Home Blog Page 62

विदेश मंत्रालय का बजट 20% बढ़ाने की सिफारिश

0

विदेश मंत्रालय का बजट 20% बढ़ाने की सिफारिश
संसदीय समिति (Parliamentary Panel) ने विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के लिए बजट (Budget Allocation) में 20% की शानदार वृद्धि (Hike) की सिफारिश की है। शशि थरूर (Shashi Tharoor) की अध्यक्षता वाली इस समिति (Committee) ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट (Report) पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसके लिए एक नया विदेशी नीति दस्तावेज (Policy Document) तैयार करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में मंत्रालय (MEA) का बजट केवल 7.81 प्रतिशत बढ़ा है, जो वैश्विक मंच (Global Platform) पर भारत के बढ़ते कद के हिसाब से काफी कम है। समिति का मानना है कि कूटनीतिक (Diplomatic) मजबूती के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट में विदेशोंं में रह रहे भारतीयों (Indian Diaspora) के कल्याण और सुरक्षा (Safety) पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही ओवरसीज मोबिलिटी बिल (Mobility Bill) को जल्द से जल्द संसद (Parliament) में लाने की बात कही गई है। इस कदम से विदेशों में काम करने वाले भारतीयों (Indian Workers) को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। यह भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि (International Image) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विदेश मंत्रालय का मौजूदा बजट और चिंताएं (Budget Concerns)
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय को 22,118.97 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह कुल केंद्रीय बजट का मात्र 0.41 प्रतिशत है। बजट आवंटन के मामले में विदेश मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की तुलना में 23वें स्थान पर आता है। समिति ने जोर दिया है कि भारत जैसी उभरती वैश्विक शक्ति के लिए यह बजट नाकाफी है। इसलिए इसमें तुरंत 20 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए ताकि कूटनीतिक कार्यों को सुगमता से किया जा सके।

एक नई और स्पष्ट विदेश नीति की जरूरत (Strategic Document)
भारत के पास अभी तक 36 अन्य प्रमुख देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जापान आदि) की तरह कोई एक लिखित और सार्वजनिक विदेश नीति दस्तावेज नहीं है। समिति ने कड़ाई से सिफारिश की है कि नीति नियोजन और अनुसंधान प्रभाग के माध्यम से एक स्पष्ट दस्तावेज बनाया जाए। इससे दुनिया को भारत के कूटनीतिक उद्देश्यों, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और द्विपक्षीय संबंधों का साफ पता चलेगा।

प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर जोर (Emigrant Welfare)
विदेशों में काम करने वाले 3.2 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘ओवरसीज मोबिलिटी बिल 2025’ को विधायी प्राथमिकता देते हुए तत्काल पारित करने की सिफारिश की गई है। यह 1983 के पुराने अधिनियम की जगह लेगा। इसके अलावा, प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए विदेश मंत्रालय के तहत एक अलग ‘प्रवासी भारतीय मामलों का विभाग’ बनाने का भी अहम सुझाव दिया गया है।

मिशन सुरक्षा और सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy)
बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों की सुरक्षा के लिए एक अलग बजट ‘सब-हेड’ की मांग की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान और सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) का बजट बढ़ाकर 500-600 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी समिति ने दिया है।

विदेश नीति दस्तावेज भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बनाएगा
इस रिपोर्ट पर विदेशी मामलों के जानकारों और पूर्व राजनयिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक लिखित विदेश नीति दस्तावेज भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बनाएगा और बजट बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में देश की पकड़ और मजबूत होगी। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय पर हैं कि वे इन सिफारिशों को कितनी जल्दी लागू करते हैं।

भारतीय प्रवासियों के लिए अलग विभाग बनाने की सिफारिश दूरगामी कदम
आगामी संसद सत्र में ‘ओवरसीज मोबिलिटी बिल 2025’ को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की संभावना है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक संकट (जैसे पश्चिम एशिया विवाद) चल रहा है। ऐसे में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिए अलग से विभाग बनाने की सिफारिश कूटनीतिक लिहाज से एक दूरगामी कदम साबित हो सकती है।

