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सूर्य-बुध की युति से 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, नौकरी-व्यापार में मिल सकता है फायदा

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की युति और राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। 22 अगस्त को सूर्य और बुध का सिंह राशि में मिलन होने जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, मान-सम्मान और करियर का कारक माना जाता है, जबकि बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क क्षमता से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में सूर्य-बुध की युति को कई राशियों के लिए शुभ माना जा रहा है।

इस ग्रह संयोग के प्रभाव से कुछ राशि वालों को नौकरी, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना जताई जा रही है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

1. मेष राशि

सूर्य-बुध का मिलन मेष राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से लाभकारी माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। व्यापारियों को नई डील या कारोबार विस्तार का मौका मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

2. मिथुन राशि

मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं, इसलिए यह ग्रह संयोग इस राशि के जातकों के लिए विशेष महत्व रखता है। नौकरी में पद और जिम्मेदारी बढ़ सकती है। व्यापार में नए संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं। रुके हुए आर्थिक काम पूरे होने की संभावना है।

3. सिंह राशि

सूर्य-बुध की युति सिंह राशि में ही बनने जा रही है। ऐसे में इस राशि के जातकों के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि हो सकती है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और व्यापार में महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अवसर मिलेगा। धन से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

4. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए भी सूर्य-बुध का यह संयोग आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं और व्यापार में नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। आय के अतिरिक्त स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है।

NEET परीक्षा की सुरक्षा पर सवाल, सरकार ने कहा- सिस्टम फूलप्रूफ; कोर्ट ने दिया UPSC का उदाहरण

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NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सरकार और अदालत के बीच अहम चर्चा हुई। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बताते हुए कहा गया कि सिस्टम को फूलप्रूफ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। वहीं, अदालत ने परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए UPSC की व्यवस्था से सीख लेने की बात कही।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

सरकार की ओर से बताया गया कि परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा के कई स्तर बनाए गए हैं और पेपर की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी तथा प्रशासनिक उपाय किए जाते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

अदालत ने इस दौरान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी प्रक्रियाओं से सीख लेकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को और सुरक्षित बनाया जा सकता है। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि अभ्यर्थियों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कायम रहना जरूरी है।

NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर की सुरक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी परिणाम प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान करना बेहद महत्वपूर्ण है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

भारत ने श्रीलंका को पहले टेस्ट में चटाई धूल, 165 रन की बड़ी जीत से सीरीज शुरू

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भारत ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज की शानदार शुरुआत करते हुए पहले मुकाबले में 165 रन से जीत दर्ज की। भारतीय टीम ने मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन किया और बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी दोनों विभागों में श्रीलंकाई टीम पर दबाव बनाए रखा।

भारतीय टीम ने पहली पारी में मजबूत प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने शानदार लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी की और नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। श्रीलंका की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए दबाव में नजर आई और भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी।

मुकाबले के निर्णायक चरण में भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की बल्लेबाजी को समेटते हुए टीम को 165 रन से शानदार जीत दिलाई। इस जीत के साथ भारत ने टेस्ट सीरीज में बढ़त हासिल कर ली है।

भारतीय टीम के लिए यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी के साथ रन बनाए, जबकि गेंदबाजों ने दबाव के क्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबला भारत के पक्ष में कर दिया।

इस जीत के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उसकी नजर सीरीज के अगले मुकाबले पर होगी। वहीं, श्रीलंका की टीम वापसी करने और सीरीज बराबर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

SBI ग्राहकों के लिए बड़ा अपडेट, मुफ्त ATM निकासी की सीमा पार करते ही देना होगा शुल्क

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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए बैंकिंग लेनदेन से जुड़ी एक जरूरी खबर सामने आई है। 1 अक्टूबर से एटीएम से नकद निकासी को लेकर लागू होने वाले नियमों को लेकर ग्राहकों के बीच चर्चा है। ऐसे में ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि मुफ्त नकद निकासी की सीमा के बाद किस तरह के शुल्क लागू हो सकते हैं।

बैंकों की ओर से एटीएम लेनदेन पर मुफ्त सीमा तय की जाती है। यह सीमा खाते के प्रकार, एटीएम के प्रकार और अन्य लागू शर्तों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। निर्धारित मुफ्त सीमा पार करने पर अतिरिक्त नकद निकासी शुल्क लगाया जा सकता है।

