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इंदौर में होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल

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इंदौर में होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल
इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। इस वर्ष भारत में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के तहत कृषि मंत्रियों की अहम बैठक 12 और 13 जून को इंदौर में होगी। इससे पहले 9 से 11 जून तक अधिकारियों की तकनीकी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञ कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित कुल 11 देशों के कृषि मंत्री भाग लेंगे। बैठक में खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, तकनीकी आदान-प्रदान और डिजिटल कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

नई दिशा देने में महत्वपूर्ण
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर को इस आयोजन के लिए प्रस्तावित किया था, इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को दी। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर दोनों नेता रविवार को इंदौर में बैठक करेंगे।

इस बार सम्मेलन की थीम रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सतत विकास रखी गई है, जो वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। गौरतलब हे कि पहले भी इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन और कृषि समूह की बैठक सहित कई बड़े आयोजन हो चुके हैं।

भोरमदेव में शुरू हो गई जंगल सफारी, 34 किलोमीटर लंबे ट्रैक में दुरदुरी झरना, बावापारा सकरी नदी का व्यू मोह लेगा मन

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भोरमदेव में शुरू हो गई जंगल सफारी, 34 किलोमीटर लंबे ट्रैक में दुरदुरी झरना, बावापारा सकरी नदी का व्यू मोह लेगा मन
कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने, स्थानीय रोज़गार पैदा करने और अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता को दिखाने के लिए जंगल सफारी शुरू की गई है। वर्ष 2001 में स्थापित अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। नया शुरू किया गया सफारी मार्ग लगभग 34 किलोमीटर लंबा है और इसमें दुरदुरी झरना, बावापारा 360-डिग्री पहाड़ी व्यू- प्वाइंट और सकरी नदी के कई रास्ते शामिल हैं। शुरुआती चरण में तीन छह-सीटर सफारी वाहन तैनात किए गए हैं, साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण है गलियारा
वन अधिकारियों ने बताया कि यह अभयारण्य महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में काम करता है, जो छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिज़र्व को मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ता है। यह वन्यजीवों की आवाजाही, आनुवंशिक विविधता और पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इको टूरिज्म की पहल के रूप में होगा काम
इको-टूरिज़्म पहल के हिस्से के रूप में, इको-कॉटेज, नेचर ट्रेल्स और गाइडेड सफारी जैसी सुविधाओं की भी योजना बनाई गई है। स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह वनांचल रसोई नाम का फ़ूड आउटलेट चलाएंगे, जहां क्षेत्रीय व्यंजन परोसे जाएंगे, साथ ही हस्तशिल्प गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

30 लोगों को सीधा रोजगार
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से करीब 30 स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर रोज़गार मिलने की उम्मीद है, और आस-पास के इलाके में मौजूद होटलों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और छोटे व्यवसायियों के लिए आजीविका के अप्रत्यक्ष अवसर भी पैदा होंगे।

भोरमदेव और चिल्फी वन रेंज में फैला है अभयारण्य
वर्ष 2001 में स्थापित यह अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें भोरमदेव तथा चिल्फी वन रेंज शामिल हैं। यह अपनी विविध वन्यजीव आबादी के लिए जाना जाता है, जिसमें बाइसन (वन भैंसा), बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, हिरण और नीलगाय जैसे जानवर शामिल हैं। अभयारण्य 134 तितली प्रजातियों और 126 पक्षी प्रजातियों का भी घर है।

सीएम ने किया इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर का शिलान्यास, किसानों को बड़ा फायदा

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सीएम ने किया इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर का शिलान्यास, किसानों को बड़ा फायदा
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत सरकार ने किसानों को उनकी जमीन का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड लौटाने का फैसला लिया है, जिससे उन्हें सीधे विकास का भागीदार बनाया गया है। योजना के चलते कई किसान करोड़पति बने हैं। हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार किसानों को विकास में पार्टनर बना रही है।

किसानों को विकास में बनाया भागीदार
इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से 60 प्रतिशत भूमि किसानों को दे रहे हैं। उनको विकास में भागीदार बना रहे हैं। किसानों को 650 करोड़ के प्लाट मिले हैं। किसानों को समृद्ध होना ही चाहिए। अगर हम किसी किसान से उसकी जमीन लेते हैं, तो हमारा पहला फर्ज बनता है कि हम किसान के गुजर-बसर की स्थाई व्यवस्था करें। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 2360 करोड़ रुपये लागत वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन नैनोद गांव में किया।

