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“वोक फेस्टिवल” और सांस्कृतिक अवमूल्यन का बढ़ता खतरा

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“वोक फेस्टिवल” और सांस्कृतिक अवमूल्यन का बढ़ता खतरा
भोपाल फिल्म फेस्टिवल : ‘वोक’ संस्कृति, वैचारिक सबवर्शन और भारतीय समाज पर गहरा खतरा

भोपाल फिल्म फेस्टिवल को लेकर उठे विवाद केवल किसी आयोजन की नीति-समीक्षा भर नहीं हैं, बल्कि यह प्रश्न भारतीय समाज, संस्कृति, परिवार और युवाओं के मनोविज्ञान की दिशा से जुड़ा हुआ है। विडंबना यह है कि जिस आयोजन का सह-प्रस्तुतिकरण मध्यप्रदेश पर्यटन जैसे सरकारी संस्थान ने किया, वही आयोजन उन फिल्मों और व्यक्तियों के लिए मंच बन गया है जो लगातार भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के विरोध में वैचारिक अभियान चलाते रहे हैं। यह अकेला उदाहरण नहीं है; पिछले कई वर्षों से ‘वोक’ और ‘प्रगतिशील’ नामों की आड़ में ऐसे कार्यक्रमों का मकसद समाज की मूल संरचना को धीरे-धीरे बदलना, भ्रमित करना और एक नई मानसिकता को नॉर्मल के रूप में स्थापित करना होता है।
फेस्टिवल में प्रस्तुत फिल्मों—Kiss (2022), Kuchur (The Itch) और अन्य चयनित शीर्षकों—की मूल थीम LGBTQ विचारधारा, किशोर यौन-मन और आनंद की अवधारणा को एक विशेष वैचारिक ढांचे में प्रस्तुत करना थी। Varun Grover जैसे निर्देशक, जो लंबे समय से वामपंथी विचारधारा का प्रचार करते रहे हैं और सरकार, भाजपा तथा आरएसएस पर खुली टिप्पणियों के लिए प्रसिद्ध हैं, ऐसे आयोजनों में विशेष स्थान पाते हैं। प्रश्न है: क्या करदाताओं के पैसे से ऐसे आयोजनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जो खुले तौर पर भारतीय समाज व राष्ट्रवादी विमर्श का विरोध करते हों?

वोकिज़्म की वैचारिक जड़ें : सांस्कृतिक मार्क्सवाद की नई शाखा
वोक विचारधारा को केवल एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में देखना भूल होगी। यह सांस्कृतिक मार्क्सवाद के आधुनिक स्वरूप का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समाज की पारंपरिक इकाइयों—परिवार, धर्म, संस्कृति, पुरुष–स्त्री संबंध, नैतिकता और सामाजिक अनुशासन—को तोड़ना है।
वोकिज़्म व्यक्ति को परिवार से बड़ा बनाता है, इच्छा को मर्यादा से ऊपर रखता है और आनंद (pleasure) को मूल मूल्य के रूप में स्थापित करता है।
फिल्में इसी दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम हैं, क्योंकि वे कथा, भावनाओं, कला और “स्वतंत्रता” के नाम पर संवेदनशील विषयों को सामान्य बना देती हैं।

युवाओं के मन पर प्रभाव : वोक सिनेमा का मनोवैज्ञानिक आयाम
किशोरावस्था किसी भी मनुष्य के जीवन का अत्यंत संवेदनशील चरण है। इस उम्र में दिखाए गए कथानक उनके मन में स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं।
‘Kiss’ (2022) फिल्म में दो किशोर लड़कों के बीच हुए चुंबन को कहानी का केंद्र बनाना LGBTQ अवधारणा की तरफ प्रविष्टि का सीधा माध्यम है। दूसरी ओर Kuchur (The Itch) जैसी फिल्में एक किशोरी के “female pleasure” और हस्तमैथुन को सामान्य और सहज प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है कि कला के नाम पर किशोरों के मनोविज्ञान को किस दिशा में ले जाया जा रहा है?
क्या यह उनकी जिज्ञासाओं का मार्गदर्शन है या उन्हें यौनिक प्रयोगवाद की ओर धकेलना?

