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हनुमान जयंती पर ‘श्रीहनुमत पंचरत्नम’ के पाठ से बजरंगबली होते हैं प्रसन्न

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हनुमान जयंती पर ‘श्रीहनुमत पंचरत्नम’ के पाठ से बजरंगबली होते हैं प्रसन्न
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti 2026) के पावन पर्व को हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम तिथि माना जाता है। अगर आप बजरंगबली जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो हनुमान जयंती की पूज में श्रीहनुमत पंचरत्नम का पाठ जरूर करें। इस पाठ से आपको पवनपुत्र हनुमान जी की विशेष कृपा मिलती है।

पाठ की सही विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ लाल कपड़े पहनें।
पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक आसन पर बैठें।
हनुमान जी की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और लाल फूल व गुड़ या लड्डू भोग लगाएं।
मन ही मन अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए हनुमान जी को याद करें।
अब “श्री हनुमत् पञ्चरत्नम्” स्तोत्र का पाठ करें।
अपनी श्रद्धा के अनुसार, इसका पाठ 1, 3, 7 या 11 बार किया जा सकता है।
पाठ के अंत में हनुमान जी की आरती करें।

मिलते हैं ये लाभ
हनुमत पंचरत्नम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्री हनुमान की विशेषता के बारे में बताया गया है। इसका नियमित रूप से पाठ करने से साधक को हनुमान जी की विशेष कृपा मिलती है। साथ ही विधि-विधान से इसका पाठ करने से भक्त के संकट, भय और जीवन की बाधाएं भी दूर होती हैं।

इस स्तोत्र के पाठ से न केवल हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, बल्कि भगवान श्रीराम की भक्ति भी प्राप्त मिलती है। इतना ही नहीं, हनुमान जी की पूजा में इस दिव्य स्तोत्र का पाठ करने से जातक को मंगल दोष के साथ-साथ शनि दोष के प्रभावों से भी राहत मिल सकती है।

शाह रुख खान की King पर मंडराए संकट के बादल

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शाह रुख खान की King पर मंडराए संकट के बादल
पठान फिल्म के बाद निर्देशक सिदार्थ आनंद और शाह रुख खान की जोड़ी फिल्म किंग के जरिए वापसी करने के लिए तैयार है। लंबे समय से किंग की चर्चा खूब हो रही है, लेकिन फिलहाल जो खबर सामने आ रही है, वह हैरान करने वाली है।

बताया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को मद्देनजर रखते हुए किंग की शूटिंग फिलहाल के लिए टाल दी गई है। पूरा मामला क्या है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं-

टल गई किंग फिल्म की शूटिंग
मध्य पूर्व एशिया में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष का असर हिंदी सिनेमा पर भी खूब दिख रहा है। पहले इसके कारण यश अभिनीत फिल्म टाक्सिक : ए फेयरी टेल फार ग्रोन अप्स की प्रदर्शन तिथि बदली गई, फिर नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म रामायणम् का रामनवमी पर होने वाला कार्यक्रम रद हुआ।

यह सीन अभिनेता अनिल कपूर तथा अभिनेत्री और शाह रुख की बेटी सुहाना खान के साथ शूट किया जाना था। हालांकि, वर्तमान में पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से जारी संघर्ष की स्थिति को देखते हुए सिद्धार्थ ने दुबई शेड्यूल रद कर दिया है। अब वह इस सीन को मुंबई में ही एक स्टूडियो में फिल्माने की योजना पर काम कर रहे हैं।

उसके लिए मुंबई के विले पार्ले स्थिति एक स्टूडियो में दुबई का सेट स्थापित किया जा रहा है। बता दें कि किंग में सुहाना पहली बार अपने पिता शाह रुख खान के साथ नजर आएंगी। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और काजोल भी अहम भूमिकाओं में हैं।

कब रिलीज होगी किंग
शाह रुख खान की किंग को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट काफी हाई है। गौर किया जाए मूवी की रिलीज डेट की तरफ तो 24 दिसंबर 2026 को क्रिसमस के मौके पर इस मूवी को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। बता दें कि इस मूवी में शाह रुख अपनी बेटी सुहाना खान संग नजर आएंगे।

बाबा विश्वनाथ और महाकाल ट्रस्ट के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

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बाबा विश्वनाथ और महाकाल ट्रस्ट के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
वाराणसी में 31 मार्च को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन आयोजित हुआ. इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मंत्रियों, दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. उन्होंने कई जानकारियां एक-दूसरे से साझा कीं. कार्यक्रम में सभी ने लघु उद्योगों से लेकर धार्मिक पर्यटन और रोजगार पर विचार-विमर्श किया.