औद्योगिक विकास और भाग्योदय का शंखनाद
उन्होंने कहा पूरे देश में किसी ने किसानों को 60 प्रतिशत का भागीदार नहीं बनाया। इसे “भाग्योदय का शंखनाद” बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवा व किसान अधिक समृद्ध होंगे। चार गुना मुआवजे के निर्णय से खुश किसानों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया और प्रतीक स्वरूप हल व मुकुट भेंट किए। आज 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित हो चुके हैं। हमने 9 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर उतारा है।

मध्यप्रदेश: उद्योगों में देश का दूसरा अग्रणी राज्य
पूरे देश में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर का राज्य है, जहां तेज गति से उद्योग स्थापित हो रहे हैं। आज से जिस विकास मॉडल की शुरुआत हुई है, वह पूरे प्रदेश में छाएगा। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह भाग्योदय का शंखनाद है। इससे इंदौर निवेश में भी आगे होगा और किसानों की समृद्धि का भागीदार होगा।

मेट्रोपॉलिटन रीजन की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन-धार-देवास-शाजापुर-रतलाम को जोड़कर बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित हो रहा है। यह कॉरिडोर पीथमपुर से आगे उज्जैन तक कनेक्टिविटी देगा और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़कर परिवहन को नई गति देगा। एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा।

कनेक्टिविटी का विस्तार और कांग्रेस पर तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़कों और कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे प्रदेश को भी फायदा मिल रहा है। अगला कदम कॉरिडोर के बाद इंदौर-उज्जैन 4 लेन सड़क का भूमि पूजन होगा, जिससे पारंपरिक मार्ग भी आधुनिक रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार किसानों को चार गुना मुआवजा दे रही है और उन्हें विकास में भागीदार बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में बिजली और सिंचाई व्यवस्था कमजोर थी, जबकि वर्तमान सरकार ने सिंचाई रकबा बढ़ाकर किसानों की स्थिति मजबूत की है।

मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर

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मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर
मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे।

वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी
यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा और जीएडी की सख्ती
घोषणाओं को पूरा कराने के लिए संविदा कर्मचारियों का भोपाल में महासम्मेलन बुलाया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि सभी प्रविधानों को लागू कराया जाएगा। यदि किसी प्रविधान को लेकर समस्या है तो संगठन के पदाधिकारी, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी बैठकर उसका रास्ता निकालेंगे। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र जारी कर सभी विभागाध्यक्षों से संविदा नियम के क्रियान्वयन का फीडबैक मांगा।

विभागों को निर्देश और स्कूल शिक्षा विभाग की पहल
इसमें पूछा गया कि किसने नियम लागू किए और किसने नहीं। जहां लागू नहीं हुए, उसके कारण क्या रहे। विभागों को स्पष्ट रूप से कह दिया गया है कि सरकार ने जब निर्णय ले लिया है तो फिर सेवा भर्ती नियम में संशोधन किए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसमें पहल की और नियम संशोधित कर अधिसूचित कर दिए।

5 साल की सेवा पर मिलेगा नियमित भर्ती का लाभ
मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि वर्ष 2018 की संविदा नीति में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान था जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती में नहीं दिया। कई मामले न्यायालय पहुंचे। इसमें विभागीय अधिकारी यह जवाब नहीं दे पाए कि उन्होंने पद आरक्षित कर लाभ क्यों नहीं दिया। अब विभाग ने गलती सुधारी है। यह प्रविधान किया गया है कि जिन संविदा कर्मचारियों ने पांच साल निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नियमित भर्ती के समय लाभ मिलेगा।

जीत की पटरी पर कोलकाता, लगातार तीसरी बार फतह

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जीत की पटरी पर कोलकाता, लगातार तीसरी बार फतह
कोलकाता नाइट राइडर्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को 7 विकेट से हरा दिया है. IPL 2026 में कोलकाता ने जीत की हैट्रिक लगा दी है, ये वही टीम है जो पहले 6 मुकाबलों में एक भी जीत दर्ज नहीं कर सकी थी. अंगकृष रघुवंशी ने 59 रनों की पारी खेल कोलकाता की जीत में बड़ा योगदान दिया. उनके अलावा कप्तान अजिंक्य रहाणे अर्धशतक लगाने से चूक गए. इससे पहले सुनील नरेन ने आईपीएल में 200 विकेट पूरे कर इतिहास रच दिया है.

हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में हैदराबाद की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 165 रन बनाए थे. बढ़िया शुरुआत के बाद SRH की बैटिंग धराशाई हो गई और अपने आखिरी 9 विकेट महज 60 रनों के भीतर खो दिए. जवाब में रहाणे और रघुवंशी की 84 रनों की पार्टनरशिप ने कोलकाता की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

सुनील नरेन ने रचा इतिहास
सुनील नरेन ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ इस मुकाबले में इतिहास रच दिया. उन्होंने इस मैच में कुल 2 विकेट चटकाए, जिससे वे इंडियन प्रीमियर लीग में 200 विकेट का आंकड़ा छूने वाले पहले विदेशी गेंदबाज बन गए हैं. नरेन के नाम अब 197 मैचों में कुल 201 विकेट हो गए हैं. सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में सिर्फ भुवनेश्वर कुमार (215) और युजवेन्द्र चहल (228) उनसे आगे हैं.

SRH नहीं लगा पाई जीत का ‘सिक्सर’
सनराइजर्स हैदराबाद सीजन के पहले 4 में से तीन मैच हार गई थी. मगर उसके बाद SRH ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार 5 जीत दर्ज की. आज कोलकाता को हराते ही वह जीत का ‘सिक्सर’ लगाते हुए प्लेऑफ के एक कदम करीब पहुंच सकती थी, मगर कोलकाता की टीम गेंदबाजी और बल्लेबाजी में एकजुट होकर खेली और हैदराबाद को लगातार छठी जीत हासिल करने से रोका. अंतिम ओवरों में रिंकू सिंह ने 11 गेंदों में 22 रनों की कैमियो पारी खेल कोलकाता के लिए मैच को फिनिश किया.

‘राजा शिवाजी’ का जलवा बरकरार, दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स

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‘राजा शिवाजी’ का जलवा बरकरार, दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स
रितेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’ रिलीज के साथ ही छा गई है. फिल्म ने पहले दिन ही रिकॉर्ड ब्रेक कमाई की. मराठी वर्जन नो तो धूम मचा दी है.

‘राजा शिवाजी’ का तीसरे दिन का कलेक्शन
Sacnilk के मुताबिक, फिल्म ने संडे को शाम 7.30 बजे तक 7.75 करोड़ का कलेक्शन किया है. फिल्म ने हिंदी भाषा में 2.68 करोड़ कमा लिए. वहीं फिल्म ने मराठी में 5.07 करोड़ का कलेक्शन किया. फिल्म की ऑक्यूपेंसी 37.9% है.

फिल्म के हिंदी वर्जन ने 9.43 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. वहीं, मराठी वर्जन ने 20.22 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. फिल्म मराठी सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनर बन गई है.

‘राजा शिवाजी’ के बारे में
फिल्म को रितेश देशमुख ने ही डायरेक्ट किया है. वो फिल्म में लीड रोल में हैं. फिल्म में अभिषेक बच्चन, संजय दत्तस भाग्यश्री, जेनेलिया, फरदीन खान, विद्या बालन जैसे स्टार्स हैं. रितेश देशमुख फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के रोल में हैं. फिल्म में सलमान खान ने कैमियो रोल भी किया है. उनके कैमियो ने धूम मचा दी है. रितेश देशमुख की एक्टिंग और डायरेक्शन की फैंस जमकर तारीफ कर रहे हैं.

इस फिल्म का क्लैश जुनैद खान की ‘एक दिन’ से हुआ. हालांकि, ‘एक दिन’ रितेश की ‘राजा शिवाजी’ के सामने टिक नहीं पाई है. जुनैद खान की फिल्म को फैंस पसंद नहीं कर रहे हैं. इस फिल्म में साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी नजर आई हैं. साई पल्लवी ने इस फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया है. इसके बाद साई फिल्म ‘रामायण’ में भी दिखेंगी.

दिल्ली अग्निकांड से दहली राजधानी, प्रधानमंत्री ने जताया शोक

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दिल्ली अग्निकांड से दहली राजधानी, प्रधानमंत्री ने जताया शोक
देश की राजधानी दिल्ली में रविवार सुबह हुई विवेक विहार में आगजनी की घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त कियाहै. इस हादसे में 8 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने सभी पीड़ितों के परिवार को 2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा भी की है. साथ ही घायलों को 50 अनुग्रह राशि देने का ऐलान भी किया है.

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली की शाहदरा जिले में आग लगने की घटना में लोगों की जान जाना बेहद दुखद है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं. घायलों को शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. जिन लोगों की जान गई है, उनके परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे.