सामाजिक विकृतियों का सामान्यीकरण : भारतीय जीवन-मूल्यों से द्रोह

आज जिस प्रकार “कला”, “स्वतंत्रता” और “अभिव्यक्ति” के नाम पर सामाजिक विकृतियों को सामान्य किया जा रहा है, वह केवल एक सांस्कृतिक भ्रम नहीं बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों के साथ सीधा द्रोह है। भारतीय चिंतन में कामना, संबंध और यौन व्यवहार को हमेशा जिम्मेदारी, संयम और सामाजिक संतुलन के साथ जोड़ा गया है। किंतु वोक विचारधारा इन संवेदनशील विषयों को किशोरावस्था में ही उन्मुक्त प्रयोग का क्षेत्र बनाकर न केवल परंपरागत नैतिकता पर आघात करती है, बल्कि मनुष्य के भावनात्मक और मानसिक विकास को भी अव्यवस्थित कर देती है। किशोरों की यौन जिज्ञासाओं को ‘स्वतंत्रता’ बताना और परिवार, मर्यादा, संस्कार को ‘दमनकारी संरचना’ घोषित करना, वस्तुतः समाज को उसकी धुरी से हटाने का प्रयास है। यह प्रक्रिया व्यक्ति को परिवार से, समाज से और अंततः अपनी सांस्कृतिक पहचान से काट देती है। सामाजिक विकृतियों का यह सामान्यीकरण उस गहरी वैचारिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पीढ़ियों को मूल्यविहीन बनाना और उपभोक्तावाद, व्यक्तिवाद तथा वाम-उदारवादी मताग्रह की प्रयोगशाला में ढालना है। अतः ऐसे आयोजनों का प्रश्न कला का नहीं—समाज के सांस्कृतिक भविष्य का है।

मीडिया नैरेटिव बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का युगधर्म
मीडिया का एक बड़ा वर्ग ऐसी फिल्मों व आयोजनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार और ‘प्रगतिशीलता’ का प्रतीक बताता है। परंतु राष्ट्रीय दृष्टि पूछती है— क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ सामाजिक अराजकता है?
क्या कला का दायित्व समाज निर्माण है या समाज विघटन?
मीडिया नैरेटिव इस विमर्श को इस तरह प्रस्तुत करता है कि जैसे परंपरावादी या राष्ट्रवादी वर्ग “अभिव्यक्ति का विरोध” कर रहा हो। जबकि वास्तविक संघर्ष विचारधारा बनाम विचारधारा का है— एक ओर हजारों वर्षों की सभ्यता आधारित संस्कृति, दूसरी ओर पश्चिम प्रेरित ‘वोक प्रयोगशाला’।

क्यों यह मुद्दा महज एक फिल्म फेस्टिवल का नहीं है?
क्योंकि यह प्रश्न सीधे-सीधे यह तय करेगा कि—
* हमारे बच्चे किस मानसिकता के साथ बड़े होंगे,
* परिवार संस्था का भविष्य क्या होगा,
* समाज नैतिकता व मर्यादाओं को कितना महत्व देगा,
* और भारत की सांस्कृतिक आत्मा अगले वर्षों में कैसे विकसित होगी।
यदि राज्य सरकारें, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और पर्यटन विभाग जैसे संस्थान भी वैचारिक प्रयोगशालाओं में परिवर्तित हो जाएँ, तब यह केवल कला का विषय नहीं रह जाता—यह सांस्कृतिक सुरक्षा का विषय बन जाता है।