ICC कर सकती है बांग्लादेश क्रिकेट को बैन

0

ICC कर सकती है बांग्लादेश क्रिकेट को बैन
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि बोर्ड के चुनावों में सरकार के दखल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की कार्रवाई हो सकती है, यहां तक कि बैन का खतरा भी पैदा हो सकता है। राष्ट्रीय खेल परिषद (NSC) ने जो पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, उसे बीसीबी ने ‘सरकारी दखल’ बताया है और इसे तुरंत भंग करने की मांग की है।

बोर्ड का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड के कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप आईसीसी के नियमों का उल्लंघन है। रिपोर्ट्स के अनुसार बीसीबी के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर आईसीसी से भी बातचीत की है और श्रीलंका व जिम्बाब्वे जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी हस्तक्षेप के मामलों में आईसीसी पहले भी सख्त रुख अपना चुका है।

विवाद की शुरुआत – तमिम इकबाल का बयान
विवाद की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई, जब पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी तमीम इकबाल ने बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। तमीम का आरोप था कि अमीनुल इस्लाम ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलवाए और नामांकन की अंतिम तिथि दो बार बढ़वाई। इन आरोपों के बाद तमीम ने अपनी दावेदारी वापस ले ली और कहा कि वे इस तरह की भ्रष्ट प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते। अमीनुल इस्लाम ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन इस विवाद ने बोर्ड की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए और विवाद को वैश्विक स्तर पर उजागर कर दिया।

चुनाव खत्म मगर विवाद नहीं
6 अक्टूबर 2025 को बीसीबी के चुनाव तो हो गए, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ। ढाका के कई क्रिकेट क्लबों ने चुनाव परिणामों को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए 2025-26 सीजन की घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं का बहिष्कार कर दिया। इसके कारण कई लीग प्रभावित हुई और जो टूर्नामेंट खेले जा सके उनमें भी कम ही टीमें मैदान में उतरी।

मार्च 2026 में तमीम इकबाल और क्लब अधिकारियों ने NSC से चुनाव प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। इसके बाद 11 मार्च को NSC ने पांच सदस्यों की जांच समिति गठित कर दी, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इस समिति को चुनाव में कथित गड़बड़ियों, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों की जांच का जिम्मा दिया गया है। हालांकि बीसीबी ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे क्रिकेट बोर्ड के कामकाज में सरकारी दखल बताया और सीधे बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग की है।

विश्व कप विवाद और कोच का खुलासा
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और सरकार के बीच यह टकराव पहले भी सामने आ चुका है। टी20 विश्व कप 2026 को लेकर भी विवाद हुआ था, जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से बाहर रहने का फैसला लिया था। फरवरी 2026 में टीम के सहायक कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने इस मुद्दे पर नया खुलासा किया था। उन्होंने पूर्व खेल सलाहकार आसिफ नजरुल पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि खिलाड़ियों की इच्छा विश्व कप से बाहर रहने की नहीं थी। सलाहुद्दीन के अनुसार, टूर्नामेंट से दूर रहने का फैसला पूरी तरह सरकारी स्तर पर लिया गया था।

इस बयान के बाद बोर्ड और सरकार के बीच तनाव और बढ़ गया, जो अब चुनाव जांच समिति के मुद्दे पर फिर से सामने आ गया है। बीसीबी का कहना है कि क्रिकेट की स्थिरता बनाए रखने के लिए जांच समिति को तुरंत भंग किया जाना चाहिए, वरना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ

0

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ
नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि. नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं.

पूरे साल में वैसे तो कुल चार नवरात्रि पड़ती है, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना है. इनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती है. चैत्र महीने में पड़ने वाली चैत्र नवरात्रि प्रकट नवरात्रि है, जिसमें भक्त 9 दिनों तक व्रत नियमों का पालन करते हैं और 9 दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है.

चैत्र नवरात्रि कब है
पंचांग के मुताबिक चैत्र महीने की नवरात्रि चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र नवमी तिथि तक चलती है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 को शुरू होगी. इसी दिन हिंदू नव वर्ष भी रहेगा. वहीं 27 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा. इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी. मां दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय नवरात्रि का पर्व माता रानी का आशीर्वाद पाने और जीवन में सकारात्मकता लाने के विशेष अवसर की तरह होता है, जब मां स्वयं 9 दिनों तक धरतीलोक पर वास करती हैं.