इस दौरान अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों के प्रजेंटेशन भी दिए. कार्यक्रम में मौजूद हस्तियों ने इस बात पर मंथन किया कि दोनों राज्य भविष्य में और किन संभावनाओं पर एकसाथ काम कर सकते हैं. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट-महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच और ओडीओपी उत्पादों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच एमओयू हुआ. सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए अनंत निवेश संभावनाएं हैं. प्रदेश से 70 हजार करोड़ से अधिक का निर्यात हो रहा है.

पीएम मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा देश- सीएम मोहन
एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम दुनिया के 7 पवित्र स्थानों में शामिल है. यह सहयोग से सम्मेलन का अद्भुत आयोजन है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कर्मक्षेत्र भी है. उनके नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन के साथ सुशासन स्थापित किया है. उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने भी कानून-व्यवस्था के साथ विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है.

प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प के बल पर कल लाल सलाम को आखिरी सलाम किया गया है. मध्यप्रदेश भी अब नक्सल मुक्त हो चुका है. यह लोकतंत्र की स्थापना के लिए बड़ी चुनौती थी.

दोनों राज्यों के बीच विशेष रिश्ता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काशी की तरह उज्जैन भी प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से विशेष महत्व रखता है. दोनों शहरों में धार्मिक पर्यटन की बड़ी संभावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विकास के कार्यों की शुरुआत की गई. बाबा महाकाल के महालोक बनने से मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन बढ़ा है.

प्रभु श्रीराम ने मंदाकिनी नदी के किनारे चित्रकूट में अपने जीवन का महत्वपूर्ण काल गुजारा है. भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के बाद उज्जैन में शिक्षा प्राप्त की. यह दोनों राज्यों के बीच विशेष रिश्ता है.

साथ-साथ बड़ा काम कर रहे एमपी-यूपी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कार्यों की शुरुआत हुई है. इसका लाभ मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के जिलों को भी मिलेगा. यह परियोजना सिंचाई के साथ पेयजल सुविधा भी उपलब्ध कराएगी.

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर मुरैना में 2000 मेगावॉट के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज विश्वनाथ कॉरिडोर की व्यवस्थाओं को भी समझा. प्रयागराज में ऐतिहासिक महाकुंभ के आयोजन की व्यवस्थाओं के अध्ययन के लिए हमने अधिकारियों को भेजा था. आगामी सिंहस्थ के आयोजन में हर तरह के प्रबंधन के लिए तैयारी चल रही है.

एमपी का निर्यात 70 हजार करोड़ से ज्यादा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो गया है. राज्य में औद्योगिक विकास के लिए अनंत निवेश संभावनाएं हैं. प्रदेश से 70 हजार करोड़ से अधिक का निर्यात हो रहा है. प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हॉस्पिटल खोलने के लिए 1 रुपए लीज पर 30 एकड़ जमीन दे रही है. कृषि कल्याण वर्ष में किसानों को विभिन्न योजनाओं में 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है.

ओडीओपी प्रोग्राम से मिली नई पहचान
वहीं, उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री नंदगोपाल गुप्ता (नंदी) ने कहा कि बाबा महाकाल के अनन्य भक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आगमन एक सुखद सौभाग्य है. वे बेहद सरल स्वभाव और जनता के मन में छाप छोड़ने वाले लोकप्रिय राजनेता हैं. आपके प्रशासनिक निर्णय कठोर होते हैं. मध्यप्रदेश सरकार में लापरवाही बर्दाश्त नहीं है.

उन्होंने कहा कि यह आयोजन दोनों राज्यों के बीच गहरी समझ का स्पष्ट उदाहरण है. बघेलखंड, ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के लोगों के साथ उत्तर प्रदेश का विशेष संबंध है. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए सबसे बेहतर गंतव्य है. हमारा उद्देश्य युवाओं को उद्यमी बनाना है. अब तक 1 लाख 63 हजार युवाओं को 6000 करोड़ से अधिक राशि वितरित की जा चुकी है. मंत्री गुप्ता ने कहा कि ओडीओपी प्रोग्राम से स्थानीय कारीगरों और हस्त शिल्प को नई पहचान मिली है.