सांस्कृतिक आत्मरक्षा का समय
भोपाल फिल्म फेस्टिवल एक केस स्टडी है कि कैसे वोक एजेंडा सरकारी संरक्षण, कलात्मक आवरण और मीडिया नैरेटिव के सहारे समाज के भीतर स्थान बनाने की कोशिश करता है। भारत काठ की तलवारों वाला राष्ट्र नहीं; यह हजारों वर्षों की सांस्कृतिक दृढ़ता वाला देश है। लेकिन दृढ़ता तभी टिकती है जब समाज अगले वैचारिक आक्रमणों को पहचान सके। इसलिए आवश्यक है कि—
* कला को वैचारिक हथियार बनने से रोका जाए,
* करदाता के पैसे का उपयोग सांस्कृतिक विघटन के लिए न हो,
* और समाज यह समझे कि “वोकिज़्म” केवल एक फैशन नहीं, एक पूर्ण राजनीतिक-सांस्कृतिक आंदोलन है।
भारत को भारत रहना है, बनाये रखना है अथवा भावी पीढ़ी का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है जब यहां का ” हम भारत के लोग” – का जन गण मन जागृत होगा, परिवर्तन के लिये तत्पर होगा तभी यहाँ कि समाज और राष्ट्र अपने सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा स्वयं करेगा।
— कैलाश चन्द्र

एआई समिट के मंच से भारत-UAE साझेदारी को नई धार

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एआई समिट के मंच से भारत-UAE साझेदारी को नई धार
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती मिली। समिट में हिस्सा लेने पहुंचे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात की। इस बैठक में उन्नत तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा हुई। इस बात की जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दी। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस बुधवार को दिल्ली पहुंचे थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और यूएई भरोसेमंद साझेदार हैं और उन्नत तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि क्राउन प्रिंस का एआई इम्पैक्ट समिट में स्वागत है और भारत-यूएई मिलकर बेहतर और साझा भविष्य के लिए एआई को आगे बढ़ा रहे हैं।

क्या है इंडिया AI इम्पैक्ट समिट?
यह सम्मेलन राजधानी में 20 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 वैश्विक दक्षिण में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदलती और प्रभावशाली भूमिका पर चर्चा करना है।यह सम्मेलन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ यानी सबके कल्याण और सुख की भावना के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। साथ ही यह ‘मानवता के लिए एआई’ यानी मानवता के लिए एआई के वैश्विक सिद्धांत को भी आगे बढ़ाता है।

इस सम्मेलन के तीन प्रमुख आधार स्तंभ
बता दें कि यह सम्मेलन तीन प्रमुख आधार लोग, पृथ्वी और प्रगति पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को मानव हित और वैश्विक संतुलन के साथ आगे बढ़ाना है। इस सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव-केंद्रित हो। यानी ऐसी तकनीक विकसित हो जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और समाज के हर वर्ग को समान रूप से लाभ पहुंचाए।

दूसरी ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ हो। तकनीकी प्रगति के साथ प्रकृति और संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही आर्थिक और तकनीकी विकास समावेशी हो, ताकि हर देश और समाज को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में की सहभागिता

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में की सहभागिता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सतत् विकास की राह में हम पर्यावरण की अनदेखी नहीं कर सकते। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना ही प्रगति का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि क्लाइमेट चेंज के मामले में ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रतिबद्धताओं में भी राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज से निपटने में सर्वाधिक नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादक बन लीडर की भूमिका में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है। यहां लगभग हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। मुख्यमंत्री ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का विश्वास और सुरक्षा की गारंटी देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर देश को नवकरणीय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के साथ हमारा रिश्ता नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम मुंबई में क्लाइमेट वीक-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (मप्र शासन) एवं ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल एक देश, एक राज्य या एक सरकार ही नहीं कर सकती, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए आगे बढ़ने की दिशा में मुम्बई क्लाइमेट वीक एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देना, हरित तकनीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना ही भविष्य का विकास मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ ही उद्योगों, संस्थाओं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक की भी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ जैसे व्यवहारिक बदलावों को अपनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरित ऊर्जा उत्पादन के जरिए क्लाइमेट चेंज से निपटने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार के नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है, जिसने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने ईवी नीति बनाई, जो क्लाइमेट चेंज की ओर कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजना, 300 मेगावाट 6 घंटे सौर-सह एनर्जी परियोजना सहित 24×7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजना पर काम कर रही है। यह एक नया प्रयोग है। यह भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते 12 सालों में मप्र की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। नवकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं के जरिए हमने म.प्र. की जरूरतों को पूरा करने के बाद पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें हमने किसी भी नागरिक को विस्थापित नहीं होने दिया, इस प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सांची देश की पहली सोलर सिटी बनी है। हम सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों, निजी क्षेत्र और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर मप्र को भारत का नवकरणीय ऊर्जा हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हम सौर, पवन, एनर्जी स्टोरेज, बायोफ्यूल तथा ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय टेक्नोलॉजी में वित्तीय एवं नीतिगत प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश की तेजी से परिवर्तनकारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें। इससे जलवायु को संतुलित रखने में तो मदद मिलेगी ही, यह सबके व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और मप्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ मप्र और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेंगे।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हम बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मप्र में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट, शाजापुर, आगर-मालवा और रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना पर काम हुआ है। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अनंत संभावनाओं का प्रदेश है। यहां निवेश करें, सरकार आपके साथ है।

अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा, विद्युत आपूर्ति का एक कारगर, सस्ता और विश्वसनीय विकल्प है। हम मध्यप्रदेश के नागरिकों को कम से कम दर पर विद्युत आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों से कहा कि वे नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उनकी जरूरतों और सुझावों के बारे में बताएं, सरकार इस क्षेत्र के विकस के लिए किए जाने वाले सभी नवाचारों में इन सुझावों को समाहित करेगी। एसीएस श्रीवास्तव ने कहा कि मप्र में 24×7 घंटे विद्युत आपूति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डावोस में वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम में विश्व समुदाय के समक्ष कमिटमेंट किया था, जिसे हम अब पूरा करने जा रहे हैं।

विश्व बैंक समूह से संबद्ध इंटरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेशन (आईएफसी) के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक इमाद एन. फ़खौरी ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार की तेजी सराहनीय है। इस क्षेत्र के विकास में सरकार की सोच और दिशा स्पष्ट है। 24X7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा पर मध्यप्रदेश सरकार की इन्वेस्टर्स फ्रेंडली डिजाइन से हम प्रभावित हैं। हम मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र की सभी विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का वैश्विक स्तर पर लाभ लेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में एफडीआरई सेंटर्स की स्थापना के लिए हम सरकार को हर जरूरी सहयोग देंगे।

सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन की भारत में निदेशक सु सीमा पॉल ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश नेतृत्वकर्ता है। मप्र में फिलहाल लगभग 500 गीगावॉट नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा के विकास एवं विस्तार में हम मध्यप्रदेश के साझेदार भी हैं और भागीदार भी। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में हम आज मध्यप्रदेश के साथ पार्टनरशिप के लिए एक एमओयू भी कर रहे हैं।

कार्यक्रम को डॉ. अश्विनी कुमार एवं अमित सिंह ने भी संबोधित किया। मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुए विकास एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर देश-विदेश के पर्यावरण विशेषज्ञों, नीति-नियंताओं और बड़ी संख्या में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस भी उपस्थित थे।

खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ के विकास में निभाएं अहम भूमिका : मुख्यमंत्री साय

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खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ के विकास में निभाएं अहम भूमिका : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित नव नियुक्त खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है और खनिज प्रशासन के प्रभावी संचालन में मैदानी अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

मुख्यमंत्री साय ने नव चयनित खनि निरीक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवाओं पर ही देश और प्रदेश का भविष्य निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि खनिज विभाग में नई नियुक्तियों से विभागीय कार्यबल मजबूत होगा तथा खनिज अन्वेषण और खनन गतिविधियों को और गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करते हुए खनिज प्रशासन से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, टिन, डायमंड, गोल्ड और लिथियम सहित विभिन्न खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है। खनिज राज्य के राजस्व का प्रमुख स्रोत भी हैं और सरकार खनिज राजस्व में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने नवनियुक्त अधिकारियों को खनिज राजस्व वृद्धि में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनि निरीक्षक के रूप में आप सभी के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करते हुए राज्य के संसाधनों के संरक्षण और सुव्यवस्थित उपयोग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 33 खनि निरीक्षकों की चयन सूची जारी की गई थी। खनिज साधन विभाग द्वारा 19 फरवरी 2026 को कुल 32 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति आदेश जारी किए गए, जिनमें से 30 नव चयनित खनि निरीक्षकों को आज मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, सचिव खनिज साधन विभाग पी. दयानंद, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म रजत बंसल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे ने रचा इतिहास, श्रीलंका को हराकर बना दिया महारिकॉर्ड