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग
चैत्र नवरात्रि के अलग-अलग दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है और हर दिन विशेष भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि, देवी को प्रिय भोग अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी को कौन सा भोग अर्पित करना शुभ होता है.

पहला दिन (Day 1)- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती. इन माता को खीर का भोग लगाना शुभ होता है. मान्यता है कि इससे सेहत स्वस्थ रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है.

दूसरा दिन (Day 2)- चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. पूजा में आप इन माता को मिश्री, चीनी या शक्कर से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे सुख-शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है.

तीसरा दिन (Day 3) – चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग अर्पित करना चाहिए. इससे जीवन के समस्त दुख और कष्ट दूर होते हैं.

चौथा दिन (Day 4)- चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है. इन्हें पीला रंग प्रिय है और भोग स्वरूप आप मालपुआ का भोग लगा सकते हैं, जोकि मां कूष्मांडा को प्रिय है.

पांचवां दिन (Day 5)- नवरात्रि का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है. मां को केला भोग प्रिय है. इसलिए आप माता को केला या कच्चे केले से बनी बर्फी आदि का भोग लगा सकते हैं.

छठा दिन (Day 6)- चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है. माता को शहद या शहद से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे व्यक्तित्व में आकर्षण और तेज बढ़ता है.

सातवां दिन (Day 7)- नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित है. इस दिन माता को गुड़ या गुड़ का नैवेद्य भोग अर्पित कर सकते हैं. इससे भय और संकटों से मुक्ति मिलती है.

आठवां दिन (Day 8)- नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है. इस दिन मां को नारियल और नारियल से बनी चीजों का भोग अर्पित करना शुभ होता है. इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

नौवां दिन (Day 9)- नवरात्रि के अंतिम और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती. इस दिन माता रानी हलवा-पूरी, नारियल और चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है.

टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी

0

टीएमसी ने उतारे 291 उम्मीदवार, नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लिए तृणमूल कांग्रेस ने 291 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 3 सीट पर अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम दार्जिलिंग में चुनाव लड़ेगी.

सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव लडे़ंगी. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी की ओर से ‘अच्छा खेल’ खेल रहा है, उन्हें सीधे बीजेपी के लिए प्रचार करना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी 2026 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों में 226 से अधिक सीटें जीतेगी.

नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी
सीएम ममता बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई थीं. इसके बाद वह भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंची थी. इस बार उन्होंने नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. टीएमसी ने नंदीग्राम से आज ही पार्टी में शामिल हुए पवित्रा कार्केई को टिकट दिया है. पवित्रा विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनावों में शुभेंदु अधिकारी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्हें 2021 में टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.

किस पार्टी के लिए टीएमसी ने छोड़ी 3 सीटें
टीएमसी ने मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर सीट से मुस्तफिजुर रहमान को मैदान में उतारा है. इस सीट से हिमायूं कबीर विधायक थे जिन्होंने बाबरी विवाद खड़ा किया था. टीएमसी ने कालिम्पोंग, कर्सियोंग दार्जिलिंग सीट अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम के लिए छोड़ दी है.

तृणमूल कांग्रेस ने चंद्रिमा भट्टाचार्य को दम दम उत्तर सीट से, मदन मित्रा को कमरहाटी सीट से, फिरहाद हकीम को कोलकाता पोर्ट सीट से, कुणाल घोष को बेलेघाटा सीट से, डॉ. शशि पांजा को श्यामपुकुर सीट से, ज्योतिप्रियो मल्लिक को हाबरा सीट से चुनावी मैदान में उतरा है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी के 291 उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं.

ईरान युद्ध पर अमेरिका में ‘बगावत’, US काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट ने दिया इस्तीफा

0

ईरान युद्ध पर अमेरिका में ‘बगावत’, US काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट ने दिया इस्तीफा
ईरान के साथ जारी जंग को लेकर अमेरिका के भीतरखाने विरोध के सुर उभरते दिख रहे हैं. यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख जो केंट ने मंगलवार (17 मार्च) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह ईरान के साथ जारी युद्ध को बताया. उन्होंने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं. इससे पहले 16 मार्च को व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार समीरा मुंशी भी इसी के चलते इस्तीफा दे चुकी हैं.