संयुक्त उद्देश्य के लिए साथ हैं दोनों राज्य
प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश एक संयुक्त उद्देश्य से जिला एक उत्पादों के लिए सहयोग और समन्वय के लिए एकत्रित हैं. यूपी के भी सभी 75 जिलों में ओडीओपी प्रोडक्ट चुने गए हैं. वर्ष 2017 में उत्तरप्रदेश का कुल निर्यात 88 हजार करोड़ रुपए था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 1 लाख 86 हजार करोड़ तक पहुंच गया है. इसमें ओडीओपी का योगदान 50 प्रतिशत रहा है. यहां 44 उत्पादों को जीआई टैग दिलवाए गए हैं.

वहीं, उत्तर प्रदेश के आयुक्त उद्योग विभाग रोहित आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश 96 लाख एमएसएमई यूनिट के साथ देश का सबसे बड़ा राज्य है. इससे राज्य में पूंजी निवेश की क्रांति आई है. 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ हुआ है. यह देश में लॉजिस्टिक्स में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा. प्रदेश में 10 से 50 एकड़ के एमएसएमई पार्क विकसित किए जा रहे हैं.

गांव कनेक्शन के संस्थापक नीलेश मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का साझा डबल इंजन हैं. गांव कनेक्शन ने उत्तर प्रदेश के जिलों से अपनी यात्रा शुरू की, जिसमें जिलों के ओडीओपी प्रोडक्ट्स को पहचान दिलवाई गई. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव देशभर के लिए एक अनोखा मॉडल बनकर सामने आया है. गांव कनेक्शन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की साझी विरासत का डाकिया बन रहा है.

प्रदर्शनी में एमपी-यूपी की कला चमकी
कार्यक्रम में दोनों राज्यों के शिल्पकारों के प्रमुख उत्पादों की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया . इस प्रदर्शनी में शिल्पकारों की बांस शिल्प मेटल क्राफ्ट वस्त्र कला तथा जूट शिल्प के उत्पाद प्रदर्शित किए गए. इसके माध्यम से लघु उद्योग और शिल्पकारों की परिश्रम को दर्शाया गया. प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद में शामिल विभिन्न उत्पादों, जी आई टैग प्राप्त उत्पादों को साझा मंच मिला. साथ ही मध्य प्रदेश के निवेश अवसरों औद्योगिक क्षमता पारंपरिक कपड़ों तथा पर्यटन स्थलों को भी इसमें प्रदर्शित किया गया है.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया. उन्होंने शिल्पियों से संवाद भी किया. इस प्रदर्शनी में वाराणसी सॉफ्ट स्टोन जरी वर्क बनारस ब्लांकेट्स, साड़ी वर्क बनारस वुडन वर्क बनारस ग्लास माला उत्पाद, बनारस गुलाबी मीनाकारी क्राफ्ट के स्टॉल लगाए गए हैं.

इसी तरह मध्य प्रदेश के शिल्पियों के बनाए गए बनाना फाइबर प्रोडक्ट, डिंडोरी-मंडला जिलों के मिलेट्स, भोपाल जिले के जूट, जारी जरदोजी प्रोडक्ट, सीधी जिले की पंजा दरी, रीवा जिले के बांस उत्पाद, बैतूल जिले के भरेवा मेटल क्राफ्ट, शिवपुरी के महिला स्व सहायता समूह द्वारा बनाए गए कपड़े के उत्पाद, महेश्वरी हैंडलूम, उज्जैन के बुटीक प्रिंट और चंदेरी साड़ियों के स्टॉल लगाए गए हैं.

डेडलाइन के आखिरी दिन बस्तर संभाग में 35 नक्सलियों का सरेंडर

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डेडलाइन के आखिरी दिन बस्तर संभाग में 35 नक्सलियों का सरेंडर
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान एक निर्णायक मुकाम पर पहुंच गया है. ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े 25 माओवादी कैडर (12 महिलाओं सहित) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी कर ली है.

मंगलवार (31 मार्च) को बीजापुर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में इन 25 कैडरों ने औपचारिक रूप से सरेंडर किया. इन पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. साथ ही सुरक्षा बलों ने इनके कब्जे से 93 घातक हथियार बरामद किए, जिनमें एलएमजी, एके-47, एसएलआर, आईएनएसएएस, .303 राइफल आदि शामिल हैं.