गृहमंत्री अमित शाह ने भी जताया शोक
इस घटना पर गृहमंत्री अमित शाह ने भी सांत्वना दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली के विवेक विहार में हुई आगजनी की घटना अत्यंत पीड़ादायक है. इस हादसे में जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं. ईश्वर शोक-संतप्त परिवारों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें. स्थानीय प्रशासन घायलों को सर्वोच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.

पूरा मामला क्या है
रविवार को सुबह दिल्ली के विवेक विहार में एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई. इससे 9 लोगों की मौत हो गई. आग लगने की सूचना सुबह तड़के मिली. पुलिस ने बताया कि विवेक विहार पुलिस स्टेशन में सुबह 3.48 बजे एक पीसीआर कॉल आई थी.

इधर, दिल्ली फायर सर्विसेज के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम का एक घंटे पहले ही अलर्ट मिल गया था. इसके बाद तुरंत कई टीमों को घटनास्थल पर रवाना कर दिया गया. सुबह 5 बजे एक कुल 14 फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया.

पुलिस ने क्या जानकारी दी?
पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि इमारत के आगे और पीछे, दोनों तरफ बने फ्लैटों के कारण दमकलकर्मियों के लिए वहां तक ​​पहुंचना मुश्किल हो गया था।

इस पूरे मामले में उप-आयुक्त (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि इमारत के आगे और पीछे दोनों तरफ बने प्लैटों के कारण दमकलकर्मियों के लिए पहुंचा मुश्किल हो गया था. आग की चपेट में आने वाला सबसे छोटा बच्चा डेढ़ साल का मासूम है. यह दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में चार अन्य लोगों के साथ मिला. आग बुझाने में करीबन 8 बज गए. इसके बाद ही सर्च ऑपरेशन शुरु किया गया.

होर्मुज संकट का मास्टरप्लान: ईरान को किनारे कर खाड़ी देशों ने खोजा समंदर का विकल्प

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होर्मुज संकट का मास्टरप्लान: ईरान को किनारे कर खाड़ी देशों ने खोजा समंदर का विकल्प
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति के केंद्र में है। Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव और कथित नाकेबंदी ने दुनिया को यह याद दिला दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का बड़ा हिस्सा आज भी कुछ सीमित जलमार्गों पर निर्भर है। यही कारण है कि सऊदी अरब, यूएई और तुर्की जैसे देश अब वैकल्पिक मार्गों के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री chokepoints में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में जब भी इस मार्ग पर संकट आता है, उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालिया घटनाओं के बाद उत्पन्न स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल एक मार्ग पर निर्भर रहना अब रणनीतिक दृष्टि से जोखिम भरा है।

इसी पृष्ठभूमि में खाड़ी और आसपास के देशों ने बहु-आयामी विकल्पों पर काम शुरू किया है। यूएई और ओमान के बंदरगाहों से सऊदी अरब के जरिए जॉर्डन तक माल पहुंचाने और वहां से Suez Canal अथवा भूमध्य सागर के अन्य बंदरगाहों तक ले जाने की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल हॉर्मुज बल्कि Red Sea पर निर्भरता को भी कम करेगा।

इसके साथ ही, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रेल नेटवर्क पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐतिहासिक Hejaz Railway को पुनर्जीवित करने की योजना केवल अतीत की विरासत को पुनर्स्थापित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह आधुनिक व्यापार और रणनीतिक संतुलन को साधने का माध्यम भी बन सकता है। जेद्दा से इस्तांबुल तक रेल संपर्क स्थापित होने से एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को एक नया आयाम मिलेगा।

ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की आहट है। बहु-देशीय तेल और गैस पाइपलाइनों, बिजली ग्रिड और जल प्रणालियों के निर्माण की योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्रीय सहयोग अब केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे के स्तर पर भी गहराता जा रहा है। हाल ही में जेद्दा में हुए जीसीसी शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क को विकसित करने पर सहमति इसी दिशा में एक ठोस कदम है।

विशेषज्ञ इसे एक “ढांचागत बदलाव” के रूप में देख रहे हैं। यह बदलाव केवल मार्गों का नहीं, बल्कि सोच का भी है—जहां अब एकल निर्भरता की जगह बहु-विकल्पीय और लचीली व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि किसी भी भू-राजनीतिक संकट का प्रभाव भी सीमित किया जा सकेगा।