‘युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता’
जो केंट ने कहा, उन्होंने काफी सोच विचार के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध किसी भी तरह से अमेरिकी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है. साथ ही जंग छिड़ने के पीछे इजरायल के दबाव को भी बड़ा कारण बताया. केंट ने कहा, वह किसी भी कीमत पर युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप को लिखा पत्र
यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा. उन्होंने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को लेकर निराशा जताई. उन्होंने कहा, मैं ईरान के साथ जारी युद्ध का समर्थन बिल्कुल भी नहीं कर सकता हूं. ईरान हमारे देश के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं है. केंट ने यह भी कहा कि युद्ध की शुरुआत इजरायल और उसके शक्तिशाली अमेरिकी समर्थकों के दबाव के चलते हुई है. उन्होंने ईरान के साथ जारी जंग को अमेरिकी लोगों के हितों के खिलाफ बताया.

कट्टर समर्थक में थी गिनती
बता दें कि एक समय जो केंट की गिनती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थकों में की जाती थी. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वह ट्रंप और उनकी विदेश नीतियों की खुलकर प्रशंसा करते थे.

समीरा मुंशी भी दे चुकीं इस्तीफा
बता दें इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धार्मिक स्वतंत्रता समिति में सेवा देने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला समीरा मुंशी भी अपने पद से इस्तीफा दे चुकी हैं. उन्होंने भी ईरान के साथ जारी युद्ध को इसकी वजह बताया था. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त और व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं. उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को अवैध बताते हुए तर्क दिया कि यह स्पष्ट संवैधानिक या संसदीय प्राधिकरण के बिना शुरू किया गया.

उन्होंने दावा किया कि आस्थावान लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी जा रही है और उनके जीवन को खतरे में डाला जा रहा है, क्योंकि वे फिलिस्तीन के बारे में अपनी गहरी आस्था रखते हैं और यह सब एक ज़ायोनी राजनीतिक एजेंडा के लिए किया जा रहा है.

‘धुरंधर 2’ 200 करोड़ की ओपनिंग के बावजूद नहीं तोड़ पाएगी ये तीन रिकॉर्ड

0

‘धुरंधर 2’ 200 करोड़ की ओपनिंग के बावजूद नहीं तोड़ पाएगी ये तीन रिकॉर्ड
रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है. फिल्म 19 मार्च को रिलीज होगी. इस स्पाई थ्रिलर को लेकर फैंस बहुत एक्साइटेड हैं. फिल्म के पहले दिन 200 करोड़ कमाने की खबरें हैं. हालांकि, अगर फिल्म ने 200 करोड़ की ओपनिंग की तो भी धुरंधर 2 तीन फिल्मों को पछाड़ नहीं पाएगी.

इन फिल्मों से पीछे रह जाएगी धुरंधर 2

धुरंधर 2 पुष्पा 2, बाहुबली 2 और आरआरआर से पीछे रह जाएगी. इन फिल्मों को पछाड़ने के लिए धुरंधर 2 को 200 करोड़ से ज्यादा की कमाई करनी होगी. अगर फिल्म 200 करोड़ (पेड प्रिव्यूज का कलेक्शन मिलाकर) की ओपनिंग करती है तो ये फिल्म चौथी हाईएस्ट ग्रॉसिंग ओपनर होगी. धुरंधर 2 को पेड़ प्रिव्यू बहुत मदद करेंगे. फिल्म के पेड़ प्रिव्यूज से ही 40 करोड़ की कमाई की खबरें हैं.

हाईएस्ट ओपनिंग डे वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस
इस लिस्ट में पहले नंबर पर पुष्पा 2 है. पुष्पा 2 ने 274 करोड़ का कलेक्शन किया था. वहीं दूसरे नंबर पर आरआरआर है. इस फिल्म ने 223 करोड़ की कमाई की थी. बाहुबली 2 ने 214 करोड़ की कमाई की थी.

धुरंधर 2 के बारे में जानें सबकुछ
फिल्म को आदित्य धर ने बनाया है. फिल्म 275 करोड़ के बजट में बनी है. इस फिल्म में रणवीर सिंह लीड रोल में हैं. वो फिल्म में हमजा और जसकीरत सिंह रंगी के रोल में नजर आएंगे. इस फिल्म में संजय दत्त भी अहम रोल निभाएंगे. संजय दत्त चौधरी असलम के किरादर में दिखेंगे. इसके अलावा फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल, आर माधवन जैसे स्टार्स भी दिखेंगे.

