विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक शांति, आतंकवाद, युद्ध, समुद्री सुरक्षा और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते संघर्षों का असर केवल युद्धग्रस्त देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद को सामान्य नहीं किया जा सकता और आतंकवाद को समर्थन देने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार पर भी जोर दिया।
विदेश मंत्री ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चिंता जताते हुए व्यावसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध प्रवाह की आवश्यकता पर जोर दिया। यूक्रेन युद्ध को लेकर भी भारत ने शांति प्रयासों का समर्थन दोहराया।
जयशंकर ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के समर्थन को भी दोहराया। साथ ही उन्होंने ग्लोबल साउथ के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत को रेखांकित किया।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी कहा कि प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना AI इकोसिस्टम विकसित करने का अधिकार होना चाहिए। भारत ने AI को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रखा है।