14 करोड़ रुपये बरामद
सबसे बड़ी उपलब्धि रही 14.06 करोड़ रुपये की सामग्री की बरामदगी, जिसमें 2.90 करोड़ रुपये नकद और 7.20 किग्रा सोना (मूल्य 11.16 करोड़ रुपये) शामिल है. इस प्रकार 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 1003 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं और कुल 19.43 करोड़ रुपये की बरामदगी हो चुकी है.

सरेंडर करने वालों में कई वरिष्ठ कैडर शामिल
सरेंडर करने वालों में कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जिनमें सीवाईपीसी मंगल कोरसा उर्फ मोटू, सीवाईपीसी आकाश उर्फ फागु उईका, डीवीसीएम शंकर मुचाकी, एसीएम राजू रैयाम उर्फ मुन्ना और एसीएम पाले कुरसम उर्फ कमली कुरसम (महिला) प्रमुख हैं. इनमें से कई कैडर 1997 से 2004 के बीच संगठन में शामिल हुए थे और विभिन्न बड़े हमलों में शामिल रहे थे.

परिजनों ने भी कार्यक्रम में लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. भापुसे, सीआरपीएफ के उप महानिरीक्षक बी.एस. नेगी, बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. स्थानीय समाज के बुजुर्गों और सरेंडर करने वाले कैडरों के परिवारजनों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.

ये है प्रशासन का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत इन कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे. प्रशासन का लक्ष्य उन्हें सम्मानजनक जीवन और समाज में पूर्ण रूप से समाहित करना है.

‘पूना मारगेम’ अभियान के माध्यम से सुरक्षा बलों (डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा, सीआरपीएफ आदि) ने निरंतर विश्वास निर्माण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके परिणामस्वरूप माओवादियों में मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है.

हिंसा छोड़कर त्याग दें हथियार- पुलिस
पुलिस ने शेष बचे माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर हथियार त्याग दें. शासन उनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

ईरान वॉर के बीच अमेरिका को इन 4 देशों ने दिया बड़ा झटका

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ईरान वॉर के बीच अमेरिका को इन 4 देशों ने दिया बड़ा झटका
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान के ऊपर दबाव बनाने में जुटे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन न मिलने पर नाराज़ दिखाई दे रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से दूरी बना ली है.

दरअसल, फ्रांस, इटली, स्पेन और स्विटजरलैंड जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने एयरस्पेस या ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी. इससे अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ा है और ट्रंप की नाराज़गी भी बढ़ी है.

कई देशों ने अमेरिका को झटका
डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के बीच सहयोगी देशों के इस रुख से काफी नाराज नजर आए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब भविष्य में इन देशों को अमेरिकी मदद की जरूरत पड़ेगी, तब संयुक्त राज्य अमेरिका भी उनका साथ नहीं देगा. ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों पर तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि वे या तो अमेरिका से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) खरीदें या फिर Strait of Hormuz से खुद जाकर तेल लेकर आएं.

वहीं यूनाइटेड किंगडम ने भी इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया, हालांकि उसने क्षेत्र में अपने हितों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य बल और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है. ब्रिटेन का कहना है कि उसका उद्देश्य सीधे युद्ध में कूदना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और संभावित हमलों से अपने नागरिकों व सहयोगियों की रक्षा करना है.

वॉर और खिंचने की आशंका
यह स्थिति दिखाती है कि भले ही अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी नाटो के सदस्य हैं, लेकिन इस संघर्ष को लेकर सभी देशों की रणनीति और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं. यही वजह है कि अमेरिका को इस बार अपेक्षित वैश्विक समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिससे भू-राजनीतिक समीकरण और जटिल होते जा रहे हैं.

दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों पर ही खत्म होगा. उन्होंने ईरान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसे अमेरिकी फैसलों को मानना ही होगा. वहीं, ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह कमजोर कर दिया है और अब उसके पास ज्यादा ताकत नहीं बची है.

उन्होंने यह भी कहा कि जो देश Strait of Hormuz का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें खुद आगे बढ़कर इसे खोलना चाहिए. ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह खत्म करने में भी पीछे नहीं हटेगा, हालांकि फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, और जैसे ही यह लक्ष्य पूरा होगा, होर्मुज स्ट्रेट अपने आप खुल जाएगा.