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टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे ने रचा इतिहास, श्रीलंका को हराकर बना दिया महारिकॉर्ड
टी20 वर्ल्ड कप 2026 का 38वां लीग मैच श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेला गया. मुकाबले में जिम्बाब्वे ने 6 विकेट से जीत दर्ज करते हुए टी20 वर्ल्ड कप में बड़ा रिकॉर्ड बना दिया. यह टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे की लगातार तीसरी जीत रही. तो आइए जानते हैं कि इस जीत के साथ जिम्बाब्वे ने कौन सा महारिकॉर्ड कायम किया.

मुकाबले में श्रीलंका ने पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर में 178/7 रन बोर्ड पर लगाए. रन चेज के लिए उतरी जिम्बाब्वे ने 19.3 ओवर में 182/4 रन बनाकर जीत अपने खाते में डाल ली.

यह टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में श्रीलंका के खिलाफ दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज रहा. लिस्ट में पहला सबसे बड़ा सफल रन चेज 190 रनों का है, जो इंग्लैंड ने 2014 के टूर्नामेंट में किया था. इस तरह जिम्बाब्वे ने श्रीलंका को हराकर महारिकॉर्ड कायम किया.
स्टेडियम का दूसरा सबसे बड़ा चेज

इसके साथ यह आर प्रेमदासा स्टेडियम में टी20 इंटरनेशनल का भी दूसरा सबसे बड़ा सफल चेज रहा. मैदान का सबसे बड़ा सफल चेज 215 रनों का है, जो बांग्लादेश ने 2018 की निदहास ट्रॉफी में किया था. इस तरह जिम्बाब्वे ने एक तीर से दो निशाने करते हुए एक और बड़े रिकॉर्ड पर अपना नाम लिखवा लिया.

टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे की फुल मेंबर के खिलाफ पांचवीं जीत
बनाम ऑस्ट्रेलिया, केप टाउन, 2007
बनाम आयरलैंड, होबार्ट, 2022
बनाम पाकिस्तान, पर्थ, 2022
बनाम ऑस्ट्रेलिया, कोलंबो आरपीएस, 2026
बनाम श्रीलंका, कोलंबो आरपीएस, 2026
सुपर-8 में जिम्बाब्वे की भारत से भिड़ंत

गौरतलब है कि ग्रुप चरण में जिम्बाब्वे ने कोई भी मुकाबला नहीं गंवाया. टीम ने ओमान के खिलाफ, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और श्रीलंका के खिलाफ जीत दर्ज की. वहीं टीम का तीसरा मुकाबला (आयरलैंड के खिलाफ) बारिश कारण बगैर टॉस के ही रद्द हो गया था.

जिम्बाब्वे ने ग्रुप चरण के मैच श्रीलंका में खेले. अब टीम सुपर-8 के मुकाबले भारत की सरजमीं पर खेलेगी. सुपर-8 में जिम्बाब्वे की भिड़ंत भारत से भी होगी. अगले चरण यानी सुपर-8 में जिम्बाब्वे को पहला मुकाबला वेस्टइंडीज के खिलाफ 23 फरवरी को, दूसरा भारत के खिलाफ 26 फरवरी को और तीसरा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 01 मई को खेलना है.

रमजान के पहले दिन पाकिस्तान में धमाका

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रमजान के पहले दिन पाकिस्तान में धमाका
पाकिस्तान में रमजान के पहले दिन बड़ा धमाका हुआ है। खाना बनाते वक्त कराची के सोल्जर बाजार में अचानक एक गैस ब्लास्ट हो गया। जिससे रिहायशी इमारत ढह गई।

इस हादसे में 16 लोगों की जान चली गई है, जिसमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। यह धमाका रमजान के पहले दिन सेहरी की तैयारी के दौरान सुबह 4:15 बजे हुआ।

कितने लोग घायल?
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लास्ट में 13-14 बच्चों के घायल होने की सूचना है। पुलिस और बचाव अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरने से इलाके को ज्यादा नुकसान हुआ है।

