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शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर

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बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर

41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

14.5 लाख परिवारों को अब भी मिल रही मुफ्त बिजली

सिंचाई पम्प धारी कृषकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं

सब्सिडी, सौर ऊर्जा एवं राहत योजनाओं से अधिकांश उपभोक्ताओं को संरक्षण

रायपुर, 16 जून 2026/छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा।

गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा।

किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं

राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी।

बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है।

बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है।

उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर

राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत

बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी।

कम बिजली खर्च करने का नया अवसर

10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश

राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है।

आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा छूट का लाभ

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मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा छूट का लाभ

छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड की तुलना में सस्ती बिजली

बीते वर्षों में महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए विद्युत टैरिफ दरों में की गई है मामूली वृद्धि
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में बढ़ी महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत तथा पूर्व वर्षों के घाटे की भरपाई को देखते हुए यह मामूली वृद्धि, जरूरी और न्यायसंगत है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि उपभोग के अलग-अलग स्लैब के अनुसार यह बढ़ोतरी 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक रहेगी। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि निर्धारित की गई है। राज्य के लाखों परिवारों पर बढ़े हुए टैरिफ का वास्तविक प्रभाव केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास होगा। टैरिफ वृ द्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का ध्यान रखा है।

सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा।

इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत ही कम होने की संभावना है।

गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा।

उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपये प्रति केवीए की वृद्धि की गई है। 33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।

नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।

आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।

एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने गाया शिव भक्ति गीत

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एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने गाया शिव भक्ति गीत
परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) बेहतरीन अदाकारा होने के साथ-साथ गायिका भी हैं। उन्होंने कई पॉपुलर सॉन्ग्स को अपनी आवाज दी है। अब एक्ट्रेस ने शिव भक्ति गीत (Shiv Bhakti Song) गाया है जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

दरअसल, प्रेग्नेंसी में परिणीति चोपड़ा ने एक शिव भक्ति गीत गाया, जिसका वीडियो अब उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। इस गीत में एक्ट्रेस की आवाज सुनकर लोग हैरान रह गए।
परिणीति ने गाया शिव भक्ति गीत

परिणीति चोपड़ा ने सोमवार को इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपना लेटेस्ट सॉन्ग शेयर किया है जिसमें वह शिव स्तोत्र ‘नमामी शमीशान’ (Namami Shamishan) गा रही हैं। एक्ट्रेस ने यह गीत करीब एक साल पहले रिकॉर्ड किया था, जिसकी क्लिप वो अब शेयर कर रही हैं।

प्रेग्नेंसी में रिकॉर्ड किया था गीत
वीडियो शेयर करते हुए परिणीति चोपड़ा ने कैप्शन में लिखा, “कुछ प्रार्थनाएं हमेशा के लिए यादें बन जाती हैं और ‘नमामि शमीशान’ उनमें से एक है। मैंने इसे अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान रिकॉर्ड किया था, एक ऐसा समय जिसने मुझे आस्था, चिंतन और कृतज्ञता के और करीब ला दिया। जब भी मैं इसे सुनती हूं, मुझे अपनी जिंदगी का वह खूबसूरत दौर याद आ जाता है। मैं इसे आप सभी के साथ शेयर करते हुए बहुत खुश हूं।” वीडियो सामने आते ही लोग परिणीति की आवाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

भानु सप्तमी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग

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भानु सप्तमी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर भानु सप्तमी मनाई जाती है। यह दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भानु सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की साधना करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।

भानु सप्तमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 20 जून को को दोपहर 03 बजकर 47 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 21 जून दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 21 जून को भानु सप्तमी मनाई जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त- 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक
अभिजत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 38 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 09 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 24 मिनट तक (22 जून)

कैसे मनाई जाती है?
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने का विधान है। इसके बाद साफ कपड़े धारण करें। तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, कुमकुम और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भानु सप्तमी के अवसर पर साधना करने से साधक को ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