हालांकि, इन योजनाओं के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय मतभेद, भारी निवेश की आवश्यकता और तकनीकी जटिलताएं इन परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी, वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकल्पों का निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

अंततः, हॉर्मुज संकट ने दुनिया को एक महत्वपूर्ण सबक दिया है—वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विविधता, लचीलापन और सहयोग अनिवार्य हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह क्षेत्र किस प्रकार नए मार्गों और नई रणनीतियों के माध्यम से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को पुनर्परिभाषित करता है।

अमेरिका के सामने ईरान की बड़ी शर्त: ‘खत्म करें युद्ध, हटाएँ पाबंदी और दें हर्जाना’

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अमेरिका के सामने ईरान की बड़ी शर्त: ‘खत्म करें युद्ध, हटाएँ पाबंदी और दें हर्जाना’
ईरान का अमेरिका को जवाब: युद्ध विराम के लिए भेजा 14 सूत्रीय शांति प्रस्तावडोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित 9 सूत्रीय फ्रेमवर्क पर ईरान की प्रतिक्रिया आई है। तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है।

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करे, नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, अपनी सेना वापस बुलाए और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए एक नई शासन व्यवस्था स्थापित करे। इस 14 सूत्रीय योजना में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, उसकी जब्त संपत्तियों को मुक्त करना और मुआवजे की मांग भी शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी का बयान
ईरान ने वाशिंगटन की दो महीने के युद्धविराम की योजना को खारिज कर दिया है और सभी मुद्दों को हल करने के लिए 30 दिन की समय सीमा का समर्थन किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि यह अब अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह वार्ता के माध्यम से समझौता करना चाहता है या खुले युद्ध की ओर लौटना चाहता है; तेहरान दोनों ही स्थितियों के लिए तैयार है।

ईरान की सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, गरीबाबादी ने तेहरान में राजनयिकों से कहा, “अब अमेरिका को कूटनीति का रास्ता चुनना है या टकराव का।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए दोनों ही रास्तों के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान की योजना पर अमेरिका की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के इस नवीनतम 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने नए अमेरिकी हमलों की संभावना का संकेत भी दिया। ट्रंप ने कहा, “ईरान के संबंध में हमारी स्थिति काफी मजबूत है। वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें शायद यह तय करने में कठिनाई हो रही है कि उनका नेतृत्व कौन कर रहा है। उन्होंने मुझे समझौते की एक अवधारणा (Concept) भेजी है, जिसकी मैं समीक्षा कर रहा हूँ।

“ट्रंप ने आगे कहा, “ईरान ने जो योजना भेजी है, मैं जल्द ही उसकी विस्तृत समीक्षा करूँगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी। मेरा मानना है कि पिछले 47 वर्षों में उन्होंने मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया शुभारंभ

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं।

पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शॉल- फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया।

हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है ‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया।

अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं।

सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए, जिससे आम नागरिक भी इनका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा तथा “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की परिकल्पना साकार होगी। मंत्री सिंह ने कहा कि “सस्टेनेबल फ्यूचर” केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे हमें आज से ही अपने कार्यों में लागू करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित वातावरण प्रदान किया जा सके।

लोक निर्माण विभाग ने बनाई अपनी नई छवि
प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग और आईबीसी मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट एस.आर. बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदृष्टि के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश में अब सभी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बन रही हैं। आईबीसी प्रेसिडेंट चिन्मय देवनाथ ने कहा कि आज इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल मीटिंग में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस, 3D प्रिंटिंग एवं प्री-फैब्रिकेशन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सेक्टर में आ रही चुनौतियों का हल निकालना है। ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर्यावरण के लिए लाभकारी है। इसमें ऊर्जा संरक्षण और जल संरक्षण पर खास जोर दिया जाता है।

इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस आईबीसी के संस्थापक अध्यक्ष ओपी गोयल ने कहा कि आईबीसी का भोपाल चैप्टर काफी सक्रियता के साथ काम कर रहा है। यहां इंजीनियरिंग सेक्टर में नए सॉफ्टवेयर और नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने गंभीरता के साथ कार्य करते हुए अपनी नई छवि बनाई है। हमारा लक्ष्य भारत को अधोसंरचना क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह, भवन विकास निगम के महाप्रबंधक सीबी चक्रवर्ती, आईबीसी के सचिव कर्नल आनंद मथलेकर सहित लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के प्रतिनिधि, सिटी प्लानर्स, नीति-निर्माता और वरिष्ठ अभियंता उपस्थित थे।