पुलिस ने बताया कि यह धमाका सुबह-सुबह हुआ, जब रिहायशी इलाके में लोग रमजान के पहले दिन सुबह का खाना बना रहे थे। रेस्क्यू टीमें मलबे में फंसे जिंदा लोगों को ढूंढने के लिए मलबा हटा रही हैं।

इस होली 100 साल बाद दुर्लभ संयोग

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इस होली 100 साल बाद दुर्लभ संयोग
भारत का सबसे बड़ा रंगों का त्योहार, होली, वर्ष 2026 में एक ऐसी खगोलीय पहेली लेकर आ रहा है जिसे समझना हर सनातनी और ज्योतिष प्रेमी के लिए जरूरी है. अगर आप कैलेंडर देख रहे हैं, तो आपको एक बड़ा अंतर नजर आएगा. इस बार होलिका दहन और धुलेंडी (रंगों की होली) के बीच 24 घंटे का ‘खाली’ समय है.

क्या यह किसी अशुभ संकेत की ओर इशारा है या ब्रह्मांड की कोई विशेष घटना? आइए विस्तार से जानते हैं कि 2 मार्च, 3 मार्च और 4 मार्च 2026 का पूरा ज्योतिषीय गणित क्या है.
होली 2026 की तारीखों का बड़ा कन्फ्यूजन (The Big Shift)

आमतौर पर परंपरा यह है कि पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगली सुबह प्रतिपदा तिथि में रंग खेला जाता है. लेकिन 2026 में ग्रहों की चाल ने इस क्रम को बदल दिया है:

होलिका दहन: 2 मार्च 2026 (सोमवार की देर रात / 3 मार्च की सुबह)
बीच का दिन (विराम): 3 मार्च 2026 (मंगलवार – सूतक और ग्रहण काल)
रंगों की होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026 (बुधवार)

भद्रा का साया: क्यों रात 12:50 के बाद ही होगा होलिका दहन?

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’. यानी भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन वर्जित है.

2 मार्च 2026 को शाम 05:55 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होते ही ‘भद्रा’ का आगमन भी हो जाएगा. भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन माना गया है, जिनका स्वभाव अत्यंत उग्र है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भद्रा का मुख काल बेहद अशुभ होता है. इसलिए, जब भद्रा का ‘पुच्छ’ (पूछ) भाग समाप्त होगा, तभी होलिका की अग्नि प्रज्वलित की जाएगी.

भद्रा समाप्ति का समय: रात 12:50 बजे (3 मार्च की सुबह)
होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: रात 12:50 AM से 02:02 AM के बीच.

3 मार्च का ‘ब्लड मून’: पूर्ण चंद्र ग्रहण का साया
2026 की होली को जो चीज़ सबसे ज्यादा ‘विशेष’ और ‘दुर्लभ’ बनाती है, वह है पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse). यह ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा.
भारत में दृश्यता और सूतक (The Sutak Factor)

2024 और 2025 की होली पर भी ग्रहण लगे थे, लेकिन वे भारत में दिखाई नहीं दिए थे, इसलिए उनका धार्मिक प्रभाव शून्य था. मगर 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा.

सूतक काल शुरू: 3 मार्च 2026 की सुबह से (ग्रहण से 9 घंटे पहले).
ग्रहण का समय: दोपहर 03:19 बजे से शाम 06:47 बजे तक.

क्यों नहीं खेलेंगे रंग? शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के दौरान उत्सव मनाना, शोर मचाना, भोजन करना और रंगों से खेलना वर्जित है. यह समय साधना और ईश्वर भक्ति का होता है. यही कारण है कि 3 मार्च को पूरा देश ‘सूतक’ में रहेगा और रंग नहीं खेले जाएंगे.
100 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग क्यों?

खगोलविदों का कहना है कि होली के दिन ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ का भारत में दिखाई देना एक शताब्दी घटना (Once in a Century Event) जैसा है. जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) से गुजरता है, तो वह तांबे जैसा लाल दिखने लगता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहते हैं. 2026 में होली की अग्नि के अगले ही दिन इस ‘लाल चाँद’ का दिखना आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से एक बड़ी घटना है.
4 मार्च: जब बुधवार को बरसेगा ‘विजय का गुलाल’

ग्रहण की समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद, 4 मार्च 2026, बुधवार को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा.
बुध ग्रह का प्रभाव: बुधवार का स्वामी बुध है, जो बुद्धि, वाणी और हास्य-विनोद का कारक है. ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण के भारीपन के बाद बुधवार की होली लोगों के तनाव को दूर करेगी और रिश्तों में मिठास घोलेगी.