धुरंधर ने किया था 1300 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
ये फिल्म दिसंबर 2025 में आई धुरंधर का सीक्वल है. धुरंधर ब्लॉकबस्टर हिट हुई थी. फिल्म ने 1300 करोड़ रुपये की कमाई की थी. इस फिल्म में सबसे ज्यादा चर्चा अक्षय खन्ना की हुई थी. अक्षय खन्ना फिल्म में रहमान डकैत के रोल में थे. उनकी एक्टिंग, उनका स्टाइल जबरदस्त हिट हुआ था. वहीं फिल्म का गाना शरारत भी छा गया था.

शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतारा उन्हीं का ‘चेला’

0

शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतारा उन्हीं का ‘चेला’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी चुनावी मैदान में होंगे. बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव से ही ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देने की रणनीति अपनाई है, जिसमें पार्टी सफल भी रही है. टीएमसी ने भी बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ इस बार वहीं रणनीति बनाई है. नंदीग्राम सीट से टीएमसी ने बीजेपी के पूर्व नेता और शुभेंदु अधिकारी के करीबी पबित्र कर को टिकट देकर सियासी हलचल तेज कर दी है.

शुभेंदु अधिकारी के सामने शागिर्द की चुनौती
नंदीग्राम विधानसभा में पबित्र कर ने पिछले विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया था, जिसका नतीजा ये हुआ कि वहां से सीएम ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा. पबित्र कर ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को टीएमसी का दामन थाम लिया. टीएमसी ने कहा कि पबित्र कर ने बीजेपी की जनविरोधी नीतियों से नाराज होकर यह फैसला लिया है. पवित्र कर का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है. वह पहले भी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रह चुके हैं.

शुभेंदु अधिकारी की जीत में निभाई थी अहम जिम्मेदारी
पबित्र कर साल 2018 में बोयाल क्षेत्र के दो गांवों के प्रधान (मुखिया) थे और इलाके में एक मजबूत जनाधार रखते थे. हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के साथ बीजेपी का रुख कर लिया था. उन्हें पिछले विधानसभा में इस क्षेत्र में बीजेपी को बढ़त दिलाने में अहम माना जाता है. साल 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर करीब 1,900 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. इसके बाद 2023 में पबित्र कर की पत्नी ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर बोयाल क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों की प्रमुख का पद संभाला.

पबित्र कर का नंदीग्राम में मजबूत जनाधार
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां दो ब्लॉक हैं, जिनमें से नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है. पवित्र कर इसी ब्लॉक के निवासी हैं और इलाके में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. तृणमूल में रहते हुए भी पवित्र कर की क्षेत्र में अच्छी पकड़ और लोकप्रियता रही है. ऐसे में नंदीग्राम से उन्हें टिकट देना स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. इस सीट पर एक बार फिर बीजेपी और टीमएसी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है.

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम

0

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं।

प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रधानमंत्री से लिया मार्गदर्शन

0

प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रधानमंत्री से लिया मार्गदर्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत कर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही राज्य में किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों तथा प्रदेश की प्रगति से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष में 17 विभिन्न विभागों के माध्यम से किसानों के लिए समेकित रूप से कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। प्रदेश में गरीब, युवा, किसान और महिला वर्ग की बेहतरी के लिए राज्य सरकार पूरी लगन से कार्य कर रही है। इन चारों श्रेणी के समग्र विकास के लिए अलग-अलग मिशन बनाकर उन पर प्रभावी अमल किया जा रहा है। राज्य सरकार इनकी बेहतरी के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया।

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

0

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में चिकित्सक संगठन एवं मेडिकल छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की और प्रदेश को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट मिलने पर उनका आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार लगातार प्राथमिकता के साथ बेहतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेशवासियों को सहज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, जिसमें लगभग 100 से 150 सीटें थीं। आज प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 14 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 1400 सीटें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, नर्सिंग सहित अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थान भी स्थापित हुए हैं, जिनका लाभ प्रदेश के विद्यार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में मेडिको सिटी की स्थापना की जा रही है, जहां बड़े-बड़े सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट प्रदान किए जाने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर तुलसी कौशिक, डॉ. देवेंद्र कश्यप सहित जूडो और मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।