4 से ज्यादा निकासी पर क्या होगा?
यदि किसी खाते या कार्ड पर चार मुफ्त नकद निकासी की सीमा लागू है और ग्राहक इसके बाद भी एटीएम से पैसे निकालता है, तो अतिरिक्त लेनदेन पर शुल्क लग सकता है। हालांकि, यह शुल्क सभी SBI ग्राहकों के लिए समान हो, यह जरूरी नहीं है। ग्राहकों को अपने खाते और कार्ड की लागू शुल्क संरचना जरूर देखनी चाहिए।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
SBI ग्राहक एटीएम से बार-बार छोटी रकम निकालने के बजाय जरूरत के अनुसार नकद निकासी की योजना बना सकते हैं। साथ ही, डिजिटल भुगतान, UPI और अन्य ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करने से नकद निकासी की जरूरत कम की जा सकती है।

ग्राहकों को सलाह है कि 1 अक्टूबर से लागू होने वाले किसी भी नए शुल्क या नियम की पुष्टि SBI की आधिकारिक वेबसाइट, बैंक की शाखा या ग्राहक सेवा माध्यम से जरूर करें। अलग-अलग खाते और कार्ड पर नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए केवल सोशल मीडिया या अनधिकृत संदेशों के आधार पर निर्णय न लें।

विन डीजल की अगली रफ्तार भरी फिल्म तैयार, ‘Fast Forever’ को लेकर सामने आया बड़ा अपडेट

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हॉलीवुड की मशहूर एक्शन फ्रेंचाइजी ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ के फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। विन डीजल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Fast Forever’ को लेकर नया अपडेट सामने आया है। फिल्म की शूटिंग जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद एक बार फिर हाई-ऑक्टेन एक्शन और तेज रफ्तार कारों का रोमांच बड़े पर्दे पर देखने को मिलेगा।

‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ फ्रेंचाइजी अपनी शानदार कारों, जबरदस्त स्टंट और एक्शन सीक्वेंस के लिए दुनियाभर में लोकप्रिय है। विन डीजल इस फ्रेंचाइजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और उनके किरदार डोमिनिक टोरेटो को दर्शकों ने खासा पसंद किया है।

शूटिंग को लेकर आया बड़ा अपडेट
‘Fast Forever’ को फ्रेंचाइजी की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म की शूटिंग की तैयारियां तेज हो गई हैं और जल्द ही कैमरा रोल होने की उम्मीद है। फिल्म से जुड़ी कहानी और अन्य कलाकारों को लेकर फिलहाल कई जानकारियां सामने आना बाकी हैं।

फैंस को है जबरदस्त एक्शन का इंतजार
फिल्म की घोषणा के बाद से ही फैंस इसके अगले अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। पिछली फिल्मों की तरह इस बार भी दर्शकों को तेज रफ्तार कारों, बड़े एक्शन सेट पीस और भावनात्मक कहानी के मिश्रण की उम्मीद है।

विन डीजल की मौजूदगी फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ा रही है। अब फैंस की नजर इस बात पर है कि शूटिंग कब शुरू होती है और फिल्म की रिलीज से जुड़ी आधिकारिक घोषणा कब की जाती है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार को मिली रफ्तार, रोज 11 लाख श्रमिकों को काम; महिलाओं की हिस्सेदारी 57%

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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र से बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में हर दिन करीब 11 लाख ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

 

ग्रामीण परिवारों को मिल रहा रोजगार का सहारा

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से बड़ी संख्या में श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है। इससे उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन करने की जरूरत कम हो रही है। ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के जरिए गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

रोजगार में महिलाओं की मजबूत भागीदारी

कुल रोजगार में महिलाओं की 57 प्रतिशत हिस्सेदारी इस पहल की खास उपलब्धि मानी जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में भी उनका योगदान मजबूत हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार के साथ-साथ आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाएं भी संचालित हैं। राज्य के श्रम विभाग की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए शिक्षा, आवास, कौशल विकास, पेंशन और अन्य सहायता योजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रोजगार के साथ विकास कार्यों पर जोर

ग्रामीण रोजगार से जुड़ी गतिविधियों का उद्देश्य सिर्फ मजदूरी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि गांवों में जल संरक्षण, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े स्थायी संसाधनों का निर्माण करना भी है। इससे रोजगार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है।

प्रदेश में ग्रामीण श्रमिकों को बड़ी संख्या में प्रतिदिन रोजगार मिलने और महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत होने को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

MP कैबिनेट का बड़ा फैसला, लाड़ली बहना योजना अगले 5 साल भी रहेगी जारी

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मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में योजना को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।

 

पांच साल तक जारी रहेगी योजना

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना को अगले पांच वर्षों तक निरंतर चलाया जाएगा। सरकार की ओर से योजना के लिए बड़ी राशि स्वीकृत किए जाने से इसके लाभार्थियों को आगे भी आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।

महिलाओं के सशक्तीकरण पर सरकार का फोकस

मध्य प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए कुल ₹1,32,828 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसमें लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी शामिल है।

सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है।

अन्य योजनाओं के लिए भी बड़ी राशि मंजूर

कैबिनेट ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए ₹16,326 करोड़ और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए ₹2,137 करोड़ मंजूर किए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ₹11,835 करोड़ तथा आईटी और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ₹492 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

सरकार के इस फैसले को प्रदेश में महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को दी जा रही प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है।

CJP प्रदर्शन पर लाठीचार्ज को लेकर पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, ‘असामाजिक तत्वों’ का दिया हवाला

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जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान अधिकतम संयम बरता गया और केवल न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास करीब 30 हजार प्रदर्शनकारी मौजूद थे और व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन बाद में भीड़ के एक हिस्से ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया।

हलफनामे में पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ असामाजिक तत्व और अपराधी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, भीड़ के बीच सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य ऐसे तत्वों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करना था।

‘कील वाली लाठी’ के आरोप से भी इनकार
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान ‘कील वाली लाठी’ या नुकीले डंडों के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया है। पुलिस ने कहा कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने संसद की ओर मार्च को भी अनुमति के बिना किया गया प्रयास बताया।

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में 2,873 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल को पुलिस ने अनुपातिक कदम बताया है।

यह मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट के सामने है जब शीर्ष अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संरक्षित है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

सावन में बेटियों के मायके आने की खास वजह, आरती से स्वागत करने की है परंपरा

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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ पारिवारिक रिश्तों और परंपराओं से भी जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शादी के बाद बेटी का सावन में मायके आना शुभ माना जाता है। खासकर नवविवाहित बेटियों के लिए पहले सावन में मायके आने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। मान्य

ता है कि इससे बेटी और मायके के बीच स्नेह बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

 

आरती उतारकर क्यों किया जाता है स्वागत?

मान्यता के अनुसार, जब बेटी सावन में मायके आती है तो उसका स्वागत आरती, रोली-अक्षत और मिठाई से किया जाता है। कई जगह बेटी को सावन से जुड़े पकवान खिलाने और श्रृंगार सामग्री या उपहार देने की भी परंपरा है। कुछ परिवार बेटी के हाथों से घर में तुलसी का पौधा लगवाना भी शुभ मानते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के साथ इसका एक भावनात्मक पक्ष भी है। शादी के बाद बेटी के मायके आने से परिवार के सदस्यों के बीच अपनापन और रिश्तों की गर्माहट बनी रहती है।

सावन में शादी करना क्यों माना जाता है वर्जित?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में सावन का महीना मुख्य रूप से भगवान शिव की उपासना और साधना के लिए समर्पित माना जाता है। इसी अवधि में चातुर्मास भी रहता है, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए कई परंपराओं में सावन के दौरान विवाह और अन्य बड़े मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।

मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और देवशयन के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है। हालांकि, विवाह की तिथियां और शुभ मुहूर्त क्षेत्र, पंचांग और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

बेटी के लिए सावन का खास महत्व

सावन में मायके आने की परंपरा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है। यह बेटी को अपने माता-पिता और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर भी देती है। हरियाली तीज जैसे पर्वों पर भी विवाहित महिलाओं के मायके जाने और परिवार के साथ त्योहार मनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

इस तरह सावन में बेटी का मायके आना जहां धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है, वहीं यह परिवार और बेटी के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने वाली सदियों पुरानी परंपरा भी है।

24 दिन के छात्र आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम, विवादित नियुक्ति परीक्षाएं रद्द

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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर करीब 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL के जरिए कराई गई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम को आंदोलन कर रहे छात्रों की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच

सरकार ने TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited के जरिए वर्ष 2014 से अब तक कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणाम और उनसे हुई नियुक्तियों की जांच का फैसला भी किया है। JSSC-CGL के अलावा अन्य परीक्षाएं भी इस जांच के दायरे में आएंगी।

क्यों शुरू हुआ था छात्रों का आंदोलन?

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, गड़बड़ियों की जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना थी। आंदोलन के दौरान छात्रों ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई।

JSSC-CGL रद्द होने से चयनित अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

जहां आंदोलन कर रहे छात्रों ने परीक्षा रद्द होने के फैसले का स्वागत किया है, वहीं JSSC-CGL में सफल होकर नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई सफल उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है और कहा है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो उसका खामियाजा सभी चयनित अभ्यर्थियों को क्यों भुगतना पड़े।

सरकार ने जांच और सुधार का भरोसा दिया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि अगर निर्धारित SOP का सही तरीके से पालन किया गया होता तो इस तरह की गड़बड़ियां सामने नहीं आतीं। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा और जांच का रास्ता अपनाया है। वहीं, आंदोलनकारी छात्र अभी भी पूरी पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की गारंटी की मांग कर रहे हैं।

इस फैसले के बाद झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब और किस नई व्यवस्था के तहत कराया जाता है और पहले से चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है।