एमपी में 15 जून से होंगे सरकारी कर्मचारियों के तबादले

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एमपी में 15 जून से होंगे सरकारी कर्मचारियों के तबादले
कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए सरकार द्वारा हटाए गए बैन के बाद प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने स्तर पर लिस्टें बनवाने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री के समक्ष जमा करा दी हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग को छोड़कर बाकी विभागों की सूचियां आज से जारी होना शुरू हो सकती हैं, जबकि शिक्षा विभाग की लिस्टें 28 जून के आसपास निकलने का अनुमान है।

जानकारी के मुताबिक, मप्र शासन द्वारा हर साल की तरह इस बार भी जून में 15 जून तक ट्रांसफरों से बैन हटाया गया है। जिसके तहत इस अवधि में स्वैच्छिक से लेकर प्रशासनिक स्तर तक कर्मचारियों के ट्रांसफर किए जाने हैं। जो कर्मचारी पसंदीदा स्थानों पर जाना चाहते हैं उन्हें भी बैन हटने का बेसब्री से इंतजार था। जबकि जिन्हें बेवजह यहां से वहां करने की आशंका है उन्हें डर सता रहा है।

जैसे ही ट्रांसफरों से बैन हटा तो पसंदीदा स्थानों पर पदस्थ होने के लिए बाट जोह रहे अधिकारी-कर्मचारियों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधते हुए अपने-अपने नाम प्रशासनिक लिस्टों में दिलवाने का प्रयास किया है। जबकि कई ऐसे अधिकारी-कर्मचारी हैं, जिन्हें जनप्रतिनिधि इधर से उधर करेंगे, वह बचने के लिए संपर्क साधे हुए हैं। उन सभी की लिस्टें तैयार होने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप के समक्ष जमा करा दी गई हैं। अब विभागवार लिस्टें निकलने की शुरुआत होगी। शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व स्वैच्छिक लिस्टें एक साथ निकाली जाएंगी। इसलिए स्वैच्छिक वालों के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की है। 28 तक पूरी होने पर एक साथ आदेश निकाले जाएंगे।
तृतीय श्रेणी, बाबू व कई विभागों के ट्रांसफर प्रभारी मंत्री की अनुशंसा से

जो नियम है उसके मुताबिक तृतीय श्रेणी कर्मचारी, प्राथमिक शिक्षक, शिक्षा विभाग के बाबू, पटवारी, बड़े पुलिस अधिकारी छोड़कर अन्य पुलिसकर्मी, कृषि विभाग के ग्राम सेवक, लोनिवि, जनपदों के बाबू व तृतीय श्रेणी कर्मचारी, सहकारिता के कर्मचारी, ग्राम पंचायतों के सचिव आदि के ट्रांसफर विधायकों, सांसद या अन्य महत्वपूर्ण नेताओं की अनुशंसा पर प्रशासनिक होने हैं। इसके लिए जो लिस्टें बनाई हैं उनका अनुमोदन प्रभारी मंत्री द्वारा किया जाएगा। इसके बाद लिस्टें निकलना शुरू होंगी।
बड़े पदों के ट्रांसफर विभागीय मंत्री स्तर से होंगे, नोटशीटें भेजीं

बड़े पदों के ट्रांसफर जिले से न होकर विभागीय मंत्री ही कर सकेंगे। शिक्षा विभाग में प्रावि शिक्षक छोड़कर बाकी मावि शिक्षक, लेक्चरर सहित अन्य सभी के ट्रांसफर शिक्षा मंत्री ही करेंगे। निकायों के ट्रांसफर नगरीय प्रशासन मंत्री करेंगे। जबकि अन्य विभागों के एसडीओ, इंजीनियर, द्वितीय श्रेणी कर्मचारी, बिजली कंपनी, कॉलेजों के प्राध्यापकों के ट्रांसफर भी विभागीय मंत्री स्तर से ही हो सकेंगे।

हालांकि, उसके लिए नामों की सूचियों विधायकों, सांसदों के माध्यम से ही नोटशीट के साथ विभागीय मंत्री के यहां प्रस्तुत कर दी गई हैं। वह ट्रांसफर नोटशीटों के आधार पर भोपाल से होंगे।
इन छह नेताओं की अनुशंसा रहेगी आधार

