है और हमलावरों की तलाश जारी है. पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके.

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले, संजय शुक्ला ACS होम, शिवशेखर शुक्ला का जीएडी की जिम्मेदारी

0

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले, संजय शुक्ला ACS होम, शिवशेखर शुक्ला का जीएडी की जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले और नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के तहत दो वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, वहीं एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जारी आदेश के अनुसार 1994 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार शुक्ल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही उन्हें विमानन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं, 1994 बैच के ही वरिष्ठ अधिकारी शिवशेखर शुक्ल को अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें संस्कृति विभाग एवं आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान का प्रभार दिया गया है। साथ ही धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग तथा कर्मचारी चयन मंडल का अतिरिक्त दायित्व भी उनके पास रहेगा।