मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीधे सैन्य हमले हुए हैं। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन लॉन्चरों से समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की जा रही थी।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागीं। ईरान की ओर से यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, यूएई ने अल मिनहाद एयरबेस पर हमले की खबरों को खारिज किया और बाद में ईरान की ओर से आए एक ड्रोन को अपने क्षेत्रीय जल के ऊपर रोकने की जानकारी दी।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा, लेकिन बातचीत को प्राथमिकता देने की बात भी कही है।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। ताजा सैन्य घटनाक्रम के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है या फिर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जाता है।