जिले में ट्रांसफरों के लिए मुख्य रूप से छह नेताओं की अनुशंसा ही काम करेगी। जिसमें सांसद रोडमल नागर, मंत्री नारायणसिंह पंवार, मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक मोहन शर्मा, अमरसिंह यादव, हजारीलाल दांगी व भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर शामिल हैं। इन्हीं छह नेताओं की सूचियों में नाम होने पर ही प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारियों के ट्रांसफर हो सकेंगे।
नेताओं का इशारा ही तय करेगा सजा

जिन कर्मचारियों के कामकाज से स्थानीय नेता खुश नहीं हैं उन्हें इधर से उधर करने के लिए भी इन छह नेताओं का इशारा ही काम करेगा। बताया जा रहा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में कुछ-कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जिनसे जिम्मेदार नेता खुश नहीं हैं। ऐसे में उन कर्मचारियों के न चाहने के बावजूद उन्हें अपने-अपने क्षेत्र से हटाने की योजना है। उन्हें भी नेताओं की अनुशंसा से ही हटाया जाएगा।

भारत और फ्रांस की एक जैसी सोच-पीएम मोदी

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भारत और फ्रांस की एक जैसी सोच-पीएम मोदी
फ्रांस के नीस में शुरू हुए तीन दिवसीय’भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, दुनिया भर के अलग-अलग देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं और रणनीतिक साझेदारी भी करते हैं। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो एक जैसी सोच पर आधारित होते हैं और फ्रांस के साथ भारत का रिश्ता ऐसा ही एक रिश्ता है। जबकि राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि AI और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच सच्ची साझेदारी है। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के नीस में राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से तीन दिवसीय’भारत इनोवेट्स 2026 सम्मेलन’ का उद्घाटन किया, जो भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल फंड्स को एक साथ लाने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है।

120 से अधिक भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप और मोदी-मैक्रों की जुगलबंदी
इसमें 120 से अधिक भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप, 15 से ज्यादा हायर एजुकेशन इंस्टीटयूट और मोदी-मैक्रों की जुगलबंदी हो रही है। इस आयोजन में प्रमुख आईआईटी और अन्य अनुसंधान संगठन भी शामिल हैं। नीस में आयोजित सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच इस वर्ष की शुरुआत में द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिए जाने के बाद पहली द्विपक्षीय शिखर बैठक भी शामिल है।

भारत और फ्रांस दुनिया भर के शीर्ष स्टार्टअप्स को एक साथ लाए
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया इस अहम सम्मेलन का यह शुभारंभ भारत-फ्रांस संबंधों में प्रौद्योगिकी और नवाचार के बढ़ते महत्व का संकेत देता है, जिसमें हाल के वर्षों में रक्षा और अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल प्रौद्योगिकी और AI तक के क्षेत्रों में सहयोग गहरा हुआ है। भारत इनोवेट्स 2026 सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र बिंदु बनने के लिए तैयार है। यह आयोजन,भारत और फ्रांस दुनिया भर के शीर्ष स्टार्टअप्स को एक साथ लाया हैं, जो’भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष ‘ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

एक-दूसरे को गले लगा कर और हाथ मिलाकर अभिवादन किया
फ्रांस में 14 से 16 जून तक आयोज्य इस कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के उद्यमियों में उत्साह है। इससे पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को नीस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल ममैक्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया,जहां दोनों नेताओं ने एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक से पहले एक-दूसरे को गले लगा कर और हाथ मिलाकर अभिवादन किया।

TMC के बागी गुट ने की स्पीकर से मुलाकात

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TMC के बागी गुट ने की स्पीकर से मुलाकात
पश्चिम बंगाल की सत्ता से हटने के बाद से टीएमसी के बुरे दिन शुरु हो गए हैं. यहां बगावत लगातार बढ़ती नजर आ रही है. दिल्ली में बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर टीएमसी के बागी सांसदों की बैठक हुई थी. अब खबर है कि सागरिक घोष और कीर्ति आजाद के बाद सभी बागी सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की है. यहां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के घर लगातार हलचल मची हुई है. उनके घर के बाहर की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है. बागी सांसदों से जुड़ी एक तस्वीर भी सामने आई है. वह सभी स्पीकर के आवास पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं. स्पीकर से रविवार को 20 सांसदों ने मुलाकात की है. दो तिहाई से ज्यादा सांसदों ने स्पीकर से मिले हैं. बागी गुट की तरफ से सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा है कि टीएमसी के असली सिंबल पर दावा करेंगे.

