ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में देश के कई अहम रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी फैसलों की कमान अब सीधे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडरों के हाथों में आ गई है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति की भूमिका अब मुख्य रूप से प्रशासनिक कार्यों तक सीमित होती जा रही है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध, विदेश नीति और सैन्य रणनीति जैसे विषयों पर IRGC का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई अपने पिता की तरह सभी निर्णय स्वयं लेने के बजाय वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के एक सीमित समूह के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस समूह में मौजूदा और पूर्व IRGC कमांडरों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है, जो युद्ध और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख फैसलों को दिशा दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका अपेक्षाकृत कमजोर हुई है। सरकार का नागरिक ढांचा दैनिक प्रशासन और आवश्यक सेवाओं के संचालन तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि रणनीतिक निर्णय सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रभाव में लिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की यह नई सत्ता व्यवस्था देश की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी असर डाल सकती है। यदि IRGC का प्रभाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो भविष्य में ईरान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति पहले की तुलना में अधिक कठोर हो सकती है।