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी
इस पहल के अंतर्गत पहली बार प्रदेश में 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंसों की शुरुआत की गई है, जो नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह सेवा राज्य की नवजात सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं को सुरक्षित रूप से उच्च स्तरीय उपचार केंद्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर सुदृढ़ हो रही हैं और पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ा है, जहां उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है। उप-स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण एवं उन्नयन के कारण अब लोगों को छोटे-छोटे इलाज के लिए दूर शहरों की ओर नहीं जाना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाए, ताकि हर जरूरतमंद मरीज तक समय पर स्वास्थ्य सहायता पहुंच सके। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा का यह विस्तार आम जनता के विश्वास को और सशक्त करेगा कि संकट की घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ उनके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पहली बार शुरू की गई 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंस सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से आज का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक है और इससे लाखों लोगों को त्वरित चिकित्सा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एम्बुलेंस सेवा में किसी भी प्रकार की देरी या कमी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है।

प्रदेश में एम्बुलेंस सेवा की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद तक समय पर सहायता पहुंच सके।

नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इनमें प्रशिक्षित नवजात इमरजेंसी तकनीशियन, 24×7 ईएमटी एवं पायलट की उपलब्धता के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक का ऑनलाइन मार्गदर्शन सुनिश्चित किया गया है। इन एम्बुलेंसों में इन्क्यूबेटर, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, सिरिंज पंप, नेब्युलाइज़र, सक्शन मशीन, पर्याप्त ऑक्सीजन सपोर्ट एवं 41 प्रकार की आपातकालीन दवाओं सहित सभी आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इन्हें “चलते-फिरते नवजात आईसीयू” के रूप में स्थापित करती हैं।

इसके अतिरिक्त, BLS एवं ALS एम्बुलेंसों में मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक एवं उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ईसीजी मॉनिटर, ग्लूकोमीटर जैसी जांच सुविधाओं के साथ ऑक्सीजन सपोर्ट, नेब्युलाइजेशन एवं अन्य आपातकालीन उपचार व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। गंभीर मरीजों के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु पोर्टेबल वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर मॉनिटर, सिरिंज पंप, लैरिंजोस्कोप सहित अन्य उन्नत उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह समग्र पहल प्रदेश के शहरी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नागरिकों के लिए एक मजबूत जीवनरक्षक तंत्र के रूप में स्थापित होगी।
इस अवसर पर विधायक मोती लाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संजीव झा, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रणबीर शर्मा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति लेकर आए।

 1 अप्रैल से बदल जाएंगे डिजिटल पेमेंट के नियम, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होगा लागू

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1 अप्रैल से बदल जाएंगे डिजिटल पेमेंट के नियम, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होगा लागू
डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। Reserve Bank of India के निर्देश के बाद अब सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य किया जा रहा है।

इसका सीधा मतलब है कि अब सिर्फ ओटीपी के जरिए पेमेंट पूरा नहीं होगा, बल्कि यूजर्स को अपनी पहचान दो अलग-अलग तरीकों से सत्यापित करनी होगी। यह बदलाव बढ़ते साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए किया जा रहा है।

ट्राइबल गेम्स के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे मणिकांता, जीते आठ स्वर्ण पदक

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ट्राइबल गेम्स के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे मणिकांता, जीते आठ स्वर्ण पदक
ट्राइबल गेम्स में कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल सबसे सफल एथलीट बनकर उभरे हैं। 21 वर्षीय मणिकांता ने विलक्षण प्रतिभा का परिचय देते हुए व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में कुल आठ स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम कर प्रतियोगिता में कर्नाटक का दबदबा स्थापित कर दिया।

चुनौतियों के बीच अनुशासित प्रदर्शन ब्रेस्टस्ट्रोक के विशेषज्ञ माने जाने वाले मणिकांता ने इस बार बहुमुखी कौशल दिखाते हुए चारों स्ट्रोक-ब्रेस्टस्ट्रोक, फ्रीस्टाइल, बटरफ्लाई और बैकस्ट्रोक में हिस्सा लिया।

रिकवरी के लिए बहुत कम समय मिल पा रहा था
उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती कड़ा शेड्यूल था, जहां रेस और पदक समारोहों के बीच रिकवरी के लिए बहुत कम समय मिल पा रहा था। हालांकि थकान के कारण 50 मीटर फ्रीस्टाइल में वे मामूली अंतर से स्वर्ण से चूक गए, लेकिन उनकी उपलब्धि ने उन्हें इस खेल का पोस्टर बॉय बना दिया है।