उन्होंने बताया कि एक सिस्टम है दो तिहाई पार्टी की हिस्सेदारी चले जाते हो तो पहले दिन क्लेम नहीं कर सकते कि हमें ये पार्टी का नाम दे दो. जब जुलाई में पार्लियामेंट चलेगा तो हम तृणमूल में आएंगे, तब हम बोलेंगे कि हम लोगों को तृणमूल दो क्यों कि हमारे दो तिहाई है.

इधर, जिस वक्त बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर बागी सांसदों की बैठक जारी थी, उसी दौरान टीएमसी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिक घोष भी लोकसभा ओम बिरला से मिलने पहुंचे थे. इसके बाद बैठक खत्म करने के बाद बागी सांसद भी स्पीकर के घर पहुंचे. इससे पहले खबर आई थी कि बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं. इससे पहले टीएमसी के बागी सांसदों की बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के साथ बैठक हुई. इस बैठक में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद थे.

क्या हो सकता है अगला कदम?
चर्चा है कि टीएमसी कांग्रेस के बागी गुट एक उत्तर पूर्व की पार्टी में विलय करने पर विचार कर सकते हैं. वह पार्टी NDA का हिस्सा होगी. हालांकि आधिकारिक जानकारी का भी इंतजार है. सूत्रों के मुताबिक त्रिपुरा की नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी में तृणमूल कांग्रेस का यह बागी गुट विलय करने की योजना बना रहा है. शताब्दी राय ने कहा कि हम नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के साथ जा रहे हैं.

गोरखपुर में सीएम योगी ने दागे हॉकी में दो गोल, हजार करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण

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गोरखपुर में सीएम योगी ने दागे हॉकी में दो गोल, हजार करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण
वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अचानक खिलाड़ियों के बीच पहुंच गए। उन्होंने दो टीमों के बीच हो रहे मैच का शुभारंभ करते हुए हॉकी स्टिक पकड़ी और दो गोल दागे। मुख्यमंत्री के गोल दागते ही सांसद रविकिशन शुक्ल बाल लेने के लिए मैदान में दौड़े। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से बात की और सुविधाओं की भी जानकारी ली।

लोकार्पण व शिलान्यास के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यहां गोरखपुर महानगर की दृष्टि से लगभग एक हजार करोड़ की योजनाएं प्रारंभ की जा रही हैं। यह प्रदेश के इतिहास के लिए अत्यंत गौरवशाली दिन है। सुपोषण के द्वितीय फेज की शुरूआत भी यहां हुई है।

हम सब को इस बारे में देखना समझना होगा कि यदि बचपन सुरक्षित है तो भविष्य भी सुरक्षित है। बच्चा जब जन्म लेता है तो पहले एक हजार दिन महत्वपूर्ण होते हैं। अच्छे से उसकी देखभाल कर ली तो उसे एक मजबूत भविष्य दे सकते हैं। इसी के लिए टेक होम राशन की प्रणाली 2022 में प्रयागराज में शुरू की गई थी। इसमें चार हजार से अधिक महिला स्वयंसेवी समूह द्वारा प्रदेश के कई विकास खंडों में प्लांट लगाया गया था। आज उसी प्रक्रिया का द्वितीय चरण शुरू होने जा रहा है।

 

प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया कि जब बच्चा तीन साल का हो जाए तो उसे आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह साल तक रखा जाए। जहां वह अच्छा आहार ले सके और खेल-खेल में कुछ सीख ले। इसलिए बाल वाटिका को भी आगे बढ़ाया गया। 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी में प्री प्राइमरी व बाल वाटिका संचालित हो रहा है।
पहले मिलती है पांच से छह घंटे बिजली