JDU से 2 सीटों पर कौन जाएगा राज्यसभा

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JDU से 2 सीटों पर कौन जाएगा राज्यसभा
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है. इन पांच में से अभी तीन एनडीए के पास है. दूसरी ओर यह भी तय है कि विपक्ष की दो सीटों पर भी इस बार एनडीए का ही कब्जा रहेगा. पांच सीटों में दो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पास है और इस बार भी ये पार्टी के पास रहेगी. ऐसे में सियासी हलचल तेज हो गई है कि इन दो सीटों पर जेडीयू से इस बार राज्यसभा कौन जाएगा? इस पर जेडीयू की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई है.

‘मुझे लगता है एनडीए के खाते में आएगी पांचों सीट’
गुरुवार (19 फरवरी, 2026) को पटना मीडिया से बातचीत में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इस संबंध में बहुत कुछ साफ कर दिया. उन्होंने कहा, “राज्यसभा का चुनाव होने वाला है. पांच सीटें बिहार से होंगी… मुझे लगता है कि पांचों सीट एनडीए के खाते में आएगी. जेडीयू की दो सीटें हैं.” उन्होंने मुख्यमंत्री पर सारे फैसले को छोड़ते हुए कहा कि नीतीश कुमार तय करेंगे कि जेडीयू से कौन जाएगा. समय पर फैसला हो जाएगा.

पत्रकारों ने संजय झा से पूछा कि खबर आ रही है कि चिराग पासवान की मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजा जा सकता है. नितिन नवीन का भी नाम है. इस पर उन्होंने कहा, “हम लोगों को ये आइडिया नहीं है… मैं तो जेडीयू का ही बता सकता हूं मुख्यमंत्री बैठकर तय करेंगे.” एक सवाल पर कहा कि जेडीयू के खाते में दो सीटें आएंगी ये बिल्कुल सही है.
अभी दो सीटों पर जेडीयू से कौन-कौन है?

जेडीयू की मौजूदा दोनों राज्यसभा सीटों की बात की जाए तो अभी इस पर ‘भारत रत्न’ कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह हैं. सबसे बड़ी बात है कि ये दोनों लगातार दूसरे कार्यकाल में हैं. सवाल है कि क्या नीतीश कुमार इन दोनों की तीसरी बार भी राज्यसभा भेजेंगे? बता दें कि कुछ वर्ष पहले जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लगातार तीसरा कार्यकाल देने से पार्टी ने इनकार कर दिया था. कहा था कि लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए किसी को राज्यसभा नहीं भेजना उसकी नीति है.

हालांकि संजय झा के बयान के बाद सस्पेंस बढ़ गया है कि क्या रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह रिपीट नहीं किए जाएंगे? ऐसे में देखने वाली बात होगी कि इस बार क्या कुछ होता है.

सिर्फ मुफ्त भोजन, साइकिल, कैश ट्रांसफर पर ध्यान देंगे तो विकास कैसे होगा -सुप्रीम कोर्ट

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सिर्फ मुफ्त भोजन, साइकिल, कैश ट्रांसफर पर ध्यान देंगे तो विकास कैसे होगा -सुप्रीम कोर्ट
मुफ्त की सरकारी योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. तमिलनाडु में लोगों को मुफ्त बिजली देने की योजना पर सख्त रवैया अपनाते हुए कोर्ट ने तमिलनाडु समेत सभी राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा है कि ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में हैं, लेकिन विकास की बजाय मुफ्तखोरी में पैसे लगा रहे हैं.