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नौ साल पहले का गोरखपुर क्या था। बीमारी, जलजमाव, गंदगी, बाढ़, नौजवान के लिए नौकरी नहीं, व्यापारी की सुरक्षा नहीं, बेटी के लिए उत्तम शिक्षा की व्यवस्था नहीं, किसान के लिए कोई अन्य सुविधा नहीं, परंपरागत उद्यम के लिए कोई कार्यक्रम नहीं। 2017 के पहले बिजली बमुश्किल पांच से छह घंटे मिल पाती थी। उसके लिए सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। इंसेफ्लाइटिस से किस तरह सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी, किसी से छुपा नहीं थी।

बंद कारखाना हमें चिढ़ाता था तो बीमार बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर की पहचान बन गया था। लखनऊ जाने में आठ घंटे लगते थे। रामगढ़ताल गंदगी का गढ़ था। गोरखपुर के नाम से लोग डरते थे। बेटियां शाम के बाद घर से निकलने में डरती थीं। मानो आतंक का पर्याय रहा हो। कैसे एक शहर बदलता है, वह आज दिखता है। दुनिया में देश का सम्मान बढ़ा है। देश में यूपी का सम्मान बढ़ा है। प्रदेश व देश में गोरखपुर का भी सम्मान बढ़ा है। अब आपसे कोई दूरी नहीं बनाता।

आज जलजमाव की समस्या का समाधान है। नौजवानों के लिए रोजगार है। व्यापारी की सुरक्षा है। बेटी की उत्तम शिक्षा के साथ उसके स्वावलंबन के कार्यक्रम है। बीआरडी मेडिकल कालेज स्वयं स्वस्थ हुआ। इंसेफ्लाइटिस की बीमारी का खात्मा हुआ है। फर्टिलाइजर फिर से चल रहा है। चीनी मिलें बन रही हैं। सड़कें चौड़ी हो गई हैं। बिजली अनवरत रूप से लोगों को मिल रही है।
रोड कनेक्टिविटी हुई बेहतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में कनेक्टिविटी बेहतरीन हुई है। एक-एक पाई का सदुपयोग हो रहा है और जवाबदेही के साथ काम हो रहा है। रामगढ़ताल पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। चिलुआताल भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। लखनऊ की दूरी 3:30 घंटे में तो वाराणसी की दूरी ढाई घंटे में पूरा कर सकते हैं।

चारों ओर से फोरलेन की कनेक्टिविटी है। एयर कनेक्टिविटी है। गरीब के घर में शौचालय है। उसके लिए आवास की सुविधा है। यह है 9 साल में बदला हुआ वह परिवेश, जिसमें आप रह रहे हैं। आज पहचान का संकट नहीं। लोग आपको सम्मान दे रहे हैं। यूपी को नई पहचान मिली है। किसी को कोई शंका नहीं।

महाराष्ट्र के पंढरपुर में दर्दनाक हादसा, श्रद्धालुओं से भरी पिकअप वैन कुएं में गिरी

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महाराष्ट्र के पंढरपुर में दर्दनाक हादसा, श्रद्धालुओं से भरी पिकअप वैन कुएं में गिरी
महाराष्ट्र के पंढरपुर में रविवार को बड़ा हादसा हो गया, जहां श्रद्धालुओं से भरी पिक अप वैन कुएं में गिर गई. हादसे में 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. अब तक आठ लोगों के शव निकाल लिए गए हैं.

सभी मृतक पंढरपुर के रांजनी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं. ये सभी लोग तीर्थयात्रा पर जा रहे थे. दुर्घटना सोलापुर के मालिशिरस गांव के पास हुई है. हादसे के पास इलाके में मातम पसरा है.
रायगढ़ जिले में पिछले महीने 8 लोगों की हुई थी मौत

पिछले महीने 25 मई को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोंकण क्षेत्र से सतारा जा रहे एक पर्यटक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से कम से कम आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. जिसके बाद बचाव अभियान चलाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, गाड़ी अनियंत्रित होकर रायगढ़ जिले के पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 1,000 फीट गहरी घाटी में जा गिरी थी. जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया था. शवों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया गया था.