केंद्र सरकार के नियम को दी चुनौती
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन ने केंद्र सरकार के Electricity (Amendment) Rules, 2024 के नियम 23 को चुनौती दी है. यह नियम बिजली की कीमतों को नियंत्रित करता है. कॉर्पोरेशन ने इसे राज्य के कामकाज में दखल और लोगों के कल्याण के लिए शुरू की गई योजना के विरुद्ध बताया था. कॉर्पोरेशन की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया. लेकिन तमिलनाडु में बड़ी संख्या में लोगों को मुफ्त बिजली देने पर नाराजगी जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा हम कैसी संस्कृति विकसित कर रहे?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, ‘देश में हम कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? जो लोग बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं, उनके लिए कल्याणकारी योजना होनी चाहिए. सबको मुफ्त सुविधा क्यों दी जाए? समस्या यह है कि अब हर राज्य में ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है. हम इस पर चिंतित हैं.’

कोर्ट ने राज्यों को नसीहत देते हुए कहा, ‘अगर आपके पास पैसे हैं, तो उसे बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों के विकास में क्यों नहीं लगाते? चुनाव के समय सामान बांटने के बजाय राज्यों को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए? ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी इन नीतियों के कारण मजबूर होकर खर्च कर रहे हैं.’

कटघरे में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजनाएं
बेंच ने डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजनाओं पर भी सवाल उठाए. चीफ जस्टिस ने कहा, ‘राज्य का कर्तव्य रोजगार के अवसर पैदा करना है। आप सुबह से लेकर दिन भर मुफ्त भोजन देने, मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली और अब सीधे लोगों के खातों में नकद ट्रांसफर करने में लगे हैं। ऐसे में विकास के लिए धन कहां बचेगा?”

दिग्गज फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन

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दिग्गज फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन
दिग्गज फिल्ममेकर एम एम बेग का निधन हो गया है. वो 70 साल के थे. इस हफ्ते की शुरुआत में वो अपने घर में मृत पाए गए थे. ये खबर उनके पब्लिसिस्ट हनी जवेरी ने दी.

हनी जवेरी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘वो काफी समय से अस्वस्थ थे. चार-पांच दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने पर पड़ोसियों ने घर से दुर्गंध आने की शिकायत पुलिस से की. पुलिस ने दरवाजा खोला तो बेग साहब का शव मिला. पुलिस ने उनकी बेटी को ये सूचना दी. बाद में शव को देर रात पोस्टमार्टम के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया. वो बहुत अच्छे व्यक्ति थे. मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं.’

बता दें कि एम एम बेग ने अपने करियर की शुरुआत जे ओम प्रकाश, विमल कुमार और राकेश रोशन के सहायक के रूप में की. वो गोविंदा की ‘आदमी खिलौना है’, ‘जैसी करनी वैसी भरनी’, ‘कर्ज चुकाना है’ और अनिल कपूर स्टारर ‘काला बाजार’ और ‘किशन कन्हैया’ जैसी फिल्मों से भी जुड़े रहे.

इन फिल्मों का किया डायरेक्ट
निर्देशक के तौर पर उन्होंने दो फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें नसीरुद्दीन शाह अभिनीत ‘मासूम गवाह’ (1990) और शिल्पा शिरोडकर अभिनीत ‘छोटी बहू’ (1994) शामिल हैं.

ऋतिक रोशन को कराई थी प्रैक्टिक्स
जवेरी ने कहा, ‘‘बेग साहब के राकेश रोशन साहब से बहुत अच्छे संबंध थे. उन्हें उच्चारण, स्वर नियंत्रण और डायलॉग की अच्छी समझ थी. इसलिए वे ऋतिक रोशन की मदद करते थे. वो ऋतिक को डायलॉग बोलने का अभ्यास कराते थे. ये उनकी पहली फिल्म “कहो ना प्यार है” आने से काफी पहले की बात है.

बेबी गुड्डू के नाम से मशहूर बेग की बेटी शाहिंदा बेग 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय बाल कलाकारों में रहीं. उनकी चर्चित फिल्मों में राजेश खन्ना और स्मिता पाटिल की ‘आखिर क्यों?’, श्रीदेवी अभिनीत ‘नगीना’, अनिल कपूर की ‘प्यार किया है प्यार करेंगे’ तथा जीतेंद्र और श्रीदेवी की ‘औलाद’ शामिल हैं.